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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, January 22, 2012

घन्ना भाई जब एम्.एल.ए . बौणळ (चबोड़ इ चबोड़ मा)


                              चबोड्या, चखन्योर्या घन्ना भाई जब एम्.एल.ए . बौणळ
                                                        भीष्म कुकरेती
                अब जब नामी गिरामी हंसोड्या, चबोड्या, चखन्योरा घन्ना भाई तैं बीजेपी वाळउन् कमलऔ फूल पकड़ऐ इ द्याई त ठीकि कार भै ! अब याँ पर छ्वीं बि लगी सकदन बल चुनौ प्रचार मा लोक घन्ना भाई क आश्वासन का हिसर-काफळ, किनग्वड़ डंफू, खाणो आला या हौंसदर्या , चबोड़, चखन्यौ सुणणो आला . मै लगद जनता सौब जाणदी च, पछ्याणदी च अर जनता द्वी इ बातुं मजा ल्याली. चुनौ मीटिंगों मा जनता पैल त घन्ना भाई क जोक्स, हंसोड्या गीत सुणली अर साफ़ तौर पर घन्ना भाई अपण चुनावी जोक्सुं मा कौंग्रेसऔ मजाक उड़ाला एकाद जोक्स सोनिया पर ह्वाला , राहुल गांधी पर बि एक आध फबती होली, चोबोड़ की खुंकरि सतपाल महाराज पर बि जरोर चौलली. ना ना मनमोहन सिंग को नाम घन्ना भाई न कतै नि लीण किलैकी मनमोहन सिंगऔ नाम से मंहगाई की प्याजौ पिपराण, गरीबी की सिलाण जी ऐ जाण. अब जब जोक्स , चबोड़ ख़तम ह्व़े जाला. त घन्ना भाई नेता गिरी कर्तब्य निभाणो खातिर अश्वासनुं नौ पूळ, निपट अश्वासनूँ बिरल़ो औंरु, तिमल बेडु जन अश्वासनुं फूल जांद दै की दक्षिणा जनता तैं पकडै द्याला. हाँ जु चुनौ मीटिंगों मा नरेंद्र सिंग नेगी गिताड़ राल त भै फिर क्या बुन भै . उन एक बात होली ही जै सभा मा घन्ना भाई ह्वाला वीं सभा मा कैन बि लाल कृष्ण अडवानी क्या सुषमा स्वराज का भाषण कतै नि सुणण. वोटर रूपी श्रोताओं न ,सब्युं न बुलण " घन्ना भै वन्स मोर , घन्ना भै वन्स मोर .." अब अडवाणी या सुषमा स्वराज बेवकूफ त नि छन उलटा ऊन बि बुलण " घन्ना भाई ! जोक्स हिंदी में सुनाओ " घन्ना भाइ हिंदी मा सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी की चबोड़ कारला अर तुमर इ सौं दां जु झूट सुचणो ह्वालू ; अडवाणी अर सुषमा स्वराज घन्ना भाई का जोकुं तैं यू.पी. क चुनावी सभा मा सुणाला अर तब जैक क्वी क्वी ,\अडवाणी अर सुषमा तैं सुणनो आला. पैलाक सी बात त रइं नी च की लोक घर्र अडवाणी या सुषमा स्वराज तैं सुणला आला . अब त यू.पी. क चुनावी पोस्टरूं या अखब़ारूं मा इन इबारत होली, " घन्ना भाई के ताजे ताजे जोक्स अडवानी और सुषमा स्वराज के मुंह से आज की चुनावी सभा में सुनिए . ' त यू.पी. का लोक बि अब घन्ना भाई का जोक्स सूणल. घन्ना भाई यू.पी. मा बि मशहूर ह्व़े जाला अर कनी कौरिक बि अडवानी अर सुषमा तैं सूणदेर/श्रोता मिलि जाला . घन्ना भाई का जोक्स की हाम/प्रसिधी सोनिया गांधी मा बि पौंचलि अर जनतौ प्रेस्सर से सोनिया घन्ना भाई तैं फोन कारली , " गन्ना बाई ! एकाद , जोक्स अमे , अमारी कोंग्रेस को बी दो ना ! '.. अब इखम मी कुछ नि बोल सकदु बल घन्ना भाई अपण कलाकारी कर्तव्य निभाला या राजकरण्या/ राजनैतिक ड्यूटी बजाला धौं !
 
