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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, April 23, 2014

प्रियंका वाड्रा जी ! इनि दुःख त जयद्रथ पत्नी दुशाला तैं बि ह्वै छौ

हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती        

(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

भारत  एक  अति विशेष देस च।  इख जब युद्ध मा कुछ नि चलद त भावनाओं का तीर आखरी हथियार चलाये जांदन।  क्वी रखड़ि पैरान्दु त क्वी कुछ हौर भावनाओं से काम चलांदु। 
अबारी सन 2014 का  सभा चुनाव की शुरुवात विकास जन विषय से शुरू ह्वे अर अंत धार्मिक उन्माद अर व्यक्तिगत छींटा कशी से समाप्त हूण वाळ च।  चुनाव आंद आंद विकास खड्डा जोग ह्वे गे , भ्रस्टाचार ढैपरम से गे , आम जनता की समस्या कुज्याण कख हर्ची गेन धौं ! 
अब त व्यक्तिगत लांछनाओं से वोटरूं पुटुक भरणै आश्वासन दियाणा छन।  
इनि एक लांछन नरेंद्र मोदीन गांधी परिवार की बेटी प्रियंका वाड्रा  का हजबैंड राबर्ट बाड्रा पर लगै दे कि एक लाख की मूल धन राशि से 300 करोड़ रुपया करणो बान RSVP योजना बौण, R से राहुल , S से सोनिया , V से वाड्रा अर P से प्रियंका। 
अर यांपर गांधी परिवार की शहजादी प्रियंका वाड्रा भावनात्मक रूप से आहत ह्वे गे कि राबर्ट वाड्रा का भ्रस्टाचारी कार्य तो राजकीय पाप च अर ये राजकीय पाप तैं चुनावी मुद्दा नि बणाये जाण चयेंद।  प्रियंका वाड्राक बुलण च कि यि व्यक्तिगत आक्षेप छन। 
प्रियंका वाड्रा सही बुलणि च कि वाड्रा विर्तांत एक व्यक्तिगत वृतांत च। 
त हे राजकुमारी ! जब एक साल पैल बिटेन दिग्विजय सिंह नरेंद्र मोदी की पत्नी कख च ? नरेंद्र मोदीन अपण पत्नी छोड़ीं च जन भगार लगैन तो क्या यी अभियोग व्यक्तिगत अभियोग नि छ्याई जु अब प्रियंका वाड्रा RSVP, जीजाजी शब्दों से चिड़नि च ?
हे नेहरू -गांधी परिवार की लाड़ली ! जब राहुल गांधीन नरेंद्र मोदी की पत्नी प्रकरण की बात चुनावी सभाऊँ मा उठाइ तो क्वी कॉंग्रेसी प्रियंका वाड्रा से  पूछन त सही कि क्या मोदी पत्नी प्रकरण व्यक्तिगत लांछन नि छौ ? 
हे नेहरू खानदान की प्रिया प्रियंका वाड्रा ! कॉंग्रेसन भारत मा उद्यम बढ़ाणो बान अलग अलग समय पर विभिन्न उद्योगपतियों तैं जगा अर टैक्स रियायत दे।  इख तक कि कॉंग्रेसन कोयला उत्पादन बढ़ाणो बान मुफ्त मा कोयला खान उद्योगपतियों तै देन (मि बुल्दु कि नीति का हिसाब से यु कुछ हद तलक सही कदम छौ )। किन्तु हे मिसेज वाड्रा ! जब राहुल गांधी बि अरविन्द केजरीवाल की सकासौरी मा अदानी -मोदी प्रकरण तै हथियार बणाला तो चुनावी दंगल मा नरेंद्र मोदी सरीखा घाघ राजनेता राहुल गांधी तैं  वाड्रा रूपी पटकनी तो  द्याल कि ना ? केजरीवाल तो नया राजनेता च तो वु कै बि उद्योगपति तैं टारगेट बणै सकुद , किन्तु कॉंग्रेस इन नि बोलि सकिद कि गुजरात मा अदानी -अंबानी तैं महत्व मिलणु च। 
त प्रियंका वाड्रा जी ! जब आप सर्वोच्च परिवार का छंवां तो छवि का मामला मा नेहरू-गांधी -वाड्रा परिवार तैं ध्यान दीण ही पोड़ल कि नेहरू परिवार पर रति भर भी दाग नि लग।  यदि भारत की जनता (विरोधी दल समेत ) नेहरू -गांधी परिवार की इज्जत करदि तो या जनता अपेक्षा भि करदि कि राबर्ट वाड्रा -जमीन घोटाला (?) जन प्रकरण नि ह्वावन।  मिसेज वाड्रा जी ! जनता नेहरू -गांधी परिवार से छुट से छुट दाग की बि अपेक्षा नि करदि। 
उन मिसेज वाड्रा ! महाभारत मा बि इनि एक धुर्या -लोभी जंवाई छौ।  वु छ्याइ सिंधु नरेश जयद्रथ।  सिंधु नरेश जयद्रथ कौरबुं जीजा याने दुस्साला कु पति छौ।  जयद्रथ द्वारा अपण जेठूं  पत्नी द्रौपदी हरण से बि कौरव बंश की नाक कटी छे अर मृत अभिमन्यु तै लत्याणो पाप कर्म बि जयद्रथन करि छौ अर अर्जुनन जयद्रथ तै मारी छौ। 
जयद्रथ का पाप कर्मों की सजा केवल जयद्रथ तैं हि नि मील छौ अपितु दुस्साला तैं बि दुःख भोगण पोड़ छौ। जयद्रथ का पापकर्मों से धृतराष्ट्र अर गांधारी बि बार बार दुखी ह्वे छा। 
तो प्रियंका वाड्रा जी ! तुम सरीखा शिखर मा बैठ्याँ  परिवार से भारत की जनता गुजारिस करदि कि जयद्रथ का पापुं दोष भीम या अर्जुन पर नि लगावो अपितु जयद्रथ तैं पाप करण से रोको।  


