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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, April 14, 2013

अपण बल्दौ खुंड सिंग

गढ़वाली हास्य -व्यंग्य 
सौज सौज मा मजाक मसखरी 
हौंस,चबोड़,चखन्यौ   
सौज सौज मा गंभीर छ्वीं

                                          अपण बल्दौ खुंड सिंग 
                              
       चबोड़्या - चखन्यौर्या: भीष्म कुकरेती 
(s = आधी अ )

                    गढ़वाळिम एक मिसल च बल 'अपण बल्दौ पैनु सिंग'। कुज्याण कैन त य़ा मिसल रचि अर गळथि से मिसल रचि बि तो या मिसल किलै प्रसिध्यायि? मिसल वै प्रसिध्याण चयेंद जैं पर लोग टक लगैक अमल  कारन। अब जब हमन जैं बात पर अमल कतै नि करण त फिर इन मिसल को क्या फैदा? हम अपण अपण बल्दों पैनु सिंग नि बथान्दा बल्कणम  सरा अडगैं (क्षेत्र) मा भोंपू लेक बुलणा रौंदा बल कख जयुं बिच्युं बल्द च  अर तैको सिंग खुंड छन। हम अपण   लोगुं भलो काम दिखणो मामला मा जन्मो काणो जि छंवा तो पैनो सिंग ह्वेक बि हम बुलणा रौंदा बल हमर बल्दो खुंड सिंग छन।
  अब सि हमर मल्ला ढांगू कि हि छ्वीं ले ल्यावदि। ग्वील का नंदा दत्त कुकरेतीन स्व सदानंद कुकरेती मरणोप्रांत सिलोगी स्कूल सम्बाळ अर स्कूल तैं मिडल बिटेन हाई स्कूल करवाइ पण हमन उंकी इज्जत त नि करि होलि हां बेजत करण मा हमन कमि बि नि कार। उ त भलो ह्वेन डा नन्द किशोर ढौंडियाळो जौन हम ढांगू  वळो  तैं बथाइ बल नंदा दत्त जी एक विभूति छया। हम  अपण कामौ बल्द पछ्याणनम अर सम्मान दीणम   भौति कंजूस छंवां। फिर यु 'अपण बल्दौ  पैनु सिंग' की कल्पना किलै ह्वे होलि?
             अब जब डा नन्द किशोर ढौंडियालो छ्वीं आइ गे त छ्वीं पर छ्वीं ऐइ जांद। डा  नन्द किशोर ढौंडियालन छै खंडोम गढ़वाल की दिवंगत विभूतियाँ (सन अस्सी बाद ) छपै। पण कथगा इ बुलणा रौंदन बल नन्द किशोर ढौंडियालन कै तैं बि विभूति बणै दे। त म्यार बुलण च बल हे भै   जु तुममा विभूति पछयाणनो बड़ी सिद्धि च तुमि एक किताब छपै दींदा! असलम हम अपण बल्दो पैनो सिंग सहन हि नि कौरि  सकदां। हम गढ़वाऴयुं कुण अपण बल्दों पैनु सिंग'  बेकार की मिसाल च उल्टा हम त 'अपण बल्दौ  पैनो सिंग' तैं खुंड्याण अर पैनो सिंग तैं तुड़नम उस्ताद छंवां।
   अफार सि केशर सिंग बिष्ट की बदौलत आज मुंबई सरीखा जगा मा बड़ो उत्तराखंडी कौथिग होंदु पण हम मुंबई का   उत्तराखंडी केशर सिंग बिष्ट अर  वूंको टीम की हौसला अफजाई जगा पर काट करण मा अपणि बडै  समजदवां। 'अपण बल्दौ  पैन सिंग' देखिक हम जळदा छंवा। 
         अब मुंबई की बात ऐ गे त बलदेव राणा बात भि होलि ही। मुंबई सरीखा जगा मा  दस दिनों नंदा जात जात्रा उर्याण एक अभिनव  प्रयोग च अर संस्कृति रक्षा, संस्कृति प्रसार , संस्कृति से पछ्याणक बणाणो वास्ता बलदेव राणा अर टीम की जथगा बि प्रशंसा ह्वावो कम ही च। पण हम मुंबई का उत्तराखंडी एक जुट ह्वेक बलदेव राणा को उचित सम्मान नि दींदा। उल्टां पीठ पैथर काट करणम अग्वाडि रौंदा। 'अपण बल्दौ पैन सिंग ' से हम हर्षित ना शोक ग्रस्त ह्वे जांदा।
   इनि बिछ्ला ढांगु  मा खंड गां का एक  मनीषी छया मुकन्द राम  बडथ्वाल। भैर वाळु कुणि  संस्कृत अर ज्योतिष का बड़ा विद्वान्। पण हम ढांगु वाळु कुण बस एक बुड्या। हमन सार्वजनिक तौर मुकन्द राम जी तैं वो सम्मान कबि नि दे जांक वो लैक छया। 'अपण बल्दौ पैन सिंग' से हम चिरड्याद छंवा।
   अब बिछ्ला ढांगु मा खंड की बात आलि तो सत्य प्रसाद बडथ्वाल की बात त होलि ही। सत्य प्रसाद बडथ्वालन अपण गां मा लोगुं तैं बथाइ बल जु गढ़वालम नौन कनवेंसनल (गैर पारम्परिक ) खेती याने  बागवानी करे जावो तो पलायन बि  रुकल अर कमाइ बि होलि। पण      हम ढांगु वळ बुल्दवां बल जब तै सत्यान पौढ़ी लेखिक खेती ही जि करण छे त किताब  किलै बोकिन? हम अपण बल्दौ पैन सिंग मा द्वास जरुर खुज्यांदा पण अच्छाई खुज्यान्द दें हम या तो टुटकां पोड़ी जांदा या बौंहड़ से जांदा।
                    
  बिचारो पैन सिंगौ बल्द अपण पैनो सिंग से कुज्याण कथगा मानसिक अर भौतिक  लडै लड़दो पण हम अपण बल्दो कमजोर्युं बखान करणम सद्यानि अग्वाडि रौंदा।
अपण पैनो सिंग वाळ बल्दौ हुंकार तैं हम बकवास नाम दींदा अर दुसरौ मरण्या बलदक कुणाट तैं पद्मश्री दीणो रगर्याट करदां।
अपण पैन सींग को बल्द मा हम तमाम ऐब खुज्यांदवां अर दुसरो ऐबि की  प्रसंशा करण मा एक हैंको दगड़ छौंपा दौड़ ( प्रतियोगिता ) करदां।
अब समौ ऐ गे बल हम  अपण मनीषियों तैं उचित सम्मान देवां।                              



Copyright @ Bhishma Kukreti  14 /4/2013