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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, December 26, 2013

उत्तराखंड के प्रत्येक विधायक के लिए पर्यटन ज्ञान हेतु विदेस भ्रमण आवश्यक हो

Uttarakhand Legislators  must Visit Foreign Tourist Places Eery Year
(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--25   ) 
                                          उत्तराखंड में पर्यटन  आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 25 
                                                       लेखक : भीष्म कुकरेती                              
                                          (
विपणन  विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )
  भारत वास्तव में एक पाखंडियों का देस है। 
. कल रात 9 बजे प्राइम टाइम में मै टाइम्स चैनेल में एक गरमागरम  बहस देख रहा था । जिसमें कर्नाटक के विधयाकों द्वारा लैटिन अमेरिका के अमेजॉन क्षेत्र में यात्रा की चीर फाड़ हो रही थी। अधिकतर गैर राजनीतिक पंडितों का निर्णय था कि कर्नाटक के विधायक ऐसे टूर कर गुनाह कर रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि  स्वयंभू  विज्ञापन गुरु   सुहेल सेठ भी टाइम्स नाउ के न्यायाधीश अर्णव गोस्वामी के साथ राजनीतिज्ञों की आलोचना कर रहे थे। पत्रकारों और विज्ञापन जगत के कर्णाधारों द्वारा  बगैर सोचे  समझे विधायकों के ज्ञान टूर को बुरा कहना केवल पाखंड ही नही अपितु नासमझी भी कहा जाएगा। 
एक बार देहरादून से प्रकाशित होने वाली प्रसिद्ध हिंदी मासिक ने उत्तराखंड  सरकार को कटघरे  में खड़ा कर दिया कि राज्य सरकार देहरादून में फूटबाल ग्राउंड तो नही बना रही है किन्तु औली में अंतर्राष्ट्रीय स्कीइंग व देहरादून में आइस स्केटिंग  खेल पर करोड़ों रुपया फूंक रही है।  मैंने मासिक के सम्पादक से कहा कि आपको जब पर्यटन उद्यम के आंतरिक तत्वो का ज्ञान ही नही है तो आप ऐसा कैसे लिख सकते है ? औली में स्नो स्कीइंग या देहरादून में आइस स्कीइंग ग्राउंड सर्वथा खेल विकास से बिलकुल  अलग विधाएं व माध्यम हैं।  स्कीइंग विकास या आइस स्केटिंग  सर्वथा पर्यटनोंन्मुखी खेल हैं और  भविष्य के लिए पर्यटन विकास के लिए इन दोनों खेलों पर निवेश आवश्यक हैं। 
इसी तरह जब उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने अपने एजेंटो की मीटिंग मसूरी में पंचतारा होटल में कराई और वहाँ कुछ ग्लैमरस प्रोग्रैम सम्पादित किये तो मेरे एक मित्र ने अपनी पत्रिका में पर्यटन विभाग की भर्त्सना  की . मैंने मित्र को फोन किया कि मेरे भाई पर्यटन एक ग्लैमरस उद्यम भी है तो इसमें ग्लैमर आना ही चाहिए।  ग्लैमर व्यापार को ग्लैमर व्यापार के हिसाब से चलना चाहिए ।  टूरिज्म एजेंटों को तुलसी की काली चाय पिलाकर प्रोत्साहित  नही किया जा सकता है और उनके उत्साह वर्धन के लिए पंचतारा होटल में पार्टी आवश्यक है। 
इसी तरह पत्रकार विधायकों का पर्यटन ज्ञान के लिए विदेस यात्रा की भी कटु आलोचना करते हैं। 
पर्यटन आज नये नये कलेवरों के साथ आ रहा है।  आज पर्यटन उद्यम में नई नई सुविधाओं व आकर्षण के नये नये माध्यम लाये जा रहे हैं।  यदि  राज्य में पर्यटन विकास करना है तो पर्यटन में नये नये माध्यमों का प्रवेश आवश्यक हैं ।
विधायक व अन्य शक्तिशाली राजनीतिज्ञ पर्यटन विकास में बदलाव हेतु निर्णायक भूमिका निभाते हैं और इन राजनीतिज्ञों को अवश्य ही पर्यटन की जानकारी अत्यावश्यक है। 
उत्तराखंड राज्य में विधयकों , जिला पर्षद के अध्यक्षों को पर्यटन की बारीकियों के बारे में , नये माध्यमों , नई तकनीक के बारे में जानकारी होनी ही चाहिए। 
यदि  विधायकों व जिला परिषद अध्यक्षों को पर्यटन में होने वाले परिवर्तनो का ज्ञान नही होगा तो ऐसे विधायक या निर्णायक नेतृत्व अवश्य ही पर्यटन में प्रतियोगी परिवर्तन को रोकेंगे।  
अत: विधायकों  व जिला परिषद के अध्यक्षों को हर साल विदेस यात्रा अत्यावश्यक है।  इसे जनता का पैसा फूंकना नही समझा जाना चाहिए। विधायकों की विदेस यात्रा से अवश्य ही पर्यटन को लाभ मिलता है। विधायक  अपने अनुभव प्रसाशनिक अधिकारी व जनता को बांटते हैं तो पर्यटन चेतना फैलती है जो पर्यटन के लिए अत्यावश्यक है। 
ब्लॉक प्रमुखों को हर पांच साल में एक बार विदेस प्रवास पर भेजना आवश्यक है जिससे उत्तराखंड में प्रत्येक क्षेत्र में पर्यटन उद्यम चेतना फैले। 
पर्यटन के बारे में समाज में भी चेतना आनी आवश्यक है कि पर्यटन एक ग्लैमरस उद्यम भी है।  समाज को सरकार पर दबाब बनाना चाहिए कि विधायकों को पर्यटन ज्ञान हेतु विदेस भेजा जाय।  


Copyright @ Bhishma Kukreti 26 /12/2013 
Contact ID bckukreti@gmail.com 
Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series to be continued ...
उत्तराखंड में पर्यटन  आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी 

                                   
 References

1 -
भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना ,शैलवाणी (150  अंकों में ) कोटद्वारा गढ़वाल 


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