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Sunday, January 8, 2012

कवि श्री जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु" से भीष्म कुकरेती क छ्वीं


गढवाळी कवियुं रचना करणों ढौळ/ब्युंत -2 : 

             गढवाळी क युवा  कवि श्री जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु" से भीष्म कुकरेती क छ्वीं


(ये वार्तालाप मा मीन पता लगाणे कोशिश कार कि कवि कविता गंठयांद दें कौं मनोस्थिति अर
कौं कौं भौतिक स्तिथियुं मा कविता करदन. आज गढवाळी का इन्टरनेट का बादशाह कवि,  युवा श्री जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु" कवि से छ्वीं)
 
   भीष्म कुकरेती को सवाल : आप कविता क्षेत्र मा किलै ऐन ?
 
 "जिज्ञासु": गढ़वाली कविता लिखणु मेरु शौक छ अर पहाड़ सी प्यार,  मन मा प्रवास की पीड़ा पैदा होण का कारण गढ़वाली  कविता लेखन शुरू करी.
भी.कु.: आपकी कविता पर कौं कौं कवियुं प्रभाव च ?
 
 "जिज्ञासु" : कै भी कवियौं कू  प्रभाव निछ, स्व. कुंवर चन्द्र बर्त्वाल जी, घनश्याम सैलानी जी, जीवानंद श्रीयाल जी अर गिर्दा जी मेरा आदर्श छन.
भी.कु: आपका लेखन मा भौतिक वातावरण याने लिखनो टेबल, खुर्सी, पेन, इकुलास, आदि को कथगा महत्व च ?
 
 "जिज्ञासु": मेरा लेखन फर इकुलांस अर स्वछंद वातावरण कू प्रभाव छ.  
 
 भी.कु:: आप पेन से लिख्दान या पेन्सिल से या कम्पुटर मा ? कन टाइप का कागज़ आप तैं सूट करदन मतबल कनु कागज आप तैं कविता लिखण मा माफिक आन्दन?
 
 "जिज्ञासु": मैं पेन सी अर कंप्यूटर मा  कविता लिख्दु छौं.   कविता लेखन का खातिर लाइन वाळी नोट बुक  ज्यादा  पसंद करदु छौं.
 
भी.कु: जब आप अपण डेस्क या टेबले से दूर रौंदा अर क्वी विषय दिमाग मा ऐ जाओ त क्या आप क्वी नॉट बुक दगड मा रखदां ?
 
 "जिज्ञासु":  मेरा दिमाग मा बाटा हिटदु  या डेस्क सी दूर जब क्वी भाव  पैदा होंदु त कोशिश करदु छौं नोट बुक फर नोट कन्न की.
 
भी.कु: माना की कैबरी आप का दिमाग मा क्वी खास विचार ऐ जवान अर वै बगत आप उन विचारूं तैं लेखी नि सकद्वां त आप पर क्या बितदी ? अर फिर क्या करदा ?
 
"जिज्ञासु":   मेरा मन मा जब क्वी विचार  पैदा होंदु अर मैं  नोट नि करि   सकदु त मन मा कसक सी पैदा होंदी छ.
 
भी.कु:: आप अपण कविता तैं कथगा दें रिवाइज करदां ?
 
"जिज्ञासु":   मैं अपणि कविताओं  कू जब सृजन करदु छौं त दुबारा रिविजन भौत कम ही करदु छौं.
 
भी.कु:आपन कविता गढ़णो बान क्वी औपचारिक (formal ) प्रशिक्षण ल़े च ?
 
"जिज्ञासु":   मैन कविता गढ़ण कू क्वी औपचारिक  प्रशिक्षण प्राप्त नि करि.
 
भी.कु: हिंदी साहित्यिक आलोचना से आप की कवितौं या कवित्व पर क्या प्रभौ च... क्वी उदहारण ?
 
"जिज्ञासु": मैं मन सी गढ़वाळि कविता लेखन ही करदु छौं.   पहाड़ फर कुछ हिंदी कविताओं कू सृजन भी करदू छौं. 
  
 हिंदी साहित्यक  आलोचना की तरफ मैं ध्यान नि देन्दु अर मेरी कवितों फर क्वी प्रभाव निछ.

भी.कु:: आप का कवित्व जीवन मा रचनात्मक सुखो बि आई होलो त वै रचनात्मक सुखा तैं ख़तम करणों आपन क्या कौर ?
 
"जिज्ञासु":   मेरा कवित्व   जीवन  मा रचनात्मक सुख औन्दु छ अर मैं प्रयास करदु छौं ऊकेन्न कू.
 
 
भी.कु:: कविता घड़याण मा, गंठयाण मा , रिवाइज करण मा इकुलास की जरुरत आप तैं कथगा हूंद ?
 
