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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, October 12, 2017

व्यास श्री तैं हड्डी दिखावो , रान दिखावो या पूरा बखर खलाओ अर अपण अनुसार इतिहास लिखवावो

(Best  of  Garhwali  Humor , Wits Jokes , गढ़वाली हास्य , व्यंग्य )
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 चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट  :::   भीष्म कुकरेती    
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(कुरुराज सम्राट युधिष्ठर का शयनकक्ष )
पाराशर ऋषि - कुंती पुत्र युधिष्ठिर ! इथगा रात अर मि तै बुलाइ अर उ बि अपण शयनकक्ष मा ?
युधिष्ठर -ऋषिवर ! जब चिंता का निवारण न ह्वावो त क्या दिन , क्या रात या क्या सिंघासन। 
पाराशर - ज्ञानी युधिष्ठिर ! चिंता तो युधिष्ठिर से दूर भगदि त क्योंकर चिंता ?
युधिष्ठिर -हे गीता विद्वान ! हे सर्वश्रेष्ठ मनोविज्ञानौ  विद्वान ! मनुष्य कथगा बि ज्ञानी हो कुछ क्षण इन आंदन जब चिंता दूर नि हूंदी। 
पाराशर -  धर्मराज ! मि तैं तुम सरीका क्षत्रिय द्वी कारणों से भट्यांदन या तो मनोविज्ञान याने गीता का गूढ़ रहस्य जाणनो या गीता तै  कार्यावनित करणो बान क्वी षटराग करणो बान। 
युधिष्ठिर - हे मनोविज्ञान ज्ञानी ! हे गीता ज्ञानी ! आज तुम से खटराग की अपेक्षा च। 
पाराशर - चक्रवर्ती सम्राट ! याने आज धर्म से अलग पथ  अन्वेषण की अपेक्षा  च ? 
युधिष्ठिर - सांख्य योग विद्वान! तुम अन्तर्यामी छंवां। 
पाराशर - धीर महापुरुष ! यदि युधिष्ठिर जन धीर अधीर हो त स्थिति  बि अवश्य अति जटिल ही ह्वेली । 
युधिष्ठिर -हे आत्मसुझाव याने गीता  गुरु ! स्थिति अति जटिल च। 
पाराशर - हे परम शिष्य ! विषय तै पूरा सम्भाषित कारो , समझाओ, बिंगाओ । 
युधिष्ठिर - मनोविज्ञान का सर्वश्रेष्ठ गुरु श्री ! तुम जणदा इ छंवां बल राजनीतिविज्ञान गुरु श्रीकृष्ण का सुझावानुसार हमन विभिन्न क्षेत्रों मा भारत पुराण लिखणो काम विभिन्न व्यासों तै दे। प्रत्येक व्यास तै राज्य वेतन पर कुशल लिपिक याने गणेश दिए गेन। 
पाराशर -हां ! जां से कि भारत का इतिहास अक्षुण रावो अर साथ साथ कुरु वंश याने पांडव वंश की सकारात्मक कीर्ति सदा अमर रावो अर इतिहास सदा ही पांडवों साथ रावो। 
युधिष्ठिर - पराम् ज्ञानी ! सत्य वचन।  
पाराशर - त  कठिनाई क्या आयी। 
युधिष्ठिर - पितामह व्यास समेत सभी व्यास पांडवुं इतिहास सकारात्मक रूप से लिखणा छन याने तुलना मा ताऊ श्री अर स्व भ्राता दुर्योधन तै खलनायक बणैक लिखणा छन। 
