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Sunday, January 15, 2012

फिल्मकार पाराशर गौड़ दगड़ी भीष्म कुकरेती लिखाभेंट


गढ़वाळी भाषौ गितांग, कवि, चाबोडया लिख्वार, स्वांगकार ,कथाकार,  फिल्मकार पाराशर गौड़ दगड़ी भीष्म कुकरेतीS लिखाभेंट
 

(सवालों का जबाब देंण से पैली मी आपकी कलम, आपकी सोच,व आप थै धन्यबाद देंन्दू की आप जै तरह से अपणी दोध बोली की बढ़ोतरी, व उथान का वास्ता रात-दिन एक कोरी कि वी थै हर तरह से संघर्ष कना छा वो अपणा आप माँ एक उदाहरण च. ! नतमस्तक आप का वास्ता !आपल भेंट बार्ता का माध्यम से मैसे कुछ सवाल पुछिनि त, मी कोशिश करुलू कु उकु जबाब देसकुलू !-Parashar Gaud)
भीष्म कुकरेती को : आप कविता क्षेत्र मा किलै ऐन ?
पाराशर गौड़ को जबाब : जबाब च आण पड़ी ! वेक भे द्वी कारण छी ! एक .. ६० का दशक माँ राजधानी ( देहली) माँ कबिता करनी त दूर लोग अपणी बोली भाषा माँ छुई या बात करद भी शर्मंदा छा ! ई बात मैथी चुभी बस तब मैं न अपणा आप से बोली कि आज से मी गड्वाली बोली कि ज्वा भी बिधा हो वेमा ही आम करलु अर लिखुलू ! दुसुरु .. वे समय पर जू लिखदा भी छा त उ का वास्ता कवी एनु मंच नि चो कि जैम एकी वो अपणी कबिता बाची सकी ,सुने सकी !तब मैंन एक निमाणी याने छवटी कोशिश करेकी उका वास्ता एक मंच तयार कैरी उकी कबिता सुणी आर अपणी सुनेनी ई तरह से कबिता का छेत्रमाँ आनु हवे ! आप थै एक बात औरी बतै दयु कि मी कबि से पैली मी , मेरी पछ्यान एक गीतकार का रूप माँ च ! ६० का दशक माँ मेरा कई गीत दिली के आल इंडिया रेडियो से प्रसारित ह्वेनी !
भीष्म कुकरेती को सवाल: आपकी कविता पर कौं कौं कवियुं प्रभाव च ?
पाराशर गौड़ को जबाब ; मेरी कबितायो पर कई भी कबि वेकि कबिता कु केकु प्रभाव नी च और ना ही राई, मेरी किबता मेरी सोच अर भावों कि अभिब्यक्ति हुदीन ! हां मी एक कबि से जरुर प्रभावित छो अर वो छी मेरा गडवाल का कालिदास याने स्वर्गीय कन्हिया लाल डंडरियालजी ! वी मैथी किबता का फीलड माँ लेनी ! असल्मा उनै मी थै कबिता लिखन सिखाए !
भीष्म कुकरेती को सवाल: आपका लेखन मा भौतिक वातावरण याने लिखनो टेबल, खुर्सी, पेन, इकुलास, आदि को कथगा महत्व च ?