"जिज्ञासु":   कविता गढ़ण अर गंठ्याण का खातिर यकुलांस की पूरी जरूरत होंदी छ.  यकुलांस ही कविता सृजन की सीढ़ी छ.

 
भी.कु: : इकुलास मा जाण या इकुलासी मनोगति से आपक पारिवारिक जीवन या सामाजिक जीवन पर क्या फ़रक पोडद ?
इकुलासी मनोगति से आपक काम (कार्यालय ) पर कथगा फ़रक पोडद
"
जिज्ञासु":   इकुलासी मनोगति का कारण मेरा पारिवारिक अर सामाजिक जीवन फर क्वी प्रभाव नि पड़दु अर  कार्यालयी काम काज फर भी  प्रभवित नि  हौंदु.  मेरु  कविमन छ अर इकुलास ही भलु लगदु कविता सृजन का खातिर।
 
भी.कु:: कबि इन हूंद आप एक कविता क बान क्वी पंगती लिख्दां पं फिर वो पंगती वीं कविता मा प्रयोग नि
करदा त फिर वूं पंगत्यूं क्या कर्द्वां ?
 
"जिज्ञासु":  कविता सृजन का बाना जब मैं क्वी पंक्ति लिख्दु छौं त कविता पूरी ही करदु.  जब क्वी सज्जन क्वी बात  बोल्दु छ त मेरा मन मा विचार औन्दु ये विषय फर कविता लिखी जै सकदी  त कागज फर नोट करदु छौं.
 
 
भी.कु: जब कबि आप सीण इ वाळ हवेल्या या सियाँ रैल्या अर चट चटाक से क्वी कविता लैन/विषय आदि मन मा ऐ जाओ त क्या करदवां ?
 
"जिज्ञासु":   जी, जब मन मा क्वी कविता कू विषय पैदा हौंदु त तुरंत लिख्दु छौं, चाहे आधी रात किले न  हो. 
 
भी.कु: आप को को शब्दकोश अपण दगड रख्दां ?
 
"जिज्ञासु":   क्वी शब्दकोश नि रखदु.

 
भी.कु: हिंदी आलोचना तैं क्या बराबर बांचणा रौंदवां ?
 
 
"जिज्ञासु":  ना  का बराबर.
भी.कु: : गढवाळी समालोचना से बि आपको कवित्व पर फ़रक पोडद ?
 
"जिज्ञासु":   गढ़वाळि समालोचना सी मेरा कवित्व  फर क्वी फेर नि पड़दु.   मेरी सोच छ, जू भी  गढ़वाळि मा लिखणु छ भलु प्रयास छ.
 
भी.कु:: भारत मा गैर हिंदी भाषाओं वर्तमान काव्य की जानकारी बान आप क्या करदवां ? या, आप यां से बेफिक्र रौंदवां ?
 
 
"जिज्ञासु":   मैं बेफिक्र ह्वैक गढ़वाली कविता लेखन करदु अर पसंद करदु छौं.  हिंदी काव्य साहित्य मा कुछ सुन्दर बात छ त अनुसरण करदु छौं.
भी.कु: : अंग्रेजी मा वर्तमान काव्य की जानकारी बान क्या करदवां आप?
"जिज्ञासु":  अंग्रेजी मा वर्तमान काव्य की जानकारी मैकु  निछ, न ही मेरी जानकारी की इच्छा छ.   गढ़वाली कविता लेखन मेरी  प्रार्थमिकता छ अर प्रयास करदु गढ़वाली का प्यारा प्यारा शब्द का प्रयोग कू.
 
भी.कु: भैर देसूं गैर अंगरेजी क वर्तमान साहित्य की जानकारी क बान क्या करदवां ?
 
"जिज्ञासु":  हरेक  देश कू साहित्य सुन्दर हौंदु पर ज्यादा  जानकारी नि रखदु.
 
भी.कु: आपन बचपन मा को को वाद्य यंत्र बजैन ?
 
 
"जिज्ञासु":   बचपन सी आजतक मैकु बांसुरी सी भौत लगाव छ.   आज भी बड़ा शौक सी  बजौंदु छौं गढ़वाली गीतू की धुन, बिना गुरु ज्ञान का.

 
भी.कु: आप संस्कृत , हिंदी, अंग्रेजी, भारतीय भाषाओँ क, होरी भासों क कौं कौं कवितौं क अनुवाद गढवाळी मा करण चैल्या ?
"जिज्ञासु":  मैं गढ़वाली कवियौं की हिंदी मा लिखीं कविताओं कू अनुवाद गढ़वाली मा कन्नु पसंद करलु.