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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, November 27, 2013

पहाडुं शिक्षा गाड़ी पटरी पर किलै नी आणि च ?

चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती 

     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
एक प्रवासी (जोर कै धै लगांदु )- अरे यी शिक्षा गाड़ी तैं क्या ह्वे भै ? बड़ी दरदनाक बात च कि हमार गांवक शिक्षा गाडी इंजिन  बुरी हालात मा च। 
मुम्बई बिटेन आयुं प्रवासी  - मै लगद या गाड़ी पटरी से उतर गे। 
दिल्लि बिटेन आयुं प्रवासी - नै नै गाड़ी त ऊनि च जन सन 1890 मा अंग्रेज यीं गाड़ी तैं ये गां मा ल्है छया। 
अमेरिका बिटें अयुंप्रवासी  - हाँ  लगणु च गाड़िक अंजर पिंजर ढीला ह्वे गेन। 
सबि प्रवासी -नै नै हमर गांवक शिक्षा गाड़ी दौड़न चयेंद।  हम सब तैं कुछ करण चयेंद। 
एक प्रवासी इंजिनियर  - अरे इंजिन का अग्वाड़ी द्वी पहिया अलग अलग साइज का किलै छन ?
एक प्रवासी जणगरु - हाँ एक पहिया शिक्षक च अर हैंक पहिया शिक्षा प्रशासन च। 
इंजिनियर -पण दुयुंक साइज अलग अलग च त गाड़ी पटरी से नि उतरलि त क्या ह्वालु ?
जणगरु -दुयुंक साइज एक बि ह्वै बि जालो तो शिक्षा गाड़ीन अग्वाड़ी नि बढ़ सकद। 
इंजीनियर - किलै ?
जणगरु -एक वाममार्गी च त हैंक दक्षिण मार्गी च।  अंग्रेजूं टैम इ बिटेन द्वी पैया अलग अलग दिशा मा चलणा रौंदन।  
इंजीनियर - कनो ?
जणगरु - प्रशासन बुलद बल बच्चों तैं शिक्षा नौकरी पाणो जरिया हूण चयेंद बस तो  शिक्षक बुलद बल  नौन्याळु आचार -विचार -ज्ञान -विज्ञान बढ़ाणो शिक्षा दिए जाण चयेंद। 
इंजिनियर -हां सही बात त च कि नौन्याळु आचार -विचार -ज्ञान -विज्ञान बढ़ाणो शिक्षा दिए जाण चयेंद। 
जणगरु -पण द्वी पहिया अलग अलग दिशा मा चलणा कोशिस करदन अर गाड़ी अग्वाड़ी ही नि बढ़द। 
विशेषज्ञ -अर पैथर समाज , नेतृत्व का पहिया बि छन जो उत्तर या पश्चिम दिशा गामी छन। चार पहिया अलग अलग दिशा मा चलदन। 
एक प्रवासी - अरे पर यूं  पहियों नट , बोल्ट , स्क्रू त ढीला हुयां छन। 
एक ग्रामवासी - वांक बान दिल्ली बिटेन शिक्षा नीति संशोधन का टिक्वा बि त अयाँ छन। 
जणगरु -पण वो अधकचा, अधकचरा  टिक्वा नट , बोल्ट , स्क्रू की जगा त नि ले सकदन ना ?
एक प्रवासी -अरे ये इंजिन बिटेन सड्याण किलै आणि च ?
हैंक प्रवासी विशेषज्ञ -पुराणो सिलेबस सौड़ी गे  तो   वांक दुर्गन्ध आणि च। 
जणगरु -पण सरकार त पांच दस सालम सिलेबस बदलणि रौंद त फिर बि इथगा दुर्गन्ध किलै ?
विशेषज्ञ - असल मा सिलेबस पूरो नि बदल्यांद। तो पुरण सिलेबस नै सिलेबस तैं सड़ै दींदु। 
इंजिनियर - एक बात बतावो ! शिक्षा इंजिन त जै बि हालत मा च स्यू त च।  पण शिक्षार्थी कख छन ?
ग्राम वासी -अब क्वी अपण बच्चों तैं गां मा नि पढ़ान्द।  सब्युं बच्चा  देहरादून या ऋषिकेशउंद पढ़दन।  
कुछ  प्रवासी - हम सब तैं अपण मातृभूमि शिक्षा वास्ता कुछ ना कुछ करण चयांद ।. 
एक बणिया - अरे जन शहरूं मा हूणु च तनि  कारो।  यीं खस्ता हालात की  , अंजर पंजर हुईं  शिक्षा गाड़ी नीलाम मा बेचीं द्यावो अर कैं प्राइवेट कम्पनी से  सेकंड हैंड शिक्षा गाडी ल्है आओ। 
सबि प्रवासी - हम एक प्रस्ताव पारित करदवां कि हमर पहाड़ मा शिक्षा गाडी पटरी पर आण चयेंद। अर हम सब अपण गांवक शिक्षा गाडी पटरी पर लाणो संकल्प लींदा। 
एक ग्राम वासी - तो सौब चलो पौड़ी जैक स्कूल इंस्पेकटर ऑफ स्कूल से बात कौरिक शिक्षा गाड़ी तैं पटरी पर लांदवां। 
एक प्रवासी - अरे मि  त द्वी दिनों छुटि लेक सामूहिक नागराजा पूजन का वास्ता अयूं छौं।  मेरि त परस्यूं ऑफिस की महत्वपूर्ण मीटिंग च। 
सबि - हाँ हम सब त द्वी या तीन दिनों कुण गाँव अयाँ छंवां . हमम टैम नी च। 
सबि ग्रामवासी - त फिर अपण घड़ियाली आंसु  बगाण बंद कारो अर सुरक अपण अपण शहर जावो। हम गांवाळ  अफिक अपण समस्याउं  निदान करला ! 


Copyright@ Bhishma Kukreti  28/11/2013 


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