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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, November 4, 2013

हे मा लक्ष्मी ! जरा इना बि ध्यान दे हाँ !

 भक्त  -भीष्म कुकरेती 

(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
 नै सालम मनिख द्वीइ  काम कौर सकद ।  या तो प्रण ले सकुद या स्याणि -गाणि कौर सकुद अर ईश्वर से प्रार्थना कौर सकुद।  
मीन बि माँ लक्ष्मी से कुछ मांग।  
हे निर्मात्री  माँ ! हमर भारत मा निर्माण बढ़ै दे।  निर्माण से  इथगा जरुरत बढ़ जावो कि भारतम  फैक्ट्रियों मा ओवर टाइम आम बात ह्वे जावो।  
हे रोजगार दिलाण वाळ मा ! हम तै आशिस दे बल ये साल हमर भारत मा सब्युं तैं रोजगार मिल जैन।  
कुछ भी हो माँ लक्ष्मी !  भारत मा निवेशकों की संख्या बढ़ै दे !  जरुर !हाँ 
हे भूमिपालुं  ब्वे ! सब्युं तैं रौणौ अपण कूड़ जरुर दे दे। 
हे माँ ! निर्माण कर्ताओं तैं बैकुं से रुप्या लगातार मिल्दो जावो। अर हाँ ! जरा कृपा कौरि ब्याज जथगा बि कम ह्वावो कमि लगै हाँ !
हे माँ लक्ष्मी ! जरा इन बि ध्यान दे बल हमर आयात अर निर्यात अनुपात बरोबर कु ही रावो हाँ। 
अच्छा तू तो जाणदि छे कि क इनफ्रास्ट्रक्चर कै हालात मा च  त जरा विश्वकर्मा जी मा बोलिक भारत मा  इनफ्रास्ट्रक्चर निर्माण बढ़ै दे हे माँ ! 
अब तू तो सब जाणदि ई छे कि गुरु वृहस्पति जी की कृपा से शिक्षा मा क्रान्ति आवश्यक च तो भारत मा शिक्षा मा क्रान्ति को वरदान दे दे हाँ !
वो लोग बुलणा रौंदन कि धनवंतरी जी अचकाल भारत को स्वास्थय पर कम ध्यान दीणा छन तो धनवंतरी जी तैं आदेस देकि हमर भारत मा स्वास्थ्य सेवा मा इजाफा करवै दे।  
हे माँ ! वो जरा देवेन्द इंद्र से बोलिक समौ पर बरखा करै दे हाँ !
अब देवेन्द्र की बात चल त कृषि की बात चलि जांद त हे माँ ! जरा एक हैंकि किस्माकी कृषि क्रान्ति लै दे ! जरा यि कृषि क्षेत्र मा इनफ्रास्ट्रक्चर की भौत आवश्यकता च त कृषि क्रान्ति से कृषि इनफ्रास्ट्रक्चर बढ़ै दे हे माँ !
अर , हे जगत जननी !  अचकाल उपभोक्ताओं आत्म विश्वास मा कमि ह्वे  गे तो त्वै से गुजारिस च बल भारत का आम उपभोक्ताओं आत्म विश्वास बढ़ै दे हाँ ! यूंकि खरीदी ताकत बढै दे हे माँ ! 
उन त मि स्टॉक मार्केट तैं आर्थिक स्थिति इंडेक्स नि माणदु पण जरा भैराक निवेशकों बान स्टॉक मार्केट मा स्थायित्व दे दे. हाँ भैरों ! दुबर याद दिलाणो जरूरत नि प्वाड़ो हाँ !
यि फिस्कल डेफिसिट भौत तंग करणु रौंद त जरा फिस्कल डेफिसिट बि कम कर दे हाँ ,  हे माँ !
 ही माँ ! अब तू त अंतर्यामी छे।  मंहगाई उथगा इ  बढ़ै जथगा हमारी इनकम बढ़ !

हाँ वो जरा इक्वल डिस्ट्रीब्यूसन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेस ऐंड मनी बि ठीक करी दे हे माँ !

बकै तू सब जाणदि छे कि आर्थिक स्थिति बढ़ाणो बान क्या क्या चयेंद।  स्यु सबि दे दे हे माँ ! 

Copyright@ Bhishma Kukreti  4  /11/2013