गढ़वाली हास्य -व्यंग्य
चुनावों मा चुनाव प्रत्यासी गडबड, आचार संघिता उल्लंघन या दुसर प्रत्यासी तै घपकांदन अर माल प्रैक्टिस करदन। पण अब तो भौत सा सा मीडिया वाळ ही जादा माल प्रैक्टिस (गुळादंगी ) करण बिसे गेन।
चुनावों टैम पर पेड न्यूज या खरिद्यां समाचार जनि बात से अब चुनाव आयोग बि परेशान च। चुनाव आयोग हाथी जन अपराध तै त पकड़ सकुद पण पेड न्यूज जन किरम्वळु कुछ नि कौर सकुद। फिर आज राजनीतिग्य अखबारों अर टी वी चैनलों मालिक ह्वे गेन। तो चुनावुं बगत मीडिया की भूमिका पर ही प्रश्न चिन्ह लगी जान्दो। क्या सामना शिव सेना की कमजोरी बथालो ? क्या सामना शिव सेना तै पाक साफ़ राजनैतिक पार्टी नि बथालो ? क्या सकाल दैनिक शरद पंवार की प्रशंसा नि कारल? क्या दैनिक लोकमत विजय दर्डा अर राजेन्द्र दर्डा क पक्षपात नि कारल ? क्या सन टीवी डीएमके की ही पूजा नि कारल? क्या जया टीवी जय ललिता की प्रशंसा ही नि कारल अर जया ललिता का विरोध्युं छांछ नि छवाळल ? क्या सुदर्शन टी वी न्यूज चैनेल कौंग्रेस को भतियाभन्द नि कारल अर इंडिया न्यूज चैनेल भाजापा की पोल नि ख्वालल?
चुनाव बगत पत्रकारों द्वारा झूट मूटो चुनावी सर्वेक्षण तो अब लोगुं समज मा थ्वडा थ्वड़ा आण बिसे गे। पत्रकारों द्वारा पक्षपाती समाचार दीण एक आम बात ह्वे गे। आज भौत सा पत्रकार गलत अर सर्वथा झुटा बयान छापदन। आज खबर नी होंदन बलकणम चुनावी प्रत्यासी को फैदा या नुकसान बान खबरों की रचना होंदी। भौत सा पत्रकारों काम काळो तै सुफेद बताणो ह्वे गे। कथगा इ पत्रकार कागज की गुडिया तैं शेर अर शेर तै किदलु/ केंचुआ बणाणम सिध्हस्त ह्वे गेन।
आज असल मा चुनावी प्रक्रिया ही ना पत्रकारिता को अनाचार, दुराचार , आचार विचारो पर भी प्रश्न चिन्ह लगि गे।
अब बिगण/ समज मा नि आणो कि जु बखरौं ग्वेर उळकाणु / उल्लू ह्वे जावो तो दुनिया को क्या ह्वालो?
Copyright @ Bhishma Kukreti 26/4/2013
(लेख सर्वथा काल्पनिक है )
सौज सौज मा मजाक मसखरी
हौंस,चबोड़,चखन्यौ
सौज सौज मा गंभीर छ्वीं
बखरौं ग्वेर उळकाणु/उल्लू
चबोड़्या - चखन्यौर्या: भीष्म कुकरेती (s = आधी अ )
जब बि कै बि जगा बान कखि बि चुनाव ह्वावन त चुनाव आयोग द्वारा की तिथि बथाण से लेकि चुनाव नतीजा आण तलक मिडिया न्यूक्लियर बम्ब या रेडिओ एक्टिव पदार्थ जन अति क्रियाशील ह्वे जांदो अर भौं भौं खबर दीण मिसे जांद।
अब द्याखो ना हमर गां जख दुसर क्षेत्र का घ्वाड़ा बि जाणम अड़ी जांद उखाक ग्राम प्राधानो चुनावी समाचार दिल्ली अखबारोंम ऐ जांदन जन कि परारौ प्रधानौ चुनाव मा दिल्लिक अखबारों मा खबर आइ कि स्वांरा देवी न एक इंटरव्यू मा इ संवाददाता तैं बथाइ बल एक प्रत्यासी बीरून दुसर प्रत्यासी धीरूक भौज तैं तीन किलो चिनी दे अर चिनाव मा गुळादंगी कार अर चुनाव आचार संहिता तोड़ी, इख तलक