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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, July 29, 2015

क्या कुत्तों को इकीसवीं सदी में प्रवेश कर ही लेना चाहिए ?

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                      क्या कुत्तों को इकीसवीं सदी में प्रवेश कर ही लेना चाहिए ?
                       क्या कुकरूं तैं इक्कीसवीं सदी मा प्रवेश कर इ लीण चयेंद ?


                        चबोड़ , चखन्यौ , चचराट   :::   भीष्म कुकरेती 


                    जब बिटेन भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधीन 1987 -88 मा घोषणा कार कि भारत तैं इकीसवीं सदी मा प्रवेश करण चयेंद तब बिटेन अर आज तक कुत्तों मा बहस हूणि इ रौंदी कि क्या कुत्तों तैं बि इकीसवीं सदी मा प्रवेश करण चयेंद कि ना ? भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेई अर मनमोहन सिंह जीन जब जब बि ब्वाल कि इण्डिया तैं ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी मा इंटर करण चयेंद तब तब कुत्तों मा बहस , चर्चा , कुकर्योळ शुरू ह्वे जांद छौ कि शुड इंडियन डॉग इंटर ईंटो ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी और नौट ? अब अच्काल जब बि नरेंद्र मोदी बुल्दन कि इकीसवीं सदी एशिया कु च तो बि कुत्तों बीच  , तर्क वितर्क  , वाद विवाद, कुकर्योळ   शुरू ह्वे जांद कि क्या कुत्तौं तै अब इकीसवीं सदी मा प्रवेश कर ही लीण चयेंद ?

                    ये साल जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीन घोषणा कार कि इकीसवीं सदी मा भारत की महत्वपूर्ण भागीदारी राली त प्रीमियम डॉग असोसिएसन न औल  इंडिया कुकर फेडरेसनौ कुण ल्याख कि अब तो डौगुं तैं ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी मा प्रवेश करण इ चयेंद।  प्रीमियम डौगुं तर्क च कि यदि डौग ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी मा प्रवेश कारल तो डौग बड़ी बड़ी , ऊँची ऊँची पचास -सौ मंजली इमारतों मा रौण लग जाल।  यदि इंडियन डौग इक्कीसवीं सदी मा चल जाला तो कुत्तों तै पैक्ड फ़ूड ऐंड मीट मिलण शुरू ह्वे जाल , मिनरल वाटर मिलण हसुरु ह्वे जाल अर सीणो कुण एयर कण्डीसण्ड कमरा  मिल जालो। इख तलक कि इकीसवीं सदी मा प्रवेश से कुत्तौं तै अमेरिकन यूरोपियन कुत्ता -कुत्तियों से शादी करणो मौक़ा मिल जालो ।  किंतु औल  इंडिया कुकर फेडरेसनन प्रीमियम डॉग असोसिएसन की बात अनसुणि कर दे किलैकि प्रीमियम डॉग असोसिएसन मा भारत का कुत्तों  की संख्या  दश्मलव शून्य शून्य शून्य शुन्य शुन्य एक प्रतिशत से बि कम च।  यी प्रीमियर कुत्ता अम्बानी , अडानी अर राहुल गांधी का डौग छन। 
         कुत्तों का एक ग्रुप च जु कुत्तों तै इकीसवीं सदी मा प्रवेश का समर्थ करणु च।  युंक तर्क च कि यदि कुत्ता ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी मा प्रवेश कारल तो कुत्तों तै इंटरनेट , फेसबुक ,ट्वीटर , वर्डसप की सुविधा मिल जाली। किन्तु यूं कुकरों कि संख्या बि नाममात्र की च ।   यी कुत्ता नरेंद्र मोदी अर शशि थरूर जन भारतियों का कुत्ता छन।   
  कुछ कुत्ता कुत्तों इकीसवीं सदी मा जानों शख्त विरोधी छन यूंक तर्क कुतर्क च कि कुकरूं इकीसवीं सदी मा जाण से कुत्तोँ की आइडेंटिटी /पहचान ही समाप्त ह्वे जाली।  यी कुत्ता लालू प्रसाद यादव , मुलायम सिंह यादव , शरद यादव , मायावती , ममता बनर्जी , कुछ धार्मिक संस्थानुं का पळयां -पुस्याँ कुत्ता छन। 

                                                   कुत्तापन मूल्यों मा भारी गिरावट का अंदेसा 

अधिसंख्य कुत्ता असोसिएसनों की रे च कि यदि कुत्ता बि भारतियों नकल कारल तो कुत्तापन मा भारी गिरावट ऐ जालो जन भारतीयों  द्वारा इकीसवीं सदी मा जाण से भातीय मूल्यों मा भारी गिरावट आई। कुत्तों तै डौर च कि कुत्ता बलात्कार  अकुत्ता गुण आदि बि शुरू कर द्याला। 

                                                अमीरी -गरीबी कु अंतर माँ आशातीत वृद्धि 

       अधिसंख्य कुत्तों तैं भी च कि इकीसवीं सदी मा प्रवेश से कुत्तों का मध्य अमीरी -गरीबी का मध्य भौत बड़ो अंतर ऐ जालो।  अमीर कुत्ता हौर अमीर हूंद जाल अर गरीब कुत्ता हौर बि गरीब हूंद जाला।  कुत्तों तैं कि कुत्ता स्वार्थ तै कुत्ता संस्कृति मनण लग जाल अर बदमाशी , चोरी चकारी अर कुकुर समाज मा झूट तै इ असलियत समजणै प्रवृति ऐ जाली।  कुत्ता यदि इकीसवीं सदी मा जाल तो कुत्ता अपण पाप दूसरों मत्था पर मढ़णो विशेषज्ञ ह्वे जाला।  
       सब्युं तै पूरो   भरोसा च    कि कुत्ता आरोप -प्रत्यारोप तैं कुत्ता गुण मानि ल्याला।  कुत्तों मध्य सहकारिता अर   सहयोग इतिहास की बात ह्वे जाल। अमीर देसुं पैसा  निर्भरता बढ़ जालो।  यूँ कुत्तों तै अवमूल्यन ही अवमूल्यन दिखेणु च। 
     कुकुर  घंघतोळ मा छन , कुत्ता भर्मित छन , डौग कन्फ्यूज छन तो पंदरा दिन बाद एक अखिल भारतीय कुत्ता सम्मेलन हूण वळ च जख मा चर्चा ह्वेलि कि कुत्तों तै इकीसवीं सदी मा छिरण  चयेंद कि ना।  

       क्या आप सलाह दे सकदन कि   कुत्तों तैं बि इकीसवीं सदी मा प्रवेशकरण , घुसेण , छिरण  चयेंद या ना ?          
          




30/7 /15 ,Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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