पाराशर -हां इतिहास मा महानायक बणन  हो तो तुलना मा कै ना कै तैं खलनायक आरोपित करण अत्यंत आवश्यक हूंद।  पुरुषोत्तम राम राम तबि ह्वेन जब विद्वान रावण अर ऊंका संपूर्ण कुल तै कलंकित करे गे। कलंकित  शत्रु उत्पादन से ही पुरुषोत्तम की उतपति हूंद। 
युधिष्ठिर -हाँ सर्वज्ञाता महाऋषि ! किन्तु गंगा -नयार संगम याने बणेलस्यूं आश्रम का व्यास अपण माह्भारत खंड मा दुर्योधन भ्राता तै खलनायक नी बणाना छन अपितु सत्य लिखणा छन। 
पाराशर - राजन ! मीन बि सूण कि गंगा -नयार संगम आश्रम जु बणेलस्यूं की धरती मा च का प्रखर व्यास श्री दुर्योधन तै सुयोधन सिद्ध  करणा छन अर दुर्योधन श्री तै महान प्रशासक सिद्ध  करणा छन। 
युधिष्ठिर -हाँ ! मेरी तुलना मा दुर्योधन तै अधिक प्रजासेवी , कुशल प्रशाशक अर न्यायप्रिय बताणा छन। 
पाराशर - कुंती पुत्र ! यदि सत्य सुणनै तागत च त बोलुं ?
युधिष्ठिर - ऋषिराज ! सत्य ही ब्वालो आज। 
पाराशर -पांडव विरोध छोड़ द्यावो तो सुयोधन तुम से अधिक सयोग्य प्रशासक छौ , प्रजावत्सल छौ , प्रजा कुण वास्तव मा न्याय दायी छौ।  हिमालय पर एकि दोष च कि वु अति शीतल हूंद अर सुयोधन कु एकि दोष छौ कि वु अति पांडव विरोधी छौ।  किन्तु गद्दी का वास्ता वास्तव मा सुयोधन का प्रत्येक कार्य सही ही छौ।  कुछ बि गलत नि छौ।  बस शकुनि की रणनीति का समिण रणनीति राज श्रीकृष्ण की रणनीति अधिक कामयाब रणनीति साबित ह्वे। 
युधिष्ठिर - योइ त संताप च।  हम पांडव न्याय का कारण नि जीतां , सुयोधन अन्याय का कारण नि हार अपितु सदा ही श्रीकृष्ण की रणनीति शकुनि से अधिक कारगार छे। यदि या बात भारत पुराण याने इतिहास मा लिखे जाली तो हम पांडवों तै क्वी नि पूजल अपितु भविष्य मा भारतवासी सुयोधन की ही पूजा कारल।  
पाराशर - युधिष्ठिर ! जब कि तुमर उद्देश्य महाभारत लिखवाणो बिगळयूं ही च।  तुम चांदा कि कुंती अर माद्री पुत्रों तै पांडु का न्यायिक अर धर्मनिष्ठ पुत्र माने जाव जांसे हस्तिनापुर पर तुमर अधिकार  सामाजिक , धार्मिक   और न्यायिक दृष्टि से बिलकुल सही साबित हो। 
युधिष्ठिर -हां।  
पाराशर - युधिष्ठिर ! तुमर महाभारत लिखवाणो उद्देश्य साफ़ बल तुमर हरेक सुजन या दुर्जन रणनीति व कार्य तैं पुण्य अर धर्म नीति बताये जाय अर सुयोधन की हर नीति , कूटनीति व कार्य तै दुश्चरित्र , अधार्मिक अर अन्यायी कार्य सिद्ध करे जावो। 
युधिष्ठिर -तुम से क्या लुकाण। 
