उत्तराखंडी ई-पत्रिका की गतिविधियाँ ई-मेल पर

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Thursday, September 12, 2013

एक्सचेंज ऑफर : आत्मा दे दो ! बेशर्मी-बदकारी ले लो !

 चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती 


आत्मा खरीददार - आत्मा ब्याचो  ,  जु चावो स्यु ले ल्यावो ! 
एक कूड़  बिटेक आवाज - ये फंड जा ये  मुहल्ला   बिटेन ! एक चीज बचीं च वा बि बेचीं द्योल्या क्या !
आत्मा खरीददार- ठीक च मि हैंको ख्वाळ जांदो।
आत्मा खरीददार- एक्सचेंज ऑफर ! आत्मा ब्याचो , जू चावो स्यु ले ल्यावो !  
एक कूड़ बिटें आवाज - ये भाग ये शहर बिटेन ! बाकि त सबी चीज बैंकम गिरबी छन।  अपण बुलणो  बड़ी मुश्किल से त आत्मा बचीं च वै बि नि रालि त हम क्या करला ?
आत्मा खरीददार- ठीक च मि कै महानगर जांदो। 
आत्मा खरीददार - एक्सचेंज ऑफर ! आत्मा ब्याचो  ,  जु चावो स्यु ले ल्यावो ! 
एक कूड़ बिटेन आवाज - ए इना आ।  पण लुकिक आ ! 
आत्मा खरीददार -ब्वालो ?
आत्मा बिचण वाळ -आत्मा क बदल तू क्या सकदी ?
आत्मा खरीददार -जु ब्वालो ! धन दौलत , गुण , चरित्र आदि 
आत्मा बिचण वाळ -क्या आत्मा बदल बेशर्मी, बदकारी  मिल जालि ?
आत्मा खरीददार -हाँ किलै ना ? बेशर्मी-बदकारी का दगड़ शरमदार दिख्याणो ढोंग -स्वांग  क्वालिटी फ्री !
आत्मा बिचण वाळ - आत्मा की जगा अपण दोष दुसर पर लगाणो गुण मिल जाला। 
आत्मा खरीददार -अवश्य ! अपण पूठाक गू दुसर पर लगाण का गुणौ दगड़ अफु तैं पाक साफ़ सिद्ध करणों  गुण फ्री !
आत्मा बिचण वाळ -आत्मा का एक्सचेंज मा कै तैं बार बार धोका दीणों  चरित्र मिल जालो ।  
आत्मा खरीददार -आत्मा का रदोबदल का बदल बार बार धोका दीणो गुण का दगड़्या दगड़ झूट तैं सच अर सच तैं झूट साबित करणों कौंळ -कला मुफ्त ! 
आत्मा बिचण वाळ -आत्मा का बदल मा जातीय दंगा करवैक अपुण गौळुन्द   धर्मनिरपेक्ष  को तगमा लगैक घुमणौ  चरित्र मिल जालो ?
आत्मा खरीददार -द ब्वालो ! जातीय दंगा करैक धर्मनिरपेक्ष ही ना  अल्प संख्यकों मसीहा बणणो गुण का साथ साथ महान राष्ट्रवादी का ढोंग करणों  गुण मोफत मा मिल जाल !
आत्मा बिचण वाळ -आत्मा का विनियम मा अपण दाग छुपाणो बान  संसद नि चलण दीणो गुण मील जाल ?
आत्मा खरीददार -हाँ किलै ना ? आत्मा का ऐवज मा  संसद माँ गतिरोध पैदा करणों गुण को साथ अपण पार्टी मीटिंग मा हो -हल्ला करणों गुण फ्री ! 
आत्मा बिचण वाळ -आत्मा का बदल अपण विरोधी तैं चित्त करणौ  गुण मिल जाल ?
आत्मा खरीददार -अरे जब बेशर्मी , बदकारी , बदचलनी गुण ऐ जावन  त अपण विरोधी तैं चित्त करणौ  गुण, कुर्सी प्रेम अफिक आई जांदन।   
आत्मा बिचण वाळ -अच्छा सूण ! कुकर्मो तैं छुपाणो गुण मील जाला ? वू क्या च अजकाल नारायण दत्त तिवारी  हड़क सिंग प्रकरण से सबि डर्यां छन ना !
आत्मा खरीददार - तुम क्या राजनेता छंवां ?
आत्मा बिचण वाळ - हाँ ! मि मंत्री छौं
 आत्मा खरीददार - मि तुमर आत्मा नि ले सकुद 
आत्मा बिचण वाळ- किलै ? राजनेता की आत्मा मा क्या खराबी च 
आत्मा खरीददार -अरे मि शैतान छौं अर अब भलो मनुष्य बणणो बान एक भलो मनुष्य की आत्मा की खोज मा छौं।  अब राजनेता अर शैतान माँ क्या फरक च ?
आत्मा बिचण वाळ - नै नै ! मीन त अपण आत्मा त वै दिन ही बेचीं दे छे जै दिन मि राजनीति मा औं !
शैतान -त फिर कैकि आत्मा बिचणाइ ?
आत्मा बिचण वाळ - वु क्या च मि अपण नौनु तैं राजनीति मा लाण चाणु छौं त पैल वैकि आत्मा बिचण पोड़ल कि ना ?
शैतान - चलो दिखावो कि वैकि आत्मा मा मनुष्य का कथगा गुण छन।  वै हिसाब से ही तुम तैं आत्मा का दाम मीलल।
 आत्मा बिचण वाळ - ठीक च तु भोळ श्याम ऐ जा।  असल मा अबि म्यार नौनु बलात्कार का केस मा जेल मा च।  भोळ जेल से छूटिक आणु च। 
शैतान - वै तैं आत्मा बिचणै जरुरात नी च वो पैलि शैतानो राजा हैवान च।  मि कखि हौर जगा जांदो।  
शैतान -  शुद्ध साफ़ आत्मा ब्याचो  ,  जु चावो स्यु ले ल्यावो !


Copyright@ Bhishma Kukreti  13 /9/2013



[गढ़वाली हास्य -व्यंग्य, सौज सौज मा मजाक मसखरी  दृष्टि से, हौंस,चबोड़,चखन्यौ, सौज सौज मा गंभीर चर्चा ,छ्वीं;- जसपुर निवासी  के  जाती असहिष्णुता सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ढांगू वाले के  पृथक वादी  मानसिकता सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;गंगासलाण  वाले के  भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; लैंसडाउन तहसील वाले के  धर्म सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;पौड़ी गढ़वाल वाले के वर्ग संघर्ष सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी  के पर्यावरण संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;मध्य हिमालयी लेखक के विकास संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;उत्तरभारतीय लेखक के पलायन सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; मुंबई प्रवासी लेखक के सांस्कृतिक विषयों पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; महाराष्ट्रीय प्रवासी लेखक का सरकारी प्रशासन संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; भारतीय लेखक के राजनीति विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य;सांस्कृतिक मुल्य ह्रास पर व्यंग्य , गरीबी समस्या पर व्यंग्य, आम आदमी की परेशानी विषय के व्यंग्य, जातीय  भेदभाव विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; एशियाई लेखक द्वारा सामाजिक  बिडम्बनाओं, पर्यावरण विषयों   पर  गढ़वाली हास्य व्यंग्य श्रृंखला जारी ...]