उत्तराखंडी ई-पत्रिका की गतिविधियाँ ई-मेल पर

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Friday, December 13, 2013

हार का बाद आत्मचिंतन या आत्मा हरण ?

चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती 

      
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
 
हार अर जीत मा एक सबसे बड़ो अंतर हूंद कि जितण वाळ जश्न मनांद त हरण वाळ प्रेस कॉन्फ्रेंस करद अर आत्मचिंतन करद। 
प्रेस कोन्फेरेंस अर आत्मचिंतन द्वी ही भयावह व धर्मसंकटी बात छन। 
प्रेस कॉन्फ्रेन्स मा पत्रकार इन इन बात पुछ्दन कि राजनीतिज्ञ जांक उत्तर सही द्यावन त कोढ़ी हूँदन अर उत्तर नि द्यावन त जग हंसाई हूंद। 
अब द्याखो ना सन 2013 का पांच विधान सभाओं का चुनाव  पश्चात , पत्रकार कॉंग्रेसी नेताओं तैं जब पुछदन बल क्या राहुल का जादू ख़तम हो गया ? तो कॉंग्रेसी  नेताs समणि यमराज -ज्यूंरा बैठ जांदो।  कॉंग्रेसी सही जबाब दीन्दन कि राहुल को जादूs  सुख हम कॉंग्रेस्युंन कबि नि चाख ना द्याख तो जु नेता सच बोलि द्यावो  वो कॉंग्रेसी नेता ह्वैंइ नि सकुद।  अर आदतन , अपण संस्कृति अनुसार कॉंग्रेसी नेता झूट बुल्दन कि नही राहुल गांधी का जादु कभी समाप्त नही हो सकता है तो जग हंसाइ ह्वै जांद।  इलै ये प्रश्न का जबाब मा कॉंग्रेसी बुलद बल राहुल गांधी दलितुंक  इख  भोजन करदन अर रात सिंयां रौंदन।
 फिर निर्दयी , कुटिल, कठोर हृदयी पत्रकार हरीं कॉंग्रेसी नेता पर हैंक सवालो तोप दागी दीन्दन बल क्या नरेंद्र मोदी का जादू चल गया है ? अब सही उत्तर च कि नरेंद्र मोदीन अपण कार्यकर्ताओं अर भक्त वोटरों माँ जान फूंकी दे।  पण कॉंग्रेसी सही जबाब द्यालु तो वै तैं कु कॉंग्रेसी ब्वालाल ? संतप्त कॉंग्रेसी जबाब दींदु बल अल्पसंख्यकों ने नरेंद्र मोदी को सफाचट नकार दिया है। पण खटिक -कसाई पत्रकार फिर पुछद कि क्या भ्रस्टाचार मुद्दा छयो ? अब इखम बि  पंजाब का मुख्यमंत्री स्वर्गीय  प्रताप सिंग कैरो का पश्चात कै बि कॉंग्रेसीम जबाब नि हूंद , तो कॉंग्रेसी जबाब दींदो बल जु भ्रस्टाचार मुद्दा हि हूंद त यदुरप्पा तैं वोट किलै मिलदा ? असल मा कॉंग्रेसी जबाब दीण चांदो छौ बल जब भ्रटाचार मा लिप्त बीर भद्र सिंह हम तै हिमाचल मा जीत दिलै सकुद त साफ़ च कि लोग भ्रस्टाचार प्रेमी छन।  
इनी भाजपा का बुरा हाल छन।  माना कि आप चटपटो मटन -भात -कळेजी पेट भरिक खावो या चटकाओ अर फिर इथगा स्वादिस्ट भोजन का बाद आप तैं नीम रस की आचमन पीण पोड़ल तो तुमर क्या हाल ह्वालु ? भाजपान तीन राज्यों मा आशा से बिंडी जीत हासिल कार , किन्तु बिचारा भाजापाई उत्सव ही नि मनै सकणा छन। अब दिल्ली  चुनाव मा  आम आदमी पार्टी का 28 एमएलए आण  से  दिल्ली विधान सभा मा सर्वाधिक 31 जितणो बाद बि भारतीय जनता पार्टी बेउत्तर च।  
जब भाजपा का नेतौं से पूछे जांद कि क्या दिल्ली में नरेंद्र मोदी का जादू नही चला ? तो बिचारा भाजपा का नेता सच नि बोल सकदन कि नरेंद्र मोदी का असर नि हूंद त हमर हाल बि कॉंग्रेस जन हूण छौ। जब पूछे जांद कि दिल्ली में नरेंद्र मोदी का जादू नही चला ? तो भाजपा का नेतौं एकी स्टीरिओ टाइप जबाब हूंद बल प्रधान मंत्री त नरेंद्र मोदी ही बणल। 
 अर पत्रकारुं समिण झूट बुलण भौत ही सरल च।  दस -बीस मिनट गूवक घूँट पीण मा नेताउं कुछ नि जांद।  बेशर्मी , बेहयाई, लज्जाहीनता  राजनेताउं का सदाबहार जेवरात , कवच, कुंडल, मुर्खल  हूँदन। 
पण सबसे कठण काम आत्मचिंतन का हूंद।  सरा दुनिया तैं ठगण सरल हूंद पण मनिख अफु तैं ठग ही नि सकुद। 
जब कॉंग्रेसी आत्म चिंतन कारल तो  भ्रस्टाचार , मंहगाई , आत्मकेंद्रित नेतौं कुकर्म त ऊंक समिण आला कि ना ?
जब कॉंग्रेसी आत्मचिंतन कारल तो ऊंकी आत्मा पूछलि कि ना कि 125 साल पुराणि पार्टी एक परिवार पर ही निर्भर किलै च ? कॉंग्रेसी नेता की आत्मा एक सवाल तो कारलि  ही कि प्रजातंत्र मा विकेंद्रीकरण एक आवश्यक तत्व हूंद अर तुमन विकेन्द्रीयकरण को भट्टा किलै बैठाइ ?
ऊनि भाजपा का नेतौं तैं ऊंकी आत्मा सवाल पूछलि कि तुम तैं संसद मा जनतान विरोधी पार्टी का रूप मा भेजि छौ कि संसद बंद करणो बान भेजि छौ ? आत्मचिंतन मा भाजपा नेता की आत्मा का प्रश्न यु  बि त होलु कि जख बि कॉंग्रेस अर भाजपा का अतिरिक्त ताकतवर तिसर राजनीतिक दल हूंद ऊख तुमर घमंड कख हर्ची जांद।  उख तुम लुंज किलै छंवां ? किलै इथगा सालों बाद बि हिन्दीलैंड तक सीमित छंवां ? 
पण नेताओं द्वारा आत्मचिंतन बि अपण आत्मा तैं धोखा दीणो बान हूंद।  बकळि जिकुड़ी का नेता , मोटी चमड़ी का नेता जै तरां से  जन मानस तैं धोखा दींदो वो अपणी आत्मा तैं बि भरमाण , धोका दीण सीखि गे।  राजनैतिक नेता का वास्ता आत्मा अर जनता मा अब कुछ फरक  नि रै ग्याइ।   



