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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, November 25, 2013

गरीबो ! भुजि खाण बंद कारो

चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती 

     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
मीन गरीब से पूछ ,"  तुम कथगा  खाणा खांदा ?"
गरीब - साब कथगा माने क्या ?
मि  -मलसन तुमर परिवार कथगा भुजि खांद ?
गरीब -यि त भुजि कीमतों पर निर्भर करद 
मि - मतबल ?
गरीब -जनकि अजकाल गोभी आठ अन किलो सस्ती ह्वे गे त हम सबि खुसी खुसी एक एक जखेलि गोभि खै लीन्दा 
मि  - बंद कारो एक जखेलि गोभि खाण बि. 
गरीब - अरे एकै जखेलि गोभी खाण बंद करि द्योला त फिर रुटि क्यांमा खाण ?
मि -अरे तुम लोग गरीब छावो त गरीब जन रावो 
गरीब -त हम एक जखेलि भुजि मा सात आठ रुटि त खांदा !
मि -नै नै तुम तै क्वी हक नी  च कि तुम भुजि का  सुपिन बि द्याखो 
गरीब -त रुटि क्यामा खाण ?
मि -जन पैल खांद छा ?
गरीब -प्याज मा ?
मि -हां 
गरीब -साब प्याज मैंगो ह्वे तबि त हम अब भुजि तरफ दिखणा छंवां 
मि  -नै नै ! कुछ बि कारो तुम भुजि खाण बंद कारो। 
गरीब -पण साब कुछ दिन पैल त तुमन सलाह दे छे कि हम गरीबुं तैं खरीदी बढ़ाण चयेंद 
मि -तब वित्त मंत्री अर प्रधान मंत्री रूणा छा कि भारत मा उपभोक्ताओं खपत नी बढ़णि च त मीन देश की आर्थिक दसा सुधारणो बान तुम गरीबों तैं सलाह दे छे कि खपत बढ़ावो। 
गरीब -अर अब क्या कांड लगि गेन जु तुम हम गरीबुं तैं सलाह दीणा छवां कि भुजि खाण बंद कारो।  कु असुण्या , बिलंच , बेगैरत , बेरहम हम गरीबुं से जळणु च ? वैकि त जीब रुंगड़ी दीण चयेंद  ! 
मि -नै नै ! वु गरीबुं सबसे बड़ा हितचिंतक छन पण वूंक स्टेटिस्टिक्स बताणि  च कि अब समय ऐगे कि देस हित , देसौ आर्थिक हितार्थ  गरीबुं तैं भुजि नि खाण चयेंद। 
गरीब -जरा बतावो त सै वैक नाम जु बुलणु च कि गरीबुं तैं भुजि नि खाण चयेंद। मि वैक दांत तोड़ि द्योलु ,वैक आँखि फोड़ द्योलु , वैक झुगल्युं पर आग लगै द्योलु ! कुलैल्वैखतरी (माथे के नीचे वाला हिस्सा फोड़ना ) कौरि दींदु।   
मि -तुम गरीबुं मा ये ही बीमारी च तुम असंवैधानिक शब्दों प्रयोग करदा।  अब हिंसा की बात पर केवल नेता  या आतंकवाद्यूं अधिकार च !
गरीब -नै तुम बतावो त सै वैक नाम जु बुलणु च बल गरीबुं तैं भुजि नि खाण चयेंद मि वैक हत - खुट नि तोड़ि द्यूं त म्यार नाम बि गरीब नी  च।
मि -नै नै भै ! वो त देस हित मा हि बुलणा छा।  
गरीब -क्या ?
मि -कि चूंकि गरीबुंन द्वि भुजि खाण शुरू कौर त मंहगाई , इनफ्लेशन बढ़ी गे !
गरीब -वै ,  जालिम , जालिया (धोखेबाज ) , कोढ़ीक नाम त बतावो ? वै पर चीरा लगैक कवौं मा नि बाँटि द्योलु त म्यार नाम गरीबी लिस्ट से निकाळ देन।
मि -देखो ! गरीबुं तैं गुस्सा नि हूण चयेंद ।  वो बड़ा जुम्मेवार पद पर छन अर मंहगाई से भौत परेसान छन. देस मा मंहगाई बढ़ण से  वूंकि भूक -तीस -निंद हर्चीं च ।  वो चाणा छन कि मंहगाई कम ह्वे जावो।  तो ऊं तैं  मंहगाई बढ़णो एकि  कारण नजर आयि  कि चूँकि गरीब लोगुंन भुजि जादा खाण शुरू कार तो मंहगाई बढ़ गे। 
गरीब -वै मूर्ख, पाजी , अज्ञानी , अहमक  तै ब्वालो कि मंहगाई इलै नि बढ़ कि गरीब लोग  सब्जी जादा खाणा छन।
मि -त फिर मंहगाई किलै बढ़ ?
गरीब -मंहगाई इलै बढ़ कि संसाधनो पर द्वी चार लोगुं अधिकार ह्वे गे , सरकारी योजनाऊँ कु अद्धा से जादा पैसा त भ्रस्टाचार्युं तिजोरी जोग ह्वे जांद। 
मि -पण आर्थिक सर्वेक्षण यीं बात पर सहमत नी  च। 
गरीब - जरा वै कमदिमग्या नाम तो बताओ जु झूट बुलणु  च?
मि -अपण केंद्रीय मंत्री श्री कपिल सिब्बलन ब्वाल कि गरीबुं आय -इनकम बढ़ण से गरीबुंन दु दु भुजि खाण शुरू कार त मंहगाई बढ़ गे। 
गरीब -सॉरी ! मि अपण सौब अल्फाज वापस लींदो।
मि -कनो क्या ह्वाइ ?
गरीब - वै वकील कपिल सिब्बल की दलीलों समिण ज्यूंरा बि नि जीत सकुद त हम गरीबुं औकात क्या च ? एक बात बतावो चुनाव कब छन ? छन कब चुनाव   ?चुनाव की तारीख बतावो ?
मि -कनो चुनाव अर मंहगाई को क्या संबंध ?
गरीब -इन बेरहम , निरदयी , गैरजरुरी , संवेदनहीन, गैरवाजिब , गरीबुं मजाक -हंसी उड़ान वळ , गरीबुं  घावुं पर लूण -मर्च लगाण वळ कुतर्कों /दलीलुँ का असली , सुडौल  जबाब त केवल वोटिंग मशीन का पास ही च !
 

Copyright@ Bhishma Kukreti  24/11/2013 



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