Copyright@  Bhishma Kukreti  23/4/2014 

*कथा , स्थान व नाम काल्पनिक हैं।  
[गढ़वाली हास्य -व्यंग्य, सौज सौज मा मजाक  से, हौंस,चबोड़,चखन्यौ, सौज सौज मा गंभीर चर्चा ,छ्वीं;- जसपुर निवासी  द्वारा  जाती असहिष्णुता सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ढांगू वालेद्वारा   पृथक वादी  मानसिकता सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;गंगासलाण  वाले द्वारा   भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; लैंसडाउन तहसील वाले द्वारा   धर्म सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;पौड़ी गढ़वाल वाले द्वारा  वर्ग संघर्ष सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी  द्वारा  पर्यावरण संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;मध्य हिमालयी लेखक द्वारा  विकास संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;उत्तरभारतीय लेखक द्वारा  पलायन सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; मुंबई प्रवासी लेखक द्वारा  सांस्कृतिक विषयों पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; महाराष्ट्रीय प्रवासी लेखकद्वारा  सरकारी प्रशासन संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; भारतीय लेखक द्वारा  राजनीति विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; सांस्कृतिक मुल्य ह्रास पर व्यंग्य , गरीबी समस्या पर व्यंग्य, आम आदमी की परेशानी विषय के व्यंग्य, जातीय  भेदभाव विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; एशियाई लेखक द्वारा सामाजिक  बिडम्बनाओं, पर्यावरण विषयों   पर  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनीति में परिवार वाद -वंशवाद   पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ग्रामीण सिंचाई   विषयक  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, विज्ञान की अवहेलना संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य  ; ढोंगी धर्म निरपरेक्ष राजनेताओं पर आक्षेप , व्यंग्य , अन्धविश्वास  पर चोट करते गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनेताओं द्वारा अभद्र गाली पर हास्य -व्यंग्य    श्रृंखला जारी  

Sarangi (Indian Guitar): String Musical Instrument of Garhwal Folk Dramas

Review of Characteristics of Garhwali Folk Drama, Folk Theater/Rituals and Traditional Plays part -141  
                  गढ़वाली लोक नाटकों के वाद्य यंत्र
                             
                     Bhishma Kukreti (लोक साहित्य शोधार्थी)

