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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, February 13, 2017

शूद्रक का विदूषक याने हिंदी फिल्मों का महमूद , ओम प्रकाश शर्मा का कैप्टन हमीद

Satire and its Characteristics, Sanskrit Drama by  Shudraka's Vidushak &  Satire,  व्यंग्य परिभाषा, व्यंग्य  गुण /चरित्र
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  शूद्रक का विदूषक याने हिंदी फिल्मों  का महमूद , ओम प्रकाश शर्मा का  कैप्टन हमीद 
                      (संस्कृत नाटकुं मा हास्य व्यंग्य )  
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    (व्यंग्य - कला , विज्ञानौ , दर्शन का  मिऴवाक  : (   भाग - 24   ) 

                         भीष्म कुकरेती 
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 शूद्रक नामी गिरामी प्राचीन भारतीय नाटकोंकारों  मादे एक प्रमुख  नाटककार माने जान्दन। शूद्रक एक राजा व नाट्यलेखक छ्या (सुकुमार भट्टाचार्यजी  , विश्वनाथ बनर्जी ) । यद्यपि शुकध्रक की जीवनी बाराम भ्रान्ति ही च।  
शूद्रक का रच्यां मृच्छकटिकम , वासवदत्ता  अदि तीन नाटक माने जान्दन। 
 शूद्रकन बि अपण नाटकुं  मा कालिदासौ तरां हास्य अर व्यंग्य उत्पति करणो बान विदूषक को सहारा ले।  कालिदास का या अन्य प्राचीन संस्कृत  नाटकुं विदूषक जख मन्द बुद्धि , लालची , खाउ हून्दन तो शूद्रक का मृच्छिकटिकम का विदूषक राजा का सहचर , अनुशासनयुक्त , अफु पर काबु  करण वळ अर चतुर च।  हाँ वाक्पटुता अर अलंकार प्रयोग दुइ प्रकार का विदुषकुं चारित्रिक गुण छन।  शूद्रक की या विदूषक चरित्र की परिपाटी  हिंदी फिल्मुं  मा सन 1970 तक राइ तो  ओम  प्रकाश शर्मा  सरीखा हिंदी जासूसी उपन्यासकारों न बि अपणै। 
   
 मृच्छकटिकम कु पंचों  अंक मा वसन्तसेना द्वारा ब्राह्मण  चारुदत्त तै भोजन दीणम उदासीनता का प्रति मैत्रेय नामौ विदूषक कसैली , कांटेदार , कड़क टिप्पणी  उपमा अलंकार या कहावतों से करद -
--------------"बगैर जलड़ो कमल , ठगी  नि करण वळु बणिया , सुनार जु चोरी नि कारो ,  बगैर  घ्याळ -घपरोळ  की ग्रामसभा की बैठक  , अर लोभहीन गणिका मुश्किल से ही ईं मिल्दन। " -----
पंचों अंक मा विदूषक चारुदत्त तै हास्य व्यंग्य रूप मा सलाह दीन्दो -
--------"गणिका जुत्त पुटुक अटक्यूं गारो च जैतै भैर निकाळण  बि मुश्किल ही हूंद "  -----
मृच्छकटिकम नाटक का खलनायक च शकारा अर वैक  दोस्त च विट जैक नौकर च चेत। यी चरित्र अलग अलग बोली -भाषा वळ छन अर  प्राकृत याने स्थानीय भाषा प्रयोग करदन ।  (तिलकऋषि ) 
शूद्रकन प्राकृत अर संस्कृत का प्रयोग हास्य -व्यंग्य उत्तपन करणो बड़ो बढ़िया प्रयोग कौर।  मृच्छकटिकम मा कल्पना, उपमा  अर मुहावरों मिळवाक्  से तीखा व्यंग्य करे गे। 

शूद्रक की शैली अनुसार ही हिंदी मा महमूद , जॉनी वाकर जन हास्य कलाकारुं से काम लिए गे तो जासूसी उपन्यासकार ओम प्रकाश शर्मा का कैप्टन हामिद बरबस शूद्रक रचित मृच्छकटिकम  का मैत्रेय चरित्र की याद  दिलांद। 



