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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, January 1, 2012

Why Doesn't Crow Bite ? कवा झूट बुलण वाळ तैं किलै नि काटदो ?

 कवा झूट बुलण वाळ तैं किलै नि काटदो ?
(Garhwali Satire, Garhwal Humorous essays, Satire in Uttarakahndi Languages, Himalayan Languages Satire and Humour )
                           भीष्म कुकरेती
                  पैलो जमानो भलो छौ जब झूट बुलण वाळ तैं कवा काटदो छौ. बस झूठ ब्वालो अर कवा अपण ड्यूटी खुणि तयार.
लोक बुल्दन बल युधिस्ठिर धर्मराज को रूप छौ अर तबी युधिस्ठिर झूठ नि बोल्दो थौ. पण महाभारत मा इन बि त नि लिख्युं च
बल दुर्योधन न बि कबि झूट ब्वाल. जी नही! दुर्योधन बि झूठ नि बोल्दो थौ. अरे झूठ कनकै बोलणो थौ चाहे ओ युधिस्ठिर ह्वाऊ
या दुर्योधन ह्वाओ द्वी झूठ बोली नि सकदा छा. वै जमानो मा जनि क्वी बि झूट बोल्दो थौ सर से कवा काटणो ऐ जांदा छया.
जनि झूठ बुले ग्याई तनी कवा कांव कांव करदा झूट बुलेंदर का मूंड पर चूंचै कचांग मारी दीन्दा होला. इन मा युधिस्ठिर त जाणि
द्याओ वैका मंत्री संतरी बि झूट नि बोली सकदा छा.
पैलो जमानो भलो थौ तबी त वकील नाम को भयंकर सामाजिक जानवर वै टैम पर नि पाए जान्दो थौ. वै टैम पर वकील अर वकालतनामा
क जरोरात इ नि छे. कोर्ट मा जनि क्वी मुवक्किल, मुद्दई या गवाह क्वी बि झूट बोल्दु रैं होलू झट से कवा ऐका पछ्याणक करदा होला बल
झूट क्वा बुलणु च अर न्यायाधीस तैं कुछ करणे जर्वत इ नी छै. कवा न्याय का पंछी छया . सैत च वैबारी लोक कोर्ट मा नि जांदा छया .
कवा न्याय करी लीन्दा छया
 
           अब यू रिवाज ख़तम ह्व़े ग्याई .कुज्याण भगवान् न कवों शक्ति किलै कम करी दे होलू , भगवान् इ जाणल़ू . पण जु बि ह्वाई
ठीक इ ह्व़े होलू.
 
               अब ज़रा घड्यावदी, जरा स्वाचदी, जरा विचार कारो त आप बि बोलिला बल ठीक इ ह्व़े जु झूट बुळण वाळऊँ तैं कवा नि कटदो.
अच्काल झूठ बोलण वालूँ तैं कवा काटदो त भारत मा इ द्वी चार सौ करोड़ कवों जर्वत होंदी. कुज्याण कु कखम झूठ बोली दीन्दो
त वै हिसाब से हरेक भारतीय क पैथर औसतन द्वी कवा त चयेणा इ छया की ना?
अब ज़रा घड्यावदी/स्वाचदी की आप रासन कार्ड ऑफिस मा जयां छंवां अर आप चपड़सी तैं पुछणा छंवां बल "साब कख छन ?"
चपड़सी क जबाब होंदु , " साब एक जरुरी मीटिंग मा व्यस्त छन ." . अर इना चपड़सी न झूट ब्वाल ना की उना कवा ऐका चपड़सी
क मूंड कच्याण बिसे जालो. कवा क्वी मनिख त छ नि अपण काम मा लापरवाही कारलु. जथगा समय भगवान् न झूट बुलण वाळ तै
ठैरायुं होलू/नियत कर्युं कवा उथगा तैं त ल्यालो की ना ? इथगा मा वी चपड़सी फोन पर साब की बीबी मा बोल्दु, " हाँ मेम साब ! साब ओफिसियल काम मा
भौत व्यस्त छन" अर फिर कवा की जरोरात होली की ना किलैकि साब त अपण सेक्रेटरी दगड चा -पाणी पीण मा व्यस्त छन .
इन मा चपड़सी पर चूंच मारणो या काटणो द्वी कवा ओफिसियाली व्यस्त ह्व़े जाला अर जब आप झूठ बोलिल्या बल आप की
आमदनी मिड्डल इनकम ग्रुप मा ना लोअर इनकम ग्रुप मा च त आप तैं काटणो एक कवा चयेंद अर फिर आपक ड्यारम त चार इ आदिम छन अर
बोलणा छंवां बल आपक परिवार मा छै आदिम छन त आप तैं काटणो हैंक कवा चएंद की ना ?
 
       अच्काल चार मोबाईल फोन अर जण चारेक गर्ल फ्रेंड रखण जरुरी ह्व़े गे. इ द्वी जरोरात बि छन अर स्टेटस सिम्बल बि छन.
अब आप एक गर्ल फ्रेंड तैं लेकी कै बढिया सी जगा मा शराब की चुस्की ल़ीणा छंवां , कैंडल डिन्नर की तैयारी होणि इ च कि आपक
बीबी क फोन आये अर आप एक मोबाइल पर बुलणा छंवां, " ए भै ! मी जरा एक महत्व पूर्ण फोरेन क्लाइंट क दगड डिन्नर करणु छौं .."
अर इथगा मा आप तैं काटणो कवा तैयार पण आप हैंको फोन पर दूसरी गर्ल फ्रेंड क दगड बचळयाणा छंवां, " स्वीट हार्ट आज मी
जरा अपण साब क दगड बैठ्युं छौं .." आप तैं कटणो हैंको कवा तैयार अर इनी द्वी हौरी गर्ल फ्रेंडू फोन आलो अर आप तैं झूट इ बुलण
पोड़ल अर खाली आपक इ वास्ता चार कावों जर्वत ह्व़े जाली जो आप पर कचांग लगाला.
 
            अर ज़रा घड्यावदी, जरा स्वाचदी, जरा विचार कारो की पार्लियामेंट अर विधान सभा मा कथगा कवों जरुरत ह्वेली ! ए मेरी ब्व़े !
जख नेता लोक पल पल मा झूट बुलणा रौंदन उख त कव्वों की फ़ौज बि कम पोड़ळी . अर फिर चुनावूं टैम पर त नेता, नेताओं चमचा,
अखबार नबीस , खबररशां ( पत्रकार ), बिचौलिया, चुनौ फंड दीण वाळ अर फंड ल़ीण वाळ अर इख तलक की वोटर बि झूठ इ बुळणा रौंदन
त चुनाव क टैम पर भगवान् इथगा कवा कखन ल्हालो?
 
         फिर चलो ! भगवान् कावों इंतजाम करी बि द्यालों पण कवों कु खाणो इंतजाम कखन होलू. अच्काल त मनिख कवों तैं घी घुसीं रुट्टी
नमकीन वगैरा दीणा रौंदन पण जब कवा झूट बुलण वालुं तैं काटल त कै मनिख न दीण कवा तैं खाणक ?
भगवान् बि हमारो इ त च. इलै भगवान न ये जमानो मा झूठ बुलण पर कवा काटणो रिवाज बन्द करे दे . चलो ठीक इ ह्व़े .
Satire in Uttarakahndi LanguagesGarhwali Satire, Garhwal Humorous essays, , Himalayan Languages Satire and Humour
to be continued in next issue....
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