कि चुनाव जितणो बाण प्रत्यासी अवैध संम्बंध बणाण से नि डरणा छन। अब या बि खबर च ? भई चुनाव जितण त चीनी चानी दीणी पोड़ल कि ना ? इखमा खबर क्या च? खबर त तब होन्दि कि एक प्रत्यासी क्वी घूस नी दीणु च। पण जब दिल्ली अखबार हमर गां पौंच तो गां मा कखला बखली मचि गे, भ्युंचळ ऐ गे । उन सि बात होन्दि त बातन आइ जाइ ह्वे जाण छौ पण चुनाव को बगत छौ त बात बढ़ी गे अर छुंयाळु छ्वीं से गां मा बणाक लगि गे। लोगुन बात उडै दे बल धीरुक बौ अर बीरु बीच अवैध सम्बन्ध छन। लोग बि सै छन किलैकि अब लोगुं तैं अपण आंखों पर कम विश्वास होंद अर समाचार पत्र या टी वी न्यूज चैनेलो पर जादा भरवस हूंद। वो तो भलो ह्वे कि शारब पिणों उपरांत छुंयाळु समज मा आयि कि धीरू बौ त बीरू घरवळि च। असला मा बीरू अर धीरू पिटालिटि भाइ छन अर प्रधान जन गुंदकि दार पद का लोभि ह्वेक एक दुसरा विरोध मा चुनाव मा खड़ा ह्वे गेन। अर स्वांरा अबि बि नाता रिश्तों खयाल करदी तो बीरू जिठा जीक नाम त ले नि सकदी त वीनं राष्ट्रीय संवाददाता से बोलि कि उ जिठा जि जु कबि उल्ट लाब सुल्ट नि करदा छा अबै दै पैल दै धीरू बौ कुण बजार बिटेन चीनी लैन। बात बड़ी सरल छे कि बीरू अब चुनाव जितणो बान अपण घरवळि तै बि खुस करण मा लग्युं च। पण संवाददातान बात कुछ हौर ढंग से लेखि दे।
सौज सौज मा गंभीर छ्वीं
बखरौं ग्वेर उळकाणु/उल्लू
चबोड़्या - चखन्यौर्या: भीष्म कुकरेती (s = आधी अ )
अब द्याखो ना हमर गां जख दुसर क्षेत्र का घ्वाड़ा बि जाणम अड़ी जांद उखाक ग्राम प्राधानो चुनावी समाचार दिल्ली अखबारोंम ऐ जांदन जन कि परारौ प्रधानौ चुनाव मा दिल्लिक अखबारों मा खबर आइ कि स्वांरा देवी न एक इंटरव्यू मा इ संवाददाता तैं बथाइ बल एक प्रत्यासी बीरून दुसर प्रत्यासी धीरूक भौज तैं तीन किलो चिनी दे अर चिनाव मा गुळादंगी कार अर चुनाव आचार संहिता तोड़ी, इख तलक कि चुनाव जितणो बाण प्रत्यासी अवैध संम्बंध बणाण से नि डरणा छन। अब या बि खबर च ? भई चुनाव जितण त चीनी चानी दीणी पोड़ल कि ना ? इखमा खबर क्या च? खबर त तब होन्दि कि एक प्रत्यासी क्वी घूस नी दीणु च। पण जब दिल्ली अखबार हमर गां पौंच तो गां मा कखला बखली मचि गे, भ्युंचळ ऐ गे । उन सि बात होन्दि त बातन आइ जाइ ह्वे जाण छौ पण चुनाव को बगत छौ त बात बढ़ी गे अर छुंयाळु छ्वीं से गां मा बणाक लगि गे। लोगुन बात उडै दे बल धीरुक बौ अर बीरु बीच अवैध सम्बन्ध छन। लोग बि सै छन किलैकि अब लोगुं तैं अपण आंखों पर कम विश्वास होंद अर समाचार पत्र या टी वी न्यूज चैनेलो पर जादा भरवस हूंद। वो तो भलो ह्वे कि शारब पिणों उपरांत छुंयाळु समज मा आयि कि धीरू बौ त बीरू घरवळि च। असला मा बीरू अर धीरू पिटालिटि भाइ छन अर प्रधान जन गुंदकि दार पद का लोभि ह्वेक एक दुसरा विरोध मा चुनाव मा खड़ा ह्वे गेन। अर स्वांरा अबि बि नाता रिश्तों खयाल करदी तो बीरू जिठा जीक नाम त ले नि सकदी त वीनं राष्ट्रीय संवाददाता से बोलि कि उ जिठा जि जु कबि उल्ट लाब सुल्ट नि करदा छा अबै दै पैल दै धीरू बौ कुण बजार बिटेन चीनी लैन। बात बड़ी सरल छे कि बीरू अब चुनाव जितणो बान अपण घरवळि तै बि खुस करण मा लग्युं च। पण संवाददातान बात कुछ हौर ढंग से लेखि दे।
