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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Friday, December 13, 2013

उत्तराखंडी समाज में पर्यटन व आथित्य की वर्तमान एवं भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता

    Uttarakhand  Society Should Always Keep Eye on Present and Future Trends in Tourism and Hospitality 

   (   Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series-9 )

                                    उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 9 
                                                    लेखक : भीष्म कुकरेती                              
                                                 (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )
                               मैंने अपने पर्यटन व आथित्य संबंधी सभी लेखों में सदा ही पर्यटन उद्यम  विकास में समाज को अधिक महत्व दिया है  । मानना है कि किसी भी भूक्षेत्र में सरकारी अधिकारी  व नेता भी तो समाज की ही देन है।  सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर बना सकती है किन्तु पर्यटन वृद्धि समाज के जिम्मे रहती है। 

            पर्यटन वा आथित्य उद्योग में वर्तमान व भविष्य की प्रवृतियों को पहचानना व प्रवृति अनुसार पर्यटन सुविधाओं में परिवर्तन लाना पर्यटन का एक मुख्य महत्वपूर्ण  कार्यक  है। समाज को हर समय पर्यटन व आथित्य प्रवृतियों के प्रति संवेदन शील होना आवश्यक है। अधिकतर गढ़वाली व कुमाऊनी लोग कहते रहते हैं कि गढ़वाल -कुमाऊं के गाँवों -शहरों में होटल आदि पर अब बाहर वालों का प्रभुत्व हो गया है।  वास्तव में यह दर्शाता है कि पुराने होटल स्वामी पर्यटन व  आथित्य उद्यम में नई प्रवृति को समझने में सर्वथा नाकामयाब रहे।  यदि पहाड़ों के होटल आदि में बाहरी लोगों का अधिपत्य हो गया तो साफ़ है कि सम्पूर्ण पहाड़ी समाज टूरिज्म में नई प्रवृति , पर्यटकों की नई आशा , नई आकांशाओं को पहचानने में सर्वथा नाकामयाब रहा है।
               पहाड़ी समाज को समझना चाहिए कि यदि समाज पर्यटन उद्यम सेवा के सभी माध्यमों में अधिपत्य चाहता है तो उसे पर्यटन व आथित्य में प्रवृति के बारे में संवेदनशील होना पड़ेगा।
              पर्यटन में कुछ नये प्रवृतियों के बारे में संक्षिप्त जानकारी 

                                                         विकल्पों की अधिकता 

                 पर्यटकों के पास अब विकल्प खुल गये हैं। धार्मिक पर्यटन में भी अब पर्यटक अति संवेदनशील हो गया है। एक समय था दुग्गडा (पौड़ी -गढ़वाल ) में यदि भोजन चाहिए तो केवल स्व ह्रदय राम कुकरेती संचालित होटल था और पर्यटकों को इसी होटल में आना पड़ता था।  अब कुकरेती भोजनालय बंद हो गया है और कई विकल्प पर्यटकों के लिए  खुल गए हैं। अब पर्यटक कोटद्वार से ही नही अपने गाँव से सैंडविच भी ला सकता है।  कुकरेती भोजनालय बंद होने के पीछे कारण  स्व हृदय राम कुकरेती की मृत्यु नही अपितु पर्यटन में नई नई प्रवृतियों का आना है। 
  देहरादून में रेलवे स्टेसन पास गांधी रोड में  पुंडीर परिवार संचालित  स्टैण्डर्ड होटल का अच्छा खासा नाम था किन्तु अब यह होटल एक आम होटल है।  कारण होटल में पर्यटन उद्यम में बदलाव के अनुसार परिवर्तन नही हुआ।  

                                                 पर्यटको को विशेष , अभिन्न अनुभव चाहिए 
             पर्यटक अब पर्यटक स्थल को केवल देखने की जगह  नही मानता है अपितु पर्यटक कुछ अभिन्न अनुभव हेतु पर्यटन करने लगा है। 
 पर्यटकों के पास अन्य स्थानों के पर्यटन का अनुभव भी है।  अत: पर्यटक अब पर्यटन साधन से अधिक मांग करने में सक्षम है।
                                                     ट्रांस्पोर्टेशन /परिवहन में क्रांति 
याद कीजिये जब ऋषिकेश से मोटर सड़क देव प्रयाग तक ही थी और बद्रीनाथ -केदारनाथ के पर्यटकों को रहने व भोजन के लिए देव प्रयागी पंडों, होटल  व दुकानदारों पर निर्भर रहना पड़ता था।  अब सड़क बद्रीनाथ या रामबाड़ा तक पंहुच गयी है, टैक्सी -कार ट्रांसपोर्ट सुलभ हो गयी है या हवाई यात्रा सुलभ हो गयी है तो पर्यटन में भी परिवर्तन आ गया है। ट्रांस्पोर्टेशन में गतिशीलता आने से ग्रामीण पर्यटन में परिवर्तन आवश्यक हो गये हैं।

