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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Tuesday, October 21, 2014

गढ़वाली -कुमाउनी भाषाई साहित्यकारों के लिए श्री खयाली राम जोशी एक उदाहरण

भीष्म कुकरेती 

मै जब से इंटरनेट माध्यम से जुड़ा मुझे लग गया था कि कुमाउनी -गढ़वाली भाषाओं के लिए एक Eden Garden खुल गया है। 
गढ़वाली भाषा साहित्य की मुख्य निम्न समस्या रहीं हैं -
१- गढ़वाली -कुमाउनियों द्वारा अपनी भाषा में पढ़ाई ना होने से लिखित गढ़वाली - कुमाउनी साहित्य पढ़ने में दिक्कत और यह दिक्क्त तभी सुलझ सकती थी जब बार बार , हर बार कुमाउनी -गढ़वालियों को कुमाउनी -गढ़वाली पढ़ने को मिले 
२- कुमाउनी -गढ़वाली हर तरह से बिखरे हैं अतः अखबारों , पत्र -पत्रिकाओं -पुस्तकों के लिए वितरण एक दुस्साहसी समस्या थी। 
इंटरनेट ने यह समस्या दूर कर दिया।  इंटरनेट माध्यम के पाठक एक तरह से इलीट पाठक हैं अतः साहित्य सटीक जगह चला जाता है। 
मै जब फेसबुक माध्यम से जुड़ा तो मैंने टेलीफोन /SMS द्वारा , लेखों द्वारा अपने साहित्यकार मित्रों को सूचित किया कि आप लोग किताब छापने याने इतिहास में स्थान दर्ज कराने में विश्वास करते हो किन्तु सरल माध्यम को नही अपना रहे हो।  आज भी इंटरनेट माध्यम में गढ़वाली साहित्यकारों में वे साहित्यकार अपना साहित्य पोस्ट करते हैं जो पारम्परिक माध्यम (पत्र -पत्रिकाओं -पुस्तकों ) में नही दीखते जैसे जयाड़ा जी , पराशर गौड़ जी , बालकृष्ण ध्यानी जी , बलबीर राणा जी , अनूप रावत जी , विजय जेठुरी जी , गीतेश नेगी जी  और कभी कभार श्रीमती उमा भट्ट जी। 
मैं कुमाउनी कवि श्री खयाली राम जी का उदाहरण देना चाहूंगा -
श्री जोशी सुबह सुबह एक सुंदर कुमाउनी कविता बहुत से फेसबुक ग्रुप में पोस्ट करते हैं। 
मै कई महीनो से उनकी कविता पढ़ता रहता हूँ और धीरे धीरे मै कुमाउनी समझने लगा हूँ। 
मेरा कहने का तातपर्य है कि यदि कुमाउनी -गढ़वाली साहित्यकार इंटरनेट या फेसबुक में भाषाई साहित्य पोस्ट करते रहेंगे तो हमें रोज नए नए पाठक मिलेंगे और पाठकों को कुमाउनी -गढ़वाली पढ़ने का ढब पड़ता जाएगा 
मै  फिर से पारम्परिक माध्यम के गढ़वाली -कुमाउनी साहित्यकारों से अनुरोध करता हूँ कि अपने पुराने साहित्य को नए रचित साहित्य को इंटरनेट व फेसबुक में अवश्य पोस्ट कीजिये और जो हमारी समस्या थी उसे दूर कीजियेगा।

टूर ऑपरेटर के विपणन अस्त्र -शस्त्र - व्यापारिक मेलों में भाग लेना

Marketing Tools for Tour Operator -Trade  Fair 

                            (Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--91       
                                                      
उत्तराखंड में पर्यटन  आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 91   

                                                                 लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन  विक्रीप्रबंधन विशेषज्ञ ) 


