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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, June 8, 2017

देवेश 'आदमी ' की दो गढ़वाली कविताएं

तुराक      

प्र-: १६।  दिनाँक -:२९/०५/०१७
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दै गौल म गे दादू तेरा स्युं बूटि की तुड़तुड़ी तुराक,,
जलमृत बणि गे दादू तेरु अगास गंगा कु छणी य ख़ुराक,,
बीजै गेन दादू सब शौकार तेरु कंटर कु खिमणाट,,
कन लै आज मैकु दादू तें पर्वतों कु पंच सुराक,,

लायूँ छौ दादू मि तेरि बौ जी कु गोला कु हंसूलु,,
ब्यानि दे दादू तिन एक तुराक नोना कु दे जब मिन धगुलु,,
दादू कूड़ी तेरु बंधण म फुंगड़यों का कांडा तिन लगेंन,,
आज पैछुं म पिवा दे एक तुराक भोल दाजू मि द्यखुलु,,

दादू ब्वै कु कंदुड क मुर्खिल लेले ब्वारी कु ग्लोबन्द धैर ले,,
दादू ब्यखुनि कु स्वील घाम द्यखिण दे अपुड़ कीशा म म्यारा पराण धैर ले,,
सुसरस्यों कु गाल्यों कु कुटरी खुलण से पैल दादू म्यार गाल रुझे दे,,
दादू यखुलि नि ज्येद गॉँव के गल्या म चल में दगड ञ्जवाल भौर ले,,

सैर मुंथा म खोजणा छन दाजू आज य शिव का ज्यूंदाल,,
जब अंठा कोड़ी न त सभि बण्या छन मैकु आज गढ़ सुम्याल,,
दादू कन च म्यार तुराक पैथर यु उलारू पराण,,
अज़्यू द्यखुणा छन मिथे तुम कभि छै मि भि इख भूम्याल,,

दादू अब त ब्यखुन फ़जल स्याणी भि आंखां घुर्याणि चा,,
रूमख म ज्वान नोनि दादू आँखा कि ड्यबलि लुकाणि चा,,
दादू आज ब्यखुनि कु निन्द ये जाल बस एक तुराक देदे,,
दादू ड्यार म कर्जदारों कु लँगट्याल म्यारा हटगा बुख़ाणि चा,,

दादू कोंप हुयूं च गैत फर झमझ्याट हुयूं ज्मदयाल म,,
अङ्ख्याव दादू मेरु छिमव्ड म घिंगाट हुयूं सुवा कु ख्वाल म,,
गौल भिजै दे दादू भुखि सियाँ नोना नि देख सकुद मि म्याल म,,
अज्यूँ दादू रुजै दे मेरु सांखि कन रों मि रिति आज ये बुग्याल म,,
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 ✍ देवेश आदमी
पट्टी पैनो रिखणीखाल
देवभूमि उत्तराखंड
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 बिजोग

बल जेठ मैना लोग कंडली साग म टिमाटर कु छोंकु मना छन,,
घण्ड्योल जागर छोड़ि अब डीजे म डिस्को डांछ कना छन,,

त बव्ला भै कन कुनस ह्वै...........

ढाँडु लगयूं भादौ मैना अर सारि म जख़्या बुतणा छन,,
लैद गोड़ि जाई जंगल बेलु ढाँगा कु ग्वील करणा छन,,

तुम बथाव कन बिजोग पोड..........

अब त सिल्ट्वा ल्वाड लेकि चौबट म वाड घँटणा छन,,
तिबरि चौख छोड़ी डेरादूंण म वाडि जग्वालणा छन,,

अब तुमि बोल हें निखणी नि ह्वै तब........

बेटियों क पैसा खैकि भग्यान अब सोकार छन बण्यां,,
पिंडलु साग खैकि ब्यखुन फ़जल हूणु बिचारों थै पण्यां,,

जैल ब्वालोल कुकुरों फर सींग नि हूंदा बल.......

देवेश आदमी

Thanking You with regards

प्रस्तुति - B.C.Kukreti