                  Chordophone Musical Instruments of Garhwali Folk Dramas

            Dr Shiva Nand Nautiyal mentioned the Sarangi as folk music instrument of Garhwal. Sarangi is an old Indian musical instrument. In hills of Garhwal, Sarangi had not been much popular. However, the saints used to play Sarangi. There are paintings of Sarangi in wall paintings at Guru Ram Darbar Sahib Dehradun (B.P. Kamboj, Early Wall Paintings of Garhwal). It seems that Garhwal kings used to enjoy by enjoying Sarangi from touring classical singers. Gaddi tribe of Garhwal especially border of Himachal uses Sarangi. There had been Sarangi players in plains of Dehradun, Haridwar and Bhabhar.   Bow type musical instrument was common in Garhwal in quite old time but not now.
           Sarangi is four stringed musical instrument that is fitted on a main body of frame. The wooden frame is rectangular, hollow from inside and half of the top is covered by goat skin. Strings are tied on pegs and number may vary. Sarangi is played by a narrow, stretched bow having string of leather or metal. The string is always stretched. Usually, Sarangi is used in religious singing or chanting occasions or a specific occasion. For example, recently (31 January 2014), Sarangi maestro Kamal Sabri played Sarangi in a program of  National Institute of visually handicapped.


Copyright@ Bhishma Kukreti 22/4/2014

Characteristics of Garhwali Folk Drama, Community Dramas; Folk Theater/Rituals and Traditional to be continued in next chapter
                 References
1-Bharat Natyashastra
2-Steve Tillis, 1999, Rethinking Folk Drama
3-Roger Abrahams, 1972, Folk Dramas in Folklore and Folk life 
4-Tekla Domotor , Folk drama as defined in Folklore and Theatrical Research
5-Kathyrn Hansen, 1991, Grounds for Play: The Nautanki Theater of North India
6-Devi Lal Samar, Lokdharmi Pradarshankari Kalayen 
7-Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas part 1-12
8-Dr Shiva Nand Nautiyal, Garhwal ke Loknritya geet
9-Jeremy Montagu, 2007, Origins and Development of Musical Instruments
10-Gayle Kassing, 2007, History of Dance: An Interactive Arts Approach
11- Bhishma Kukreti, 2013, Garhwali Lok Natkon ke Mukhya Tatva va Charitra, Shailvani, Kotdwara
12- Bhishma Kukreti, 2007, Garhwali Lok Swangun ma rasa ar Bhav , Chithipatri
13-Manorama Sharma, Tribal Melodies of Himachal Pradesh: Gaddi Folk Music
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Folk Tale about Sukhvasani Temple in Udaipur Patti

Garhwali Folk Tales, Fables, Traditional Stories, Community Narratives -81

  Compiled and Edited by: Bhishma Kukreti (Management Training Expert)

         Sukhvasani Devi temple is situated in Manikut Danda (Manikoot Parvat) near Siddhon ke Kot and near Bhuvaneshwari temple and Neelkantha temple in Udaypur Patti, Pauri Garhwal. The region is just 30-35 KM far from Rishikesh.
         The temple is very near in the north direction of Siddhon ke Kot (in ancient time, was famous caves and water reservoirs). Siddh Kot means the fort of Siddh (who accomplished).
        Sukhavasani temple is famous for avoiding drought and feminine. The folk story about Sukhavasani temple goes as under-   
           In quite old time, there was very stern drought in Udaipur Patti. The rain was not there for many months. People did not see a small cluster of cloud for many months. Due to no rain for quite long time, water resources started drying up. People forget to plough field as there was no chance of seeds germinating. The forests were pale yellow. The cattle died due to shortage of water and fodders. People started migrating to other regions. There was no food left for the people. There was no forest produce to feed people. However, a quite numbers of families nearby Mani Koot Hills did not leave their village. They were devotee of deities of the region. One night, a village chief saw dream. In dream, the village chief got order of Sukhavasani Devi.
 Sukhavasani Devi ordered to village chief to come to Manikut hills and reach to her Symbols. In the early morning, the village chief with his few followers reached to Manikut hills and found Symbols of Sukhvasani Devi. All villagers performed rituals to worship Sukhvasani Devi. Sukhavasani Devi was pleased by devotion of the people. Just after finishing rituals by villagers, there was heavy rain. Now, the rain was sufficient to agriculture, water resources and forest. From that day, the people of the region started worshipping Sukhvasani Devi for avoiding drought and feminine. Initially, the villagers built a small temple for Devi Sukhvasani.