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8 / 2/2017 Copyright @ Bhishma Kukreti 

Discussion on Satire; definition of Satire; Sanskrit Drama by  Shudraka's Vidushak &  Satire,Verbal Aggression Satire; Sanskrit Drama by  Shudraka's Vidushak &  Satire, Words, forms Irony, Sanskrit Drama by  Shudraka's Vidushak &  Satire,Types Satire;  Games of Satire; Sanskrit Drama by  Shudraka's Vidushak &  Satire,Theories of Satire; Sanskrit Drama by  Shudraka's Vidushak &  Satire,Classical Satire; Censoring Satire; Sanskrit Drama by  Shudraka's Vidushak &  Satire,Aim of Satire; Satire and Culture , Rituals
 व्यंग्य परिभाषा , व्यंग्य के गुण /चरित्र ; (संस्कृत नाटकों में  हास्य व्यंग्य )  व्यंग्य क्यों।; (संस्कृत नाटकों में  हास्य व्यंग्य )व्यंग्य  प्रकार ; (संस्कृत नाटकों में  हास्य व्यंग्य ) व्यंग्य में बिडंबना , व्यंग्य में क्रोध , व्यंग्य  में ऊर्जा ,  व्यंग्य के सिद्धांत , व्यंग्य  हास्य, व्यंग्य कला ; व्यंग्य विचार , (संस्कृत नाटकों में  हास्य व्यंग्य )व्यंग्य विधा या शैली ,(संस्कृत नाटकों में  हास्य व्यंग्य ) व्यंग्य क्या कला है ? (संस्कृत नाटकों में  हास्य व्यंग्य )   

कालिदास साहित्य मा हास्य -व्यंग्य

Satire and its Characteristics, Satire and Humor in Kalidas Literature ,  कालिदास साहित्य में हास्य -व्यंग्य,  व्यंग्य परिभाषा, व्यंग्य  गुण /चरित्र 
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                कालिदास साहित्य मा हास्य -व्यंग्य 
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    (व्यंग्य - कला , विज्ञानौ , दर्शन का  मिऴवाक  : (   भाग - 23    ) 

                         भीष्म कुकरेती 
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महाकवि कालिदास संस्कृत का नाटक शिरमौर छन। ऊंको महाकव्य , गीतों में प्रतीकों से सटीक बिम्ब बणदन, कालिदासन शास्त्रीय शैली अपणाइ।  कालिदास का नाटकुं माँ चरित्र अपण पद अर जाती का हिसाबन व्यवहार करदन तो  कालिदास का नाटकुं माँ     
हास्य -व्यंग्य करणो काम विदूषक  /भांड करदन।  किन्तु विदूषक  का हास्य बि परिष्कृत हास्य व्यंग्य च। बलदेव प्रसाद उपाध्याय (संस्कृत साहित्य का इतिहास , 1965 , शारदा मन्दिर प्रकाशन ) लिखदन बल  कालिदास का कवितौं माँ हास्य व्यंग्य पर्याप्त मात्रा माँ च और उंका नाटकुं मा वीम का सिर बि दर्शकों तैं हंसाण मं कामयाब च , हास्य च तो व्यंग्य बि ऐई जांद।   गोविंदराम शर्मा (संस्कृत साहित्य की प्रमुख प्रवर्तियाँ, 1969  ) लिखदन की कालिदास का हास्य प्रयोजन बि श्रृंगार कारस का अनुकूल च।. 
                      जे  . तिलकऋषिन अपण एक लेख ' THE IMAGES OF WIT AND HUOUR IN KALIDAS'S AND SUDRKA'S DRAMAS ' मा  कालिदास अर शूद्रक का नाटकों माँ व्यंग्य की पूरी छानबीन अर व्याख्या कार। कालिदास कृत अभिज्ञान शाकुंतलम का रूपान्तरकार विराजन बि कालिदास कृत ये नाटकम हास्य व्यंग्य का कथगा इ उदाहरण देन। 
अनन्तराम मिश्र 'अनन्त ' अपण ग्रन्थ 'कालिदास  साहित्य और रीति काव्य परम्परा (लोकवाणी संस्थान , 2007 , पृष्ठ 297 ) मा लिखदन बल 'हास्य -व्यंग्य क्षेत्र में रीतिकवि कालिदास से अधिक सफल हैं। यद्यपि कालिदास ने नाटकों में विदूषक के माध्यम से हास्य रस उद्भावना के  विभिन्न प्रयास किये हैं तथापि उनमे हास् भाव रीतिकाव्य के जैसे स्फुट और विशद नही हैं ' ।
सुषमा कुलश्रेष्ठ (कालिदास साहित्य एवं संगीत कला, 1988  ) मा बथान्दन बल कालिदास साहित्य मा हास्य भरपूर च (भरत कु नाट्य शास्त्र माँ    हास्य माँ ही व्यंग्य समाहित च ) .  
कालिदास का विदूषक अंक  मा हास्य व्यंग्य पैदा करणो बाण कालिदासन अलंकार , उपमाओं को बढ़िया प्रयोग कर्यूं च। विदूषक की भाषा में अपभ्रंश व प्राकृत शब्दावली प्रयोग हुयुं च। 

