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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, April 28, 2013

रूड़ी (गरमी ) ऐ ग्यायि कि ना?

गढ़वाली हास्य -व्यंग्य 
सौज सौज मा मजाक मसखरी 
हौंस,चबोड़,चखन्यौ   
सौज सौज मा गंभीर छ्वीं 
                                    रूड़ी (गरमी ) ऐ ग्यायि कि ना?

                                         चबोड़्या - चखन्यौर्या: भीष्म कुकरेती (s = आधी अ )
             पैलाकि सि बात नि रै गे कि हम तैं अफिक पता चलि जावो बल गरमी ऐ ग्ये। पैल हमर सरैल संवेदनशील छौ अर सरैल अफिक चितांदो छौ बल भैर वातवरण कथगा ठंडु  च , कथगा गरम च। तब हमर सरैल अग्वाडि इतला बि दींदो छौ बल रुड़ी कनि रालि अर कथगा गरमी रालि।
               अब त नेताओं , अधिकार्युं का कुकर्मों, आश्वासनों, बेशर्मी, खुलेआम झूट, घूसखोरी , स्वार्थ देखिक हमर चमड़ी  इथगा बकळि  ह्वे गे कि ठंड -गरम त जाणि द्यावो हम तैं पता इ नि चलद बल हम तैं किरम्वळ तड़काणा छन। वो तो क्वी  इनसेक्टिसाइड बिचण वाळ बथांदो बल हम तै किरम्वळ तड़काणा छन।

                        कुछ दिन हम टी वी न्यूज चेनलों पर भरवस करदा छया अर जब चैनेल  बुलदा छा तो  हम तै पता चलदो छौ कि ठंडी ऐ गे कि गरमी पण अब त गर्मी अर जड्डू समाचार बि स्वार्थपूरक ह्वे गेन। परसि    चैनेल यूपी टेन  मा सुबर बिटेन स्याम दें तलक समाचार आणा रैन कि  उत्तर प्रदेश मा गर्मी से बुरा   हाल छन, समाचार छौ कि उत्तर प्रदेश गर्मी से झुलस रहा है । चैनेल यूपी टेन की न्यूज छे कि गरमी से लोगुं इ ना कुता, बिरळु, गोरुं , चखुलों खलडा बि  उतरण मिसे गे। चैनेल समाचार दिखाणो छौ बल उत्तर प्रदेश मा गर्मी से त्राहिमाम त्राहिमाम मच्यु च. अर उत्तर प्रदेश की जलवायु समाचार देखिक हमन अपण पंखा स्पीड बढाई दे। ब्याळि, सुबेर बिटेन आज सुबेर तलक चैनेल यूपी टेन समाचार दिखाणु छौ कि उत्तर प्रदेश मा मौसम खुशनुमा च अर सरकार विरोधी लोगुंन अफवा फ़ैलाइ कि उत्तर प्रदेश मा गर्मी को प्रकोप फैल्युं च।   फिर सरा दिन  चैनेल यूपी टेन मा समाचारों से जादा उत्तर प्रदेश जनसम्पर्क विभाग को विज्ञापन दिखाये जाणा छा कि कन अखिलेश यादव का आणो बाद गरीब सुखी छन अर कन प्रदेश मा लॉ ऐंड ऑर्डर की स्थिति बेहतर ह्वे गे। चैनेल यूपी टेनमा सरा दिन भर सौ दें उत्तर प्रदेश में अपराध  कम  हुए का विज्ञापन दिखाए गेन अर उथगा इ दें समाचार बि दिखाये गेन कि उत्तर प्रदेश मा मौसम खुशनुमा च। अब जब टीवी चैनलों मा जलवायु , मौसम को  समाचार बि विज्ञापन प्रेरित अर प्रदेश को तापमान बि प्रायोजित हूण बिसे जावन तो  हम लोगुंक  टी वी चैनलों पर विश्वास कम हूण लाजमी च। जख तलक सीएनएन या बीबीसी को सवाल च यी बि इंडिया को मौसम की जानकारी ये हि हिसाब से दीन्दन कि जां अमेरिका अर यूरोप का माल बिको। दिखण मा त सीएनएन या बीबीसी  निष्पक्ष समाचार दाता  लगदन पण यूं से बड़ो स्वार्थी चैनेल अबि धरती मा नि आयि सो गरमी ऐ गे कि ना/ की सुचना  बान हम लोग सीएनएन या बीबीसी पर निर्भर नि छंवां।

                      फिर मौसम की जानकारी पैल रिश्तेदार चिट्ठी से दींदा छा कि इख पहाड़ो म ठंड इ च अर आवो इख घुमणो ऐ जावो। अब त पहाड़ो माँ रिश्तेदार झूठ बुलण बिसे गेन अर हर समय बथान्दन बल इख बि टेम्प्रेचर पैंतालिस का करीब च। अब पहाड़ी रिश्तेदारों तैं डौर रौंदी कि मि कखि गर्म्युं मा ऊंक इख नि ऐ जौं।

                  मि जब छ्वटु छौ त मेरि ददिन टक  लगैक मि तै सिखै छौ कि जब चखुल ढंढि मा नयावन तो समझो कि चिट्टों घाम चमकण वाळ च अर जु चखुल माटो मा नयावन तो शर्तिया बरखा होलि। पण अब इख मुंबई मा कखि  जगा इ नि बचिं कि चखुल माटो मा नयावन, सब जगा त  सीमेंट की जमीन जि ह्वे गे। अर उन ढंढि बि मुंबई मा नींन कि चखुल ढंढियुं मा छळबळ ह्वेक नयावन। तो चखुलों द्वारा मौसम की जानकारी का द्वार बंद ह्वे गेनि।

         अब रै गे कवाओं से मौसम की जानकारी की बात तो बिचारा कवा  बि मुंबई का कंक्रीट जंगलों से मतिभ्रमित हुयां छन। पैल कवा गर्मी आंद हि अपण घोल -घोसला बणाणो तयारी मा लगि जांदा छा अर बरखा हूण से ठीक द्वी चार दिन पैलि  अंडा दींद छा या अंडा दिणों तयारी करदा छा पण अब  कंक्रीटो मकान हूण से स्थानीय जलवायु मा परिवर्तन ह्वे गे अर कवावों तैं पता इ नि चलदो कि कब घोल घोसला बणाण अर कब अंडा दीणन अर कब अंडा सिकणन। 

 सरकारी सूचना विभाग पर तो पैलि बिटेन क्वी विश्वास कतै नि करदो। अमूनन जब मौसम विभाग सूचना दीन्दो कि आज बरखा होलि तो वैदिन घाम चटकदो अर जैदिन घाम को आश्वासन होंदु वैदिन तड़क्वणि पोड़दन।
अब मेरि बिंगणम/समजम नि आणो च कि रुड़ी ऐ ग्यायि कि ना?                      
 
 
Copyright @ Bhishma Kukreti  28/4/2013           
(लेख में नाम व घटनायें सर्वथा काल्पनिक  हैं  )