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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Friday, December 20, 2013

गढ़वाळि अपण गढ़वळि बॉस तैं उल्लू का पट्ठा समजद

भीष्म कुकरेती 


 तौळ जब द्वी ड्राइवरुं छ्वीं लगणि छे त प्राइवेट सक्रेटरी माणावाल जी कुछ टैमौ बान फस्ट फलोर पर  ऐ छा अर भैर  थोकदार ड्राइवरौ द्वी चार बथ सुणिन अर फिर मथि शिक्षा मंत्री का कक्ष मा गेन।
रूम माँ जान्दि माणावाल जीन मंत्रालय का चीफ सक्रेटरी जीना मुख कौरिक ब्वाल पण सुणाणा मंत्री जी तैं ही छा - चीफ साब ! दीज गढ़वालीज  वुड नेवर लिव इन प्रेजेंट नोट वुड ऐक्सेप्ट द रियलिटी !
घ्याळ दा यांने शिक्षा मंत्रीन पूछ - क्या बात ह्वे माणावाल जी तुमर लहजा मा तिबासी छांच जन खटास किलै च ?
माणावाल - मंत्री जी ! क्या बोलें ! लखनऊ में भी यही हाल था अर इक बि यी हाल छन। गढ़वाली गढ़वाली बॉस तैं उल्लू का पट्ठा समजदन अर दुसर जातिक कै बि   मनिख तैं बड़ो बॉस !
चीफ सक्रेटरी - मिस्टर माणावाल जी ! कम टु द  प्वाइंट 
माणावाल जी - वू नीन भू संरक्षण विभागौ ड्राइवर थोकदार जी वु अबि बि थोकदार , कब्जादार , खैकर की बात करणा रौंदन। 
चीफ सक्रेटरी करम सिंग रावत - माणावाल ! असल मा गढ़वाल्युं पुराणो सोसल स्ट्रक्चर इन छौ कि जातीय अंतर छोड़िक बकै क्वी हौर आर्थिक या सामजिक या व्यवहारिक , भाषाई अंतर नि छौ अर ब्रिटिश पीरियड से समाज मा उंच नीच का जन कि पोजीसन , अर्निंग , माइग्रेसन कु स्थान आदि नया नया दसियों पैरामीटर ऐ गेन। 
शिक्षा मंत्री - रावत जी आपक आकलन सही च कि पैल एक आम गढ़वाली क्षेत्र मा जातीय अंतर छोड़िक क्वी इथगा भारी अंतर नि छौ।  बस जैं  सरयूळ बामण मौक  बीस खारी जौ ह्वे जावन वा मौ वै साल सौकार पण दुसर साल पाळन (ओस से) जौ फुके जावन तो वा मौ बि शिल्पकारु दगड़ जंगल का बसिंगु , तैडु , पातड़ी, च्यूं आदि पर गुजारा करणो मजबूर ह्वे जांदी छे।  द्वी जात्युं जंगल पर इकसनि निर्भरता शिल्पकार अर उच्च कुलीन ब्राह्मण का भेद ख़तम कौर दींद छौ . 
चीफ सेक्रेटरी - सर ! यू आर अब्सिल्यूटली राइट।  किन्तु अब आर्थिक , सामाजिक अंतर भौत बड़ो ह्वे गे। 
प्राइवेट सेक्रेटरी - सर ! हां पण हम तै कुछ त ख़याल करण चयेंद कि जमानो बदल गए।  चीफ साब आप तो ऊं बिष्ट जी तै जाणदा ही छ वो जो परार सक्रेटरी ह्वेक रिटायर ह्वेन। वो बालम सिंग जी तब लखनऊ मा अपर डिवीजन कलर्क से अंडर सेक्रेटरी ह्वे गे छा।  अचाणचक ऊंक डिपार्टमेंट मा ऊंक गांवक एक चपड़ासी ट्रांसफर ह्वेक आयि।  अर वैन सरा डिपार्टमेंट मा बुलण शरू कौर दे बल स्यु   बालम सिंग  इख  बड़ो साब बणदु पण उख गां मा तैक  बुबा त हमर हळया छौ। तौंक एकी उबर -मंज्यूळ च अर हमर चार दुभित्या तिपुर च। 
