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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, December 22, 2013

विरोधी दल को काम च कठिण सवाल पुछण तो सरकार को काम च जबाब नि दीण

विरोधी दल को काम च कठिण सवाल पुछण तो सरकार को काम च जबाब नि दीण 

                             चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती 

(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
  घ्याळ दा याने शिक्षा मंत्री क  दुसर दिन च। घ्याळ दा सुबेरि उठ जांद तो आज बि सुबेरी उठ।  घ्याळ दान ड्राइवर याने ख्यातवाल जीकुण ब्याळि रात बोलि याल छौ कि भोळ मि पैदल ही कार्यालय पौंछ जौल तो आणै जरुरत नी  च। घ्याळ दा क सुचण छौ कि सुबेर सुबेर चलिक जाला तो  खुट चलणा राला निथर खुटुंन  जाम ह्वे जाण ।
क्षेत्र से पार्टी का वरिष्ठ नेता बि अयां छन वुं तैं दिन मा मिलण। 
घ्याळ दा  पर ऑफिस पौंछिन अबि तलक स्टाफ आदि क्वी नि ऐ छा। 
चतुर्थ श्रेणी कु एक कार्मिकन शिक्षा मंत्री तैं कैबिन तक पौंछए। 
घ्याळ दा अपण कुर्सी मा बैठिक ब्याळि शिक्षा विभाग का चीफ सेक्रेटरी करम सिंह रावत जी अर शिक्षा मंत्री को प्राइवेट सेक्रेटरी माणावाल जी अर घ्याळ डाक मध्य बातचीत  याद करण मिसे गेन। 
घ्याळ दा -करम सिंग  जी ! यि  मंत्री अर सरकारी तंत्र कु असली काम क्या च ?
करम सिंग - जी ! मुख्य रूप से द्वी खंड छन।  एक च राजनैतिक खंड अर दुसर च प्रशाशनिक याने गवर्नेंस 
घ्याळ दा - राजनैतिक खंड क्या च ?
करम सिंग -विरोधी पार्टी को काम च शिक्षा मंत्री से सर्वथा कठिन  अर बेकार सवाल करण अर सरकार को काम च सवालुं जबाब नि दीण। 
घ्याळ दा -पण विधान सभा मा सवालुं जबाब त दीणि पोड़ल कि ना ?
करम सिंग -हां पर अधिकतर सवाल जबाब दयावो या नि द्यावो को बरोबर ही होंद। 
घ्याळ दा - इन कनकैक ह्वे सकुद ?
माणावाल - आप सर तैं एक सवाल पुछिक त दिखावा ?
घ्याळ दा - अति दक्षिण गढ़वाल मा आइटीआइ स्कूल कब खुलली 
करम सिंग - आप तैं सत्य जबाब चैंद कि राजनैतिक जबाब ?
घ्याळ दा - सही सत्य। 
करम सिंग -अब उख आइटीआइ स्कूल खुलि नि सकद।  
घ्याळ दा -पण ये उत्तर से तो सरकार की बेज्ज्ती ह्वे जालि ?
करम सिंग - इलै इ त मीन ब्वाल कि सरकार को काम च जबाब नि दीण। 
घ्याळ दा - रावत जी जब सवाल पूछे गए हो तो जबाब बि दीणि च। 
करम सिंग -इकम राजनैतिक जबाब ही काम आंद अर राजनैतिक जबाब अधिकतर जबाब नि दीणो बराबर ही होंदन। 
घ्याळ दा - सत्य अर राजनैतिक जबाबुं अंतर कनकै ह्वै सकदन ? 
करम सिंग -माणावाल जी जरा विधान सभा मा ये विषय पर पुछ्यां सवाल जबाबु बारा मा अपण लैपटॉप मा द्याखदि कि क्या सवाल छया  अर क्या जबाब दिए गे 
