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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, June 8, 2017

खौन्द्वार

इन्नैं खौन्द्वार, उन्नै खौन्द्वार
जन्नै द्यखा, उन्नै खौन्द्वार।।

चौका तिरवालै पुंगड़ी टूटी
मज्यूल जाणै थुमुदी टूटी
टूट गाई दानणै पठाल
इन्नैं खौन्द्वार, उन्नै खौन्द्वार
जन्नै द्यखा, उन्नै खौन्द्वार।।

अब्ता धुरप्पलौ रस्ता ऊबरा अय्यु घाम
कूड़ी का टूट्या छन सब्या दार
ऊब्बर-मज्यूला काभी टूट्टी गैं मोर-संगार
इन्नैं खौन्द्वार, उन्नै खौन्द्वार
जन्नै द्यखा, उन्नै खौन्द्वार।।

सरग दिदा कू भी इन्न म्वारु
छन्नी पिछनै प्वाडू रवाडू
अब्ता छन्न भी ह्वैगै खौन्द्वार, 
इन्नैं खौन्द्वार, उन्नै खौन्द्वार
जन्नै द्यखा, उन्नै खौन्द्वार।।


गौ का बाटा-घाटों मा काण्डा जामी गैं
सगोड़ा-पुगड़ियों मा बुखुलू फूली गैं
बांजा पोड्या छिन नवला-पन्यार
इन्नैं खौन्द्वार, उन्नै खौन्द्वार
जन्नै द्यखा, उन्नै खौन्द्वार।।

देवी-द्यब्तों का मन्दिरों मा मूसा दौड़णा छिन
ऊही द्यब्तों मा हम अपणी तरक्की मागणा छिन
अरे यो द्यबता लग्या छी अपणी पुज्जै का सार
इन्नैं खौन्द्वार, उन्नै खौन्द्वार
जन्नै द्यखा, उन्नै खौन्द्वार।।

चला कुछ दिनों खुणै ही,अपणा घर-गौ जौला यार
बचौला अपनी थाति, ल्यौला उन्नै भी बाहर
नी हूणी द्यौला अपणा पुरखों की कूड़ी तै खौन्द्वार।
नी हूणी द्यौला अपणा पुरखों की कूड़ी तै खौन्द्वार।

लिख्वार:- गोविन्दराम पोखरियाल 'साथी'