पाराशर -अर तेरी स्वयम की अनिर्णय क्षमता तै धर्म नीति का नाम दिए जावो , अनिर्णय से जनित प्रशाशन हीनता तै धार्मिक प्रशासन नाम दिए जाय।  है ना ?
युधिष्ठिर -हूं हूं   ... 
पाराशर - युधिष्ठिर ! हर युद्ध मा जितण वळ हमेशा इतिहास -पुराण रचवांदो अर अफ़ु तै सत्यशील , न्यायप्रिय अर धार्मिक सिद्ध करवांदो अर विरोधी तैं अन्यायी साबित करवांदो त त्वी बि जित्यूं राजा छै तो तू बि वी करणु छै।  रामकाल मा इतिहास लिखणो साधन नि छा तो रामचंद्रन श्रुति विशेषज्ञों से अपण इतिहास रचवाये।  तुमम लिखवाणो साधन छन तो महाभारत रचवाणो छंवां अपण हिसाब से अपण कीर्ति अक्षुण रखवाणो वास्ता।  राजकुल रीति सदा चली आयो  अपण इतिहास अफिक लिखवावो। 
युधिष्ठिर - ऋषिराज ! किन्तु बणेलस्यूं का व्यास श्री त अड़चन पैदा करणा छन।  दुर्योधन खंड लिखणै उत्तरदायित्व त बणेली व्यास श्री का पास च अर वो दुर्योधन तै सुयोधन सिद्ध  करणा छन।  
पाराशर - अर युद्ध मा जित्युं युधिष्ठिर चांदो कि सुयोधन तै दुर्जन दुर्योधन नाम से कुप्रसिद्ध करे जाव। 
युधिष्ठिर -हाँ ऋषिराज। 
पाराशर - तो शाम दंड भेद की नीति अपणावो। 
युधिष्ठिर -तुम तो सुविज्ञ छंवां।  व्यास विद्वान हून्दन।  वूं पर आम नीति , कूटनीति नि चलदी। 
पाराशर -न्है।  एक नीति हमेशा हरेक पर लागु हूंद। 
युधिष्ठिर -क्या ऋषिराज ! 
पाराशर -हड्डी दिखावो , रान दिखाओ  अर बखर खलाओ। 
युधिष्ठिर - बिंगण मा नि आयी गुरुदेव !
पाराशर - बणेलस्यूं का इतिहासकार व्यास श्री तै मध्य हिमालय राजा सुबाहु तै बोलिक बणेलस्यूं , मनियार स्यूं का स्वामित्व दे द्यावो अर आश्रम का आसपास द्वी चार अति आधुनिक मेनकाओं तै छोड़ि द्यावो। 
युधिष्ठिर -नयार -गंगा संगम का व्यास श्री तै बणेलस्यूं , मनियार स्यूं का स्वामित्व तो ठीक च किन्तु आधुनिक मेनका  क्या धर्म विरुद्ध नि होलु ?  
पाराशर - चक्रवर्ती सम्राट !  युद्ध , राजकरणी अर प्रेम मा हर नीति धर्मनिष्ठ ही हूंदी। यदि तुम चांदा कि बणेली व्यास श्री तुम तै सक्षम प्रशासक व सुयोधन तै दुर्जन सिद्ध  कारो तो बणेली व्यास श्री तै भूमि , स्त्री व अन्य वर्जित सुविधाओं से भ्रष्ट करवावो। अर हां ! बणेली व्यास श्री  का गणेश श्री तै बि कुछ गाँव दे देन।   यूं वर्जित सुविधाओं से लतपत ह्वेक प्रत्येक व्यास वी लिखद जु राजा चांदो।  
युधिष्ठिर - जो आज्ञा गुरुदेव। 
पाराशर - अच्छा तो मि चलदो छौं। 
युधिष्ठिर - भोळ नकुल आपक आश्रम मा आप तै दर्शन द्यालो। प्रणाम गुरुदेव। 
पाराशर - सदा प्रसिद्ध भव : 