पाराशर गौड़ को जबाब: कबिता यु सब चीजू कि मोताज नी हुन्दी ! कबिता बनाइये नी जादी ! कैभी चीज थै बनाणा का वास्ता चीजुकी जरूरत हुन्द उदारण का वास्ता जनकी मकान बनाणा वास्ता गारू माटु ठुंगा लकड़ी छेनी आदि कि आवश्यकता हुन्द युका बिना वो पूरी नी हवे सकद जबकि कबिता माँ ना त कवी कुर्सी टेबल जनी चीज जरूरत नी हुन्दी ! वेंम त भावों कि आवश्यकता जरूरत हुन्द ! अर भावों थै, ना त समय ,नत कै इक्लुवंस क़ी ना कै भोतिक सुख सुबिधो क़ी कवी जरूरत हुन्द ! उत कै भी समय /कै भी जगह माँ ये जान्द !
भीष्म कुकरेती को सवाल: आप पेन से लिख्दान या पेन्सिल से या कम्पुटर मा ? कन टाइप का कागज़ आप तैं सूट करदन मतबल कनु कागज आप तैं कविता लिखण मा माफिक आन्दन?
पाराशर गौड़ को जबाब: कबिता का भाव जब आन्दीन, त , तब जवा भी चीज समणी आन्द बस वेमै लिखन बैठ जादू सवाल: जब आप अपण डेस्क या टेबले से दूर रौंदा अर क्वी विषय दिमाग मा ऐ जाओ त क्या आप क्वी नॉट बुक दगड मा रखदां ? अक्सर इनुत नी हुन्द पर अगर कभी एनु ह्वेजा त, मी वे समय जू भी चीज याने पेपर उपलब्ध हवा वे माँ उ पंग्त्यु थै लेखी देन्दु ! फिर जब कभी मौका मिल्द त वी गीत या कविता थै पूरी करी देन्दु ! न पेंशन अर कागज़ मी थै ज्यादा बालू लगद बादम कम्प्यूटर माँ लेखी वे थै रखी देन्दु !
भीष्म कुकरेती को सवाल: जब आप अपण डेस्क या टेबले से दूर रौंदा अर क्वी विषय दिमाग मा ऐ जाओ त क्या आप क्वी नॉट बुक दगड मा रखदां ? अक्सर इनुत नी हुन्द पर अगर कभी एनु ह्वेजा त, मी वे समय जू भी चीज याने पेपर उपलब्ध हवा वे माँ उ पंग्त्यु थै लेखी देन्दु ! फिर जब कभी मौका मिल्द त वी गीत या कविता थैपूरी करी देन्दु !

सवाल: जब आप अपण डेस्क या टेबले से दूर रौंदा अर क्वी विषय दिमाग मा ऐ जाओ त क्या आप क्वी नॉट बुक दगड मा रखदां ?
सवाल: माना की कैबरी आप का दिमाग मा क्वी खास विचार ऐ जवान अर वै बगत आप उन विचारूं तैं लेखी नि सकद्वां त आप पर क्या बितदी ? अर फिर क्या करदा ?
भीष्म कुकरेती कोसवाल: आप अपण कविता तैं कथगा दें रिवाइज करदां ?
पाराशर गौड़ को जबाब: जतका बगत मी उई थै पडदू !

भीष्म कुकरेती को सवाल: क्या कबि आपन कविता वर्कशॉप क बारा मा बि स्वाच? नई छिंवाळ तैं गढवाळी कविता गढ़णो को प्रासिक्ष्ण बारा मा क्या हूण चएंद /
पाराशर गौड़ को जबाब: आपल बहुत ही अहम सवाल उठाई जू साहितिक द्रष्टि से बहुत ही मत्वा पूर्ण च ! अगर इनु हवे जा या करेजा त इसे द्वी बात हवे सक्दं एक त भाषा थै एक सबल मिलालू और साथ ही साथ
लेखक थै कबिता का तत्वा भी पता लागला जैसे वेकि कबिता माँ ससकता येजाली !नया कबिऊ थै चैद की उ गड्वाली का अचा कबियु थै पड़ींन ! उ के रचना पर फोकास करी ! एसे उ थै
कई बात पता लागली जन्की , किब्ता क्या हुन्द वेकि रचना कन करी जान्द ! सब्दो आर भाह्वो कु ताल मेल l क्न्क्वे बठाये जान्द आदि आदि !
भीष्म कुकरेती को सवाल : आपन कविता गढ़णो बान क्वी औपचारिक (formal ) प्रशिक्षण ल़े च ?
पाराशर गौड़ को जबाब: सच बोलू त ना ...! वे बेर अक़ल की कमी छे अर नहीं इतका साधन मौजूद छाया जेकू लाभ तब हम ले सकदा छा जातक आज छन !
भीष्म कुकरेती को सवाल: हिंदी साहित्यिक आलोचना से आप की कवितौं या कवित्व पर क्या प्रभौ च . क्वी उदहारण ?
पाराशर गौड़ को जबाब: बहुत असर पडद ! पता लगाद की हम क्या छा लिखना ! क्या जू लिखुच वो कबिता का माध्यम से सम सामय्की च की ना !क्या वो अपना संदेश देना माँ कामयाब हवे या ना !

भीष्म कुकरेती को सवाल : आप का कवित्व जीवन मा रचनात्मक सुखो बि आई होलो त वै रचनात्मक सुखा तैं ख़तम करणों आपन क्या कौर ?
पाराशर गौड़ को जबाब: क ना बल्कि के बार इनु हवे जान्द ! ताज उदाहरण युच की अभी पट ८ महीना से कलम व भाव द्वी नदारद छन ! कपाल रग ड णु छो पर मजाल च जू एक भी हर्फ आनु हो !
मूड ही नि बनुनु च ! यु मूड भी बडू उत्कू घस्सा च ! एजात इजा, नि औ त, नि आ !

