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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, September 22, 2013

उजड़्यूं कूड़ अर प्रवासी वार्ता

 कंदूर्या : भीष्म कुकरेती           


उजड़्यूं कूड़ (हैंसिक )-क्या छै भै हर्कैक , फर्कैक म्यार मलवा -गार -माटु , मलवा मा जम्याँ घास-कंसिलो बुट्या   दिखणु ? 
प्रवासी -हैं क्वा च ?
उजड़्यूं कूड़-अरे क्वा च क्या , त्यार पुरखों उजड़्यूं कूड़ अर कु !
प्रवासी -अच्छा !
उजड़्यूं कूड़-इन बता तू इन आश्चर्य अर निराशा मा क्या खुज्याणु छे ?
प्रवासी -नै उ मुंडळो सिलेटी पत्थर,  सड्यां ही सै बौळि, कड़ी , पटला कुछ  नि दिखेणु च !
उजड़्यूं कूड़-हा ! हा ! जर , जोरु अर जमीन जैमा रौंद जर , जोरु अर जमीन पर हक वैकु हूंद। त्यार गांवक ही लोग मुंडळो सिलेटी पत्थर अर दार उठै लीगेन।
प्रवासी -पण   …?
उजड़्यूं कूड़ (हौंसिक )-पण क्या चालीस साल परांत याद आयि त्वै कि गां मा बि क्वी कूड़ छौ ?
प्रवासी -तू बि इख गां वाळु तरां चिरड़ाणि छे। तेरि  याद रोज आंद। 
उजड़्यूं कूड़ (व्यंग्य  अर करुण मिश्रित भाव ) -तुम प्रवासी अपुण  कूड़ों याद त करदा छा पण कूड़ नि छंवै सकदां हैं ?  
प्रवासी (हर्युं जुवारी भौण मा ) -नै नै चांद त मि बि छौ कि अपुड़ कूड़ छौं पण  … !
उजड़्यूं कूड़ (रोस मा )-पण क्या जब तु पच्चीस सालु छौ त तेरि ब्वेन रैबार नि भेजि छौ बल कूड़ छाण ?
प्रवासी (आंख्युं मा भितर पाणि )  -हाँ इच्छा त इन छै कि कूड़ इ नि छौं बल्कणम चौक बि ठीक करि द्यूं !
उजड़्यूं कूड़ (कौतुहल भाव )-तो कैन रोकि छौ ?
प्रवासी (गर्व का भाव ) -वु भाइ तब पढ़णु छौ अर वैकि कॉलेज की फीस अर आइ इ ऐस कोचिंग की फीस इथगा छे कि त्वे तैं छंवाण क्या मि ड्यार बि नि ऐ सकदु छौ।    
उजड़्यूं कूड़-त त्यार भै आइ इ ऐस बौण च ?
प्रवासी (घमंड का भाव ) -आइ इ ऐस त नि बौण साक पण एक चपड़ासि भाई सीधा सेक्सन ऑफिसर ह्वे जावो त बड़ी बात छे कि ना ? 
उजड़्यूं कूड़-त वैक बाद छैं लींद ?
प्रवासी (करुण अर अफु पर ही  गुस्सा का भाव ) -कनकै छैं लींद।  ब्यौ नि कार ?
उजड़्यूं कूड़-तो ?
प्रवासी (चिरड़ेक )   -तो क्या ब्यावक कर्जा उतारद उतारद कै गैणा रात खुलि गेन। 
उजड़्यूं कूड़-जब ब्यावक कर्जा उतर गे त फिर कूड़ छाण छौ कि ना ?
प्रवासी (गुस्सा मा ) -अरे तब तलक त्यार (कूड़ो ) अंजर पिंजर इथगा ढीला ह्वे गे छा कि क्या बोलु !
उजड़्यूं कूड़-त करज पात ले लींदु !
प्रवासी (गुस्सा मा ) -कर्ज पात ! पैल त वैबरी करज पात सरलता से नि मिलदु छौ अर मिल बि ग्यायि तो इथगा पुन्यात नि छौ कि कर्ज बौड़े दींद। 
उजड़्यूं कूड़-पण इथगा बि त कमजोरी नि छै कि कूड़ नि छंये जावो !
प्रवासी -अरे बुन्न सरल च।  जब अफु पर बितदि त तब पता चलदो।  उना बच्चा बि ह्वे गे छा अर ऊं तै अंग्रेजी स्कूल मा भर्ती करै दे।  .
उजड़्यूं कूड़ (कौतुहल भाव )-तो ?
प्रवासी (औसंद /परिश्रम का भाव ) -तो क्या ! अब हम द्वि झण अंग्रेजी त जाणदा नि छा त बच्चों बान टयूसन अर कोचिंग क्लासौ खर्चा उठाणो बान मि एक दुकानिम स्याम दै काम बि करण लगि ग्यों। 
उजड़्यूं कूड़-अरे पर त्यार भाइ बि त छयो ?
प्रवासी (घंगतोळ )- हां  ….
