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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, June 8, 2017

मानसून की आहट

सुखदेव दर्द की कविता 
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आज दुद्याल त्वाड़ा बजाणा छिन् .............................
आज बरखा ह्वे सकद भै,,
आज त् काणा धै लगाणा छिन............................
आज बरखा ह्वे सकद भै,,
चोल्हि आज फजल बिटेकि .
बसदा_बसदा ,पगलेणी छिन,
किरम्वलि बि धरति छोड़िकि,
अगास म फौंखुड़ी फुर्याणी छिन्,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
आज मूसा मुसद्वल्यौं बिटि ,
हथि खुट्योंल माटु थैं चुटाणा
छिन्,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
आज बरखा ह्वे सकद भै ,
           ( सुखदेव दर्द)



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