                     मी क्या सौब कोंग्रेसी चौंर्या स्याळ बि बुलणा छन बल पौड़ी बिटेन त घन्ना भाई न इ जितण त यांको मतबल च घन्ना भाई मार्च बिटेन ड्याराडूण चलि जाला. अर फिर घन्ना भाई क मैत पौड़ी ना ड्याराडूण ह्व़े जालो. अर कोठी त फिर ड्याराडूण मा इ बौणली. फिर घन्ना भाई क सुक्युं, पिचक्युं, पेट अर पीठ एक हुयाँ पुटक गैबण भैंस्व लद्वड़ जन ह्व़े जालो अर जन दु दु नौनी नारायण दत्त तिवाड़ी तैं सरकाणा रौंदन उनि घन्ना भाई तैं दु दु जनानी ठसकाणा राला, जनक्याणा राला. अब इखमा घन्ना भाई क क्वी दोष नि होलू कुज्याण यू लोक सभा अर विधान सभा क खाणकै तासीर इ इन च कि या विधान सभा /लोकसभा कि आबो हवा इन च कि अच्छो खासो नेतौं पुटुक गैबण भैसों जन ह्व़े जांद . मी तैं पूरी उम्मीद च घन्ना भाई बि ये मामला मा पैथर नि राला अर ड्याराडूण जन्दो जांद राजनैतिक हिसाब से आशाबंद /गैबण/गर्भवती पुटुक वाळ ह्व़े जाला.
 
            अब जब घन्ना भाई पैल दिन शपथ ल़ीणो विधान सभा जनां जाला त माहौल इ कुछ हौरी ह्व़े जालो. विधान सभा क चौक मा घाम तपण दें सौबसे पैलि त कोंग्रेसी खबेशि (राजपूत, ब्राह्मण अर शिल्पकार ) च्वाल़ा अर राजकरण्या लारा छोड़ीक घन्ना भाई से जोक्स कि मांग कारल. घन्ना भाई जोक्स सुणेक सौब तैं खुश कारल. घन्ना भाई न तैबरी तलक कलाकार इ रौण जैबर तक राजनीति का कळच्वण्या पाणी क ढंढी मा डुबकि नि लगाला.
           अब जब घन्ना भाई क सौं/शपथ घटणो टैम आलो त राष्ट्रीय स्वयं संघ का च्याला होणो प्रमाण त द्याला ही अर घन्ना भाई पुट्ठ्याजोर/कोशिश लागला कि कै बि तरां से संस्कृत मा सौं/शपथ घटे जाओ त भन्ना भाई न बुलण-
 
श्रृंगारो विष्णुदैवत्यो हास्य: प्रथमदैवत:
अत:मैं घन्ना भाई मेरे कलाकारी देवता , हास्य ke देवता प्रथम की शपथ लेता हूं........... और
विपरीतालंकारैर्विकृताचारभिधानवैषेश्च
विकृतैरर्थ विशेषिर्हर्सतीति रस स्मृतो राजनीतिस्य हास्य : :
 
अर्थात मै घन्ना भाइ विपरीत वेश भूषा से अपने को सज्जित करने से, उल्टे सीधे आचरण करने से , उल्टी सीधी बात बोलने से , अनर्गल अर्थ वाले, नाहंसी में भी हंसी लाकर राजनैतिक हास्य रस पैदा करूँगा. सौं/शपथ का श्ब्दुं से पीठासीन अध्यक्ष न बि क्या बुलण अब    जब जादातर सब्बी राजकरण्या खिलाड़ी 'उल्टे सीधे आचरण', 'उल्टी सीधी बात बोलने' 'अनर्गल अर्थ वाले' वाळ इ छन त घन्ना भाई तैं रोकिक क्या फैदा! फिर बि पीठासन अध्यक्ष ब्वालल बल " कोई भी बात रिकोर्ड में रखने से पहले हम घन्ना भाई की शपथ की जांच करेंगे की कोई असंवैधानिक शब्द ना आ जायं ."  
 
