उत्तराखंडी ई-पत्रिका की गतिविधियाँ ई-मेल पर

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Thursday, September 5, 2013

बैंक डकैती

चबोड़्या -चखन्योर्या - भीष्म कुकरेती 
जगा - बैंक भितर 
लोग -
एक नौनी कैशियर 
कुछ ग्राह 
तीन डाकू 
डाकू सरदार  (पिस्तौल हवा मा दिखैक )-  चूंकि लंच टाइम च त कैशियर छोड़ि सब बैंक स्टाफ लंच करणों भैर जयां छन। तो जू बि छन वु सब भ्युं मुर्गा बणिक बैठ जावो। 
द्वी डाकू मुर्गा बणदन- पुरण जमन मा यु मास्टर रै होलु।  
डाकू सरदार - अबै तुम ना ! मीन बकैयुं कुण मुर्गा बणनो ब्वाल ! कैशियर अपण हथ अळग कौर अर मुर्गा बौण 
(सबि ग्राहक मुर्गा बणदन ) 
एक डाकु - बॉस कैशियर जनानी च अर वा मुर्गा नि बौणि सकदी।  
डाकु सरदार -सौरि मुर्गी बौण 
कैशियर (हथ अळग करदी करदी ) -मिस्टर ठग 
एक डाकु - सरदार ! पिस्तौल चला अर ईंक गुदल फोड़ दे।  हमकुण ठग बुलणि च।  हम क्वी वु सरकारी अधिकारी छंवां जु सरकार अर जनता तैं ठगणा छन। 
कैशियर -सॉरी ! मिस्टर लुटेरा !
वी डाकु - सरदार चलाओ गोली।  हम क्वी सरकारी ठेकेदार, माफिया, नेता  छंवां जु देश लुठणा छंवां ?
कैशियर - सौरी ! मिस्टर डाकु 
दुसर डाकु - उन त तू अंग्रेजी मा बचियाती है पण हम तैं हिंदी मा डाकू कर भट्याती है ?
कशियर ! सौरी !   मिस्टर  रौबर   !
डाकू सरदार - बोल।  जल्दी बोल हमन बैक रॉब करण। 
कैशियर - बैंक रॉबरी त खतरनाक अर गैर कानूनी काम च।  बैंक लुटणो  सरल तरीका बि च जु कानूनन एकदम सही च। 
एक डाकू - क्या ?
कैशियर सरकारी अर  सहकारी बैंकुं से लोन ल्यावो अर फकोरिक से जावो। 
डाकू सरदार - हां ! हमन महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक स्कैम की वा खबर पौढ़ी छे जैमा बड़ा बड़ा नेताओं नाम आयुं छौ।  अर वीं खबर पौढिक त सरकारी बैंक से लोन ले छौ 
कैशियर - तो क्या ! हम पर हमर जमीनों नीलामी नोटिस ऐ ग्यायि ! वांकी बान त हम बैंक रॉबरी करणा अयाँ छंवाँ  
कैशियर - त   तुमन अपण असली जमीन गिरवी लेक कर्ज ले छौ ?
डाकु -हाँ !
कैशियर - तुमर लोन एजेंटन  नि बथाइ कि नकली कागज दिखैक बैंक बिटेन कर्ज लीण चयांद 
डाकु सरदार - ना ! अच्छा अब छ्वीं लग गेन।  फटाफट जथगा बि कैश च हमर थैला पुटुक पांज  . ये डाकु नम्बर वन ! जा कैशियर की सहायता कौर अर थैला पुटुक पैसा भौर। 
(एक डाकू थैला लेक कैशियर का पास जान्दो अर द्वी पैसा पंजणम व्यस्त ह्वे जांदन )
डाकु सरदार एक मुर्गा बण्यु जवान नौनु से - क्या बै ठीक से मुर्गा नि बण्यान्द त्वे से ?
नौनु -नै ! वो मोबाईल मा एक अर्जेंट मैसेज अयुं च त पढ़णो कोशिस करणु छौं।  
डाकु सरदार -चल देख ले।  
नौनु मोबाइल मा मैसेज पढ़दु अर जोर जोर से हंसण बिसे जांद। 
डाकु सरदार -क्या बै किलै हंसणु छे ?
नौनु -फेस बुक मैसेज मा एक इन चित्र आयुं कि बरबस हंसी आणि च। 
डाकु सरदार - जरा इना लादि मी बि दिखुद कि कनु चित्र च। 
(नौनु मोबाइल लेक सरदारौ पास आंदु अर चित्र देखिक खत खत हंसण बिसे जांद )
डाकु सरदार -ये त्यार फेस बुक का फ्रेंड रंगीला छन जो इन बढिया मैसेज भिजदन।  हमर फेस बुकाक फ्रेंड बेकार छन।  जरा हौरि इनि चित्र त दिखादि। 
(नौनु मोबाइल पर सरदार तै चित्र दिखांदु।  सरदार जोर जोर से हंसुद।  इन मा तिसर डाकु बि उखम आंदु अर मोबाइल का चित्र देखिक सरदारों दगड़ खत खत हंसण लगि जांद )
कैशियर का पास कु डाकु कैशियर से - ये त्यार मोबाइल पर बि फेस बुक का  मजेदार मैसेज आन्दन क्या ?
कैशियर - हाँ ! दिखौं क्या ?
डाकु -हाँ तू मोबाइल का मैसेज दिखा।  मि रुपया पांजदु 
(कैशियर मोबाइल माँ मैसेज दिखांदी।  डाकु उत्तेजित ह्वे जांद।  वैक दांत सिल्ल  ह्वे जांदन )
वू डाकु अपण सरदार से  दांत कीटिक  बुलद - बौस ! अरे इखम तो  आवो क्या मैसेज छन। 
(सरदार कैशियरौ पास आंद अर मोबाइल का चित्र दिखणम व्यस्त ह्वे जांद।  सरदार का भाव से लगद कि मैसेज उत्तेजक छ्या )
(उना नौनु तिसर डाकु तैं चित्र दिखाणम व्यस्त रौंद अर डाकु बेफिकर चित्र देखिक हंसणु रौंद )
इथगा मा पुलिस सायरन कि आवाज आंदी। 
डाकु सरदार -ये मोबाइल मा को च वीडिओ गेम खिलणु ?
पुलिस इंस्पेक्टर  - अबे या आवाज वीडिओ गेम की नी च   या असली पुलिस कु सायरन च 
सरदार - पण ?
पुलिस इंस्पेक्टर - हाँ कैशियरन मोबाइल से मेखुण मेसेज भेजि कि ….  
      