Copyright @ Bhishma Kukreti 22/4/2014 for review and interpretation


Garhwali Folk Tales, Fables, Traditional stories, Community Narratives for Effective Managers, Effective executives, Effective Boss, Effective Supervisors or Stories for Effective management, management Lesson from Garhwali Folk Literature from Garhwal, to be continued …in next chapter

                                 References

1-Bhishma Kukreti, 1984, Garhwal Ki Lok Kathayen, Binsar Prakashan, Lodhi Colony, Delhi 110003, 
2- Bhishma Kukreti 2003, Salan Biten Garhwali Lok Kathayen, Rant Raibar, Dehradun
3- Bhishma Kukreti, Garhwali Lok Kathaon ma Prabandh Vigyan ka Tantu , Chitthi Patri’s Lok Kathayen Visheshank  , Dehradun
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History Review of General Administrations before Garhwal King Ajaypal

History of Garhwal including Haridwar (1223- 1804 AD) –part -77     
                                            
 History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -322 

                       ByBhishma Kukreti (A History Research Student)

             History Review of Taxation before Garhwal King Ajaypal
               The Devprayag inscription provides fascinating aspects of history of Garhwal before Ajaypal.
          There were various land taxes and levies. The Kingdom was the sole proprietor of land. The land owner was owner till land owner paid taxes. As soon as the land owner stopped paying tax, the owner was changed by the Kingdom officers or representatives.
 There were two types of taxes.
Kar- A definite portion of agriculture produces was paid to the Kingdom.
Akar- This tax was probably on other King services as Begar (free service to king, Kingdom officers or representatives, Village or Area Chieftain, Pundits, Temples etc).

 History Review of Land Ownership before Garhwal King Ajaypal
        The land ownership depended on paying land taxes.
         Many times King used to offer land or region for reward or as payment for a specific service to a person. The said person was authorized to collect tax from land owners living in the region.
 The King could take back land from those were awarded Jagir.
          King also used to donate land to temple or Pundits of any type (Sanskrit Karmkandi or Mantrik-Tantrik). However, King never took back such land from those Pundits.  Dhangu, Dabralsyun and Dhaundiyalsyun Pattis are examples of Jagir offering by Garhwal King to Brahmins. Dhangu, Dabralsyun and Dhaundiyalsyun were offered to Brahmins and never took back by Kings.
The Jagirdar was free to mortgage or award land to other people.

        Types of Landowners before Garhwal King Ajaypal

           The landownership was not changed till the landowner stops paying tax or the owner leaved the land by his choice. In the following conditions, the landownership was changed.
Gayali- Gayali means who has gone somewhere. If an owner leaved land the owner could offer the land to other and the new owner became owner by paying the tax.

Muyali- When a person die, the ownership ended. However, the heirs used to pay small amount of tribute to Kingdom/representative and automatically used to get ownership right.

Autali- Aut means no sons. When aperson die without sons, the Jagirdar or Thokdar or Kingdom used to became landowner. The relatives were not supposed to be owner. The unmarried daughters of deceased were supposed to be the consumable goods and Kingdom or Thokdar used to make those daughters as maid servants.

Natali- Natali means young or unmarried. If a person dies, the land ownership used to transfer to immediate kin. In the absence of any immediate kin, Kingdom or Thaokdar used to become land owner.

                             Language

 Garhwal King as Jagtipal promoted Garhwali Language as the court language and not Sanskrit. The inscription of Jagtipal is the oldest record of written Garhwali. The Garhwali language was quite mature on the time of Jagtipal. However, the Sanskrit was powerful language and used to influence Court.


   History Review of   Income from Pilgrims before Garhwal King Ajaypal

 The pilgrim tour in Haridwar and Garhwal was common. Pande and other priests used to take donations from their Jajman or pilgrim tourists. Perhaps the Kingdom used to collect apportion of donations from Pande or Priests.


Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India, bckukreti@gmail.com22/4//2014
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued… Part -323 
                                                              
                                      References

1-Dr. Shiv Prasad Dabral, 1971, Uttarakhand ka Itihas Bhag-4, Veer Gatha Press, Dogadda, Pauri Garhwal, India 
2-Harikrishna Raturi, Garhwal ka Itihas
3-Dr. Patiram, Garhwal Ancient and Modern
4-Rahul Sankrityayan, Garhwal
5- Oakley and Gairola, Himalayan Folklore
6- Bhakt Darshan, Garhwal ki Divangit Vibhutiyan
7-Foster, Early Travels in India William Finch
8-Upadhyaya, Shri Shankaracharya
9-Shering, Western Tibet and British
10-H.G. Walton, Gazetteer of British Garhwal
11-B.P.Kamboj, Early Wall Paintings of Garhwal
12-H.g Walton, Gazetteer of Dehradun
13- Vimal Chandra, Prachin Bharat ka Itihas
14-Meera Seth, Wall Paintings of Western Himalayas 
15-Furar, Monumental Antiquities
16-Haudiwala, Studies in Indo-Muslim History
17- Rahul Khari 2007, Jats and Gujjar Origin, History and Culture
18- Upendra Singh, 2006, Delhi: Ancient History, Barghahan Books
19- B.S. Dahiya, 1980, Jats the Ancient Rulers (A Clan Study) , Sterling Publications
20- Maithani, Bharat –Gotrapravardeepika
21 Prem Hari Har Lal, 1993, The Doon Valley Down the Ages
22-Dashrath Sharma, Early Chauhan Dynasties
23- Shailndra Nath Sen, Ancient History and Civilization
24-H.M Elliot, 1867, The History of India as told by its Own Historians
25- Jaswant Lal Mehta, 1979, Advance Study in Medieval India
26- Nau Nihal Singh, 2003, The Royal Gurjars: their contribution to India, Anmol Publications 
(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)
History of Garhwal from 1223-1804 to be continued in next chapter          
Notes on South Asian Medieval History of Garhwal;  SouthAsian Medieval History of Pauri Garhwal;  Medieval History of Chamoli Garhwal;  South Asian Medieval History of Rudraprayag Garhwal;  South Asian Medieval History of Tehri Garhwal;  Medieval History of Uttarkashi Garhwal;  South Asian Medieval History of Dehradun, Garhwal;  Medieval History of Haridwar ;  South Asian Medieval History of Manglaur, Haridwar;  South Asian Medieval History of Rurkee Haridwar ;  South Asian Medieval History of Bahadarpur Haridwar ; South Asian History of Haridwar district to be continued
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History Review of General Administrations in Garhwal before Garhwal King Ajaypal; History Review of General Administrations in Pauri Garhwal before Garhwal King Ajaypal; History Review of General Administrations in Chamoli Garhwal before Garhwal King Ajaypal; History Review of General Administrations in Rudraprayag Garhwal before Garhwal King Ajaypal; History Review of General Administrations in Tehri Garhwal before Garhwal King Ajaypal; History Review of General Administrations in Uttarkashi Garhwal before Garhwal King Ajaypal; History Review of General Administrations in Dehradun Garhwal before Garhwal King Ajaypal; History Review of General Administrations in Haridwar Garhwal before Garhwal King Ajaypal;