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13/10  / 2017, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India

*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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Miscellaneous Temples and worshiping Places in British Garhwal

British Administration in Garhwal   -194
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History of British Rule/Administration over Kumaun and Garhwal (1815-1947) -214
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            History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -1047
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                              By: Bhishma Kukreti (History Student)
       There were varieties of working places and temples in British Garhwal other than Shakta, Shaivya and Vaishnava sect temples. The following present worshipping places were also there in British period-
    There is old worshipping place Sati Savitri temple in Kaindul, Malla Dhangu, Pauri Garhwal and was in British time too.
 There is Math a cremation Centre of Dalya in Jaspur, Malla Dhangu .
   There is Gwill Temple the kuldevta of Kukreti in Jaspur, Malla Dhangu.
 In Jaspur, Nagraja temple is quite old temple and now renovated.
 Silsu temple is old temple of Karthi, Malla Dhangu.
    Siddhon ka Kot: There were caves where siddha used to do tap in Siddhon ka Kot on manikut hills of Uadyapur Patti, Pauri Garhwal.
     Ganesh Gufa- ganesh gufa is near Neelkanth Mahadev, Udaypur Patti.
    Sati Math in Bhabhar- Sati math is there in Bhabhar , Pauri Garhwal near Kanwashram.
There are Math or Ashraams near Kanwashram too as Charakh ka danda .
 Siddhbli or Hanuman temple is there in Kotdwara and was in British period too.
    There are devgufa, pari Gufa, Brahmdhungi, Nath baba udyar etc worshipping places in Dudhatoli region .
 There is Bridh Bharsar temple of 11 th century in Bharsar region, Pauri Garhwal.
 famous Bhairav garhi a Bhairav temple is in Langurgarh.
  Danda Nagraja temple is in Kafolsyun region. Silsu temple is in Slsu village of banelsyun, Pauri Garhwal.
 There is Kandoliya Kshetrapal Temple above Pauri.
 There is Nag Devta temple near Pauri on Bubakhal-Kandoliya raod.
     Lakshman temples are there in Kot, Sitaunsyun, Pauri Garhwal  and are of 11th century.
   There is Gorakhnath Gufa in Shrinagar.
There is Satyanath Math of Gorkhanath sect in Devalgarh.
 There is Som ka Manda in Devalgarh.
 There are six caves related to Nath sects in Devalgarh.
 There is Ashtavakra temple in Khirsu region of Pauri Garhwal.
 There is Nagraja temple in Sumari village.
   There is Naagraja temple in Ufalda village near Shrinagar  of Pauri Garhwal,
 There was surya temple in Kyark, Pauri Garhwal as an idol was found there.
 There are following important temples in Adi Badri, Chmoli –
Ram lakshman, Janki Temple, Hanuman temple, Ganesh temple, Garud Temple, Satyanarayan temple, Kuber temple and Surya temple.
    There is Nagnath temple in Pokhari, Chamoli.
  Ghantakarn Temple is in Badginda of Urgam valley.
 Banshinarayan temple is in Urgam valley.
 There are temples as Dudhai dani, Devalaya of Bharki, Bhumyal, Jakh near Chopta region in Chamoli Garhwal.
 There are Nrisingh, Timundiya, Hanuman temples in Joshimath.
 There is hanuman temple in Auli.
 There is Lakshman lokpal temple in Hemkund.
 Agysthmuni temple is in Rudraprayag district.
 Jakh temple is in Guptakashi.
 Kartikey swami temple is on Pokhari-Rudraprayag road.

     
  
References  
1-Shiv Prasad Dabral ‘Charan’, Uttarakhand ka Itihas, Part -7 Garhwal par British -Shasan, part -1, page- 343-456
2- Atkinson, Himalayan Districts Vol.2
3- Hema Uniyal, Kedarkhand

Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India,bjkukreti@gmail.com 12/10/2017 History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued… Part -1048
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*** History of British Rule/Administration over British Garhwal (Pauri, Rudraprayag, and Chamoli1815-1947) to be continued in next chapter
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(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)

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धत्त तेरे की ! हमर ब्वे बुबौं तैं पता इ नि छौ बल पटाखा फुड़न, जुआ खिलण से हिन्दू धरम बचद !

