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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, January 15, 2012

Garhwali Words are Now being Extinct -8


Presented by Bhishm Kukreti
Source Shri Ramakant Benjwal and Shrimati Vina Bejwal , Garhwali Shabdkosh
 
 
छंचर =शनिवार
छंछा = कलंकिनी , चरित्रहीन
छ्न्तोळी =रिंगाळ का छाता
छंवाळ =अवस्था, पीढ़ी
छकटु /छकटो =मौका , अवसर
छकल्वी =घरों में छोटा मोटा काम कर जीवन बसर करने वाला
छ्क्कू = पेटू
छगटणु = ठगना ,ल़े लेना
छ्छल़ोण/छ्याळणु =भेद लेना, पूछताछ करना
छsडु /छsड़ो = झरना, (s = आधी अ )
छपनवास = छुप जना, लुप्त हो जना
छपड्वड़ी =पर्याप्त
छांगण =चुनना , बीनना
छारु , छारो = राख
छिर्वणि = कच्चे गूल से रिसता पानी
छिलबिलू= पतला कपड़ा
छिलडेणु =छटपटाना
छुचकार = लानत
छुदर, छेपरू = क्षुद्र
छुन्यार =सेवा, टहल करने वाला
छुंवोदारि = वह स्त्री जो नवजात शिशु को सर्वप्रथम छूती है
छेपरवाती= ओच्चेपन की बातें
छोळया =वह पशु जिसके दूध में वसा अधिक हो
छ्वैणा = दूध दुहना
Courtesy: Shri Ramakant Benjwal and Shrimati Vina Bejwal , Garhwali Shabdkosh