                                                   लघु पर्यटन 
अब भारतीय पर्यटक भी साल भर में बार बार पर्यटन के लिए निकल पड़ते हैं और उनका पर्यटन समय छोटा हो गया है।  अत: उत्तराखंड के पर्यटन में भी परिवर्तन अवश्य ही आ गया है। दिल्ली -पंजाब -लखनऊ के प्रवासी अब अपनी कार से सुबह अपने गाँव पंहुचते हैं , दिन में धार्मिक अनुस्ठान में भाग लेते हैं और शाम को फिर अपने गंतव्य  स्थान के लिए निकल पड़ते हैं। 
                                          पर्यटको की क्रियाशीलता में वृद्धि 
अब पर्यटक अधिक क्रियाशील हो गए हैं।
                              सूचना -प्रसारण माध्यमों से पर्यटन  शैली में परिवर्तन 
 सूचना -प्रसारण माध्यमों में क्रांति आने से पर्यटकों की पर्यटन शैली में अत्याधिक बदलाव आया है. अब कुली को भी ठीक समय पर मोबाइल से बुलाया जाता है। सूचना प्रसारण सेवा से अग्रिम बुकिंग पर अत्याधिक प्रबाहव पड़ा है। सूचना -प्रसारण माध्यमों से पर्यटक अधिक ग्यानी हो गया है। ऑनलाइन ज्ञान प्राप्ति और ऑनलाइन बुकिंग की मांग बढ़ गयी है।

                                     इंटरनेट व सोसल मीडिया 


इंटरनेट व सोसल मीडिया पर्यटन को प्रभावित क्र रहा है। सोसल मीडिया सोसल व्यापार में परिवर्तित हो रहा है।
                   पर्यारण व वातावरण के प्रति पर्यटकों व भागीदारियों की चेतना व संवेदनशीलता 
अब पर्यटक , समाज सेवी व भागीदार पर्यावरण , वातावरण के प्र्रति आग्रही हो गये हैं जो पर्टयन शैली में निरंतर बदलाव ला रहे हैं। 

               पर्यटन स्थलों में विशेषता की मांग 
अब पर्यटक स्थलों में एक्सक्लूजिविटी की डिमांड बढ़ गयी है। पर्यटन में कई नई विभाग आ गये हैं।

             ग्लोबलिजेसन का प्रभाव 
आर्थिक वैश्वीकरण के खुलने से पर्यटन में भारी बदलाव आया है।  अब न्यूयार्क पर्यटन उद्यम  भी बद्रीनाथ पर्यटन  से प्रतियोगिता करता पाया जा सकता है।  
               स्वास्थ्य पर्यटन में आशातीत वृद्धि 
कई कारणो से स्वास्थ्य लाभ हेतु पर्यटन में वृद्धि देखी गयी है। वेलनेस टूरिज्म की मांग बढ़ रही है। 


             साहसिक व अनुभव प्राप्ति पर्यटन में विकास 
साहसिक व अनुभव प्राप्ति पर्यटन में विकास  की सम्भावनाओं में वृद्धि हुयी है।
             युवाओं की भागीदारी 
युवाओं की पर्यटन में भागीदारी बढ़ रही है। उसी तरह ओल्ड एज टूरिज्म से पर्यटन उद्यम को नया आयाम मिल रहा है ।
           ओसन व स्पेस टूरिज्म 
अब स्पेस टूरिज्म , जलया समुद्री टूरिज्म को नया आयाम  मिलते रहेंगे 

         भविस्य में विषेशज्ञों की आवश्यकता 
पर्यटकों के ज्ञान में जिस तरह वृद्धि होगी पर्यटन उद्यम विशेषज्ञों का उद्यम रह जाएगा।  गौरी कुंड से केदारनाथ    तक घोड़े वाले को भी विशेष पर्यटन विशेषज्ञ बनना आवश्यक हो जाएगा।
आजकल पर्यटन में मॉसक्लूजिविटी  शब्द का पर्यटन उद्यम में चलन बढ़ गया है है कि भीड़ , समूह भी अब विशेष यात्रा अनुभव चाहता है।  मॉसक्लुजिविटी का अर्थ है एक्सक्लुजिविटी फॉर मासेज याने समूह , बहुसंख्यक , भीड़ भी विशेष की चाह रहे हैं। 

        स्नोमोडिटी , उबेर प्रीमियम टूरिज्म , हाइजेनियिक टूरिज्म , नेसन'स लाइट , ट्रांसउमेरिज्म , नॉन साइक्लिकल रिच टूर, जनरेसन कंज्यूमर आदि नये नये  शब्द अब टूरिज्म को मिल रहे है जो यह इंगित कर रहे हैं कि भविष्य का नया पर्यटन उद्योग रोज पर्यटन उद्यम परंपराओं को तोड़ता जाएगा। 
अत: उत्तराखंडी समाज को पर्यटन व आथित्य की बदलती प्रवृतियों के प्रति सचेत व संवेदनशील रहना पड़ेगा। 
 


Copyright @ Bhishma Kukreti 7/12/2013

Contact ID bckukreti@gmail.com

Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series to be continued ...

उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वारा , गढ़वाल

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उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ;पिथोरागढ़। उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ;बागेश्वर ,उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ;चम्पावत ,उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ;नैनीताल, उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ;अल्मोड़ा ,उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ;उधम सिंह नगर उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ;गंगा सलाण ,उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ;पौड़ी गढ़वाल ,उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ;टिहरी गढ़वाल ,उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ;चमोली गढ़वाल ,उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ; उत्तरकाशी गढ़वाल ,उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ;देहरादून गढ़वाल ,उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ;हरिद्वार ,उत्तराखंड समाज को पर्यटन व  आथित्य की वर्तमान एवं  भविष्य प्रवृति के बारे में संवेदनशीलता की आवश्यकता ;
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