                      अब जु घन्ना भाई की बी.जे.पी. बहुमत मा आली त घन्ना भाई को कलाकारी पकृति वै दिन से इ मड़गट जोग ह्व़े जाली याने की घन्ना भाई की कला वै दिन इ मोरी जाली. अब ए भै ! घन्ना भाई अफुकुणि मिन्स्टरै खुर्ची बान पुट्ठ्या जोर लागला की तुम तैं जोक्स सुणाला हैं ? मिनिस्टर नि बौण साकल त घन्ना भाई कै सरकारी खाऊ-प्याऊ संस्थान की चेयरमैनशिप क बान जुगाड़ भिड़ाला या लोकुं तैं हंसाला ? बी.जे.पी तैं बहुमत मीलल त सोळ आना एक गढ़वाळी कलाकारों कला की तेरवीं /बरखी न जरोर हूण. पण एक शांति त राली की अपण घन्ना भाई क पुटुक आशाबंद/गैबण त ह्व़े इ जालो ! कुछ पाणो बान कुछ खूण बि पोड़द. हम एक कलाकार की कला की मौत दिखला त घन्ना भाई की ड्याराडूण मा कोठी त बौणली की ना ? हिसाब बरोबर. हाँ एक बात च बी.जे.पी वाळऊँ खुणि एक फैदा जरोर ह्व़े जालो . जब बि कोंग्रेसी विधान सभा मा दंगळयाट करणो स्वचाल वै दिन बी जे. पी. वल़ा घन्ना भाई तैं बुलणो बोली द्याला अर घन्ना भाई अपणा स्टाइल मा हौंसदारि भाषण द्याला त विधान सभा का सदस्य हौंस हौंसिक पुटुक पकड़ना राला. अर इन मा कोंग्रेस की दंगळयाटऔ मनसा कौंग्रेस मा इ रै जाली.
                 जु कोंग्रेस तैं बहुमत मीलल त तब बि गढ़वाळयूँ तैं पुळयाणो/खुश होणऐ जरोरात नी च. एक कलाकार की कला की मौत त तब बि अवश्यम्भावी च किलैकि बी.जे.पी वालुं बाण/प्रक्रति त विधान सभा मा हो हल्ला की ह्व़े गे. अर इन मा घन्ना भाई तैं हौंस, चबोड़ छोड़िक रौद्र रूपी हो हल्ला, भंगळयाट, भिभड़ाट सिखण पोडल अर रौद्र रस अर हास्य रस की त जनम जाती दुश्मनी च.
अच्काल जै बि पौड़ी वाळ तैं द्याखो स्यू इ घन्ना भाई घन्ना भाई करणो च. जब घन्ना भाई चुनौ जीति जाला तब बि पौड़ी वाल़ू न घन्ना भाई की रट लगाण किलैकी घन्ना भाई न ड्याराडूण जान्दो जांद पौड़ी वालुं तै बिसरी जाण अर पौड़ी वाळ घन्ना भाई तैं खुज्याणो विज्ञापन ' खबर सार' मा द्याला " जै तैं घन्ना भाई पौड़ी मा दिखे जालो वै तैं इनाम मिललो .." ना त भाई न हूण ना त भाई बांठे भत्ति खयाण. ना त घन्ना भाई ल चुनौ जितणो परांत पौड़ी मा दिख्याण ना ही कै तैं इनाम मिलण. अब जन कवि लोक कविता गंठयान्दन बल " हे प्रवासी ! अपण पितर कूड़ी तैं किलै बिसरी तू ! " उनि वीरेंद्र पंवार कविता गंठयाल अर नरेंद्र सिंग नेगी जी गाणा गाला, ' हे घन्ना भाई ! अपण करम कूड़ी पौड़ी तैं किलै बिसरी तू !"
                  पण इखमा घन्ना भाई को क्वी दोष नी होलू किलैकि राजनीति क बाण/प्रकृति इ इन होंदी बल खुर्ची क बान राजधानी मा जंकजोड़ करण पोडद अर पितर कूड़ी , करम कूड़ी सौब बिसरण पोडद.
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