उत्तराखंडी ई-पत्रिका की गतिविधियाँ ई-मेल पर

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Friday, December 13, 2013

चुनावी विश्लेषकों द्वारा अति सरलीकृत विश्लेषण

भीष्म कुकरेती 

 टीवी चैनेलों मा जब आप पार्टी कु योगेन्द्र यादव ब्वालो कि सरा भारत मा शहरी मतदाता दिल्ली  जन आम आदमी पार्टी तै वोट द्याला तो बात समज मा आदि च बल यादव अपण पार्टी का प्रोपेगेंडा बान अति सरलीकृत विश्लेषण रीति अपनाणु च।  राजनैतिक पार्टी वाळु कुण अति सरलीकृत रीति अपनाण माफी लैक  च। 
टीवी चैनेलों मा जब भाजापा का पीयूष गोयल ब्वालो कि सोसल मीडिया को इथगा प्रभाव च कि गरीब, रस्ता मा सीण वाळ हरिया काका बि नरेंद्र मोदी तैं प्रधान मंत्री बणाण चाणु च।  अतिसरलीकरण करण राजनैतिक पार्टी वाळु कुण एक धारदार हथियार च। 
जब तृणमूल कॉंग्रेस या अन्य दल वाळ बुल्दन बल भारत मा चार छै करोड़ लोग ही नरेंद्र मोदी तैं जाणदन तो यो अति सरलीकरण क्वी नी च किलैकि राजनीतिकों से या उम्मीद करे जै सक्यांद।
जब कॉंग्रेस का प्रवक्ता राहुल गांधी तैं इंदिरा गांधी से जादा जनप्रिय नेता बुल्दन तो क्वी भारी भूल नि माने जालि।  यदि सरलीकृत विश्लेषण से क्वी  राजनैतिक पार्टी पार्टी रक्षा कवच पैरो तो यु सरलीकरण जायज च। 

पण  जब न्यूट्रल राजनैतिक विश्लेषक जाने अनजाने मा  सरलीकृत विश्लेषण कारन तो बात समज से भैर ह्वे जांद। 
आप  पार्टी दिल्ली मा जीत तो यांक अर्थ कतै नी  च कि मुम्बई , कोलकत्ता , लखनऊ , जयपुर मा बि आम आदमी पार्टी तैं वा ही उर्बरक धरती मीललि ज्वा उर्बरक धरती आम आदमी पार्टी वाळ तैं दिल्ली मां मील। अब आम आदमी पार्टी सभी शहरों में अपना परचम लहरायेगी जन वाक्य सरलीकृत वाक्य च जो अनुभवी पत्रकारों का मुख से नि निकळण चयेंद। 
एक वाक्य छौ क्या दिल्ली में मोदी का जादू नही चला और हैंक वाक्य छौ क्या राहुल गांधी का जादू नही चला ?
यी द्वी वाक्य अति सरलीकृत विश्लेषण छन। 
चुनाव , वोटिंग सबि एक जटिल प्रक्रिया च जख मा केवल करिश्माई नेता ना बल्कणम संगठन अर हौर बि तत्व छन जो काम करदन। 
राहुल गांधी अबि बि कॉग्रेस्युं वास्ता संजीवनी च।  राहुल गांधी बाद कॉंग्रेस माँ कु नेता च जु आसाम का एक गाँव मा बि भाषण दे सकुद तो मदुरई मा बि? आज  कॉंग्रेस्युं तैं एकजुट गांधी परिवार ही कौर सकुद। 
राहुल गांधी या क्वी बि केंद्रीय या राष्ट्रीय नेता चुनावुं टैम पर भीड़ जुटा बि द्यालो अर संगठन कमजोर च तो चुनाव जितण कठण ही च।
फिर कथगा प्रत्यासी कम्प्लिसेन्सी का शिकार ह्वे जांदन अर वो अपण रणनीति तैं उन नि चलान्दन जन चलण चयेंद।  
बाड़ -वाड -फेंस मा बैठ्याँ वोटर्स चुनाव का पासंग होंदन अर यूं वॉटरूं पर ध्यान नि  जावो तो सबी चुनाव गणित अर विश्लेषण सरलीकृत ह्वे जांदन।
वोटिंग मा द्वी बजी से पांच बजे तक की वोटिंग अति महत्वपूर्ण हूंद . जु बि पार्टी द्वी बजे से लेकि पांच बजे तक वोटरों तैं खैंचीक लांदी वा पार्टी कांटे की टक्कर जन जगाऊँ मा बाजी मार जांद , इखमा ही  संगठन काम आंद। 
कॉंग्रेस पर यूपीए द्वितीय मा इथगा दाग लग्यां छन कि भगवान बि ऐ जावो तो भी कॉंग्रेस का पक्ष मा दलील दीण कठण च।
नरेंद्र मोदी का रास्ट्रीय स्तर पर आण सरल च , ऊनि केजरीवाल ऐंड पार्टी का वास्ता बि अवतरित हूण कुछ हद तक सरल च किलैकि नरेंद्र मोदी का  रास्ट्रीय स्तर की पैथरै स्लेट साफ़ च अर केजरीवाल की स्लेट तो बिलकुल ही साफ़ च। 
चार हिन्दीलैंड राज्यों का चुनाव ना ही लोक सभा का आइना छन अर ना ही यूँ चुनावुं रिजल्टुं तैं खारिज करे सक्यांद।  
चुनाव मा जितण इन च जन खाणक बणाण।  लूण से दाळ स्वादिस्ट ह्वे ग्याइ  एक सरलीकृत विश्लेषण च किलैकि दाळ बणाण मा कथगा ही घटक अर प्रक्रिया दाळ तैं सवादि बणान्दन। इख तलक कि भोजन तैं कै हिसाब से परोसे गे  बि भोजन को स्वाद बदल दींद।  इनी चुनाव हूँदन अर चुनावी रिजल्ट तैं एक कारण से विश्लेषित नि करे सक्यांद। 
विश्लेषकों से उम्मीद हूंद  कि वूंकि विवेचना सरलीकृत नि  ह्वावो 
 
Copyright@ Bhishma Kukreti  9 /12/2013