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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, June 8, 2017

हे अबेर क बौल्या बणिक

Garhwali Poem by Virendra Juyal 'Ajnabi' 

 हे अबेर क बौल्या बणिक
तुम इबरि तक किलैई
लुक्यां छो।
क्या निन्द ल तुमरि धीत
नि भ्वर्ये जो खतिडि ल्हेकि
सियाँ छो।।
भितर क्वी पुछदु नि
अर भैरक अफि
परवाण बण्यां छो।
इलैई त सदनि
अपडों कि
आंख्यूं मा सुद्दि
करकरा हुयाँ छो।।
मुंड मा अपुडु ट्वप्ला
नि च अर भै बंदी मा
अफ तिरपाल सि
तण्याँ छो।
अब जब बगत क घाम
अछैई कि चलिग्या त तुम
घाम तपण वला बण्याँ छो।।
होर्युं कि किस्मत तडतडि
पर अपिडि त किस्मतल हि
अपुडु ब्वगचा बणायुं चा।
दुन्या द्यखो हथ खीसाऊंद
कुच्यां छैंचि पर देख्ये जावा
त सब अखणैंयु चा।।
Copyright@ Virendra Juyal