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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, January 4, 2012

Election in Uttarakhand


मौसमी बुखार
                     उत्तराखंड मा ह्युन्दो टैम पर चुनौ
                         भीष्म कुकरेती
           अच्काल उन त उत्तरखंड मा ह्यूंदो मौसम च, हाँ जी थ्वड़ा -थ्वडा बरखा होणो मौसम च,
जख बरफ पोड़दो उख बर्फ पड़दो, जख नि पोड़दो उख नि पड़दो. बर्फ अपणी मर्जी
से कखिम बि नि पोडद . बरफ मनिख नी च, बर्फ पोड़णो नियम होन्दन अर मनिख
गां-गौळओ (सामाजिक) अर सम्वैधानिक नियम बणादो इं इलै च बल नियम
बणदा यि तोड़े जवान . हाँ त मि बुल णो छौ बल उत्तराखंड मा ह्युन्दो ,ठंड को, जडडू
मौसम च पण चुनाव रूपी महाभारत से मौसम मा गर्मी ऐ गे.
प्राकृतिक हिसाब से बर्फ पिघळणो टैम मार्च-अप्रैल मा होंद पण संवाददाता
खबर दीणा छन चुनावी तातोपन से अबि बिटेन बर्फ पिघळण बिसे गे.
            अच्काल अबि इ उत्तराखंड का विधायाकुं तैं याद आई बल पांच साल पैल
ओ विधायक बौणी छया.अब बिचारा विधायक ! ड्याराडूण राज्धानित्व का
सुख का गैरो तालाब मा फंस्या रैन अर बिसरी गेन बल चुनाव त पाँच सालुं मा आन्द. अब बिचारा
विधायक ! नक्शौं मा देखी देखी अपण चुनावी क्षेत्र को भूगोल याद करणु च .
इनी जु पैल्या दें चुनाव हारी गे छा ओ बि याद करणे कोशिश करणा छन, विश्लेसण, समीक्षा
अब इ करणा छन बल ऊंका हार की असली वजे क्या छे .
         क्त्त्युं पर जनसेवा क खज्जी होणी च, समाज सेवा की मर्च लगणी च वो चुनाव लड़णो ऐ गेन ,
जौं तैं उत्तराखंड तैं सोराग बणोणे पीड़ा होणी च वो बि चुनाव मैदान मा आई गेन.
, क्त्त्युं तैं याद आई बल अबि तक ड्याराडूण इ उत्तराखंड की राजधानी च अर
गैरसैण अबि तक राजधानी नी बौण त वो गैरसैण तैं राजधानी बणाणो
चुनाव लड़णा छन. पता नी गैरसैण का ग्रहूँ मा राहू केतु की क्या दसा च धौं !
जब बि चुनाव आन्दन तबी लोकुं तैं गैरसैण याद आन्द.
क्त्त्युं तैं पता च की वो ये जनम त दूर वै जनम मा बि चुनाव नी जीत सकदन
पण वो चुनाव इलै लड़णा छन की कै हैंक उम्मेदवारो पत्ता साफ़ ह्व़े जाओ.
       अच्काल मिंडकूं समौ नी च , पण चुनावी महाभारत मा
अच्काल नेताओं का बोल मिंडकूं टरटर्याट जन छन अर जन मिंडकी मिंडकु तैं पटाणो बान
टर्र टर्र करदन उनि अच्काल उमेदवार बि जनता पटाणो बान टरटराट करदन. दुयूंक टरटराट मा
प्रेम होंद आशा होंद .
           अच्काल ह्युन्दुं मा गरम कपड़ों मौसम होंद थौ पण ये साल उत्तराखंड मा जनवरी तलक
पोस्टरूं टुपला, पोस्टरूं मफलर, बैनरूं कोट, कुर्ता , सबि कुछ चुनावी बैनरूं का .इख तक की
ढिकाण-डिसाण बि चुनावी बैनरूं का ही होला.
             ये साल उत्तराखंड मा ढांडउन नी पोड़न . ये बरस त नेताओं का भाषणु ग्व़ाल़ा पोडल.
ये साल बर्फन बि नी पोड़न ये साल त नारेबाजी से उपजीं आश्वासन की बरखा होली .
          आप दिखदा होल्या किजादातर ह्यूंद मा इ तन्त्र मन्त्र कर्मकांड क पूजन हुंद पण ये साल
नेताओं का प्रपंची मन्त्र तन्त्र , काल़ो जादू दिखणो मीलल. राजनीति का जादूगर
झूट तैं सच अर सच तैं झूट सिद्ध करण मा झाड़ ताड़ वालुं से जादा होस्यार होन्दन त तांत्रिक-मान्त्रिक
ये समौ पर कूण्या चलि जाला. झूट का भुज्यल , झूट का गिगुड़ ,चुनावी झाड़ ताड़ का ताम झाम होला.
     मूस अर किरम्वळ जन अपणो डुडख्युं/दुंलुं मा बगत कुबगतो बान खाणक पीणक जमा करदन
तन्नी छुटभया नेता उमीदवारों से कमीसन लेकी अगला पाँच सालो खुणि अपण पुटकी भरणो इंतजाम करी
लीन्दन. प्रजातंत्र च त बड़ा नेता राजधानी मा मौज कारल त छुटभया बि अपण मेनत मजदूरी उगाला
कि ना ?
         उन त ह्युन्दुं मा पहाड़ कि नद्युं मा पाणी सुकी जान्द पण ये साल नदी, गाड, गदनु मा
पाणि ना शराब बौगलि. चुनावी मौसम शराब की कम्पन्यूँ क प्रोडक्सन मा बढ़ोतरी को
बि मौसम च.
 
     चुनावी मौसम अखबार वाल़ू खुणि बि कमणो मौसम च. भारत मा एक नयो बिजिनेस
इजाद ह्व़े गे अर ये बिजिनेस को नाम च 'पेड़ न्वूज ' . जी हाँ अच्काल 'पेड़ न्वूज' का
बिजिनेस मा उछला ऐ जालो. प्रजातंत्र मा भौं भौं नया नया टुटब्याग की जै हो!.
         अच्काल ह्यूंदो मौसम नी रै जालो .उन ह्यूंद मा सर्दी जुकाम की बिमारी होन्दन
पण अच्काल त गढवाळ मा , कुमाऊं मा ' खब' याने खश्या-बामण नाम की उकै-उन्द,
खश्या-बामण का दस्त, खश्या-बामण को खुर्या , खश्या-बामण बुखार जन मौसमी बीमारी
ऐ जाली. ख-ब की बीमारी भौत पुराणी बीमारी च अर बुल्दन बल कुमाओं-गढ़वाळ मा गुरख्याणी
औण मा भौत हड़ तक ख-ब बीमारी को बि हाथ छौ .
        पुराणा जमानो मा ह्यूंद को मौसम मा लोक बल्दुं तैं नाळन तेल घी पिलान्दा छया ये चुनावी
मौसम मा नेता जनता रूपी बल्दुं तैं आश्वासन, अणभिग्य पण अभिनवी सुपिनो
पिलाली अर जनता भोट दीणे जाली बल सैत च ये चुनाव मा जित्याँ नेता पहाडु
बान कुछ सकारात्मक कदम उठाली . नेता कथगा बि कुकर्मी ह्व़े जाला, नेता लोक कथगा बि
कुनेथिक ह्व़े जाला, नेता लोक कथगा बि कुपाण इ (बुरी प्रवृति ) होला, पण जनता त हमेसा से
आशावान हुंदी अर या ही प्रजातंत्र की खूबी च.
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