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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, December 16, 2013

घ्याळ दा शिक्षा मंत्री कनकै बौण ?

चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती 

     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

घ्याळ दा  विधान सभा का टिकटु बंटवारा टैम पर स्याळ दा की पैरवी करणो देहरादून छौ।  पण स्याळ दा का विरोधी कुरस्यळ काका अर गूणी बाडान साफ़ बोलि दे कि स्याळ दा तैं पार्टी टिकेट देलि त वून स्याळ दा हर्वै दीण। उना  स्याळ दा अर कुरस्यळ काकान बि बोलि दे कि यदि गूणी बाड़ा तैं टिकेट मीलल तो उंन गूणी बाड़ा हर्वे दीण।  पार्टी कुरस्यळ काका तैं टिकेट दे नि सकदी छे किलैकि गूणी बाडा अर स्याळ दादान कुरस्यळ काका हरवै दीण छौ।  ये चक्कर मा अचाणचक घ्याळ दा तैं विधान सभा कु टिकेट बि मिल गे अर घ्याळ दा एमएलए बौण ग्यायि। 
सीट बि  इन च कि घ्याळ दा तै मंत्री बणाण जरूरी ह्वे गे। 
  चूंकि जै देस मा पंचु नामांकन बि दिल्ली से ह्वावो तो वै देस मा प्रदेस मंत्री मंडल गठन बाबत गम्भीर बैठक दिल्ली मा हूण जरूरी च।  तो कै तै मंत्री बणाण कै तै मंत्री नि बणाण की बैठक दिल्ली मा चलणी छे। 
मुख्यमंत्री -शिक्षा मंत्री कै तै बणये जावो ?
प्रदेस प्रभारी -खड़क सिंह तैं शिक्षा मंत्री बणावो। . साला तैं डंड मिलण चयेंद। 
केंद्रीय पर्यवेक्षक - हां ! खड़क सिंह पर  भौत चर्बी चौढ़ गे।  हाई कमांड की एन बड़ी जगहंसाई करवाइ।
प्रदेस  पार्टी अध्यक्ष -ओ तो ठीक च पर वै धुर्यान इन तुच्छ मंत्रालय लीण से मना कौर दीण अर कखि उ अपण चार पांच एमएलए लेक पार्टी छोड़ि द्याल तो क्या ह्वाल ?
मुख्यमंत्री - नै नै ए बगत खड़क सिंग जी तैं तुच्छ मंत्रालय देक बेज्ज्ती  करण ठीक नी च।  खड़क सिंग जीकी बेज्ज्ती समय आण पर करे जालि। 
प्रदेस पार्टी अध्यक्ष - तो भवानी दत्त जी तैं शिक्षा मंत्रालय दे दिवां ?
प्रदेस प्रभारी -तुमर दिमाग खराब हुयुं च। भवानी दत्त जी हाइ कमांड का ख़ास आदिम छन  तो  भवानी दत्त जी तैं इथगा गंदो , बेकारौ, गैरजरूरी  मंत्रालय देल्या त हाइ कमांड हमर बारा मा क्या स्वाचल ?
मुख्यमंत्री - तो मिसेज सुचेता आर्य तैं शिक्षा मंत्री   …। 
प्रदेस अध्यक्ष - देखो जी मुख्यमंत्री ! तुम मेरी खुले आम बेज्ज्ती करणा छंवां।  इथगा महत्वहीन , फिस्सडी मंत्रालय म्यार आदम्युं  तैं देल्या त पता च मि क्या से क्या कौर सकुद। 
प्रदेस प्रभारी - तो भंवर लाल गुप्ता जी तैं शिक्षा मंत्री ....
केंद्रीय पर्यवेक्षक - नै नै गुप्ता जी भौत काम का आदिम छन।  पार्टी तैं चंदा वी दिलवांदन।  गुप्ता जी तैं इन सड्यू गऴयुं, बेकार  शिक्षा मंत्रालय नि दीण।    
पार्टी प्रदेस अध्यक्ष - डा. सिद्धार्थ जी तैं शिक्षा मंत्री ?
मुख्यमंत्री - डा सिद्धार्थ जी शिक्षा का  बड़ा ज्ञानी छन। म्यार बुबा जी बरफ नंदन जीक बुलण छौ कि कबि बि एक्सपर्ट तैं वो मंत्रालय नि दीण चयेंद जांक वो एक्सपर्ट ह्वावो। 
केंद्रीय पर्यवेक्षक -हाँ बरफ नंदन जी सै बुल्दा छा।  एक्सपर्ट तै इन मंत्रालय दीण चयेंद जांक वेकि समज कम ह्वावो।
पार्टी प्रदेस अध्यक्ष- तो मुस्सदी लाल टमटा जी तै शिक्षा मंत्रालय दे दिया जाय।
प्रदेस प्रभारी - नै नै ! टमटा जी मा संगठनात्मक शक्ति भौत च। माना कि शिक्षा मंत्रालय बेकार मंत्रालय च पण पहाड़ों मा चुनाव जितण त मास्टर हमर कब्जा मा हूण चैन्दान।   शिक्षा मंत्रालय देल्या त टमटा जीन सबि शिक्षक संघ  अर छात्र सँघुं पर कब्जा कौर दीण।  मुस्सदी  लाल जी तैं इथगा ताकतवर नि बणान कि भ्वाळ वो हम तैं ही आँख दिखाण बिसे जावन।
 केंद्रीय पर्यवेक्षक -तो सुलेन्द्र सिंग जी तै शिक्षा मंत्रालय दे द्यावो। 
प्रदेस अध्यक्ष -नै नै ! हम सुलेन्द्र सिंग जी तै इन घटिया, उयाद , बेगैरत मंत्रालय देक नाराज नि कौर सकदा।  भ्वाळ विरोध्युं से विधायक तुड़ण पोड़ल तो सुलेन्द्र सिंग जीन ही काम आण। 
प्रदेस प्रभारी - आप बुलणा छा कि क्षेत्रीय अर जातीय समीकरण बैलेंस करणो बान घ्याळ दा तै मंत्री बणाण आवश्यक च ?
मुख्यमंत्री - वु त ठीक च पर घ्याळ दा तैं क्वी अनुभव नी  च।
केंद्रीय पर्यवेक्षक - शिक्षा मंत्रालय ही तो चलाण क्वी उद्योग मंत्रालय त चलाण नी च कि अनुभव की आवश्यकता ह्वावो। घ्याळ दा तैं शिक्षा मंत्री बणै द्यावो।  नै नै छन तो बोलि बि नि सकदन कि इथगा महत्वहीन मंत्रालय मील !
सबि - हाँ ठीक च। घ्याळ दा तैं शिक्षा मंत्रालय देक  क्षेत्रीय अर जातीय समीकरण बि बैलेंस ह्वे जाल अर घ्याळ दा पर क्वी फरक बि नि पोड़ल कि इथगा बेकार मंत्रालय मील !  
मुख्यमंत्री - चलो शिक्षा मंत्रालय की आफत त खतम ह्वे गे।  अब महत्वपूर्ण मंत्रालयों बारा मा गम्भीरता पूर्वक सुचे जावो।


Copyright@ Bhishma Kukreti  15/12/2013 


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