टूर ऑपरेटर के पास भाँती भाँती के विपणन अस्त्र -शस्त्र होते हैं।  शस्त्र  माने अस्त्र भौतिक व नजदीकी हथियार और अस्त्र माने दूरगामी अथवा  मांत्रिक (मनोवैज्ञानिक ) हथियार। 
                           व्यापारिक मेला अथवा ट्रेड फेयर में प्रदर्शनी         

टूरिस्ट /यात्रा संबंधी मेले टूर ऑपरेटरों के लिए  आर्थिक दृष्टि से कम कीमती , प्रभावकारी हथियार है। 
यात्री मेलों (टूर फेयर ) से निम्न लाभ होते हैं -
१- नए उत्पाद या नए यात्रा स्थान की शुरुवात 
२- ग्राहकों से संबंध बनाना 
३- नए या पुराने ग्राहकों की लिस्ट बनाना, डाटा बेस तयार करना व् उनसे भविष्य ब्यापार हेतु करार करना 
४- ग्राहकों से सीधा सौदा करना 
५- एजेंटो की खोज 
६- मार्किट रिसर्च करना 
७- सामयिक प्रतिस्पर्धा , सामयिक यात्रा सेवा व सेवा हेतु उत्पाद , सामयिक पर्यटन स्थल की सीधी जानकारी मिलना 
८-सप्लायरों का मिलना 
               ट्रेड फेयर में आवश्यक वस्तुयें व व्यय 
              अ -जगह व स्थान अलंकरण हेतु -
जगह का चुनाव व डिजाइन आदि 
जगह का किराया 
पोस्टरों आदि का इंतजाम 
स्थान सजावट / अलंकरण डिजाइन व उसके लिए विभिन्न वस्तुयें व उपकरण 
बिजली 
पानी 
सफाई 
भोजन व्यवस्था 
ग्रहकों के लिए बैठने आदि का इंतजाम आदि 
इन्सुरेंस /सेक्युरिटी 
अन्य क्रियाएँ व खर्चे 
               ब -परिवहन 
विभिन्न वस्तुओं-उपकरणों को मेले की जगह पंहुचाने हेतु -
पैकिंग 
परिहवन माध्यम 
लदान व उतारने की सुविधा जुटाना 
इन्सुरेंस व अन्य कर
             स - प्रचार -प्रसार माध्यम व व्यय 
टेलीफोन मार्केटिंग 
पैम्फलेट  पोस्टिंग /मेल मार्केटिंग 
पोस्टर /बाउचर प्रिंटिंग 
प्रेस रिलीज 
ऑडियो -वीडियो प्रचार सामग्री 
पासेज 
पार्टी /भोजन खिलाना 
विभिन्न विज्ञापन करना 
परिवहन 
           द - व्यक्तिगत इंतजाम व व्यय 
डिमोंस्ट्रेटरों  या सेल्समैनों  का इंतजाम 
डिमोंस्ट्रेटरों  या सेल्समैनों के खर्चे जैसे परिवहन , भोजन व्यवस्था व रहने का इंतजाम
डिमोंस्ट्रेटरों  या सेल्समैनों के मनोरंजन का इंतजाम आदि 


Copyright @ Bhishma Kukreti  21 /10//2014  

Contact ID bckukreti@gmail.com
Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series to be continued ...

उत्तराखंड में पर्यटन  आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी 

                                   
 References

1 -
भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना शैलवाणी (150  अंकोंमें ) कोटद्वार गढ़वाल



