उत्तराखंडी ई-पत्रिका की गतिविधियाँ ई-मेल पर

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Sunday, September 22, 2013

गढ़वाली होटलचरितम

ठकर्या : भीष्म कुकरेती  

वेटर - ब्वालो ! कुछ अछेकि खाणक  चयाणु  च ?
ग्राहक -अरे होटलम  क्यांकुण आंदन ?
वेटर -नै भौत सा लोग माख मरणा बि आंदन !
ग्राहक -क्या यु होटल 'फ्ली हंटिंग' (मक्खियों का शिकार ) को इंतजाम बि करद ?
वेटर -साब मीन हिंदी मुहावरा प्रयोग  कार। आप सचमुच मा खाणा खाणौ अयाँ छा ?  
ग्राहक -हाँ !
वेटर -त ब्वाला ?
ग्राहक -पैल इन कौर यूं माखुं तैं भगा ! 
वेटर -साब जु तुमन सचेकि खाणा खौण त माख भगाये जाला निथर माखों दगड़ छ्वीं-बथ लगावा !
ग्राहक -अरे बोलि आल ना कि मि तैं भूक लगीं च।   . 
वेटर (आवाज दींदु )-ये स्वीपर  ! टॉयलेट  करण छोड़ अर साबौ समणि माख भगा।  
स्वीपर -साब आपन अछेकि इख भोजन करण ? 
ग्राहक -क्या मतबल ?
स्वीपर - नै वू क्या च बल जादातर लोग माख भगै दींदन अर फिर बि खाणा नि खांदन ! त फिर मेरी मेनत  फ़ोकट मा बेकार चली जांद।  
ग्राहक -अरे यि मेज अर टेबल तौळ किरम्वळ छन।  यूं तैं बि भगा। 
वेटर  -साब आपन खाली चाय पीण या खाणक बि खाण ?
ग्राहक - अरे चाय पीणो  किरम्वळ भगाणों दगड़  क्या संबंध ?  
वेटर -जु तुम चाय पेल्या त इनि पे ल्यावो।  इखमा किरम्वळ भगाणों जरूरत क्या च? एक चाय   बान फ़ोकट मा हम तै 'हिट'-फ्लिट' मारण पोड़ल !   
ग्राहक -मीन ब्वाल  कि ना ? कि मैँ तैं जोर की भूक लगीं च।
वेटर -ये स्वीपर हिट -फ्लिट मारी दे रे !
ग्राहक -अरे या मेज त गंदी च।  मेज मा दाळ -सब्जी -कढ़ी  क सुक्याँ  पिंदका पड्याँ   छन। कै दिन बिटेन साफ़ नि कार या मेज ?
वेटर -मि तैं नि पता।   यु काम स्वीपर कु च।   (स्वीपर तैं आवाज दींदु ) स्वीपर !साब बुलणा छन बल मेज कथगा दिन बिटेन साफ़ नि कार !
स्वीपर की आवाज - अरे साब तै पूछ बल जु खाली ब्रेकफास्ट करण त फिर इथगा साफ़ सफै किलै चयाणि च ?
ग्राहक - भै ! मीन लंच करण
स्वीपर - ठीक च त गल्ला मा बैठ्यु गुन्दरु कुण बोलि दि बल फ्लिट बि मारि दे अर  मेज बि साफ़ कौरि दे।  मि टॉयलेट साफ़ करणु छौं।  दस  मिनट मा जात्र्युं बस ऐ जालि त मी तै वेटर बणण पोड़ल  !
वेटर -आप ऑर्डर द्यावो !
ग्राहक - तुमर इक स्वीपर बि वेटर ?
वेटर - वु  हमर गढ़वाल मा क्वी स्वीपर जातिक नि हूंद। 
ग्राहक - फिर ? वो स्वीपर ?
वेटर - अहो ! वेटरगिरि क अलावा वु टॉयलेट साफ़ बि करदो अर द्वी चार रुपया जादा कमै लींदो ! वो वैक नाम हमन इनि स्वीपर धौर दे।
ग्राहक -अच्छा ! तुमर होटलक बोर्ड मा लिख्युं च बल 'एथनिक गढ़वाली कुइजिन  ' त जरा बता गढ़वाली व्यंजन मा क्या क्या च ?
वेटर -वेज कि नौन वेज ?
ग्राहक -द्वी चौलल ! पैल इन बथा नौन वेज मा क्या च ?
वेटर -मटन अफगानी , चिकेन कोल्हापुरी , आंध्रा अंडा करी , ओडियाई मटन फ्राई, हैदराबादी बिरयानी, चिकेन शंघाई , कम्बोडियाई  मटन राइस ……. 
ग्राहक -अर वेज मा
वेटर -पंजाबी आलू गोभी , कश्मीरी उड़द -राजमा , राजस्थानी पीली दाल , गुजराती उंधिया , बंगाली भात , मद्रासी सांभर, केरलाइट दही भात ….
ग्राहक -मिठै मा ?
वेटर -बंगाली रसगुल्ला , बीकानेर  का घेवर … …
ग्राहक -अरे पर मि त एथनिक गढ़वाली फ़ूड खाणो बान ये होटलमा औं !
वेटर -साब ! मीन अपण ददाजी मन सूण छौ कि कुछ गढ़वाली एथनिक फ़ूड हूंद छौ। अब हमर इख पहाड़ों मा गढ़वाली फ़ूड खाणो क्वी रिवाज नी च ।
ग्राहक -पण बोर्ड मा त लिख्युं च कि होटलम  'एथनिक गढ़वाली कुइजिन ' मीलल ?
वेटर - साब बोर्ड माँ लिख्युं की क्वी कीमत बि हूंदि क्या ?
ग्राहक -क्या मतलब ?
वेटर - सब जगा बोर्ड मा या दिवालुं मा लिख्युं रौंद बल 'यहाँ पेशाब करना मना है ' पण सबि बोर्ड तौळ या दीवाल मा इ पेशाब कौरदन। 
ग्राहक -जरा मि तै अपण होटल मालिक से त मिलावो। 
वेटर -मालिक त द्वी घंटा से पैल नि मिलि  सकदन ?
ग्राहक - किलै ?
वेटर - साब पैथर एक साऊथ इन्डियन होटलम खाणो खाणा जयां छन फिर खाणक खैक एक घंटा सींद बि छन। 
ग्राहक - अरे तुमर मालिक अपण होटल छोड़ि दुसर होटलम खाणा खाणों जांद?
वेटर - वु क्या च मालिक तै गंदो वातावरण मा खाणक नि खयांद !
ग्राहक - इख पुण क्वी हौर अछु होटल बि च ?
वेटर - हां पैथर एक पंजाबी क पंजाबी होटल सबसे बढिया च।  
ग्राहक - ठीक च मि उखि जांद। 
वेटर - हे स्वीपर ! फ्लिट -हिट  रण दे रै , अर मेज साफ़ करणै बि जरूरत नी च। 
स्वीपर - औ त जन रोज हूंद स्यु ग्राहक बि बगैर खयां चलि ग्यायि।  
वेटर - अरे हम तै ले क्या ? बस का यात्री त झख मारिक हमर होटलम इ खाला कि ना ?