(Best  of  Garhwali  Humor , Wits Jokes , गढ़वाली हास्य , व्यंग्य )
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 चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट  :::   भीष्म कुकरेती    
    एक बात मि मानी ग्यों जु पढ्यां लिख्यां नि हूंदन वू  हिन्दू धरम नि बचै सकदन , ना ही मे सरीका डिग्री बाज हिन्दू धरम बचै सकदन।  हिन्दू धरम त न्यूज चैनल का ऐंकर , धार्मिक  ठेकेदार अर पटाखों दुकानदार इ बचै सकदन। 
    मि तैं साठ साल बाद पता चौल कि यदि हिन्दू दिवाळी -बग्वाळी अर गोधनक दिन पटाखा नि फ्वाड़ल  त हजारों साल पुरण सनातन धर्म समाप्त ह्वे जाल।  अर यी बि तब पता चौल जब सब राष्ट्रीय चैनलों मा न्यायालय द्वारा दिल्ली मा दिवाली तक पटाखा बिक्री पर बैन का विरुद्ध डिबेट हूणी छे अर डिबेट पटाखों ना हिन्दू विरुद्ध मुस्लिम की हूणी छे।  
     ब्याळै टीवी डिबेटुं से त मीन यी जाण कि हिंदुत्व माने पटाखा अर मुसलमान माने लाऊड स्पीकरों द्वारा अजान।  यदि हिन्दू पटाखा नि फ्वाड़ल त हिन्दू धर्म नष्ट ह्वे जाल अर जु मुसलमान लाउड स्पीकर से अजान नि सूणल त भारत मा इस्लाम खतरा मा पड़ जाल।  ब्याळी इ पता चौल कि हिन्दू राम जी का समय से इ पटाखा फुड़दन। 
     सबि हिंदी अंग्रेजी चैनलुं डिबेट देखिक मि तै भूतकाल की चिंता अर शरमींदगी से सरा रात निंद नि आयी।  बैं  हौड़ फरकुं त दैं  हौड़ मि तै भूतकाल की शरमींदगी याद दिलै दींदो छौ।  दैं हौड़ फरकुं त बैं हौड़ भूतकाल की चिंता से हौर बि चिंता मा डाळ द्यावो।  दैं हौड़ मि तैँ लज्जित करदो छौ कि " हे नराधम हिन्दू ! जब तक तू गढ़वाळ मा रै त्यार ब्वे बाबुन दिवळि -बग्वळि कुण पटाखा नि फुड़ेन ! शरम कर बेशरम ! कि तीन अपण बचपन मा यूं दिनों पटाखा नि फ्वाड़ अर ना इ फुलझड़ी जळाइ।  त्यार स्वर्गीय पिताजी अर ज़िंदा मां तैं हिन्दू धर्म तै गर्त मा लिजाणो जुर्म मा माफ़ी मांगण चयेंद। " 
    दैं हौड़ यदि लज्जित करदो छौ त बैं हौड़ भूतकाल की चिंता से मि तै उद्वेलित करदो छौ ," हे असम्मानीय हिन्दू ! सोच कि यदि भारत मा हौर पटाखेबाज हिन्दू नि हूंदा त सोच ! आज हिंदुस्तान हिंदुहीन हिन्दुस्तान हूंद।  आज हिन्दुस्तान मा हिन्दुओं हालात रोहिंग्या हिन्दुओं , बंग्लादेशी हिन्दुओं अर कश्मीरी पंडितों जन हूंदी। " अर मि तै भरवस ह्वे गे कि वास्तव मा हिन्दू धर्म त वूंक वजै से जिंदु च जौन यूं दिनों रात दिन पटाखा फोड़िन अर हम सरीखा तो हिन्दू धरम पर केवल बोझ छंवां। 
  जब द्वी हौड़ुन  मि तै सीण नि दे त मि कमर का बल सीण मिस्यों त कमरन ठौ दीणो जगा उलाहनाओं का कांड पुड़ाण शुरू कर दे अर ताना तून दीण शुरू कर दे , " डूब मरण चयेंद इन हिन्दुओं तै जु हिन्दू धर्म बचाणो खातिर दिवाळी बगत जुआ नि खिलदन।  "
    अब मि बड़ी घंघतोळ मा छौं कि क्या जि कौर।  हिन्दू धरम बचौं अर पटाखा फोड़ि प्रदूषण बढ़ौं ,  हिन्दू धरम बचौं अर जुआ खेलिक अफु  कंगाल ह्वे जौं या भाई बंध तै कंगाल कौरुं या दिल्ली रिस्तेदारुं इख बगैर पटाखों की दिवाळी मनाऊं।   
 