विक्रमोर्वशीय का तिसरो अंक मा विदूषक का भोजन की कल्पना व्यंग्य को बहुत सुंदर उदाहरण च जब भोजन व चिन्नी  -मीठा प्रेमी प्रिय  विदूषक ' चिन्नी ' की याद  माँ चन्द्रमा की  तुलना  चिन्नी -पिंड से करद (ही ही भो खांडमोदासस्सिरियो उदीदो रा। ... )   । 
'मालविकागणिमित्र' मा बि विदूषक का हाव भाव व वार्तालाप हास्य -व्यंग्य पैदा करद ( तिलकऋषि) 
शकुंतलम (दुसर अंक ) मा बि विदूषक का भाव भंगिमा , वार्ता से हास्य व्यंग्य पैदा हूंद। विदूषक का वार्तालाप शब्द अर मच्छीमार का शब्द सामयिक प्रशासन अर समाज पर व्यंग्य  पैदा करदन।  
कालिदास का सभी नाटकों में हास्य व्यंग्य उतपति का वास्ता विदूषक ही मुख्य चरित्र च। कालिदास का नाटकुं मा मुख्यतया   उपमा अलंकार का प्रयोग हास्य -व्यंग्य उत्पन करद।   


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7 / 2/2017 Copyright @ Bhishma Kukreti 

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Satire and Humor in Kalidas Literature ,  कालिदास साहित्य में हास्य -व्यंग्य,

पँचतन्त्र मा हास्य व्यंग्य

Satire and its Characteristics, Panchtantra, व्यंग्य परिभाषा, व्यंग्य  गुण /चरित्र
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पँचतन्त्र मा हास्य व्यंग्य 
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    (व्यंग्य - कला , विज्ञानौ , दर्शन का  मिऴवाक  : (   भाग -  22  ) 

                         भीष्म कुकरेती 
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पण्डित विष्णु शर्माs  रच्यूं कथा खौळ (संग्रह ) पँचतन्त्र आज भी उपयोगी च , लाभकारी च अर प्रासंगिक च।  कथा चूँकि शिक्षा दीणो रचे गै थै त इखमा निखालिश व्यंग्य की गुञ्जैस कमी च। 
फिर बि पँचतन्त्र मा व्यंग्यक झलक झळकां मिलदी च।  दंभ , मिथ्याभिमान, लोलुपता , नारी दगड़ विश्वासघात आदि जन व्याख्यानों में कम ही सै व्यंग्य तो छैं इ च (सत्यपाल चुग , 1968 , प्रेमचन्दत्तरो उपन्यासों की शिल्पविधि ).  
Leonard Feinberg न अपण ग्रन्थ  'Asian Laughter  (पेज 426 ) मा पँचतन्त्र का कथाओं मा हास्य व्यंग्य ढूंढ।Leonard Feinberg का हिसाब से संसार तै जानवरों आँख से दिखण अपण आप मा व्यंग्य च अर जानवरों चरित्र से मनिखों मनोविज्ञान व्याख्या करण बि एक तरां को व्यंग्य ही च। 
पँचतन्त्र माँ सूक्ष्म हास्य या व्यंग्य च अर वो  झळकां ही च (Meena Khorana , 1991 , The Indian subcontinent in literature for children and Young)  
Mathew Johan Hodgart अपणी किताब  Die Satire ( पृष्ठ 127  मा )लिखदन कि पँचतन्त्र या अन्य पुरणी कथाओं मा कथा उद्देश्य अपणा आप मा व्यंग्य च अर  फिर जानवरों द्वारा कथा तै जीवन्त बणये जाण बि त व्यंग्य को एक रूप च।   
सम्मेलन पत्रिका  19 77 माँ बि इनि बोले गे बल पँचतन्त्र मा अपरोक्ष रूप से व्यंग्य मिल्दो जखमा एक पात्र अर्जुन तरां संशय से भर्यूं रौंद अर दुसर चर्तित्र कृष्ण तरां उपदेश दीन्दो वास्तव मा यु सुकराती आइरोनी च। 

