उत्तराखंडी ई-पत्रिका की गतिविधियाँ ई-मेल पर

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Wednesday, August 5, 2015

भुंदरा बौकी अब्दुल कलाम जी तै बिगळी श्रद्धांजलि !

Tribute to Bharat Ratna Abdul Kalam 

  भुंदरा बौकी अब्दुल कलाम जी तै बिगळी श्रद्धांजलि !
         - भीष्म कुकरेती 

भुंदरा बौ -ये भीषम ! मि कब बिटेन त्यार फोन ट्राइ करणु छौ।  घंटी बजणी छै पर कुनगस बल तीन फोन नि उठाये।  उन तो तू   …… 
मि -हाँ , मि एक मीटिंग मा छौ।  स्वर्गवासी अब्दुल कलाम जी तै श्रद्धांजलि की बैठक।  तो फोन साइलेंट मोड मा जि छौ।  निथर त्यार फोन हो अर मि नि उठौं ? 
भुंदरा बौ -मेर समज से कलाम जी नि मरिन। 
मि -क्या मतबल ?
भुंदरा बौ -अरे मरदु त  वा च जु चुला से भैर , चौक से भैर , चौहद्दी से भैर जात्रा नि करदु। 
मि -हाँ ये बौ सै ब्वाल तीन।  कलाम जीन तो ता जिंदगी जात्रा मा गुजार।
भुंदरा बौ -मरदु त वा च जु पढ़दु नी। 
मि -अरे वाह मरदु त वा च जु पढ़दु नी। कलाम जी तो हर बगत पढ़दा बि छ अर पढ़ांद बि छा। 
भुंदरा बौ -मरदु त  व च जु आदतों का गुलाम ह्वे जावो।  मरदु त वा च जु जोखिम नि उठावो नया कुछ करणो वास्ता। 
मि -कलाम जी तो इन्नोवेसन की मिसाइल रूपी मिसाल छया। 
भुंदरा बौ -मरदु तो वा च जु बात नि करदु अजनबियों से। 
मि -कमाल जी को कमाल छौ कि क्वी बि , कनि बि , कखक बि अपछ्याणक ह्वावो वैक दगड़ दोस्ती कर लींदा छ अर खासकर बच्चों दगड़ दोस्ती करण मा कलाम जी तै अति आनंद औंद छौ। 
भुंदरा बौ -मरदु वा च जु मदद करण छोड़ि दींदु। 
मि - कलाम जी तो मदद का दुसर नाम छया। 
भुंदरा बौ -मरदु त वो च जु जजबातों से नफरत सरांदु। 
मि -ये ले कमाल साब तो प्रेम का पुजारी छया। 
भुंदरा बौ -मरदु वा च जु अनिश्चित का बान निश्चित पर टिक्यूँ रौंद अर खतरा का रस्ता अख्तियार नि करदु। 
मि -कलाम जी तो हमेशा अनिश्चित तै निश्चित बणानो रस्तों पर चलदा छा। 
भुंदरा बौ -मरदु वा च जु ख़्वाबों पैथर नि भागदु। 
मि -कमाल च ये बौ ! कमाल जीका ख़्वाबों से इ आज हिन्दुस्तान न्यूक्लियर पावर बणी.
भुंदरा बौ -वु मरदु  च जु लकीर का फ़क़ीरी रस्ता नि बदल्दु। 
मि -भै भुंदरा बौ कमाल जी तो हमेशा रचनाधर्मिता का ही रस्ता पर चलणा रैन। 
भुंदरा बौ -तो फिर कनै बोलि सक्यांद कि अब्दुल कलाम मरि गेन?  
मि -नै नै अब्दुल कलाम जनाब तो हमेशा अमर छन , अमर छन , अमर छन।

(स्पेनिश कवि पाब्लो नरूदा की एक कविता पर अधारित) 

Copyright @ Bhishma Kukreti 1 /8 /2015