उजड़्यूं कूड़-क्या हां ?
प्रवासी (अफ़सोस आर घमंड का मिश्रित भाव ) -अब वु ऑफिसर ह्वे गे छौ त वो अर वैक परिवार विशेस याने इलिट क्लास की दौड़ दौड़न लगी गेन अर ऊंकुण  घौरक कूड़ छाण  एक नगण्य बात ह्वे गे।   
उजड़्यूं कूड़-अरे त तीन अपण भाइ तै समझाण त छौ कि ना ? कि आखिर पुरखों चिण्यु कूड़ च। 
प्रवासी -इन च गांव वाळ बि में से इनि बात करणा छा कि आखिर पुरखों चिण्यु कूड़ छौ त उजड़ण नि चयांद।
उजड़्यूं कूड़-हां ठीक त बुलणा छया। 
प्रवासी (उत्तेजित भाव )  -ह्यां पण एक बात बतादि बल पैल इहलोक सुदारण  चयांद कि परलोक ?
उजड़्यूं कूड़ (कुछ देर सोचिक अर अध्यापकी भाव ))- भै पैल त इहलोक ही ठीक करण चयेंद।  परलोक याने दुसर लोक कैन द्याख ?
प्रवासी (हौर बि उत्तेजित भाव ) -बस हम प्रवास्युं कुण द्वी रस्ता छन कि यदि हम गांवक कूड़ आदि सैंकण मा लगदां त हमर  परदेश मा वर्तमान  खराब हूंद अर परदेश मा वर्तमान सुधारदवां त भूतकाल उजड़दु च। 
उजड़्यूं कूड़ (खिसयानी हंसी )-त तुम द्वी भायुंन अपण पुरखों लगायुं मकान उजड़ण द्याइ ! पुरखों खेतुं तै बांज हूण दे ?
प्रवासी (भग्नाशा भाव ) - धन को हिसाब से हम कमजोर छंवां त हम वर्तमान ही सुधार सकदवां।  भूतकाल  संबाळणो हमर बसै बात नी  च।  
उजड़्यूं कूड़ (चिरड़ेक )   -अरे पर फिर बीच मा इन अवसर बि त ऐ होलु कि जब तुम अपण उजड़दा कूड़ो मरम्मत कौर सकदा छा ?
प्रवासी (चिरड़ेक )   -फिर बच्चों उच्च शिक्षा को बोझ इथगा भारी छौ कि मि दिल्ली मा एक कमरा-किचन  लैक जगा तक नि ले सौक त कूड़ क्या छाण छौ।  अर जब बि कूड़ छाणो इच्छा ह्वे त विकल्प  एकि छौ या तो पैसा बच्चों शिक्षा पर लगौं  या कूड़ छाण पर !
उजड़्यूं कूड़-अब त तू रिटायर ह्वे त अब इख गां मा बसण चाणु ह्वेल हैं ?
प्रवासी (निराशा भाव ) -इच्छा त हम द्वि झणु छे बल रिटायरमेंट का बाद गाँव मा बसी जांदा पर अब कुछ नि ह्वे सकुद।
उजड़्यूं कूड़-किलै अब क्या च त्यार बच्चा त सेटल ह्वेइ गे ह्वाल ?
प्रवासी -हाँ।  द्वी अच्छी नौकरी पर छन दुयुंक ब्वारि नौकरी करदन।
उजड़्यूं(कौतुहल भाव ) -कूड़-औ त अब ?
प्रवासी -एक नौनु हैदराबाद नौकरी करदु , वैक एक बच्चा च त मि वैक दगड़ रौंद। 
उजड़्यूं कूड़-औ ! अर हैंको ?
प्रवासी -हैंक नौन चंडीगढ़ अर वैक  बि बच्चा छुट छन त वूंक दगड़ मेरि घरवळि रौंदि।  बस द्वी तीन सालम छुट्युं मा हम द्वी झण एक दुसरौ सूरत दिखदवां। 
उजड़्यूं कूड़ (उत्साह मा )-त इन बथादि तु गां इथगा सालुं बाद किलै ऐ ? क्या मि तैं छाणो विचार ?
प्रवासी -ना
उजड़्यूं कूड़ (निराशा भाव )-तो ?
प्रवासी -वु क्या च म्यार चंडीगढ़ वाळ नौनो प्रमोसन हि नि हूणु  च त गणत मा पुछेरन ब्वाल बल कै असंतुष्ट पुरखा की हंत्या दोष लग्युं च
उजड़्यूं कूड़ (हैंसिक )-त तु असंतुष्ट पुरखा की हंत्या पुजणो आयुं छै ?
प्रवासी -हाँ !
उजड़्यूं कूड़ (जोर से हौंसिक )-वाह ! पुरखों बणयूं  कूड़ छांद नि छंवां अर पुरखों हंत्या  पुजै खूब होणि च।   
प्रवासी - तु जन बि समज ! कै तैं नि पड़ीं कि  हम प्रवासी एक इन समस्या मा घिर्यां रौंदा कि इना जौंदा त उना बिगड़दु अर उना ध्यान दींदा त इना उजड़ जांद।     


Copyright@ Bhishma Kukreti  23/9/2013