पँचतन्त्र मा चरित्रों नाम गुण बि बथान्दन अर यो भि व्यंग्य को एक भाग च।  यही शील गढ़वाली नाटक का शिरमौर भवानी दत्त थपलियालनन अपण द्वी नाटकों मा बि अपणाइ।  नाम से हास्य व्यंग्य पैदा करण एक व्यंग्य  शैली च  

@भीष्म कुकरेती

Sunday, January 29, 2017

Forest Administration by Ramsay

Exploitation of Forest Resources-4

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                            British Administration in Garhwal   -105
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History of British Rule/Administration over Kumaun and Garhwal (1815-1947) -122
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            History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -959
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                              By: Bhishma Kukreti (History Student)

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                One of various steps for reforming forest administration by Kumaon commissioner Captain Henry Ramsay was forest protection.
 Atkinson called Ramsay as first conservator of Uttarakhand.
  Ramsay stopped offering old system of offering forest on contract and started new system.  Henry Ramsey stopped farming inside forests. Ramsey offered land to those were farming in hill forests in Bhabhar or Haridwar to Baramdev region. That was first appreciable step in protection for forests.
 By 1867, Ramsey displaced Goth (a temporary camp for animals) from forest of Haldwani to   Sharda River. Ramsey desired for displacing all ‘Goth’ from Garhwal forests.
   Ramsey started branding / indentifying by the officials the trees to be cut by contractors. The government officials used to hammer on trees to be cut.  By displacing Goth from forests was also for decreasing forest fire in summer season. By that there were difficulties for Goth masters but was fine for forest protection. Ramsey started cultivating new tress too. There was increase in forest revenue and there was net saving for Rs 15 lakhs in 1867-68 after all expenses (Atkinson page 853).


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Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India, bckukreti@gmail.com 27/1/2017
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued… Part -960
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*** History of British Rule/Administration over British Garhwal (Pauri, Rudraprayag, and Chamoli1815-1947) to be continued in next chapter
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(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)
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References  
 1-Shiv Prasad Dabral ‘Charan’, Uttarakhand ka Itihas, Part -7 Garhwal par British -Shasan, part -1, page- 287-312
 2- Atkinson, Himalayan Districts, Vol.-1 page 840-915

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History of British Rule, Administration , Policies, Revenue system,  over Garhwal, Kumaon, Uttarakhand ; History of British Rule , Administration , Policies Revenue system  over Pauri Garhwal, Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand; History of British Rule, Administration, Policies ,Revenue system  over Chamoli Garhwal, Nainital Kumaon, Uttarakhand; History of British Rule, Administration, Policies ,Revenue system  over Rudraprayag Garhwal, Almora Kumaon, Uttarakhand; History of British Rule, Administration, Policies ,Revenue system  over Dehradun , Champawat Kumaon, Uttarakhand ; History of British Rule, Administration, Policies, ,Revenue system  over Bageshwar  Kumaon, Uttarakhand ;
History of British Rule, Administration, Policies, Revenue system over Haridwar, Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand;