Tips  on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and  Hospitality Industry Development  in Uttarakhand; Tips  on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and Hospitality Industry Development  in Haridwar Garhwal, Uttarakhand; Tips  on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and Hospitality Industry Development in Pauri Garhwal, Uttarakhand; Tips  on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and Hospitality Industry Development  in Dehradun Garhwal, Uttarakhand; Tips  on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and Hospitality Industry Development  in Uttarkashi Garhwal, Uttarakhand; Tips  on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and Hospitality Industry Development  in Tehri Garhwal, Uttarakhand; Tips on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and Hospitality Industry Development  in Rudraprayag Garhwal, Uttarakhand; Tips  on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and Hospitality Industry Development  in Chamoli Garhwal, Uttarakhand; Tips  on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and Hospitality Industry Development  in Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand; Tips  on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and Hospitality Industry Development  in Nainital Kumaon, Uttarakhand; Tips on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and Hospitality Industry Development  in Almora Kumaon, Uttarakhand; Tips  on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and Hospitality Industry Development  in Champawat Kumaon, Uttarakhand; Tips  on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and Hospitality Industry Development  in Bageshwar Kumaon, Uttarakhand; Tips  on Participation in Trade Fair for Marketing of Travel, Tourism and Hospitality Industry Development in Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand;

Garhwal through Economic Perspective in Pal /Shah Era

Administration, Social and Cultural Characteristics History of Garhwal in Shah Dynasty -25 

History of Garhwal including Haridwar (1223- 1804 AD) –part -214     
   History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -462 
                        By: Bhishma Kukreti (A History Research Student)

                              Income Source of State
           Garhwal Kings used to get state income from various taxes. These taxes were –
Revenue taxes from people
Mines contracting
Forest Contracting
Export Duties  
Import Levies
Monitory Punishment to Criminals
Death of Childless person
Gifts
The details of various taxes are already mentioned in earlier  chapters.
   Captain Hardwick mentions that the state annual income was for rupees Five lakhs and six thousand (Rs four lakhs five thousand in Farrukhavadi rate).
  Common people were poor and in very bad condition.




Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India, bckukreti@gmail.com21/10/2014
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued… Part -463
(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)
History of Garhwal from 1223-1804 to be continued in next chapter ….
History of Characteristics of Garhwal Kings Shah dynasty, to be continued

XX                     
Notes on South Asian Modern Period  History of Garhwal;  South Asian Modern Period   History of Pauri Garhwal; South Asian  Modern Period  History of Chamoli Garhwal;  South Asian Modern Period   History of Rudraprayag Garhwal;  South Asian Modern  History of Tehri Garhwal; South Asian Modern  History of Uttarkashi Garhwal;  South Asian Modern Period   History of Dehradun, Garhwal;  Modern  History of Haridwar ; South Asian Modern Period   History of Manglaur, Haridwar;  South Asian Modern Period   History of Rurkee Haridwar ;  South Asian Modern Period   History of Bahadarpur Haridwar ; South Asian Modern Period History of Haridwar district, South Asian History of Bijnor old Garhwal
XX
Garhwal through Economic Perspective in Pal /Shah Era; Garhwal through Economic Perspective in Pal /Shah Era in context Tehri Garhwal History; Garhwal through Economic Perspective in Pal /Shah Era in context Rudraprayag Garhwal History; Garhwal through Economic Perspective in Pal /Shah Era in context Chamoli Garhwal History; Garhwal through Economic Perspective in Pal /Shah Era in context Pauri Garhwal History; Garhwal through Economic Perspective in Pal /Shah Era in context Bijnor , Old Garhwal History; Garhwal through Economic Perspective in Pal /Shah Era in context Haridwar Garhwal History; Garhwal through Economic Perspective in Pal /Shah Era in context Dehradun Garhwal History; Garhwal through Economic Perspective in Pal /Shah Era in context Uttarkashi Garhwal History;

संबंध-समाप्ति करणो तरीका

चबोड़ , चखन्यौ , घपरोळ ::: भीष्म कुकरेती 
 जनि मनिख बुड्या हूंद , जनि मनिख पैसा वाळ हूंद , जनि भाजपा जन राजनीतिक  पार्टी ज्यादा तागतवार हूंद तनि यी सबि पुरण संबंध ख़तम करण पर लग जांदन। अतः मनिख तैं पता हूण चयेंद कि संबंध कनै तोड़े जांदन। 

