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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, November 6, 2014

कुछ हँसौण्या-सिखौण्या कैपणि बोल (कहावतें )

गढ़वाळि हास्य -व्यंग्यकोष -भाग -29        

                               
Garhwali Humorous and Satirical Dictionary part -29      


                                              संकलन  ::: भीष्म कुकरेती

घर आयुं कज्याणिन हरायुं , बौण गयूं बाघन डरायुं। 
जु बि घ्वीड़ जिबळ (जाल ) से भागी जावो वु महान घ्वीड़ हि होलु !
तीन दिन बाद माछ अर मेमान से बास (दुर्गन्ध ) आण बिसे जांद !
स्याळो असली यार अळगसि ग्वेर  !
बच्चा पैदा करण बच्चा की चिंता करण से सरल हूंद !
धन सब कुछ त नि कौर सकद पर नौन्याळु तैं न्याड़ ध्वार रख सकद !
मि सबि  चीजुं प्रतिरोध कौर सकुद बस लालच -ल्हाळसा म्यार बस मा नि आंद !
 गन्ना ब्वेली त हाथी मीलल अर मूंगफळी दिखैल त गूणी -बांदर ही आल !
भोळ सबसे व्यस्ततम  दिन हूंद !
बंद मुखक भितर माख नि छिरदन !
नाव जबतक किनारो पर बँधीं च सुरक्षित च पर नाव बंधणो थुका बणाइ !
जिंदगी मा कुछ बि निर्धारित नी च  किंतु मृत्यु व इन्सुरेंस पर टैक्स अवश्य ही निश्चित च
सबसे म्यारु मोती ढांग , सौ रुपया कु सींग 
अच्छी चीज वैमा इ आंदन जु प्रतीक्षा करद किंतु  समय अर ज्वारभाटा कैक बि प्रतीक्षा नि करदन 
सही कारो निथर नि कारो पर यि बि त बुल्यांद बल निछौंद ममा से काणो   ममा भलो !
सिखणै क्वी उमर नि हूंदी पर इन बि बुल्दन बल तुम पुरण कुत्ता तैं नै तरकीब नि सिखै सकदा। 
तलवार से कलम बड़ी पर दगड़म कैपणी बोल बि च बल बुलण से भलो कर्युं काज /कार्य 

क्वी बि खबर नि हो ………....... ………………………………असंभव 
सब्युं तैं प्यार कारो , विश्वास ……….......…………………… मि पर ही कारो 
ढम मारो  …………………………… जब सरसु (खटमल ) समिण दिखे जावु 
एक धेला  बचैक …………………… ……………………खन्नु हूण ?
वा ही ब्योलि खुस हूंद …………………………………जैं तैं जादा भेंट मिलद 
वूं नंग दांतुन नि काटो …………………………………जु गंदा ह्वावन 
जख बि धुंवा च …………………………………………तख प्रदूषण च 
कलम बड़ी च …………………………………………सुंगरुँ से 
सीण (सोना ) तैं ………………………………………भोळ तक नि टाळो 
कबि बि धिवड़ (दीमक ) की ताकत ……………………कम नि अंक्याण 
जोर जोर से हंसिल्या तो संसार हौंसल पर ………… रोल्या (रोओगे ) त नाक साफ़ करण पोड़द 
यदि कुत्ता दगड़ सेल्या तो …………………… तो कुत्ता पर सुबेर तुमर गंध बि आली 
मुर्ख उखी दौड़दन  …………………… जख पैल मूर्ख दौड़ ह्वावन 

                                     आणा  -भ्वीणा बोलिक घ्वीड़ -काखड़ नि मारे जांदन ! 



व्यंग्य शब्दकोश जारी रहेगा ……।
Bhishma Kukreti  6/11/2014 


                                                                   

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