Copyright@ Bhishma Kukreti 6/9/2013 

[गढ़वाली हास्य -व्यंग्य, सौज सौज मा मजाक मसखरी  दृष्टि से, हौंस,चबोड़,चखन्यौ, सौज सौज मा गंभीर चर्चा ,छ्वीं;- जसपुर निवासी  के  जाती असहिष्णुता सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ढांगू वाले के  पृथक वादी  मानसिकता सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;गंगासलाण  वाले के  भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; लैंसडाउन तहसील वाले के  धर्म सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;पौड़ी गढ़वाल वाले के वर्ग संघर्ष सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी  के पर्यावरण संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;मध्य हिमालयी लेखक के विकास संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;उत्तरभारतीय लेखक के पलायन सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; मुंबई प्रवासी लेखक के सांस्कृतिक विषयों पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; महाराष्ट्रीय प्रवासी लेखक का सरकारी प्रशासन संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; भारतीय लेखक के राजनीति विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य;सांस्कृतिक मुल्य ह्रास पर व्यंग्य , गरीबी समस्या पर व्यंग्य, आम आदमी की परेशानी विषय के व्यंग्य, जातीय  भेदभाव विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; एशियाई लेखक द्वारा सामाजिक  बिडम्बनाओं, पर्यावरण विषयों   पर  गढ़वाली हास्य व्यंग्य श्रृंखला जारी ...]