माणावाल (अपण लैपटॉप दिखद ) -सर ! 2009 मा शिक्षा मंत्रीन जबाब दे छौ कि चूंकि आइटीआइ भवन से पर्यावरण विशेष रूप से जंगली जानवरों व कांटेदार झाड़ियों के जीवन पर  प्रभाव पड़ रहा है इसलिए इसलिए वैज्ञानिक टोली अन्वेषण कर रही है कि भवन से पर्यावरण पर कितना प्रभाव पड़ेगा।  2010 मा वै ही प्रश्न को जबाब मा भूतपूर्व शिक्षा मंत्री न विधान सभा मा बोलि छौ कि जंगली जानवरों चलने के वैकल्पिक रास्तों के बारे में अध्ययन चल रहा है।  सन 2011 मा शिक्षा मंत्री क उत्तर छौ कि जंगली झाड़ियों के लिए अन्य कौन सा स्थान आरक्षित किया जाय पर खोज हो रही है। 2012 मा विधान सभा मा बुले गे कि भूगर्व वैज्ञानिक , जंतु शास्त्री व वनस्पति शास्त्री इस बात पर विचार कर रहे हैं कि जंगली जानवर अर जंगली झाडियों के न होने से इस क्षेत्र के पर्यावरण को कितना नुकसान होगा। 
घ्याळ दा - पण जब आइटीआइ भवन बणण वाळ छौ तो इथगा सारा अध्ययन नि ह्वे छौ ?
करम सिंग -मंत्री जी ! वै इ अध्ययन की रिपोर्टुं से त भूतपूर्व मंत्रीन जबाब दे छौ। 
घ्याळ दा - मतबल ?
करम सिंग -इन च मंत्री जी ! एक आम  कूड़ लगांद दैं बि दसियों आशंका तो हूंदी छन कि ना ?
घ्याळ दा - हां 
करम सिंग -फिर हम ऊं आशंकाओं का विश्लेषण करदा अर जु बेकार की या कम महत्वपूर्ण आशंका हूँदन उंकी उपेक्षा कौर दींदा कि ना ?
घ्याळ दा -हां 
करम सिंग -पण यदि वीं जगा मा कूड़ नि बणानै  तो हम छुटि से छुटि आशंका तै बि बड़ी आशंका बतैक उखम कूड़ नि बणादा। 
घ्याळ दा -सही बात च। 
करम सिंग -बस यही बात च।  भूतपूर्व मंत्री जीन छुटि -मुटि बेकार की आशंकाओं तै बड़ी आशंका बतैक सिद्ध कार कि उखम आइटीआइ स्कुल खुलणम परेशानी च। 
घ्याळ दा -यदि मि तैं विधान सभा मा जबाब दीण पोड़ तो म्यार जबाब क्या ह्वाल ?
करम सिंग -यदि जबाब नि दीण तो आपको जबाब होलु कि वै स्थान की झाड़ियों के कटने से निकटवर्ती गाँवों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़  सकता है। 
घ्याळ दा - क्या उयाद जबाब च यु ?
माणावाल - सर ! भवन निर्माण से पैल जु आकलन हवे छौ उखमा एक आशंका या बि च । 
घ्याळ दा -यदि स्कूल कु काम दुबर शुरू करण ह्वावो तो म्यार क्या जबाब होलु ?
करम सिंग -अब पता नी  च कि काम बंद किलै ह्वे धौं ? अब तो नया शिरा से काम ही कराण ठीक रालो। 
घ्याळ दा - मि विधान सभा मा जबाब की बात करणु  छौं। 
माणावल -तो आपक राजनैतिक जबाब होलु कि अति शीघ्र क्षेत्र में आइटीआइ स्कूल खुल जायेगी।
घ्याळ दा -पण यदि सवाल ह्वाल कि स्कूल कब खुलेगा तो जबाब क्या होलु ?
माणावाल -चूँकि अब आप सत्य बुलण चाणा छन तो अब यु जबाब प्रशाशनिक हिसाब से ही दिए जालु 
घ्याळ -याने कि राजनैतिक जबाब झुठा  अर प्रशासनिक जबाब सत्य ?
करम सिंग - एस मिनिस्टर  ! नो सर 
घ्याळ - क्या ?
करम सिंग - एस मिनिस्टर मतलब मि आप तै सम्बोधित करणु छौं 
घ्याळ दा - अर नो माने 
करम सिंग - नो माने च कि  सरकार कबि बि झूठ नि बुल्दी अर प्रशासन तै झूठ बुलणो संवैधानिक आदेस  कतै नी  च। 
घ्याळ दा अपण सोच मा इथगा तल्लीन छा कि उंन सूणी नी कि माणावाल जी दरवाजा भचोळिक बुलणा छन , " सर ! में आइ कम इन।  आइ ऐम  माणावाल"
कैबिन का दरवाजा भचोळणो  आवाज से   घ्याळ दा की तंद्रा टुटि।  घ्याळ दान ब्वाल , "क्वा च।  भितर आवो। "
माणावाल जी भितर ऐन।  माणावाल जीक दगड़ पांच  चपड़ासी दस दस फ़ाइल लेक भितर आणा छा। 



Copyright@ Bhishma Kukreti  23/12/2013 


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