                                                  शुरुवात मा ही संबंध तोड़णो तयारी  

 संबंध बणाण से पैली संबंध खतम करणो तयारी से मनिख जल्दी संबंध तोड़ सकद।  तो यदि आप संबंध तोड़न पसंद करदां तो संबंध बणान दै इ संबंध तोड़णो इरादा करि ल्यावो।  जरा हरियाणा मा भाजपा अर हरियाणा जन परिषद पार्टीक गठजोड़ द्याखो तो गठजोड़ से पैली द्वी पार्टयूं का इरादा ही एक दुसर  फायदा लेक अलग हूण छौ।  मायावती -मुलायम गठजोड़, मायावती -भाजपा गठजोड़ या तेलंगाना नरेश चंदशेखर रावक कॉंग्रेस गठजोड़ की जड़ मा  शुरुवात से ही गठजोड़ तोड़णो बीज बुए गे छा।   जोड़ीदार का प्रति प्रतिबद्धहीनता ही सबंध खतम करणो कारण हूंद।  यदि तुम सबंध खतम करण चांदा तो शुरवात से ही जोड़ीदार का प्रति प्रतिबद्धहीन , बचनबद्धहीन अर पीठ पर छुर्रा घुस्याणो तयारी कर ल्यावो। संबंध तोडू मनिख या पॉलिटिकल पार्टी शर्तहीन प्रतिबद्धता की बात कबि बि नि सुचदन। 
चालाक , धूर्त, खुट्या  स्याळ हमेशा संबंध स्थापित करद ही वूं विन्दुओं तैं पछ्याण जांद जु संबंध खतम करणो माध्यम छन अर इन धुर्या , धूर्त अर स्वार्थी मनिख  समूह यूँ संबंध बिगाड़ो बिन्दुवो की हर समय पूजा करणु रौंद।
                                                      संबंध बिगाड़न तैं अचाणचक   गति दीण 

                    जै जोड़ीदारन संबंध बणन से पैलि संबंध बिगाड़णो संधिस्थल को ध्यान करी हो वो अचानक संबंध बिगाड़नो बान तेजी लांद अर फिर संबंध बिगाड़नो बान तर्क , कुतर्क या खनु खरपट को सहारा लेक संबंध खतम करद।  राजनीति मा जयललिता , ममता या अरविन्द केजरीवाल यामा प्रसिद्द छन।
                                                   कुछ भि भगार , लांछना लगाण 

     संबंध तोडू जब संबंध तुड़द , रिश्ता -नाता  पर आग लगांद ,  अलग ढपली से अलग राग बजांद   तो अपण कुछ भि गलती नि माणद   बल्कण मा दुसर पर इन भगार लगांद  , लांछन लगांद दुसरो इन कमर तोड़दु कि हौरुं तैं  वो आधारहीन लांछन , भगार , आक्रमण  हजम नि हूंद। अबि कुछ महीना पैल बिहार का नीतेश कुमारन जब भाजपा से अठारा साल पुराणो गठजोड़ -गठबंधन-रिस्ता  त्वाड़ अर भाजपा की तौहीन कार कि भाजपा एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी नी च तो आज बि नितीश कुमारो दगड्या शरद यादव बि पुटक पकड़िक  जोर जोर से हंसणु रौंद।  लोग अर लालू यादव बि खत -खत  ही -ही -हा- हा -खू -खू करिक हंसणा रौंदन।  
 इनि अबि जब भाजपा -शिवसेना अर कॉंग्रेस -एनसीपी गठजोड़ टूटेन त चारि पार्ट्यून गठबंधन -गठजोड़ -अलाइंस टुटणो कारण बतैन तो यु चर्री पार्ट्युंक कार्यकर्ता धड़म से बेहोस ह्वे गेन अर आज बि चर्री पार्टयुं कार्यकर्ता संसय मा छन , सशंकित छन अर भयभीत छन। 
                                          संबंध बिगाड़न एक कला च , एक कौंळ च , एक विज्ञान अर वास्तव मा एक क्लासिकल खेल च। ये खेल तैं सीखो। 
                                          रिस्ता खतम करण एक स्वार्थ  पूर्ति च , अवसरवादी  प्रक्रिया च अर अविश्वास  परिकाष्ठा च। यदि आप संबंध खतम करण चांदवां तो स्वार्थी बणो।  
                                          नाता समाप्ति याने एक दुसर पर आरोप की झड़ी लगाण , अनावश्यक प्रत्यारोपुं  बरखा करण , गैरजरूरी कारणों का बमगोळा फुड़ण।  बस अनावश्यक , गैर जरूरी कारणु पर ध्यान द्यावो तो सबि नाता -रिस्ता अफिक खतम ह्वे जाला। 
                                           एक दूसर पर विश्वास नि कारो तो अवश्यमेव आपको रिस्ता समाप्ति -स्वर्ग फल प्राप्त होलु। जोड़ीदार की कमजोरी पर ध्यान द्यावो अर संबंध समाप्ति का पुण्य भोगो।
                                           एक हैंक  पर शक कारो अर रिस्तेदारी दुस्मनै मा बदलो 
                                                                                    ।  इति संबंध समाप्ति कारणम् अध्यायम ।

