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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Friday, December 13, 2013

कोटद्वारम अंग्रेजी स्कूलम टीचर पोस्ट का बान इंटरव्यू

चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती 

     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
( यु सरा इंटरव्यू हिंदी मा ह्वे।  यु अनुवाद च )

मि - सर ! यस्टरडे नाइट ! ऐट कोटद्वार बजार , आइ वाज हैविंग अ ड्रिंक इन गुप्ता बियर बार ऐंड  रेस्ट्रॉरेंट।  दियर द प्रोप्राइटर गुप्ता जी  टोल्ड मी दैट   देयर इज ए वैकेंसी फॉर टीचर इन  योर इंग्लिश मीडियम स्कूल।
वाइस प्रिंसिपल (म्यार कंदुड़म )  -प्रिंसिपल साब तैं अंग्रेजी ठीक से  नि आदि।  हिंदी मा बात कारो। 
मि (वाइस प्रिंसी का कंदुड़म ) -तो गढ़वाळी मा बचऴयों ? 
वाइस प्रिंसिपल (म्यार कंदुड़म ) -प्रिंसिपल साब तैं अपण घौरम अर स्कूलम गढ़वळिम बुलण -बचऴयाण पसंद नी च।  ऊंक मानण च  गढ़वळिम बुलण -बचऴयाण से  बच्चों की हिंदी बिगड़ जांद )
प्रिंसिपल वाइस प्रिंसिपल से -क्या बात हूणि च ? 
वाइस प्रिंसी   -नै कुछ ना सर।  मि समझाणु छौ बल चूँकि  हिंदी उत्तराखंड की प्रथम राजकीय भाषा च त हिंदी मा छ्वीं लगन त ठीक रालो।
प्रिंसिपल-फिर ठीक च।  अच्छा तुम तैं गुप्ता जीन हमर स्कूलो बारा मा बताइ इ होलु कि हमर स्कूल क्या च ? कथगा प्रसिद्ध च।
मि - गुप्ता जीन ही  बतायी कि गंगासलाण का ग्रामीण मास्टरों बच्चा इखि पढ़दन । ढांगू , लंगूर , अजमेर अर उदयपुर पट्टी का ग्रामीण मास्टरों मध्य या स्कूल बड़ी प्रसिद्ध च। 
प्रिंसिपल -जी हमर स्कूल मास्टरों बीच प्रसिद्ध च।
मि - इन लगणु छौ कि  गुप्ता जी की या स्कूल होली ?
वाइस प्रिंसिपल-नै नै ! स्कूल त उत्तराखंड का नामी गिरामी शराब वितरक माननीय श्याम मनोहर जुयाल जी की च।  गुप्ता बियर  बार का मालिक गुप्ता जी हमर जनसम्पर्क सलाहकार छन।  वो हमर स्कूलम मास्टर अर बच्चा भिजदन। 
मि -श्याम मनोहर जुयाल ? वो जु  ढांगू का  छन ?  
प्रिंसिपल-तुम जुयाल जी तैं कनकै जाणदा ?
मि -वो मयार नजीको गांवक दूरो रिस्तेदार छन।
प्रिंसिपल-हैं ? अर मि ऊंक दूरो गांवक नजीको रिस्तेदार छौं। 
वाइस प्रिंसिपल - वै हिसाबन तो आप द्वी बि दूरो रिस्तेदार ह्वेल्या ? 
मि -प्रिंसिपल साब ! आप कै गांवक छन ?
प्रिंसिपल- मि कांडीखाळ कु जगमोहन कंडवाल छौं
मि -आप जगमोहन  कंडवाल ! पण आप त आबकारी विभाग मा चपड़ासी छा। 