चीफ सेक्रेटरी - येस येस  ! आइ रिकाल दोज इंसिडेंट्स।  बिचारा बिष्ट जी तैं लोगुन पीठ पैथर हळया बुलण शुरू कौर दे छौ।  बिचारा बिष्ट जीन अपण ट्रांसफर गोरखपुर कराइ दे।  
शिक्षा मंत्री - बिचारा बिष्ट जी ! मि जाणदो छौं ऊं तैं।  पांच पास करिक ऊन प्राइवेट ही बीए कार अर आंतरिक विभागीय परीक्षा पास करिक इथगा बड़ी पोस्ट पर पौंछिन। 
प्राइवट सक्रेटरी - दैट्स व्हट आइ ऐम ट्राइंग टु एक्सप्लेन। कि वू चपड़ासी बिष्ट बिजातीय लोअर डिवीजन कलर्कु त  खुट मा गंड गंड पड़दु छौ पण अपण गांवक अपण जातिक मनिख तैं बॉस मानदु इ नि छौ। उल्टां इंसल्ट करदु छौ। 
शिक्षा मंत्री -पण सच बुलिन रावत जी ! क्या जु गढ़वाली उच्च पद पर छन याने हाइ पोजीसन मा छन वो बि लोअर पोजीसन का गढ़वाल्यूं तैं तुच्छ नि समजदन ?
चीफ सेक्रेटरी - यस मिनिस्टर ! येस ऑफकोर्स ! हम उच्च पद पर बैठ्यां गढ़वाली बि कम नि छंवां , अर यी आप तैं सोसल कार्यकर्मो मा साफ़ दिख्याल।  जब इन सामजिक संस्थाओं कि सभाओं या शादी ब्यौ मा चपड़ासी पद का या कलर्क पद का कुछ ब्वालो तो हम आईएएस या प्रोविंसियल सर्विस का लोग बोलि दींदा कि तैक सोच चपड़ासी की ही च या क्लर्क की सोच त कलर्क की ही रालि।  हम उख सोसल सर्कल मा यदि क्वी चपड़ासी उच्च पद पर बैठि जांद तो वी हाइ पोजीसन पीपल आल्सो डोंट ऐक्सेप्ट दैट रिएलिटी।  हम उच्च पदेन  गढ़वाली स्वीकार इ नि करदां कि क्वी चपड़ासी सोसल सर्कल मा बड़ो पद पर ह्वे सकद।  हम हाइ पोजीसन वाळ वै चपड़ासी की परोक्ष या अपरोक्ष रूप से बेज्ज्ती कौरि दींदा। 
शिक्षा मंत्री - यांक समाधान क्या च ?
चीफ सेक्रेटरी - सर ! यांक समाधान कुछ नी  च।  अब जब स्टेटस का इथगा दसियों माप दंड याने पैरामीटर ह्वे गेन तो हम तै रोज ही इन घटनाओं से रुबरु हूण इ पोड़ल।  आज तो कम च भोळ हमारी सामजिक स्थितियों मा कथगा इ लेयर्स याने  अंतर आलु तो इन विषमताओं मा और बि बढ़ोतरी होलि।  हम कुछ नि कौर सकदां।  जस्ट टु लिव इन प्रजेंट  याने वर्तमान मा जीवो ही समाधान च।  सोसल सर्किल मा जो बड़ो च वै तैं महत्व द्यावो अर प्रशासकीय जिंदगी मा जो बड़ च वै तैं स्वीकार कारो। 
शिक्षा मंत्री - अब ब्वालो माणावाळ जी !
प्राइवेट सक्रेटरी - एस मिनिस्टर ! बॉस इज ऑलवेज  राइट ! 
शिक्षा मंत्री (जोर से हंसद ) -तब क्या ह्वालु जन मि मिनिस्टर नि ऱौलु ?
पाइवेट सेक्रेटरी - मिनिस्टर सर  ! तब की तब दिखे जालि। 
शिक्षा मंत्री - चलो अब मि ड्यार जांदु।  एडमिनिस्ट्रेसन का बारा मा भोळ बात करला। 
प्राइवेट सेक्रेटरी - जी मंत्री जी ! ऑलवेज ऐट युअर सर्विस ! 



Copyright@ Bhishma Kukreti  20 /12/2013