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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, April 25, 2013

कव्वरोलि - अफरातफरी

Dinesh Bijalwan

कव्वरोलि - अफरातफरी 
कल्दार - रुपये /रुपया 
किल्ला /किल्लु - पशु बाँधने का खूंटा 
कित्लू /कित्ल्डू - केचुवा 
कित्लु - केतली (चाय बनाने का बर्तन )
कखरेनो - किनारा करना / किनारे करना 
कबरेणो - भूरे रंग का 
कुतराण - सूती कपडे के जलने की गंध 
कुतरेंन्डू - कपडे का टुकड़ा जो आग सुलगाने या जलने के लिए प्रयोग होता है. 
कूल (गूल)- पानी की नहर 
कुटलु - गुड़ाई, निराई का औजार / इसका हत्ता लकड़ी का होता है जिसे जाड़आ कहते है तथा फल लोहे का होता है 
कताड़नु - फैलाना (जैसे मुह )
करड़ी - सख्त 
कॉलू - मुर्ख /सीधा 
कोर्नु - खोदना ,मन की बातें की बातें खोद खोद कर पूछना 
कुलैं - चीड का पेड़ 
कन्दूड़ - कान 
कनागू - कान का मैल 
किल्लांक /किल्ल्कार - किलकारी 
कुश्नु - बर्तन साफ़ करने के लिए प्रयुक्त कपड़ा या घास 
कोंग्लू - कोमल 
कड़पट /खड़बट - अशक्त 
कोंप्लू - कोंपल 
कुरेडी /कुरै - कोहरा/धुंध 
कुटम दारी - परिवार 
कै -बै /काई -बाई - जल्दी 
कौथिक/कौतिग (थअळ )- मेला 
किसाण - किसान का बिगड़ा हुआ रूप जो कुशल व्यक्ति /खेतिहर की लिए प्रयोग होता है 
कौंराक - शिकायत /या नाराजगी प्रकट करना 
कुड़बाकि - दुर्भासी (बुरा बोलने वाला)
किरपणया - कमजोर 
कुबेर - कुबेर धन के देवता 
कुबेर- जो अच्छा समय न हो 
कोठार - अन्न भंडारण के लिए लकड़ी के बक्शे 
काणसु /काणसो / काणसी - छोटा /छोटी 
कठगळ -लकड़ियों का ढेर