Copyright@  Bhishma Kukreti  21/10 /2014       
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लेख में  घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख  की कथाएँ चरित्र व्यंग्य रचने  हेतु सर्वथा काल्पनिक है



Garhwali Humor in Garhwali Language, Himalayan Satire in Garhwali Language , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language , North Indian Spoof in Garhwali Language , Regional Language Lampoon in Garhwali Language , Ridicule in Garhwali Language  , Mockery in Garhwali Language, Send-up in Garhwali Language, Disdain in Garhwali Language, Hilarity in Garhwali Language, Cheerfulness in Garhwali Language; Garhwali Humor in Garhwali Language from Pauri Garhwal; Himalayan Satire in Garhwali Language from Rudraprayag Garhwal; Uttarakhandi Wit in Garhwali Language from Chamoli Garhwal; North Indian Spoof in Garhwali Language from Tehri Garhwal; , Regional Language Lampoon in Garhwali Language from Uttarkashi Garhwal; Ridicule in Garhwali Language from Bhabhar Garhwal; Mockery  in Garhwali Language from Lansdowne Garhwal; Hilarity in Garhwali Language from Kotdwara Garhwal; Cheerfulness in Garhwali Language from Haridwar;

Export and Import in Garhwal in Pal /Shah Era

Administration, Social and Cultural Characteristics History of Garhwal in Shah Dynasty -24 

History of Garhwal including Haridwar (1223- 1804 AD) –part -213     
   History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -461 
                        By: Bhishma Kukreti (A History Research Student)

         The following materials of Garhwal were sold in Wholesale Markets (Mandi) of Bhabhar (Kotdwara and Bijnor) –
                             Agro products
     Farmers used to export wheat, barley, paddy, Japanese Barnyard millets, Finger Millets, Hog Millets, Italian Millets, Amaranths; Ogal; Black gram, lentils, horse gram, Souabean; mustard types of grains and pulses. Other agro products as Turmeric, ginger,  Taro were exported from Garhwal. People used to export fruits as Fig, Himalyan Malberry, Berries, lemon, pumpkins, nuts, oranges etc. People also grew Opium for export.
   Charas was commonly used by Baba, Mahatma and People used to gro hemp for Charas and fiber. Hemp fiber had demand in Bhabhar (including Bijnor), Haridwar and Rishikesh.
 People used to produce Ghee, Honey and nurture animals as horses, Bull, Buffalo, cows, goats, etc for Trade.
                   Forest Produces
            People used to collect various spices as black cumin, Indian bay leaves, Hill Cinnamon, Indian gooseberry, Nirbishi, Mari, Aracha, Chirayta etc from forests and used to export.
 Forest honey had good demand in plains.
 Te wood was export from Garhwal in huge quantity.
Animals and animal produces were also exported.
Medical herbs had very good demand and were exported in raw or medicine forms.
                      House Hold Products  
 People used to export woolen produces, wooden articles, metal vessels and metal weaponsetc, products of Bamboo species, paper, bark and skin.
                                      Minerals
     Iron ores, copper ores, borax, salt , gold dust, shilajit, chalk mud, color soil, sankhiya etc were exported in volumes.
                                Human or Slave Sales
    People used to sell children, widows to Marcha of Tibet and Rohillas.