चुनावों मा चुनाव प्रत्यासी गडबड, आचार संघिता उल्लंघन या दुसर प्रत्यासी तै घपकांदन अर माल प्रैक्टिस करदन। पण अब तो भौत सा सा मीडिया वाळ ही जादा माल प्रैक्टिस (गुळादंगी ) करण बिसे गेन।
चुनावों टैम पर पेड न्यूज या खरिद्यां समाचार जनि बात से अब चुनाव आयोग बि परेशान च। चुनाव आयोग हाथी जन अपराध तै त पकड़ सकुद पण पेड न्यूज जन किरम्वळु कुछ नि कौर सकुद। फिर आज राजनीतिग्य अखबारों अर टी वी चैनलों मालिक ह्वे गेन। तो चुनावुं बगत मीडिया की भूमिका पर ही प्रश्न चिन्ह लगी जान्दो। क्या सामना शिव सेना की कमजोरी बथालो ? क्या सामना शिव सेना तै पाक साफ़ राजनैतिक पार्टी नि बथालो ? क्या सकाल दैनिक शरद पंवार की प्रशंसा नि कारल? क्या दैनिक लोकमत विजय दर्डा अर राजेन्द्र दर्डा क पक्षपात नि कारल ? क्या सन टीवी डीएमके की ही पूजा नि कारल? क्या जया टीवी जय ललिता की प्रशंसा ही नि कारल अर जया ललिता का विरोध्युं छांछ नि छवाळल ? क्या सुदर्शन टी वी न्यूज चैनेल कौंग्रेस को भतियाभन्द नि कारल अर इंडिया न्यूज चैनेल भाजापा की पोल नि ख्वालल?
आज जब चुनावी दंगल एक नृशंस , निर्दयी , आचार हीन, स्वार्थ पूरक, प्रजा तन्त्र पर कुलाड़ी चलाण वाळ युद्ध ह्वे गे तो प्रजातंत्र को चौथो खम्भा से उम्मीद छे कि प्रजातंत्र की साख बचावो पण जब खंबा पर ही स्वार्थ को वाइरस , घूसखोरी को मैस्वाग, भाई भतीजावाद को धिवड़/द्यूं/दीमक लगी जावो तो प्रजातंत्र को छ्त्यानाश होणि च।
चुनाव बगत पत्रकारों द्वारा झूट मूटो चुनावी सर्वेक्षण तो अब लोगुं समज मा थ्वडा थ्वड़ा आण बिसे गे। पत्रकारों द्वारा पक्षपाती समाचार दीण एक आम बात ह्वे गे। आज भौत सा पत्रकार गलत अर सर्वथा झुटा बयान छापदन। आज खबर नी होंदन बलकणम चुनावी प्रत्यासी को फैदा या नुकसान बान खबरों की रचना होंदी। भौत सा पत्रकारों काम काळो तै सुफेद बताणो ह्वे गे। कथगा इ पत्रकार कागज की गुडिया तैं शेर अर शेर तै किदलु/ केंचुआ बणाणम सिध्हस्त ह्वे गेन।
आज असल मा चुनावी प्रक्रिया ही ना पत्रकारिता को अनाचार, दुराचार , आचार विचारो पर भी प्रश्न चिन्ह लगि गे।
अब बिगण/ समज मा नि आणो कि जु बखरौं ग्वेर उळकाणु / उल्लू ह्वे जावो तो दुनिया को क्या ह्वालो?
Copyright @ Bhishma Kukreti 26/4/2013
(लेख सर्वथा काल्पनिक है )
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आपका बहुत बहुत धन्यवाद
Thanks for your comments