समाजवादी साम्यवाद अर नरेंद्र मोदी

 हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती        

(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

सन 2014 कु लोकसभा चुनाव अपणा आप मा एक अतुलनीय , एक आश्चर्यजनक , अभिनव , अजीव सि चुनाव सिद्ध हूणु च।  
सन 1971 या सन 1977 मा इंदिरा गांधी सरा चुनाव की केंद्र बिंदु छे किलैकि वा सरकार मा छे पर सन 2014 का जन नि छे जख विरोधी दल कु नेता नरेंद मोदी केंद्र बिंदु च याने चुनाव की धुरी नरेंद्र मोदी च। 
ये 2014 का चुनाव मा पार्टी इन समझणा छन कि वूंकी पार्टी  अफ़ग़ानिस्तान की क्रिकेट टीम च अर नरेंद्र मोदी अजेय भारतीय क्रिकेट टीम च  ! 
आरएसएस संस्था तब इथगा मुखर रूप मा राजनैतिक काम नि करदी छे किन्तु इंदिरा गांधी तब बि सब जगा आरएसएस की भयंकर तरह से आलोचना करदी छे।  मीन सन 73 -74 मा देहरादून की एक सभा मा इंदिरा गांधीक मुखन सुणी कि आरएसएस भारत का वास्ता नुकसानदेय च।  मीन अपण दगड्यों तैं पूछ बल यु आरएसएस क्या बला च तो पता चौल कि आरएसएस जनसंघ की ब्वे च।  तब जनसंघ से  (उत्तराखंड का प्रथम मुख्यमंत्री ) नित्या  नन्द स्वामी चुनाव लड़दु छौ अर हारदु छौ।  किन्तु इंदिरा गांधीन देहरादून वाळु तैं आरएसएस की डौर अवश्य दिखै छौ। हम गढवाळयूं तैं कॉंग्रेस का अलावा क्वी हौर पार्टीका बारा मा पता बि नि छौ   किन्तु इंदिरा भक्ति मा मी बि आरएसएस विरोधी ह्वे गे छौ। याने इंदिरा गांधी एक इन संस्था का बारा मा डरांदि छे , जैंक बारा मा हम सरीखा युवाऊँ तै डरांदि छे जैक बारा मा हम नि जाणदा छा। हाँ इंदिरा गांधी इन भेड़िया से सचेत रौणै बात करदी छे जै भेड़िया तैं हमन नि देखि छौ। 
आज आरएसएस भौत ताकतवर संस्था ह्वै गे तो हरेक पार्टी आरएसएस की आलोचना से  अपण मेनिफेस्टो का पेज भरणी च। 
यु चुनाव एक अजीव चुनाव च अर आश्चर्यचकित करदो। 
जख राहुल गांधी या सोनिया गांधी तैं अपण दस सालुं शासन का गुणगान करण चयेंद छौ यी द्वी आसाम मा बुलणा छन कि गुजरात मा कुछ नि ह्वै। 
जख राहुल गांधी तैं लखनऊ चुनावी सभा मा उत्तर प्रदेश की बदहाली का वास्ता मुलायम सिंह अर मायावती की कटु आलोचना करण चयाणी छे तो राहुल गांधी बुलद बल उत्तर प्रदेश मा गुजरात मॉडल नि चौल सकुद। 
मुलायम सिंह तैं बताण चयेणु छौ कि उत्तर प्रदेश मा लौ ऐंड ऑर्डर ठीक च कि ना किन्तु मुलायम सिंह मैनपुरी की चुनावी भाषणो मा फुंकार मारद कि मि तैं सन 2002 मा नरेंद्र मोदीन दंगा पीड़ित मुसलमानु सेवा करणो इजाजत नि दे। 
मायावतीन मजा से भाजपा का काँध मा राज्य सुख पायी किन्तु अब बुलणी च कि नरेंद्र मोदी एक नॉन सेक्युलर पार्टी च।  मायवती बगैर नरेंद्र मोदी तैं गाळी दियाँ अपण भाषण ख़तम नि कौर सकदी।  वींक चौललि त मायवती उत्तर प्रदेश की बदहाली का वास्ता नरेंद्र मोदी पर भगार लगै द्याली। 
अखिलेश यादव का उत्तर प्रदेश मा मोटर सड़कु इथगा बुरा हाल छन कि झाँसी से कानपुर पौंछद -पौंछद हिचकोलों से कमर अकड़ जांद अर अखिलेश यादव नरेंद्र मोदी पर भगार लगांद कि गुजरात मा चिपळी सड़क अदानी अर अम्बानी का वास्ता बणी छन। 
ममता बनर्जी तैं बंगाल की बुरी हालत का वास्ता बामपंथी विचारधारा तैं गाळी दीण चयेंद पर वा बि गुजरात मॉडल की आलोचना मा अपण भाषण खत्म करदि। इनि हाल जयललिता का छन। 
नीतीश कुमार अर लालू यादव या केजरीवाल का निशाना पर केवल नरेंद्र मोदी च।  जु नरेंद्र मोदी विरोधी दल कु नेता च , सबि राजनैतिक दल भारत की भविष्य की बदहाली का वास्ता नरेंद्र मोदी तैं जुमेवार ठहराणा  छन अर गाळी दीणा छन। 
एक टैम छौ जब चुनावुं मा भारत मा स्वतंत्र पार्टी अर जनसंघ सरीखी पूंजीपति आर्थिक नीति क समर्थक दल बि साम्यवाद या समाजवाद की पूजा करदा छा अर बुल्दा छा कि हम तैं बोट द्यावो अर तुमर क्षेत्र मा हम समाजवाद लाणो वास्ता कोका कोला की फैक्ट्री लगौला अर अमेरिकन एक्स्प्रेस बैंक की शाखा खुलला। तब हरेक बीमारी की दवा समाजवाद छौ। तब हरेक सुख की सीढ़ी साम्यवाद विचारधारा छे। 
आज 2014 का चुनाव मा हरेक दर्द कु कारण नरेंद्र मोदी च अर हरेक मरज कु समाधान बि नरेंद्र मोदी च।  
क्या या स्थिति भारतीय प्रजातंत्र का स्वास्थ्य  का वास्ता ठीक च ? कदापि नही ! व्यक्ति परक विचारधारा प्रजातंत्र का वास्ता बिलकुल बि लाभदायक नी च।  किन्तु भाजपा की मजबूरी च कि 2014 का चुनाव तैं भाजपान व्यक्तिकेंद्रित बणाइ अर बकै सबि राजनीतिक दलूँ कमजोरी च कि वो व्यक्तिकेंद्रित  चुनावी रणनीति तैं समर्थन ही नि दीणा छन अपितु व्यक्तिकेंद्रित चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बि ह्वै गेन। 