                                     Import
1-Food produces as Gud, suger; Supari, coconut, spices of south India, tobacco, tobacco leaves, fruits and flowers.
2- Dress and dresses materials was imported as cotton was not grown in hills.
3- Various colors
4-Metals and metal produces
5-Ornaments- various ornaments
Miscellaneous-– guns, gun powders, paper, ink etc
                     Traders
 As far as Garhwalis were concerned there was no casts of trading communities. Individuals used to act as traders. Tibetans, Marcha had trading communities.
  In later stage, Muslim traders especially for leather works settled in some part of Garhwal especially in Shrinagar, Bhabhar.
                          Barter System
             In rural region, Barter system was the main source of exchanges of materials, services and consultation.
                   Coins

 There was State mint for Silver coins or Timasi in Shrinagar. Four Garhwali or Gorkhali Timasi  equal to one Garhwali rupee and five Timasi was equal to one Farukhabadi rupee.
 Spain dollar and other coins used to come to Garhwal too.
 Copper mint used to produce Taka. One Timasi was equal to ten taka.


Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India, bckukreti@gmail.com19/10/2014
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued… Part -462
(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)
History of Garhwal from 1223-1804 to be continued in next chapter ….
XX                     
Notes on South Asian Modern Period  History of Garhwal;  South Asian Modern Period   History of Pauri Garhwal; South Asian  Modern Period  History of Chamoli Garhwal;  South Asian Modern Period   History of Rudraprayag Garhwal;  South Asian Modern  History of Tehri Garhwal; South Asian Modern  History of Uttarkashi Garhwal;  South Asian Modern Period   History of Dehradun, Garhwal;  Modern  History of Haridwar ; South Asian Modern Period   History of Manglaur, Haridwar;  South Asian Modern Period   History of Rurkee Haridwar ;  South Asian Modern Period   History of Bahadarpur Haridwar ; South Asian Modern Period History of Haridwar district, History of Characteristics of Garhwal Kings Shah dynasty ,  to be continued