12/10  / 2017, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India

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चिर सुंदरी भुंदरा बौ द्वारा शॉर्ट /जंग्या पैरिक खौळ - म्याळ मा जाण

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 चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट  :::   भीष्म कुकरेती    
चिर सुंदरी भुंदरा बौ - हलो ! हलो ! 
मि - आती क्या खंडाला ?
भुंदरा बौ - अपड़ी फूफू तैं घुमा खंडाला पंडाला। 
मि -चलती क्या नौ से बारा ? 
भुंदरा बौ - देख हां  मीन मजाक मसखरी कुण अपण गेड़ीन फोन नि लगाई हाँ ! 
मि - अच्छा बोल।  इथगा सुबेर सुबेर फोन ? अबि त   .. 
भुंदरा बौ - अबि क्या।  नौ बजी गेन। 
मि - ये मेरी भुंदरा बौ ! नौ बजि गेन अर मि चिताणु छौं छै इ बजिन।  जब फेसबुक अर व्हट्सप्प का साथ हो तो समय का पता ही नहीं चलता।  
भुंदरा बौ - तबि त बुल्दु मि कि   ... अच्छा जाणि दि हैंक दिन।  
मि - अच्छा बता कि फोन किलै कार ? 
भुंदरा बौ - वु क्या च।  सरा गांवक छोरी ,अदबुडेड़ जनानी अर बुडेड़ जनान्युंन शॉर्ट मंगैन त मीन बि मंगै देन। 
मि - शॉर्ट मंगै देन ?
भुंदरा बौ -हाँ। 
मि -शॉर्ट ? 
भुंदरा बौ -हां भै हां शॉर्ट अर अळगौ गारमेंट । 
मि - त अब मेकुण किलै फोन कार ? 
भुंदरा बौ - अच्छा सूण ! जब मि सुबेर सुबेर शॉर्ट पैरिक पाणि -पंद्यरम जौलु त कन लगुल ? 
मि -त्यार त पता नि पर त्यार शॉर्टन जवान क्या बुड्यों नींद हरचै दीण अर उंन रतखुनि बिजि जाण। 
भुंदरा बौ - तू बि ना मजाक।  अच्छा सूण शॉर्ट पैरिक मि घास लखड़ कटणो जौल त कन लगुल ?
मि -तू कन लगली यी त नी पता पर कीड़ -पतंगा त्यार ऐथर पैंथर इन पोड़ल जन जन फूलूं पैंथर भौंरा !
भुंदरा बौ - देख हां ! अपण खराब आदत सुधार हां।  निथर मीन द्यूराणी कुण फोन करण। 
मि - ह्यां पर  .. 
भुंदरा बौ -अच्छा जब मि स्यार साणौ कुण शॉर्ट पैरिक जौल त ? 
मि - स्यार साणो अर धाण करणो कुण त शॉर्ट सुविधाजनक च पर  .. 
भुंदरा बौ - अच्छा ! जब मि शॉर्ट पैरिक खौळ -म्याळा जौंल त कन लगुल। 
मि - नि जाणा नि जाणा मेरी बौ सुरीला ! शॉर्ट पैरी खौळ म्याळा त कत्तै नि जाणा।  
भुंदरा बौ -शॉर्ट पैरी खौळ म्याळा त कत्तै नि जाणा? क्या मतलब ? किलै नि जाणा ?
मि - त्यार शॉर्ट देखि छवारों दिल मचल जाणा , बौ सुरीला ! चुची बौ सुरीला !  त्यार शॉर्ट देखि छवारों दिल मचल जाणा। 
भुंदरा बौ -पर किलै छवारों दिल मचल जाणा ? 
मि - उख भगदड़ मची जाणा , उख म्याळा मा घपरोळ ह्वेई जाणा। 
भुंदरा बौ - ह्यां सीद तरां से बात कौर शॉर्ट मा क्या च कि उख म्याळा मा घपरोळ ह्वेई जाणा ?
मि - त्वे तैं पता बि च बल शॉर्ट क्या हूंद ?
भुंदरा बौ - ना।  ह्वाल क्वी सुलार जन क्वी वस्तर ।  महिला सशक्तिकरणो वास्ता एक आवश्यक वस्त्र। 
मि -ना ना शॉर्ट माने सुलार नि हूंद। 
भुंदरा बौ - त ?
मि -शॉर्ट माने जंग्या या हाफ पैंट।
भुंदरा बौ - क्या ?शॉर्ट माने जंग्या या हाफ पैंट? 
मि -हां शॉर्ट माने जंग्या या हाफ पैंट। 
भुंदरा बौ - ये मेरी ब्वे ! अब पता चौल कि वे राहुल गांधी कुण लाटु किलै बुल्दन। 
मि - राहुल गाँधी अर शॉर्ट ?
भुंदरा - अरे ये लाटान तो ब्याळि बताइ कि महिला सशक्तिकरण का वास्ता महिलाओं तैं शॉर्ट पैरण चयेंद , आरएसएस शाखाओं मा महिला शॉर्ट पैरिक किलै नि आंदन अर हम जनान्युंन शॉर्ट मंगै देन। 
मि -शॉर्ट , महिला सशक्तिकरण अर राहुल गाँधी ?
भुंदरा बौ - सोनिया ज्योरूक कुछ नि ह्वे सकद।  यु लाटो सही बात गलत जगा पर बोल इ जांद।  ये राहुल लाटा तै पता इ नि चलद कि क्वा उपमा कखम खपद। 