छुमा बौ एक प्रतीकात्मक नाम है

- भीष्म कुकरेती
आज मेरे पुराने मित्र व पाठक उद्योगपति श्री दयानंद द्विवेदी जी ने छुमा बौ गीत की फरमायश की मै कोशिस करूंगा कि छुमा बौ से संबंधित सभी गीत इंटरनेट पर प्रस्तुत करूँ।
प्रसिद्ध इतिहासकार डा. शिव प्रसाद नैथाणी ने 'उत्तराखंड लोक संस्कृति और साहित्य ' लेख में छुमा बौ पर अपनी राय दी
उत्तराखंड के लोक गीतों कि नायिकाओं के नाम बहुत कुछ उनकी सामयिकता तत्कालीन युग का परिचय भी दे देते हैं
कत्य्री गाथा में वह उदा है, जोत्रमाला है, मोती माला है , इजुला, बिजुला और राणी जिया है .
उधर उत्तर मध्य काल में उसके नाम हैं सुरु कुमैण, मोतिया, जसी , मलारी और राजुला, किन्तु राजुला से पहले सुरजी हुए थी
रमकणि, छमकणि, बीरू कसी वूंग, कहती मीठी साली होली दाख दाड़िम जसी ....
और इधर पिछली सदी में पहले दौंथा थी, पुरुष 'मेरी दौंथा कथैं गे ' कहकर ढूंढते थे
इस बीच मधुलि भी तो आ गयी थी
'खेली जाली होली , मदौली मदुली सबि बुल्दन कन मदुली होली'
दौंथा के बाद तो छुमा प्रसिद्ध हुयी किन्तु वा तो छुमा बौ के नाम से प्रसिद्ध हो गयी , छुमा बौ कद में कुछ छोटी है , नारंगी सी दाणीसी, गोल मटोल सी, और रंग नारंगी जैसा है, छुमा बौ को पहाड़ी टोपी और मगजी बहुत प्रभावित करती है . भाभी है तो प्रगल्भ भी है इशारा भी करती है
छोटी छोटी छुमा बौ टु नारंगी सी दाणी
रूप कि आन्छरी छुमा, जन ऐना चमलांद
गुड़ खायो माख्योंन , सरा संसार गिच्चन खांदो
तू खांदी आंख्योंन
पीतल कि छनी, पीतल कि छनी मुलमुल हंसदी छुमा
दै खतेणि जन
रोटी क कतर, रोटी क कतर, नथुली को कस लगे
तेरी गल्वाड़ी पर
झंगोरा कि बाल, झंगोरा कि बाल छुमा परसिद ह्व़े गे
सरा गढ़वाल सरा गढ़वाल
छुमा ने प्रसिद्ध तो होंना ही था जिस नथुली के कस कि बात गितांग कर रहा है उस नथुली को हल्का सा हिलाकर छुमा ने अपने प्यार कि स्वीकृति भी दे दी थी पर बुद्धू बहुत देर बाद समझ पाया
टोपी कि मगजी टोपी कि मगजी
नथुली न सान करे तिन णि समझी
सुनने में आया कि बाद में छुमा बौ लछमा के नाम से प्रसिद्ध हुयी
आजकल तो छुमा बौ हिंदी फिल्मो से निकल कर गढ़वाल में बसने लगी है और छुमा बौ का गुलबन्द गुम हो ग्या है नथुली हर्च गयी है और छुमा बौ मोबाइल में समाने को आतुर है

श्रीमद भगवद गीता मा व्यंग्य झलक

Satire and its Characteristics, Bhagvad  Geeta व्यंग्य परिभाषा, व्यंग्य  गुण /चरित्र
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श्रीमद भगवद  गीता मा व्यंग्य झलक 
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    (व्यंग्य - कला , विज्ञानौ , दर्शन का  मिऴवाक  : (   भाग -21    ) 

