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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, April 29, 2013

दिल्लि, मुंबई मा बि बुरांश, काफळ, फ्यूंळि जमदन

गढ़वाली हास्य -व्यंग्य 
सौज सौज मा मजाक मसखरी 
हौंस,चबोड़,चखन्यौ   
सौज सौज मा गंभीर छ्वीं 
                         दिल्लिमुंबई मा बि बुरांश, काफळ, फ्यूंळि  जमदन     

                                         चबोड़्या - चखन्यौर्या: भीष्म कुकरेती (s = आधी अ )
   तुम सणि विश्वास नि होणु ह्वाल बल दिल्लि मुम्बई मा बि बुरांश, काफ़ळ , फ्यूंळि  जन पेड़ पौधा कन जामि सकदन अर पनपि  सकदन। 
उन त मि नि बिंगै /समजै सकदु कि बुरांश पर किनग्वड़ लगदन पण कथा से मि बतौल बल दिल्लि, मुंबई मा फ्यूंळि पर हिसरों कांड कनै पुड़दन।
  भौत सालुं बात नि च। बस वैइ सालों बात च जब मुंबई मा कौथिग दुसर साल ह्वे छौ तो मुंबई का लोगुं तैं पता चौल बल इख मुंबई मा उत्तराखंड बटे अयां चार पांच या दस छोरोंन एक सामाजिक संस्था खोलिं च अर जैक नाम यूनाइटेड बुरांश च । असलम मुंबई वाळु तैं जब बि क्वी नै संस्था खुल्दि तो क्वी उत्साह नि आंद इखाक लोग बुल्दन बल नै संस्था माने घमंडी सामजिक कार्यकरतौं नई दुकान-कुज्याण कब बंद ह्वे जांद धौं। पण वै कौथिग से पता चौल कि बुरांश का छ्वारों म नई सोच च किलैकि इ लोग गिटार बि बजौंदा छा त हुडकी बि हुडकांदा छा अर ए  मेरि ब्वै सबी सदस्य लैपटॉप लेकि इन उना फरकणा रौंदा छा। यून मतबल बुरांशन कौथिग वाळु  बड़ी प्रशासनिक सौ  सायता कार। मुंबई का लोगुं तैं जादा त ना पण कुछ कुछ भरवस ह्वाइ बल सैत च या बुराशै डाळि जादा दिन तक टिकी रालि। पण लोग बिसरि गेन कि बुरांशन उत्तराखंड को बांजौ पाणि पियुं च अर खंड खंड खांड्यू मा बंटण उत्तराखंड की पौराणिक परम्परा च।
            ह्वे क्या च बल कौथिग का कौथिगेर अर हिल ड्रामा का नंदा देवी  का जागर्युं मा कौथिग मा नंदा देवी जात्रा स्वांग मा दक्षिणा क बाण झगड़ा ह्वे गे। कौथिगेरु बुलण छौ बल दक्षिणा पर कौथिगेरुं हक च त जागर्युं बुलण छौ बल दक्षिणा लीणो अधिकारी त बस जागर्युं को ही च।
             बस नंदा देवी स्वांग का जागरी कौथिग से बिगळे गेन अलग ह्वे गेन। मुंबई का लोगुं तैं बुरु नि लग किलै कि उत्तराखंडी परम्परा अनुसार अलग अलग काम करण अर खंड खंड मा बंट्याण ही हमारी संस्कृति अर सभ्यता को मूल चूल च , धुरी च। 
पण कौथिग का कौथिगेर अर हिल ड्रामा को झगड़ालू  ड्रामा से बुरांश का फाड़ ह्वे गेन।कुछ कौथिगेरूं दगुड़ दीण चाणा छा अर जादातर हिल ड्रामा कम्पनी दगुड़ दीण चाणा छा। बस एक नई संस्था काफुळ खड़ी ह्वे गे।
जब हिल ड्रामा कम्पनीन मुंबई मा नंदा जात जात्रा उर्याई तो काफुळ का काफुऴवै (काफुळ तोड़ने वाले ) हिल ड्रामा वाळो पाळि (Side) छा।
                अब उत्तराखंडी परम्परा निर्वाहन को खातिर हिल ड्रामा कम्पनी मा दुफाड़ हूण जरूरी छौ त नई माउंटेनिंग ड्रामा  कम्पनी खुलि गे अर वा नई माउंटेनिंग ड्रामा  कम्पनी बि नंदा जात जात्रा उर्याण बिसे गे।
इन मा काफळो डाळौ  हलण जरूरी छौ।  कुछ हिल ड्रामा कम्पनी दगुड़ नि छुड़ण चाणा छा पण   जादातर नई  माउंटेनिंग ड्रामा  कम्पनी का साथ दीण चाणा छा तो ऊंन फ्युंळि नाम से एक नई संस्था खडी कर  दे।
                  फिर परम्परा निर्वाह का खातिर माउंटेनिंग ड्रामा  कम्पनी मा दुफाड़ ह्वाइ अर एक नई ड्रामा  कम्पनी खुल -यू .के .वैली ड्रामा कम्पनी।  यू .के .वैली ड्रामा कम्पनी बि   नंदा देवी जात्रा स्वांग करण बिसे गे।
इन मा  रीति रिवाज अर अपण संस्कृति बचाणो खातिर  फ्युंळि  मा बि दुफाड़ ह्वे गे, नई संस्था को नामकरण ह्वे तिमलु जो  यू .के .वैली ड्रामा कम्पनी साथ निभाणो बान बणाये गे।
                        यू .के .वैली ड्रामा कम्पनी मुंबई का ड्रामेवाजों मा उत्तराखंड राज्य की राजकीय भाषा अंग्रेजी ह्वावो या हिंदी पर झगड़ा ह्वे ग्यायि अर इन मा एक नई ड्रामा कम्पनी की पौ (नींव ) पोड़ी अर नई कम्पनी को नाम छौ यु के रिवर ड्रामा कमपनी।
इन मा तिमलु संस्था मा तिड्वाळ (दरार ) पोड़ण जरूरी छौ तो नई संस्था को गठन ह्वे बेडू।
                   फिर बेडू से लोगुं मा बिखळाण पोड़ त एक नई संथा को उदय ह्वे मेंळु. मेंळु पर कांड पुड़ीन त छ्युंति संस्था खुलि। छ्युंति पर बीज नि मिलेन  त औंळा संस्था  खुलि। अब जन कुछ लोग गढवाल भ्रात्रि  मंडल मुंबई को पुनर्जीवित करणों विचार करणा छन उनि बुरांश को पुनर्जीवित करणों बात चलणि च जां से कि घिंघारू, हिसर,डंफु  संस्था खुलणो अवसर पैदा ह्वे जावन।                                                         

 
 Copyright @ Bhishma Kukreti  30/4/2013           
(लेख सर्वथा काल्पनिक  है )