प्रिंसिपल-हाँ ! ओ तो तुम म्यार बारा मा जाणदा छंवां।  फिर ठीक च।  मीन भौत साल पैल एलटीसी ( टीचिंग ट्रेनिंग ) कौर छे।  वैबगतां टीचरूं तनखा कम छे तो मी टीचिंग मा नि ग्यों मि सरकारी दफ्तर मा चपड़ासी बौण ग्यों। रिटायर हूणों बाद खाली छौ तो स्वाच टैम काटणो वास्ता  प्रिंसिपल ही बौण जौं !
मि -यी श्याम मनोहर जुयाल जी ठहरे शराब का ब्यापारी तो फिर जुयाल जी शिक्षा व्यवसाय मा कनकै ऐ गेन ?
वाइस प्रिंसिपल-वु  क्या च।  शराब  ब्यापार का बाद शिक्षा ब्यापार मा ही जादा मुनाफ़ा च। बिजिनेस डाइवर्सीफिकेसन  का बान जुयाल जी शिक्षा व्यापार मा ऐन।  अर फिर शराब का ब्यापार का इन च कि श्याम मनोहर जुयाल जीन अपण गां मा मंदिर -धर्मशाला बणाइ।  पर सबि इनी बुल्दन बल सि देखि ल्यावदी ! शराबौ पैसान मंदिर बौण।
मि -हाँ या बात त छैं च.
प्रिंसिपल-यीं स्कूलम ढांगू -उदयपुर -लंगूर का गाउँ मा पढ़ाण वाळ मास्टरुं बच्चा पढ़दन। अब अंग्रेजी स्कूलूँ रिवाज च तो बिचारा ग्रामीण मास्टर अपण बच्चों तैं हमर प्रसिद्ध अंग्रेजी स्कूलम भर्ती कौर दीन्दन !  
मि -जी पण मीमा टीचर ट्रेनिंग को सर्टिफिकेट नी  च।  ना ही मै  तैं क्वी मास्टरगिरी को क्वी तजुर्बा च।
वाइस प्रिंसिपल-आप तैं थोड़ा भौत अंग्रेजी आंदी च ना ?
मि -हाँ !
प्रिंसिपल-तो आप हमर स्कूलम  बच्चों तैं फीजिक्स अर केमिस्ट्री पढ़ाओ। 
मि -पण मीन त बायलॉजी से ग्रेजुएसन कार।
प्रिंसिपल-इकमा क्या च हमर स्कूलम हिस्ट्री मा एमए वाळ मास्टर गणित पदांदु।  बस जरा थोड़ा भौत अंग्रेजी आण जरुरी च। 
मि -पण आप लोग ट्रेंड टीचर किलै नि लीन्दा ?
प्रिंसिपल-ट्रेंड टीचरों तैं तनखा जादा दीण पोड़द।  ट्रेंड टीचर तीस हजार रुपया की डिमांड करद।  जब कि तुम सरीखा अनट्रेंड पांच सात हजार रुपया मैना मा मिल जांदन।   
मि -एक बात बतावदी यी ग्रामीण ट्रेंड अध्यापक अपण बच्चों तैं इन स्कूलम किलै पढान्दन जख अनट्रेंड टीचर पढान्दन। जाणि बुझिक अपण बच्चों भविस्य दगड़ खिलवाड़ ?
प्रिंसिपल-सूणो तुम तै पता च कि शराब बुरी चीज च ?
मि -हाँ।  शराब भौत ही बुरी चीज च। स्वास्थ्य अर  पैसा बर्बादी का लिहाज से शराब बहुत ही खतरनाक च। 
प्रिंसिपल - बस जन तुम शराब का नुक्सान का बारा मा इथगा जाणिक बि शराब पींदा , तनि  ग्रामीण मास्टर बि अपण बच्चों तैं हमर स्कूलम पढान्दन। 
वाइस प्रिंसिपल - आप भोळ से पढ़ाणो ऐ जावो। 
प्रिंसिपल - एक बात हौर ! तुम तैं तनखा सात हजार कैश मीलि जालि पर रजिस्टर मा तुमर तनखा तीस हजार होली। 


Copyright@ Bhishma Kukreti  13  /12/2013 


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