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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, January 15, 2012

Garhwali words, now being Extinct -9


Presented by Bhishm Kukreti
Source Shri Ramakant Benjwal and Shrimati Vina Benjwal , Garhwali Shabdkosh
जनक = बैलों या घोड़ो के गले की माला
जंकरू /जौंळया= जुड़वां बच्चे
जंगजगु/जंगजगो = मोती वुधि वाला , सुस्त
जंगार =गधेरों में जांघ तक गहरे पानी में लाठी के सहारे पाने के अन्दर अन्दर ही पैरो को सरकाकर चलना
जंगारी =जालीदार झोला
जंतणु = जोड़ना, पृथक हुए अवयवों को जोड़ना
जन्दा= ताला
जजलाट =कम्पन, हिलना, भय से अचानक काम्पना
जड़जड़कार= सुखी, कठोर
जड़जडो/जड़जडू =सुखा, कठोर, जडो से मजबूत हुई
जणगरु/ जणगरो= विद्वान्, विशेषग्य
जणदारु, जणदारो = पैदा करने वाला, पिता
जतय = नर भैंसा
जद्यों= जै देव , राजवंश और कुलीन वंस वालों के लिए अभिवादन.
जनीत = भोज में आमंत्रित लोग
जफ्फा/जफ्फी = मजबूत पकड़
जबराण = भूस्खलन के बाद पत्थरों से भरी जगह
जमरकिट्टा = वस्तु को गहराई में मजबूती से गढ़ने का कार्य
जळकामुंडी =छिपकर बार बार देखने की प्रक्रिया
जळगड्ड= झीना , पारदर्शी
जवाती = जौ की पत्तियां
जवातु = जौ का आटा
जान्ठी= लाठी
जाखू = रोशनदान
जाकारू = बुद्धिहीन
जाजरया = पथरीला
जाबु = जानवरों का पंजा
झिंगरेण = गुस्सा होंना
जिळका = गेंहूँ /धान आदि की कटाई के बाद बचे जड़ें
जुड़खु = रस्सी
जुळक्या =चंचल
जोंगड़ो =छोटे बच्चों को रखने की टोकरी
जोबरू = मिट्टी या कठ की परोठी
जोबा = याक
Courtesy: Shri Ramakant Benjwal and Shrimati Vina Benjwal , Garhwali Shabdkosh, Vinsar Publishing co. Dehradun