समर्थन ले लो ! समर्थन ले लो , फ़ोकट में ले लो

स्किट (चौंतरा स्वांग , लघु नाटिका )::: भीष्म कुकरेती 
ब्याळि 19 /10 /2014  कुण महाराष्ट्र विधान  चुनाव रिजल्ट आणो उपरान्त जब एनसीपी याने शरद परिवारो परिवारिक पार्टीन भाजपा तैं समर्थन दीणै बात कार तो हमर बिल्डिंग मा बच्चोंन एक चौंतरा स्वांग ख्याल।
 एनसीपी - समर्थन ले लो , बन बनिक समर्थन ले लो , राजनीतिक खलबली ले लो
एनसीपी - अरे क्वी बि नि बुलाणु च।  चलो मि  जोर से भट्यांदु .
एनसीपी - समर्थन ले लो , समर्थन ले लो , राजनैतिक हथियार ले लो !
पत्रकार -ये भै समर्थन क्या भाव चलणु च।  कति रुपया छटांग चलणु च? कति रुपया कीलो  चलणु च ? कति करोड़ प्रति विधायक चलणु च ?
एनसीपी -नै नै ! हम समर्थन का मोल भाव नि करदा।  हमर विधायक बिकाऊ नि छन।  बगैर शर्तौ समर्थन च।
पत्रकार -हाँ पर समर्थन की क्वी ना क्वी शर्त त होली ?
एनसीपी - इन न नी च पर उन च। 
पत्रकार -इन  नी च पर उन च,  कु क्या मतबल ?
एनसीपी -हम चांदवां कि महाराष्ट्र का विकास ह्वावो।
पत्रकार -ह्यां पर तुम पिछला दस सालों से अर शरद पवार तो पिछ्ला चालीस सालों सालों से बुलणा छंवां कि महारष्ट्र मा विकास ह्वे गे।  तो अब त महाराष्ट्र तैं विकासै जरूरत ह्वेलि ही ना। 
एनसीपी -हाँ उन त महाराष्ट्र  तैं विकासौ जरूरत नी च पर फिर बि हम महाराष्ट्र का विकास का बान बगैर शर्तुं समर्थन दीण चाणा छंवां। 
पत्रकार -वाह भली बात च। 
एनसीपी -हम पक्का राष्ट्रवादी जि छंवां। इलै हम भारतीय जनता पार्टी तैं समर्थन दीण चाणा छंवां।
पत्रकार -एक बात बतावदी बल जब एक एमपी सवाल पुछणो बि पैसा लींद तो तुम इथगा पुण्यात्मा कब बिटेन ह्वे गेवां ?
एनसीपी -हमर नीयत साफ़ च हम महाराष्ट्र का विकास चांदवां। 
पत्रकार -ह्यां पर राजनीतिज्ञ अपुड़ दांतौ लू (मैल ) बि फोकट मा नि दींदु तो घाघुं घाघ नेता शरद पवार बगैर शर्त का सुपिन मा समर्थन नि द्यालो। 
एनसीपी -हमर समर्थन अमूल्य च , बगैर मूल्य का च , सुदी ही च।
पत्रकार -सुणो ! सरा भारत की जनता जाणदी च कि एनसीपी का नेताओं का सिंचाई विभाग मा कथगा खिंचाई करीं च , महाराष्ट्र कॉपरेटिव बैंक  की कन लुटिया डुबाइं च , महासदन को गदन कन कर्युं च। 
एनसीपी -सब बकबास च। 
पत्रकार -जनता  जाणदी च कि एनसीपी नि चांदी कि महाराष्ट्र मा पिछ्ला दस सालों कु भ्रष्टाचार समिण  आवो तो तुम अब इन खेल खिलणा छंवां कि तुमर पाप छुप जावन। 
एनसीपी -बकबास !
पत्रकार -बकबास नहीं सत्य च।  अर अब जनता थोड़ा भौत अपण अधिकारुं प्रति सचेत ह्वे गे। 
एनसीपी -मै ऐसे बेकार के पत्रकारों के मुंह नही  लगता।  जा अपण रस्ता नाप। 
पत्रकार -भारत मा देर से ही सही पर पाप्युं तैं सजा त मिलदी च।  लालू , चौटाला अर जयललिता कु उदाहरण समिण च। 
एनसीपी -हम समर्थन देके रहेंगे।   तुमको जो बकना है बकते रहो ।

Copyright@  Bhishma Kukreti  20/10 /2014       
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लेख में  घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख  की कथाएँ चरित्र व्यंग्य रचने  हेतु सर्वथा काल्पनिक है



Garhwali Humor in Garhwali Language, Himalayan Satire in Garhwali Language , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language , North Indian Spoof in Garhwali Language , Regional Language Lampoon in Garhwali Language , Ridicule in Garhwali Language  , Mockery in Garhwali Language, Send-up in Garhwali Language, Disdain in Garhwali Language, Hilarity in Garhwali Language, Cheerfulness in Garhwali Language; Garhwali Humor in Garhwali Language from Pauri Garhwal; Himalayan Satire in Garhwali Language from Rudraprayag Garhwal; Uttarakhandi Wit in Garhwali Language from Chamoli Garhwal; North Indian Spoof in Garhwali Language from Tehri Garhwal; , Regional Language Lampoon in Garhwali Language from Uttarkashi Garhwal; Ridicule in Garhwali Language from Bhabhar Garhwal; Mockery  in Garhwali Language from Lansdowne Garhwal; Hilarity in Garhwali Language from Kotdwara Garhwal; Cheerfulness in Garhwali Language from Haridwar;

