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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, January 22, 2012

अपणि पुराणि सुआ (प्रेमिका ) की समलौण

Satire Or Fatkar
चबोड़ चखन्यौ मा भैरों
                                             अपणि पुराणि सुआ (प्रेमिका ) की समलौण (याद) मा द्वी आंसू
                                    (याने उत्तराखंड क्रांति दल की कळकळी (करुण रस ) कथा )
                          ------------------------------------------भीष्म कुकरेती---------------------------------------
अपणि पुराणि सुआ या प्रेमिका की याद जब बि कैतैं आँदी त अहा ! अहा ! जिकुडि मा सेळ बि पोड़ी सकदी, उत्साह से तरोबितर ह्व़े सकद या उमाळ बि ऐ सकद अर निरुत्साह को घौण कुयडु (कोहरा, बादल ) बि लग सकुद . मनिख-मनिख्याणि पुळयांदा बि छन , खुस बि हुयांद अर खुसक (शुष्क) मगज बि ह्व़े जान्दो
इन्नी मेरी क्या भौतुं एक प्रेमिका छे जैको नाम थौ (उन वा बोल्दी क़ि बल वा त बचीं च ) उत्तराखंड क्रान्ति दल ..
कबि उत्तराखंड आन्दोलन मा लोग बाग़ वींको नाम जपदा छ्या अब त इ राम दा ! सत्ता बिहीन होण से क्वी वीं को नाम ल़ीण त दूर वींको नाम सुणण बि नि चान्दन अर वींको नाम च उत्तराखंड क्रांति दल . विचारी दल दल, फडक़ि-फड़की मा जि बंटीं च . जु इन बोल्दु बल वु उत्तराखंड क्रांति दल मा च त वै तैं इ नि पता क़ि सच्ची मा उत्तराखंड क्रान्ति दल छें च या वो सुद्दी ही भरम मा शरम मा बोलणु च बल यू के डी ज़िंदा च
उत्तराखंड क्रान्ति दल इन दल च जैन जोश खरोश, देळी देळी मा जैक गारो माटो कु इंतजाम करी , इना उना बिटेन इख तलक क़ि मुंबई बिटेन अर्जुन सिंह गुसाईं या नैनीताल का डी डी पन्त ओड (मिस्तरी ) ल्हैक , संघर्ष से एक भलो कूड चीण , मुलायम सिंह यादव का अन्न्याई का डंडा , गोळी खैका बि उत्तराखंड नाम को मकान बणाई अर जब कूड़ो मा भितरपैन्छी , ग्रह प्रवेश को समौ आयी त बी जे पी अर कांग्रेस वालुं न यू के डी वालुं तैं राजनैतिक थान्तो/मूसल से पीट पीटिक, लात्युं न लतेक, मार मारिक, मुठक्यूँन मुठकैक (घुंसाबजी ) , तागत का जोर पर , तिकडम का बल पर कूड को न्याड ध्वार (निकट) त जाणि द्याओ यूकेडी तैं गाँ से भैर करी दे अर अब त उत्तराखंड क्रांति दल (मेरी पुराणि सुआ-प्रेमिका ) का हाल इन छन जन बुल्यां वा लंडेरि कुत्ती ह्वाऊ अर लंडेरी कुत्त्ती बि इन कुत्ती जें फर खज्जी, खाज -खुजली की बीमारी, ब्याधि लगीं च . वीं कुत्ती से वोटर नामक सैं -गुसैं दूर इ रौण चांदो उल्टा अपण नौकर- चाकरूं से इन खज्जी वळी कुत्ती क पिटे बि करे जांद
यू के डी वल़ा लाचार छन , तंगी हालात मा छन, कंगाली का मरयाँ छन अर यूँ तैं कांग्रेसी, भाजापाई , बी एस पी जन बडो गौड़ का छोड़यूँ घास-खौड़ त जाणि द्याओ भिन्टळ (जहाँ मनुष्य पेशाब कर्ता है ) चाटणो बि नि मिल्दो . यूकेडी वल़ा पस्त छन . यूकेडी वल़ा इन घिंडुडी, चखुली , चिड़िया छन जौका मेनत से तिनका तिनका कट्ठा कौरिक बणयूँ घोल-घोसला पर धुर्या चिलंगा ऊँन, गिद्ध-गरुड़उन कब्जा कौरी दे अर यूँ वगत का मारयां चख़ुलों मा च्वींचाट , किर्राट (कराहना ) करणो अलावा क्वी काज बि नी च . जब सत्तासुख को समौ आयी त सत्ता क फसल क्वी हौरी निज्जड़ो ही काटिक ल्ही ग्याई अर यू के डी वल़ा टपरान्दा इ रै गेन .
उन दिखे जावू त यूकेडी का अकाळ ( दुर्दिन ), अँध्यारो, अपौन्दो (जिसे कोई चीज प्राप्ति न हो ) क्वसकाणी स्तिथि (निपट अंधे वाली हालत) बुरा हाल, कुहाल, , कमजोरी, कंगाली, बदहाली , ख़ळचटि हालात (गैर जम्मेदाराना ), खज्यात, तीसवाळी हालात (प्यासा) का जुम्मेवार यू के डी वल़ा इ छन . युनको सन्गठन मा पवाण (शुरुवात ) से बुरा हाल रैन . यू के डी मा नेताओं की त भरमार रै अर अबी बि च पण कबि बि यूकेडी मा खेतवाळउ (खेती करने के मजदूर या कार्यकर्ता ) क्वी नि ह्वाई. नेता बिजां ( बहुत अधिक ) रैन ,अर अबी बि छन पण असली कामकज्या कार्यकर्ता खुज्याण से बि नि मिलदा छ्या अर ना ही आज यूकेडी मा क्वी कार्यकर्ताओं की फ़ौज च . नेतौं फ़ौज अर बगैर कर्यक्र्ताउन का च यूकेडी
यूकेडी वला हंसाण मा उस्ताद छन . युंका दल हवा मा ही रौंद अर हवा मा इ कामकाज हुन्द जन की क्वी बि अध्य्क्स का पद से एक हँका नेता तैं दल से निकाळी दीन्दो अर ना त निकाळण वलू पर क्वी फ़रक पोडदू ना ही जै को हुक्का पाणी बंद होंदु/ निष्कासन ह्व़े वै फर कुछ फ़रक पड़दो किलैकि यूकेडी को असली अस्तित्व हव्वा मा च अस्मान मा च , शून्य मा च यूकेडी अगास मा इ च. ह्व्वाई बात , ह्व्वाई छ्वीं लगदन बस . यूकेडी का नेताओं की फौन्दारी (लड़ाई झगड़ा ) हव्वा मा ही होंदी . जमीन से यूँ नेताओं क क्वी नातो रिश्ता इ नी च
ह्यां ! ए राम दा जु पैल उत्तराखंड क्रांति दल का दगड्या छया ओ अच्काल या त हाथ दिखाणा छन या ठंडो  मुल्क का यू.के ड़ी का बणयाँ तालों मा कमल  की खेती करणा छन. इन बि सुणन मा आई बल यू.के.ड़ी क पुंगडों मा हाथी बि उज्याड़ खाणा छन
हाँ हम सरीखा जु कभी उत्तराखंड क्रान्ति दल का प्रेमी छ्या, भीना छ्या उ अब बस गू-अक सी घूंट पेकी टपराणा रौंदन बल क्या यूकेडी का दिन बौड़ळ ? कुज्याण ?कुज्याण कु जाण?
Copyright@ Bhishm Kukreti