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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, November 17, 2014

सत्ता , पत्ता अर चिलम का स्थाई नियम हूँदन

सत्ता , पत्ता अर चिलम का स्थाई नियम हूँदन 
                                    

                                                        भीष्म कुकरेती
 
      बेडू पकणो  , तिमल पकणो अर हथनी क बियाणो अपण अपण नियम हून्दन। 
      चाय पत्ती सिजाणो , तमाकु सिजाणो (फर्मेन्टेशन ) अर क्याड़ सिजाणो अपण नियम धियम हूंदन। 
        इनि सत्ता , पत्ता (ताश -चौपड़ ) अर धुंवा पीणो (चिलम ) अपण स्थाई रुल -रेगुलेसन हूंदन। 
 हमम पिछ्ला दस हजार सालुं युद्ध -जुद्ध कु इतिहास च अर सब बथांदन बल साम्राज्य्वादी  हो , साम्यवादी तंत्र हो या प्रजातंत्र हो !  सत्ता खेल दस हजार साल पैल बि उन्नी छया , लाल चचकार रूस मा बि उन्नि छया अर अच्छे दिनुंक धड़वै  नरेंद्र मोदीक समौ पर बि उन्नी च। 
 सबसे पैल सत्ता का सूत्र च सत्ता पाणो बान सब कुछ जायज च।  अब चाहे युधिष्ठर कु झूठ हो , अशोक -औरंगजेब कु भयात कतल्यौ हो या शिवसेना -भाजपा कु गाळिदिवा   कलह हो ।  यूँ सब्युं मा एक समानता च कि सत्ता का खातिर सब कुछ जायज  च ।  
   फिर च सत्ता एक दैं ऎ जाव तो वीं सत्ता पर चिपकिक बैठ जावो फिर यांक बान कथगा बि कत्लेआम आम करण पोड़ करदा रावो।  दुर्योधनन बि इनि कार , यूपीएन बि इनि कार अर भाजपान बि इनि करण किलैकि सत्ता कु नियम च एक दैं सत्ता आयि ना फिर सत्ता गंवाण लाट -कालुं काम च तबि त ख़ास आदिम केजरीवाल अजकाल बेज्जती बचाणो बान फिरड़ी -फिरड़ी करणु च। खाणक भरीं थाळि पर ठोकर मारण ,   अयीं लक्ष्मी तरफ पीठ करण अर सत्ता तैं ठुकराण सर्वथा महापाप च  अर बेज्जती कु  काम च। द्याख नी तुमन बिचारो नीतीश कुमार कु मुख ! जब वैन थुक्युं चाट याने लालू यादव का दगड़ जुगलबंदी कार।  सत्ता बचाणम  सब कुछ जायज च।  अब इंदिरा गांधी कु इमरजेंसी हो , यूपीए कु घोटाला ह्वावन फिर तटाकथित पाक साफ़ भाजपा महाराष्ट्र मा सरकार बणाणो बान , शिवसेना तैं सत्ताबिहीन करणो बान , अपण छुट छुट भागीदार पार्टयूँ तैं डंडा दिखाणो बान पवित्र भाजपा आज शरद पवार की नेसनल करप्ट पार्टी (NCP ) का कंधा मा चढ़ीं च।  सत्ता से दूर रौण आदि काल से ही पाप माने जांद।  सत्ता से दूर रौण पाप च अर यु चखुलों मा बि दिखे जांद।  कबूतर शांत स्वभाव कु पंछी माने जांद किन्तु जरा कबूतरों बीच ठौ -घोल का वास्ता लड़ै दिख्ल्या तो तुम बि बोलिल्या कि कॉंग्रेस सरकार बचाणो बान हरीश रावतन सबि विधायकों तैं पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी बणाइ तो होशियारी ही कार , शिवसेना महाराष्ट्र मा विरोधी पार्टी च किन्तु दिल्ली मा घोर ठाकरे भक्त गीते जी केंद्रीय मंत्री छन। दस हजार सालक युद्ध इतिहास गवाह च कि जैन बि सत्ता से मुख म्वाड़ ना उ बिचारु केजरीवाल ह्वे जांद। केजरीवाल जन सत्ताहीन का साथ आदर्शवादी लोग बि दगुड़ छोड़ दीन्दन।  भीष्म , द्रोणाचार्य , कृपाचार्य अर विदुर पांडव प्रेमी छया किन्तु सत्तासुख का खातिर यी मृत्यु पर्यन्त दुर्योधन का साथ ही रैन अर युद्ध मा यूंन सत्ताहीन पांडवों का साथ नि दे । 