                         भीष्म कुकरेती 
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                   श्रीमद भगवद गीता क्वी धार्मिक पुस्तक नी च अपितु साँख्य योग याने Auto Suggestion की अभ्यास दर्शन च।  इनि अष्टवक्र की महागीता बि स्वयं सम्मोहन  याने  Auto Suggestion दर्शन या अनुभव च।  हिन्दू और मुसलमानों दुयुं तै गलतफहमी च।  हिन्दू -सनातन  धर्म से या कर्मकांडी धर्म से द्वी गीताऊँ कुछ लीण -दीण नी च।  
        साँख्य योग याने Auto Suggestion की अभ्यास दर्शन चजब त गीता मा हौंस -चबोड़ की कम ही गुञ्जैस च।  चूँकि गीता एक मनोविज्ञान की पुटक च तो इखमा मनोविज्ञान का हिसाबन ही वार्तालाप च। 
सबसे पैलो अध्याय मा दुर्योधन बुल्दु बल पांडव सेना महावीर भीम से रक्षित च तो यो अफिक ही एक व्यंग्य च।  युद्ध से पािल क्वी बि सिपाही या रणनीतिकार कै सिपाही या सेनापति तै परमवीर चक्र जन पदवी नि दीन्दो।  किन्तु दुर्योधनन भीम तै जताई कि कुरुक्षेत्र युद्ध भीम द्वारा जिते सक्यांद याने भीम हीरो च।  किन्तु असलियत मा क्या ह्वे ? कुरुक्षेत्र का असली हीरो अर्जुन सिद्ध ह्वे ना कि भीम। 

कृष्ण अधिकतर अर्जुन तै कै ना कै विश्लेषण युक्त नाम से जन कि पार्थ , कुंतीपुत्र , शेरपुरुष , भरतश्रेष्ठ , पाण्डुपुत्र , कौरववंशी , पांडव , आदि नाम से भट्यांदन अर भौत सी जगा मा अर्जुन तै मानसिक रूप से अळग  चढांदन अर फिर अग्वाड़ीs पंकत्युं मा  अर्जुन का अहम पर चोट करिक अर्जुन का मानमर्दन करदन अर यही तो व्यंग्यकार करदो। 
 दुसर अध्यायम एक जगा मा अर्जुन युद्ध नि करणै बात करदो तो कृष्ण अर्जुन पर व्यंग्य करदन बल तेरो शरीर क्षत्रिय को च , तेरो ब्यापार क्षत्रिय को च अर तू पण्डित या बामणु जन छवी लगाणु छै ? या उक्ति व्यंग्य को आछो उदाहरण च।  
स्वामी चिन्मयानन्द जीन बि अपण गीता टीका ( The Bhgvad Geeta अध्याय 4 पृष्ठ 88 -89 ) मा गीता मा व्यंग्य की झलक सिद्ध कार अर ब्वाल कि गीता (चौथा अध्याय श्लोक संख्या 41 आदि ) मा कृष्णन कटु व्यंग्य प्रयोग कारिक अर्जुन तै झपोड़। 
इनि ए. पार्थसारथी अपण भगवद गीता ग्रन्थ (44 वां भाग ) मा सिद्ध करदन बल गीता मा महर्षि व्यासनं ऊँ लोगों (ऋषि , पण्डित ) पर व्यंग्य कर जु सिरफ नाम का वास्ता तपः आदि का प्रयोग करदन या जनूनी ढंग से पूजा पाठ  करदन या धोखा दीणो बान पूजा करदन  

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29 / 1 /2017 Copyright @ Bhishma Kukreti 

Discussion on Satire  Bhagvad  Geeta; definition of Satire; Verbal Aggression Satire   Bhagvad  Geeta;  Words, forms Irony, Types Satire Bhagvad  Geeta ;  Games of Satire  Bhagvad  Geeta; Theories of Satire Bhagvad  Geeta  Bhagvad  Geeta; Classical Satire Bhagvad  Geeta ; Censoring Satire Bhagvad  Geeta ; Aim of Satire Bhagvad  Geeta; Satire and Culture  Bhagvad  Geeta, Rituals व्यंग्य परिभाषा , व्यंग्य के गुण /चरित्र ; व्यंग्य क्यों।; व्यंग्य  प्रकार ;  व्यंग्य में बिडंबना , व्यंग्य में क्रोध , व्यंग्य  में ऊर्जा ,  व्यंग्य के सिद्धांत , व्यंग्य  हास्य, व्यंग्य कला ; व्यंग्य विचार , व्यंग्य विधा या शैली , व्यंग्य क्या कला है ?   