Copyright@ Bhishma Kukreti  22 /9/2013 



[गढ़वाली हास्य -व्यंग्य, सौज सौज मा मजाक मसखरी  दृष्टि से, हौंस,चबोड़,चखन्यौ, सौज सौज मा गंभीर चर्चा ,छ्वीं;- जसपुर निवासी  के  जाती असहिष्णुता सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ढांगू वाले के  पृथक वादी  मानसिकता सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;गंगासलाण  वाले के  भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; लैंसडाउन तहसील वाले के  धर्म सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;पौड़ी गढ़वाल वाले के वर्ग संघर्ष सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी  के पर्यावरण संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;मध्य हिमालयी लेखक के विकास संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;उत्तरभारतीय लेखक के पलायन सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; मुंबई प्रवासी लेखक के सांस्कृतिक विषयों पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; महाराष्ट्रीय प्रवासी लेखक का सरकारी प्रशासन संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; भारतीय लेखक के राजनीति विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य;सांस्कृतिक मुल्य ह्रास पर व्यंग्य , गरीबी समस्या पर व्यंग्य, आम आदमी की परेशानी विषय के व्यंग्य, जातीय  भेदभाव विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; एशियाई लेखक द्वारा सामाजिक  बिडम्बनाओं, पर्यावरण विषयों   पर  गढ़वाली हास्य व्यंग्य श्रृंखला जारी ...]