               युद्ध का दुसर अमर नियम च सत्ता हथियाणो बान आक्रमणकारी तैं सत्ताधारिक सबसे कमजोर बिंदु पर जोर की खचांग मरण चयेंद ।  राम रावण से युद्ध तबि जीत जब रामन रावणक कमजोर नाभि छ्याद।  भीमन दुर्योधन तबि मार जब वैन दुर्योधन का सबसे कमजोर अंग जांघ पर गदा प्रहार कार। सन 2014 का लोकसभा चुनाव मा भाजपान भरस्टाचार आदि का अस्त्र -शस्त्र से कॉंग्रेस की कमजोर कड़ी राहुल गांधी पर जोर का प्रहार कार।   अब आक्रमण की बारी राहुल गांधी की च किन्तु बिचारो तैं पता ही नी च कि नरेंद्र मोदीक कमजोरी क्या च ? राहुल गांधी अर मोदी विरोध्युं की सबसे बड़ी कमजोरी या राइ कि यूँ सब्युंन नरेंद्र मोदिका सबसे शक्तिशाली गुणों पर हथ्वड़ चलाइ , घौण चलाइ , वार कार अर हमेशा नरेंद्र मोदी से शिकस्त खाइ।  गुजरात का दंगा नरेंद्र मोदी की शक्ति च अर वीं शक्ति पर मौत का सौदागर जन बमगोळा चुलैला तो तुमर हि नुकसान होलु।   बहुत सा कॉंग्रेसी आज नरेंद्र मोदी पर भगार लगांदन कि नरेंद्र मोदी अपण मंत्र्युं कमान अफुम रखद अर मंत्री बिचारा नरेंद्र मोदी  का समिण पाणि भरदन।  किन्तु आम जनता तो यो ही चांदी कि मंत्री संत्री प्रधानमंत्री की मुठी माँ रावन ना कि मनमोहन सिंगौ तरां जख हरेक मंत्री प्रधानमंत्री से बड़ो छौ अर प्रधान मंत्री सोनिया गांधीक या राहुल गांधीक ड्यार पाणि भरणो जांद छा।  नरेंद्र मोदी  का मंत्र्युं पर रौब -दाब च , मंत्री अनुशासन माँ छन , नरेंद्र मोदी का सब मंत्री नरेंद्र मोदीक समिण किदलु छन जन छवि असल मा नरेंद्र मोदीक तागत च। उनि  बि ममता बनर्जी , जया ललिता , नवीन पटनायक  कौनसा अधिनायक नि छन?  अर युद्ध मा तागत पर आक्रमण नि करे जांद।  इनि जापान मा ढोल बजाण नरेंद्र मोदी की तागत बथांद अर बिचारो राहुल  बाबा जब ढोल बजाण पर आक्रमण कारल तो जगहँसी का ही पात्र बौणल कि ना।  असल मा कमजोरी हमेशा तागत का अंदर लुकीं रौंद अर नरेंद्र मोदीकी कमजोरी अवश्य ही 'अच्छे दिन आएंगे ' माँ ही होली। 
       सत्ता युद्ध का चौथा नियम च यदि तुम दुसर नंबर का आक्रमणकारी नि ह्वै सकदा तो अचाणचक जोरों से नया हथियार लेक सत्तासीन पर पैथर बिटेन आक्रमण कारो ।फ्लैंकिंग युद्ध याने  आश्चर्य या अचाणचक,  जोर से आक्रमण। सन 1962 मा चीन द्वारा भारत पर आक्रमण फ्लैंकिंग अटैक छौ, सन 1977 मा जनता दल बणन अर चुनाव लड़न ,  अर आम आदमी पार्टी द्वारा दिल्ली कु प्रथम चुनाव फ्लैंकिंग युद्ध ही छौ। इखमा आक्रमणकारी वै क्षेत्र पर आक्रमण करद जू सत्ताधारी का वास्ता ख़ास महत्वपूर्ण ना हो या जख सत्ताधारी सियुं हो। 
         सत्ता युद्ध मा चौथी रणनीति हूंदी छापामारी या गुरिल्ला युद्ध।  मूसुं तरां , या स्याळु तरां या कवौं तरां शेर का शिकार से झपटा मारिक छीन लीण , लूठि लीण अर भाजि  जाण।  शिवाजी महाराज की रणनीति छापामारी रणनीति छे।  वियतनाम्युंन  अमेरिका दगड़ छापामारी रणनीति से ही युद्ध जीत।  भारतीय प्रजातंत्र मा क्षेत्रीय पार्टी छापामार लड़ाका छन।  यूँ तैं राष्ट्रीय पार्टयूं दगड़ सीधा युद्ध नि करण चयेंद।  सबसे बढ़िया उदाहरण द्रविड़ियन पार्टी अर बीजू जनता दल कु च।  समाजवादी पार्टी आदि तैं समजण चयेंद कि ऊँतें ज्यादा दिन तक टिकण तो प्रधान मंत्री का ख्वाब दिखण बंद कर देवां अर तब चुनाव लड़ां।  फिर इनमा कबि अवसर ऐ गे तो बण जावो प्रधानमंत्री ! क्षेत्रीय पार्टयूं तैं क्षेत्रीयता कबि नि छुड़ण चयेंद। 

जू पिछ्ला दस हजार सालुं युद्ध इतिहास जाणदु वै तैं आश्चर्य नि ह्वै कि भाजपान महाराष्ट्र विधानसभा मा ध्वनिमत से विश्वासमत जीत।  किलैकि सत्ता , पत्ता अर स्वार्थ का नियम अपण ही छन। सत्ता , पत्ता अर स्वार्थमा आदर्शवाद की कखि बि , कनि बि, कोर बरोबर बि जगा नि हूंदी। 



Copyright@  Bhishma Kukreti 16 /11 /2014       
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लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं। 
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