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11 /10  / 2017, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India

*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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Shailendra Bhandari: A Garhwali Poet

 (गढ़वालउत्तराखंड,हिमालय से गढ़वाली कविता  क्रमगत इतिहास  भाग - 232)
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 (Critical and Chronological History of Garhwali Poetry, part -232)
  By: Bhishma Kukreti    
 Shailendra Bhandari ‘ Deenbandhu’ was born in 1970 in Bangoli, Rudraprayag, Garhwal. Shailendra Bhandari creates poems related to Garhwal villages imageries
  मेरा गौं का नौन्याळ  (कई बिम्ब वाली गढ़वाली कविता )
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गौं का बीच भीमळै की डाळी मूड़ 
कूड़ी भांडी खेल्दा 
मेरा गौं का नौन्याळ। 
जेठ का घाम मा 
गोरु की डार अटकौंदा 
बौण बौण   डबखदा 
 मेरा गौं का नौन्याळ। 
गदन्यूं का ओर पोर 
काफळ बिण दा , गीत गांदा 
नयेंदा -धुयेंदा , खेल्दा खेल्दी 
झगड़ेन्दा बी 
  मेरा गौं का नौन्याळ। 
छुट्टि ऐकि।  बस्ता लेकि
घौर ऐकि , ताळी देखि 
भुखन  कबलैगि  पोटगी 
आंसू पोंछदा चित्त बुझौन्दा 
 मेरा गौं का नौन्याळ। 
ज्वनि की उमर अब 
ब्वे बाबू तैं  सारू चैन्दु 
सोचदा सोचदा आँखी तोपदा 
पहाड़ छोड़दा 
मेरा गौं का नौन्याळ। 

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2017
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