Copyright@ Bhishma Kukreti  10 /12/2013 


[गढ़वाली हास्य -व्यंग्य, सौज सौज मा मजाक मसखरी  दृष्टि से, हौंस,चबोड़,चखन्यौ, सौज सौज मा गंभीर चर्चा ,छ्वीं;- जसपुर निवासी  के  जाती असहिष्णुता सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ढांगू वाले के  पृथक वादी  मानसिकता सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;गंगासलाण  वाले के  भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; लैंसडाउन तहसील वाले के  धर्म सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;पौड़ी गढ़वाल वाले के वर्ग संघर्ष सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी  के पर्यावरण संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;मध्य हिमालयी लेखक के विकास संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;उत्तरभारतीय लेखक के पलायन सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; मुंबई प्रवासी लेखक के सांस्कृतिक विषयों पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; महाराष्ट्रीय प्रवासी लेखक का सरकारी प्रशासन संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; भारतीय लेखक के राजनीति विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य;सांस्कृतिक मुल्य ह्रास पर व्यंग्य , गरीबी समस्या पर व्यंग्य, आम आदमी की परेशानी विषय के व्यंग्य, जातीय  भेदभाव विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; एशियाई लेखक द्वारा सामाजिक  बिडम्बनाओं, पर्यावरण विषयों   पर  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनीति में परिवार वाद -वंशवाद   पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ग्रामीण सिंचाई   विषयक  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, विज्ञान की अवहेलना संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य  ; ढोंगी धर्म निरपरेक्ष राजनेताओं पर आक्षेप , व्यंग्य , अन्धविश्वास  पर चोट करते गढ़वाली हास्य व्यंग्य    श्रृंखला जारी  ]