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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, July 20, 2015

सतपुळि बजार क्यों आंदि ? -- गढ़वाली लोक गीत

इंटरनेट प्रेजेंटेशन -भीष्म कुकरेती
सतपुळि बजार क्यों आंदि
मेरि ब्वारी गौमती या ?मेरि ब्वारी गौमती या ?
सतपुळि बजारै आन्दु
मी तुमारा  बान या, मी तुमारा बान या
काटी च जमणि ये ब्वारि , काटी च जमणि ये ब्वारि 
मी तै नि मिलणो ए ब्वारि ,
सबुकी समणि , या सतपुळि
तमाखू का कोया ए जिवरो, तमाखू का कोया ए जिवरो,
डौर छाई तुमतै त पैलि
केकु ज्वाड़  माया या
सतपुळि बजार क्यों आंदि
बामणु कि पोथी ए ब्वारि , बामणु कि पोथी ए ब्वारि ,
भली बिराज दींदि  ए ब्वारि
तेरी काळि धोति या
सतपुळि बजार क्यों आंदि
स्वैरि जाली सौँळि जिवरो ,  स्वैरि जाली सौँळि जिवरो ,
कन बिराज दींदि जिवरो ,
बुलबुलूं कि कौंळ या
सतपुळि बजार क्यों आंदि
मेरि ब्वारी गौमती या ?मेरि ब्वारी गौमती या ?
 
 Curtsey _ Shri Totaram Dhoundiyal Dhad magazine June 1990