भीष्म कुकरेती को सवाल: कविता घड़याण मा, गंठयाण मा , रिवाइज करण मा इकुलास की जरुरत आप तैं कथगा हूंद ?
पाराशर गौड़ को जबाब: इत्गा भी नि पुड्दी पर हां पर जब भाव आदन त तब एकुल्वास की जरूरत पुड्दी च !

भीष्म कुकरेती को सवाल : इकुलास मा जाण या इकुलासी मनोगति से आपक पारिवारिक जीवन या सामाजिक जीवन पर क्या फ़रक पोडद ?
पाराशर गौड़ को जबाब: इत्गा बोल्या भी न हवा मी अभी की २४ घंटा कबिता माँ ही उलझयु रों! हां जय दिन या नोबत आइजली तब दिखला !
भीष्म कुकरेती को इकुलासी मनोगति से आपक काम (कार्यालय ) पर कथगा फ़रक पोडद
पाराशर गौड़ को जबाब: बिभाधन त हवे जान्द कभी कबि

भीष्म कुकरेती को सवाल: कबि इन हूंद आप एक कविता क बान क्वी पंगती लिख्दां पं फिर वो पंगती वीं कविता मा प्रयोग नि
करदा त फिर वूं पंगत्यूं क्या कर्द्वां ?
पाराशर गौड़ को जबाब अक्सर ...मेरा साथ इनी हुन्द यत वा पकती कई कुणमाँ छन अपनी बारी की जग्वाल माँ या फिर हर्चे जदन कागजू का बीच !
भीष्म कुकरेती को सवाल : जब कबि आप सीण इ वाळ हवेल्या या सियाँ रैल्या अर चट चटाक से क्वी कविता लैन/विषय आदि मन मा ऐ जाओ त क्या करदवां ?
उठी चट से कगाज माँ उतारी देनु !

भीष्म कुकरेती को सवाल: आप को को शब्दकोश अपण दगड रख्दां ?
पाराशर गौड़ को जबाब: ना

भीष्म कुकरेती को सवाल: हिंदी आलोचना तैं क्या बराबर बांचणा रौंदवां ?
पाराशर गौड़ को जबाब: ना
भीष्म कुकरेती को सवाल : गढवाळी समालोचना से बि आपको कवित्व पर फ़रक पोडद ?
पाराशर गौड़ को जबाब: बहुत हरक पडद! जन मिल बोली की तब तक पत ही नि लगुद की क्या ल्याख अर जू ल्याख भी च वो कख तक ठीक च !
भीष्म कुकरेती को सवाल: भारत मा गैर हिंदी भाषाओं वर्तमान काव्य की जानकारी बान आप क्या करदवां ? या, आप यां से बेफिक्र रौंदवां
पाराशर गौड़ को जबाब: पैली त पता नि छो अर नहीं रूचि छे लेकिन जब से नेट से जुड़ा त तब से अब अन्य बोली भासयु थै पडन की रूचि जगी उका बरम समझन की अकाल एगे !

भीष्म कुकरेती को सवाल : अंग्रेजी मा वर्तमान काव्य की जानकारी बान क्या करदवां आप?
पाराशर गौड़ को जबाब: नेट व लायब्रेरी माँ जेकी वे का बारामा पडदा !

भीष्म कुकरेती को सवाल: भैर देसूं गैर अंगरेजी क वर्तमान साहित्य की जानकारी क बान क्या करदवां ?
पाराशर गौड़ को जबाब ग्रुप व संस्था से जुड्की वेक बरमा जानकारी लीना की कोशिश रै द !
भीष्म कुकरेती को सवाल: आपन बचपन मा को को वाद्य यंत्र बजैन ?
पाराशर गौड़ को जबाब: पिपरी वो पताकी !
भीष्म कुकरेती को सवाल: आप संस्कृत , हिंदी, अंग्रेजी, भारतीय भाषाओँ क, होरी भासों क कौं कौं कवितौं क अनुवाद गढवाळी मा करण चैल्या ?
पाराशर गौड़ को जबाब: जरुर !
Wait for another Garhwali creative's views on his creative Craft and Craftsmanship ..
 
Copyright@ Bhishm Kukreti