Copyright@  Bhishma Kukreti  22/4/2014 

*कथा , स्थान व नाम काल्पनिक हैं।  
[गढ़वाली हास्य -व्यंग्य, सौज सौज मा मजाक  से, हौंस,चबोड़,चखन्यौ, सौज सौज मा गंभीर चर्चा ,छ्वीं;- जसपुर निवासी  द्वारा  जाती असहिष्णुता सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ढांगू वालेद्वारा   पृथक वादी  मानसिकता सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;गंगासलाण  वाले द्वारा   भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; लैंसडाउन तहसील वाले द्वारा   धर्म सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;पौड़ी गढ़वाल वाले द्वारा  वर्ग संघर्ष सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी  द्वारा  पर्यावरण संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;मध्य हिमालयी लेखक द्वारा  विकास संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;उत्तरभारतीय लेखक द्वारा  पलायन सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; मुंबई प्रवासी लेखक द्वारा  सांस्कृतिक विषयों पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; महाराष्ट्रीय प्रवासी लेखकद्वारा  सरकारी प्रशासन संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; भारतीय लेखक द्वारा  राजनीति विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; सांस्कृतिक मुल्य ह्रास पर व्यंग्य , गरीबी समस्या पर व्यंग्य, आम आदमी की परेशानी विषय के व्यंग्य, जातीय  भेदभाव विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; एशियाई लेखक द्वारा सामाजिक  बिडम्बनाओं, पर्यावरण विषयों   पर  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनीति में परिवार वाद -वंशवाद   पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ग्रामीण सिंचाई   विषयक  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, विज्ञान की अवहेलना संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य  ; ढोंगी धर्म निरपरेक्ष राजनेताओं पर आक्षेप , व्यंग्य , अन्धविश्वास  पर चोट करते गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनेताओं द्वारा अभद्र गाली पर हास्य -व्यंग्य    श्रृंखला जारी  

गढ़वाली लोक नाटकों में एकतारा वाद्य यंत्र

Review of Characteristics of Garhwali Folk Drama, Folk Theater/Rituals and Traditional Plays part -140   
                  गढ़वाली लोक नाटकों के वाद्य यंत्र
                             
                     Bhishma Kukreti (लोक साहित्य शोधार्थी)