उपनिषदुं मा हौंस -व्यंग्य -2

Satire and its Characteristics, Satire and humor in Upnishad व्यंग्य परिभाषा, व्यंग्य  गुण /चरित्र
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                 उपनिषदुं मा हौंस -व्यंग्य -2 
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    (व्यंग्य - कला , विज्ञानौ , दर्शन का  मिऴवाक  : (   भाग - 20   ) 

                         भीष्म कुकरेती 
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                     उपनिषदुं  तै आम लोक धार्मिक ग्रन्थ मन्दन पर  उपनिषद विशुद्ध मनोविज्ञान कु विज्ञानं छन। इनम हौंस -व्यंग्य मुश्किल से मिल्दैन।  किन्तु छान्दोगेय उपनिषद (1 :12 ) मा  व्यंग्य उफरिक आयुं च ( S .C . Sen , The Mystic Philosophy of Upnishads, page 45 ) । ये अध्याय मा शौव उद्गीथ सिद्धांत समझाणो बान रचयिता कुत्तों उदाहरण दीन्दो।  एक ऋषि ग्लावs समिण कुछ कुत्ता ( ऋषि ) आंदन अर एक सफेद कुत्ता से भोजन की अपेक्षा करदन।   सफेद कुत्ता ऊँ कुत्तों से सुबेर आणो बुल्दो।  दुसर दिन वो अलौकिक कुत्ता एक हैंकॉक पूँछ  अपण मुख पूटुक लेकि इनि आंदन जन वैदिक ऋषि जुलुस माँ आंदन।  अर ऊँ सब्युन हिंकार ('हि ' स्तोभ ) शुरू कार अर सब बुलण लगिन , हम भोजन , जलपान का इच्छुक छंवां   ... हम तै अन्न द्यावो , अन्न द्यावो  ... "  ये खण्ड मा वैदिक ऋषियों को लालच पर सचमुच माँ एक व्यंग्य च अर ऋषि कुत्तों की योनि वास्तव माँ ऋषियों द्वारा कुत्ता जन व्यवहार पर व्यंग्य ही च। ये सन्दर्भ मा John Oman  ( Natural and Supernatural पृष्ठ 490 ) छान्दोगेय   उपनिषद का उदाहरण दीन्दो अर बथान्द बल भौत सा  ऋषि बगैर अर्थ समझ्यां वैदिक ऋचा जोर जोर से बखणा रौंदन   अर यो बात उपनिषद  मा व्यंग्य शैली से बुले गे । 
S .C Sen बथान्दन बल बृहद अरणायक उपनिषद  (अश्वपति आख्यान अध्याय ) मा पशु बलि की भर्त्सना वास्तव मा व्यंग्य रूप से करे गे  अर उपनिषदनिक व्यंग्य को सर्वोत्तम उदाहरण च।  
A .B . Keithन ( The Relgion and Philosophy of Veda and Upnishads ) बि वेद अर उपनिषदुं मा व्यंग्य का उदाहरण पेश करिन। 


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26/ 1 /2017 Copyright @ Bhishma Kukreti 

Discussion on Satire; Upnishad definition of Satire; Upnishad Verbal Aggression Satire;  Upnishad  forms Irony, Types Satire;  Upnishad Games of Satire; Theories of Satire; upnishad Classical Satire; Censoring Satire; Aim of Satire; Satire and Culture , Rituals व्यंग्य परिभाषा , व्यंग्य के गुण /चरित्र ; व्यंग्य क्यों।; व्यंग्य  प्रकार ;  व्यंग्य में बिडंबना , व्यंग्य में क्रोध , व्यंग्य  में ऊर्जा ,  व्यंग्य के सिद्धांत , व्यंग्य  हास्य, व्यंग्य कला ; व्यंग्य विचार , व्यंग्य विधा या शैली , व्यंग्य क्या कला है ?