Trade with Tibet and Other Trades in Garhwal in Pal /Shah Era

Administration, Social and Cultural Characteristics History of Garhwal in Shah Dynasty -23 

History of Garhwal including Haridwar (1223- 1804 AD) –part -212     
   History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -460 
                        By: Bhishma Kukreti (A History Research Student)

                     Trade with Tibet

   At older time, the border traders from Taknaur, Nagpur, Painkhanda, Dashuali, Badhan regions used to have trade with Tibet, China. In later stage, the Bhotiya of Mana and Neeti grew relation with Tibetian Traders. Bhotia , Maracha, Tolcha,  or Jad got monopoly over trade with Tibet.
   Bhotiya used to sell grains to Tibet traders and in barter system they used to get Tibet or Lancha salt, Boxite, Chanvar, Wool, Woolen dresses, medicines and medical herbs, spices gold dust etc. Bhotiya used to visit Tibet in summer till mid October or October end. Those traders used to take  the Tibet goods up to Bijnor and Haridwar.
                    Trade in Chattis
 There were Chattis at Ganga and Yamuna bank. Chattis means place to short stay or Dharamshala. When Pilgrims used to visit Badrinath and Gangotri etc, villagers nearby Chatti used to sell food articles and other articles to pilgrims.
                              Dhkar
   Dhakar means to go to Mandi or Mnadi for buying materials. In groups, Garhwalis used to take agro products, forest produces, ropes, woolen goods etc to Khohdwar (Kotdwara), Dugdda, Nazibabad, Rishikesh, Kankhal, Chaukighat, Laldhang, Ramnagar. Through barter system , they used to get Gud, Sugar, cotton, salt or the  material that was not available in Garhwal.

Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India, bckukreti@gmail.com18/10/2014
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued… Part -461
(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)
History of Garhwal from 1223-1804 to be continued in next chapter ….
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Notes on South Asian Modern Period  History of Garhwal;  South Asian Modern Period   History of Pauri Garhwal; South Asian  Modern Period  History of Chamoli Garhwal;  South Asian Modern Period   History of Rudraprayag Garhwal;  South Asian Modern  History of Tehri Garhwal; South Asian Modern  History of Uttarkashi Garhwal;  South Asian Modern Period   History of Dehradun, Garhwal;  Modern  History of Haridwar ; South Asian Modern Period   History of Manglaur, Haridwar;  South Asian Modern Period   History of Rurkee Haridwar ;  South Asian Modern Period   History of Bahadarpur Haridwar ; South Asian Modern Period History of Haridwar district, History of Characteristics of Garhwal Kings Shah dynasty ,  to be continued
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Trade with Tibet and Other Trades in Garhwal in Pal /Shah Era in context Garhwal History; Trade with Tibet and Other Trades in Garhwal in Pal /Shah Era in context Chamoli Garhwal History; Trade with Tibet and Other Trades in Garhwal in Pal /Shah Era in context Pauri Garhwal History; Trade with Tibet and Other Trades in Garhwal in Pal /Shah Era in context Haridwar Garhwal History; Trade with Tibet and Other Trades in Garhwal in Pal /Shah Era in context Dehradun Garhwal History; Trade with Tibet and Other Trades in Garhwal in Pal /Shah Era in context Uttarkashi Garhwal History; Trade with Tibet and Other Trades in Garhwal in Pal /Shah Era in context Tehri Garhwal History; Trade with Tibet and Other Trades in Garhwal in Pal /Shah Era in context Rudraprayag Garhwal History;