                  Chordophone Musical Instruments of Garhwali Folk Dramas

            
              Ektara: A One String Folk Musical Instrument of Garhwali Folk Dramas

                         गढ़वाली लोक नाटकों  में  एकतारा  वाद्य यंत्र

         Ektara is one of the simplest and might be one of the old string musical instruments of Garhwal.
 In Old classical Sanskrit Literature, Ektara is mentioned as Ektantri Vina. Ektara was popular in Vedic period too.
To make Ektara, dry pumpkin is used and holed at two places and then covered by leather or other materials. A wooden stick around 75 CM long and 2 Cm diameter is connected to Pumpkin bowl through holes. Pegs at both end of stick are used for tightening or loosening the string. Then a string is based from last corner of wood stick and Pumpkin. String is stuck by fingers  to produce sound. The Ektara is kept on one solder and held by a hand by other hand fingers stuck the string.

 Usually, in Garhwal, Dalya or Guru Gorakhnath sect priest use Ektara while Dalya Guru sings the preaching of Guru Gorakhnath or story of Gopichand. The following Geet was sung by Parmantha a Dalya Guru in Jaspur around 1967-168 with Ektara

ऋद्धि  को सुमिरों सिद्धि को सुमिरों सुमिरों सारदा माई।
अर  सुमिरों गुरु अविनाशी को सुमिरों कृष्न कनाई।
सदा अमर नि रैंदी धरती माता बजर पड़े टूट जाई।
अमर नि रैंदा चंद सुरजि छुचा मेघ घिरे छिप जाई।।१।।  
माता रोये जनम कूं बहिन रोयेबहिन रोये छै मासा।
तिरिया रोये डेढ़ घड़ी कूँ आन करे घर बासा।।२।।
कागज़ पतरी सब कुई बांचे करम नि बांचे कुई।
राज घरों को राजकुंवर बुबा करणी जोग लिखाई।। ३ ।।
सुन रै बेटा गोपीचंद जी बात सुनो चित लाई।
कंचन कया कंचन कामिनी मति कैसे भरमाई।।  ४।।  
अलख निरंजन अलख निरंजनसुन रे बेटा गोपीचंद जी बात सुनो चित लाई।
अलख निरंजन अलख निरंजन जपो रे भाई हो भव सागर पार

  
Copyright@ Bhishma Kukreti 21/4/2014

Characteristics of Garhwali Folk Drama, Community Dramas; Folk Theater/Rituals and Traditional to be continued in next chapter
                 References
1-Bharat Natyashastra
2-Steve Tillis, 1999, Rethinking Folk Drama
3-Roger Abrahams, 1972, Folk Dramas in Folklore and Folk life 
4-Tekla Domotor , Folk drama as defined in Folklore and Theatrical Research
5-Kathyrn Hansen, 1991, Grounds for Play: The Nautanki Theater of North India
6-Devi Lal Samar, Lokdharmi Pradarshankari Kalayen 
7-Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas part 1-12
8-Dr Shiva Nand Nautiyal, Garhwal ke Loknritya geet
9-Jeremy Montagu, 2007, Origins and Development of Musical Instruments
10-Gayle Kassing, 2007, History of Dance: An Interactive Arts Approach
11- Bhishma Kukreti, 2013, Garhwali Lok Natkon ke Mukhya Tatva va Charitra, Shailvani, Kotdwara
12- Bhishma Kukreti, 2007, Garhwali Lok Swangun ma rasa ar Bhav , Chithipatri
13-Manorama Sharma, Tribal Melodies of Himachal Pradesh: Gaddi Folk Music
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 Ektara: the One String Musical Instrument in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays;  Ektara: the One String Musical Instrument  in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Chamoli Garhwal, North India, South Asia; Ektara: the One String Musical Instrument in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Rudraprayag Garhwal, North India, South Asia;   Ektara: the One String Musical Instrumentin Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Pauri Garhwal, North India, South Asia; Ektara: the One String Musical Instrument in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Tehri Garhwal, North India, South Asia; Ektara: the One String Musical Instrument in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Uttarkashi Garhwal, North India, South Asia;  Ektara: the One String Musical Instrument  in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Dehradun Garhwal, North India, South Asia; Ektara: the One String Musical Instrument in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Haridwar Garhwal, North India, South Asia
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