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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, July 26, 2015

तै किसानन पर्स्युं ना , भोळ बि ना , आजि आत्महत्या करण !

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Alcohol Harm

                    तै किसानन पर्स्युं ना , भोळ बि ना ,  आजि आत्महत्या करण ! 

                        चबोड़ , चखन्यौ , फिरकी    :::   भीष्म कुकरेती 


(स्थान -देसी -विदेशी ठेका , शराबखाना )
एक ट्यूबलाइट - ये ल्यावो ! सि गेन उत्तराखंड का जण्या -मण्या सामाजिक कार्यकर्तौं डार। युंकुंण  पंचभया सामाजिक कार्यकर्ता बुले जांद। जख बि जाल पंचि दगड़ी जाला। 
दुसर -ह्यां ! यूंन कार क्या च जु युंकुंण सामाजिक कार्यकर्ता बुले जांद ?
एक बल्ब - अबै सामाजिक कार्यकर्ता माने जु हरेक गढ़वळि कार्यक्रम मा पौंछन। 
ट्यूबलाइट - हाँ आज यूंन भौत रूण।  जब बि यी कै तै मड़घट फुकणो जांदन तो बगैर पियां यूँ से घौर नि जयांद। अर जनि एक पैग यूंक गौळम गे ना कि यूँ पर 'गढ़वाळम  पलायन' का जुकाम लग जांद , दुसर पैग द्याख ना गढ़वाळम 'गूणि -बांदर भौत ह्वे गेन का भूत चढ़ जांद। 
बल्ब - अरे एक बाद तो यी भौत मजेदार छ्वीं लगाण मिसे जांदन।  सब दुःख जतैक गढ़वाळम शराबौ प्रचलन भौत बढ़ी गे पर बहस शुरू कर दींदन। पता च बस यूंमा चार पांच कथा छन अर हर बार दारु पीणो बाद यूँ शराब मुतालिक कथा एक दुसर तैं सुणांदन। 
पंखा -यार मि त यूंक चार कथौं से बोत ह्वे ग्यों।  पांच साल से बस वी कथा सुणांदन।  अरे क्वी नै कथा बि नि सुणांदन। 
ऐक्जौस्ट फैन - अरे गढ़वाळ जावन तो नई कथा सूणांल ना ! गढ़वाल तो जांद नि छन अर दारु पेक बकबास करणा रौंदन।  गढ़वाळम  इन ह्वे गे , तन ह्वे गए , जख्या भंगुल जामी गे। मि त बोर ह्वे ग्यों यूंक फोकटिया बकबास सूणी सुणिक।  
ट्यूबलाइट - ये ल्यावो अपण मिलिट्री हॉस्पिटलौ कम्पाउंडर साब बि आज पीणो ऐ गेन। 
बल्ब -यार मिलिट्री कैंटीन से दारु सस्ती मा मिल्दी अर फिर बि इख पीणो किलै आंदो ह्वाल यी कम्पौंडर साब ?
पंखा - अबै आज पियाँ मा येन  अवश्य ही औपरेसन करद जरूर कै मरीजैकि मवासी घाम लगै दे होलि।  याद च पांच दिन पैल बि यु गम गलत करणो बान ठर्रा पीणो इख ऐ छौ।  वैदिन येन  पियां मा एकाक आंख्युं घाव सिल्दा दै आँखि फोड़ यल छौ।  उ तो भलो ह्वे कि मरीजौ भाग सही छया कि वार्ड ब्वॉय की समज मा ऐ गे अर वैन ये दरोड्या कम्पाउंडर साबक  हतुं से सुई लूठि दे।  निथर मरीज द्वी आँख लेक ऐ छौ वु एक आँख लेक घौर जांदु। 
बल्ब -आज पता नी कैकि मवासी घाम लगै होलि धौं ?
ऐक्ज़ॉस्ट फैन - ये ल्यावो सकस्याट जी बि ऐ गेन।  तैक फेफड़ा अर जिकुड़ी शराबन पूरी फुकीं छन पर मृत्यु तै अंग्वाळ बटणो तयार च पर स्यु दरोड्या शराब नि छोड़ि सकणु च।  पता च चार मैना पैल यु गांवक अपण सँजैत कूड़ बेचिक ऐ गे।  अर अब एक भायुं अर खरीददारों बीच मुकदमा चलणु च। 
ट्यूबलाइट - मुर्दार मादा। 
पंखा - ये ल्यावो ! हमर प्रेमी ! किसान ज्यु बि ऐ गेन। 
बल्ब - आज एक मुख मा तनाव च भै।  हैँ ! ऐकि येन पूरा नीट पैग घटकै याल भै।  क्या बात ?
एक्जॉस्ट फैन - घरम ब्या करीं जनानी , अलग अलग शहरूं मा द्वी रखैल जैक ह्वाल वैक तो कुहाल इ ह्वाल ना। 
पंखा - हाँ जब एक फसल अच्छी हूंदी छे तो एक ठाट दिखण लाइक छ।  दस दस यार दगड्यों दगड़ रोज पीणो आंद छौ। 
बल्ब - सुणन मा आयि बल दु दु रखैलुँ खर्चा पुगाणो बान ये किसानन चार बैंकुं से लोन ले बल ?
ट्यूबलाइट - हाँ अर अब चर्री बैंकुं तै बि पता चल गे अर घरवळि तै बैंकुं लोन इ ना रखैलुं बारा मा   बि पता चल गे। 
पंखा -अरे यु किसान तो शराब इन पीणु च जन गर्म्युं मा तिसा पाणी पींदु।  क्या बात ? क्या एकी अर एक घरवळि मध्य कुछ ज्यादा इ झगड़ा ह्वे होलु ?
हैंक ट्यूबलाइट - इन लगणु च घरवळि ना रखैलुं दगड़ बि झगड़ा ह्वे ह्वालु। 
बल्ब - अरे किसानौ  मुख पर अजीब तनाव दिखेणु च। 
पंखा - इन तनाव तो आत्महत्या करण वाळक मुख पर हूंद ?
एक्जॉस्ट फैन - मै लगद येन पर्स्युं तक आत्महत्या कर दीण। 
बल्ब -भै मुखक तनाव देखिक तो लगणु च कि भोळ इ येन आत्महत्या कर दीण। 
ट्यूबलाइट - अरे अरे ! यु किसान भैर किलै भगणु च ? 
पंखा - हैं ! हैं ! ये ले स्यु किसान जाणि बूझिक ट्रकक तौळ ऐ गे।   अर ! अर ! अर ये मेरी बिजली ब्वै  ! तैकि त मौत ह्वे गे। 


  


27/7 /15 ,Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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