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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, November 17, 2013

बेलो पॉवर्टी लाइन (बीपीएल ) की घिराळी -चकरघिनी

चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती 

     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
अधिकारी - मेरि जान नि खा ! तू गरीबी रेखा तौळ  ऐइ नि सकदी !
लखपति  -ह्यां पण म्यार नाम म्यार बुबान लखपति  इलै धौर छौ कि सैत च हम तैं  द्वी टैम खाणा नसीब ह्वे जावो !
अधिकारी -मीन सौ दैं बोलि याल लखपत्यूं  हजारपत्यूं  तैं हम गरीबी रेखा तौळ वाळ याने बीपीएल सर्टिफिकेट नि दे सकदां। 
लखपति -पण  .... !
अधिकारी -हवलदार ये आदिम तैं गां से भैर छोड़ि आ यु सरकारी कामु मा अड़चन डळणु च। 
हवलदार -चल साला गांव की सरहद से भैर चल जा हाँ , निथर त्वै पर उपद्रव मचाणै धारा लगै द्योल हां !
लखपति - जांद छौं ! जांद छौं
हवलदार -पता नि यूं लखपत्यूं तैं शरम ल्याज बि नी च जु बीपीएल मा आण चांदन।  
गरीबदास -समनैन साब ! यि ल्यावो म्यार कागजात ! 
अधिकारी -हूं त त्यार क्वी सगा संबंधी बि नी जु तेरि देख भाळ कौर साक !
गरीब दास - सात भाई ह्वे छा पण क्वी ये रोगन मोर त क्वी हैंक रोगन मोर। 
अधिकारी -पण तेरी घरवळि त छैं च ?
गरीब दास -हां चौथु बच्चा जणद दैं वीं पर लकवा मारि  गे।  तीन बच्चों देख भाळ नि ह्वे सकणि च। 
अधिकारी -हां तू बीपीएल लैक नागरिक छे 
गरीबदास - जुग  जुग जिओ साब ! तुमर ड्यार छपन भोगुं बरखा हूणि रैन !
अधिकारी -हैं ! गरीबदास त्यार नाम पर त एक पक्कु मकान च ?
गरीबदास -साब इख पहाड़ि गाउँ मा मकान नि ह्वाल त हर साल सैकड़ों लोग ठंड से मरि जाला।  
अधिकारी -नै नै ! पण जैमा पक्कु मकान होलु वै तैं हम बीपीएल मा नि डाळि सकदां 
गरीबदास -साब वो मकान तो थोकदार जीन म्यार पड़दिदा तैं थोकदार जी कुण पख्यड़  खोदिक पुंगड़ बणाणो मजदूरी मा दे छौ। 
अधिकारी - मि कुछ नि जाणदु नियमक हिसाब से जैम पक्कु मकान ह्वावो वो बीपीएल स्कीम मा नि ऐ सकुद 
गरीबदास - साब अब तुमि कुछ कारो। 
अधिकारी -सॉरी गरीबदास ! तू बीपीएल मा नि ऐ सकदी। हवलदार ! गरीबदास तै भैरौ रस्ता दिखावो 
गरीबदास -रण द्या मि अफिक जांदु।  अरे गढ़वाळम क्वी मौ इन नि ह्वे सकदी जैक एक भितर नि ह्वावो तो  …। 
अधिकारी -हैंक प्रार्थी तैं बुलावो 
निखण्या दास -ल्या साब सौब कागजात लयां छन। 
अधिकारी - हाँ तीम त पक्कु मकान बि नी च। 
निखण्या दास -साब अपण पक्कु मकान नि हूण से पोरु साल ठंडन  एक नौन मोर अर परार दूधि नौनु मोर ! झुपड़ा मा ठंड भौत हूंद 
अधिकारी -हां तू अवश्य ही बीपीएल लायक  नागरिक छे
निखण्या दास - जुगराज रयां साब !
अधिकारी -अरे ! पर तुमर नाम पर  त एक साइकल च
निखण्या दास - वूंक कफ़न लगलि या सैक़ल जौन फोकट मा दे छे ।  परार एक सरकारी स्कीम ऐ छे कि नौन्युं तै सरकार से फ्री सैकल मीललि।  छै मील से हम वीं साइकल तै जनकेक ल्है छा . अब हमर क्षेत्र मा  सड़क बि नि छन त साइकल दिवतौं मूरत जन पडीं च। 
अधिकारी -मि कुछ नि जाणदु।  सरकारी हिसाब से त्यार परिवार साइकल मालिक च। अर साइकल मालिक बीपीएल स्कीम मा नि गणे सक्यांद।  जा भैर जा।
निखण्या दास - साब वीं साइकलौ हमन करण क्या च जब उक  दस मील तलक सड़क ही नि छन। 
अधिकारी - मि कुछ नि जाणदु।  हवलदार !  निखण्या दास  तैं भैरो रस्ता दिखावो ! हाँ ! त ग्राम प्रधान जी अब आप समिण बैठो !
ग्राम प्रधान - जी ब्वालो !
अधिकारी -प्रधान जी ! हम तै टारगेट मिल्युं च कि हरेक ग्राम सभा से द्वी  परिवार बीपीएल मा पंजीकृत हूण चएंदान । .
ग्राम प्रधान -द्वी परिवार बीपीएल लायक छैं छन ना।  ल्या  ऊंक कागजात !
अधिकारी (कागज पतर देखिक )-कागज तो बिलकुल सही छन।  सही माने मा बीपीएल लायक नागरिक।  कु कु छन यी परिवार ?
ग्राम प्रधान -एक म्यार भतिजु च अर दुसर सरपंच जीक साडु भाइक स्याळु च।   कागजात मा यी द्वी बिलकुल सहारा विहीन छन। 
अधिकारी -ठीक च।  हवलदार तैं  दक्षिणा दे द्वावो।  
ग्राम प्रधान हवलदार तैं कूण्याम लिजांद - हवलदार जी बीपीएल पंजीकरण की कथगा दक्षिणा च ?
हवलदार - ये मैना बिटेन दस हजार रुप्या प्रति पंजीकरण 
प्रधान - हैं ! पोर त पांच हजार रुप्या छौ 
हवलदार -प्याजौ भाव द्याख च ? कथगा बढ़ी ग्यायी ?
ग्राम प्रधान -ठीक च।  ल्या दस हजार रुप्या। 
हवलदार - अधिकारी जी !  प्रधान जी तैं द्वी बीपीएल सर्टिफिकेट दे द्यावा ! 


Copyright@ Bhishma Kukreti  17/11/2013 



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