उत्तराखंडी ई-पत्रिका की गतिविधियाँ ई-मेल पर

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Tuesday, January 17, 2012

If Queen Had Moustaches She Would Have Been a King


Humor/Satire /Wits
चबोड़ इ चबोड़ मा
                                                      फूफू क मोछ होंद त वा काका /चचा होंदी
                                                    If Queen Had Moustaches She Would Have Been a King
                                                                             भीष्म कुकरेती
हाँ , हम जादातर इन होंदो त, तन होंदो त, इफ्स अर बट्स, अगर, मगर, मा भगवान से बि बिंडी विश्वास करदवां.बुलद दें इन कबि नि ह्वाऊ बल हम 'इन ह्व़े जांदू त आहा कथगा भलु होंद, . आहा ! तन ह्व़े जान्द त वैकी मवसी घाम लगी
जान्द या तिकी मवासी बसी जांदी' जन वाक्य नि बवालों. फूफू क मोछ होंद त वा काका होंदी या राणी क मोछ होंद त वीन इ राजा बणण छौ हमारी संस्कृति बौणि गे.
अब द्याखो ना सी पोरुक सालो त छ्वीं छन जख मा फुफ क मोछ होंडा त पर बबल ह्व़े गे. . मूसी काकी क कूड छयाणो छौ. त जन कि गां मा घर्या अर्थशास्त्रीय रिवाज च, या क्या च धौं पण ओड अर हौरी चिणे दारूं खुणि सुबेरो नक्वळ/नास्ता, दिनौ खाणक, दिन मा चार बजे चा अर द्वी रुट्टी अर स्याम दें खाणक दीण इ पड़दो.अर ह्व़े साको त कूड़ो काम पुरो हूण पर बखरू मारे जाव त भलो.
अब वै दिन क्या ह्वाई बल दुफरा मा मूसी काकी ओडु तैं रूस्वड़ मा खाणक दीणि छे. चौंळ अपणो स्यारक का छ्या .पण कुज्याण भै कुज्याण धौं कैको दाग लग धौं ! ए मेरी ब्व़े ! भात गिल्लू इ रैगे. इथगा मा मूसी काकीन ओडू तैं सुणेक ब्वाल," इ राम दा ! जरा पाणि कम पड़दो त भात न गिल्लू नि होण छौ ". कै बि ओड न बोल बल मूसी काकी बुलणि च बल फूफुक दाड़ी- मोछ होंद त फूफू काका ह्व़े जांदी. अब कुटुमदरी क बात च, कूड चिण्याणो फिकर च एक दिन भात गिल्लू ह्व़े बि गे त क्या ह्वाई. अर कैबरी चौंळ बि मनिखों दगड रैकि अपण प्रकृति बदली दीन्दन . एक मैना पैली वी चौंळ कम पाणी खान्दन पण एकी मैना उपरान्त दल बदलू नेतौं तरां अपणी प्रकृति बदली दीन्दन अर वी चौंळ पाणी बिंडी /जादा खाण बिसे जान्दन . त कबि भात गिल्लू अर कबि भात क्वर्री या कड़कड़ो रै जांद. चौंळ छन त इन ह्वेई जांद . त वै दिन चौंळ गिल्ला रै गेन. बात आई गाई ह्व़े गे. ना त ओडून कुछ ब्वाल ना ही पैथारां कै कुकरो न कुछ ब्वाल जौं तैं बि वी गिल्लू भात दिए गे.
अर ए भै वै दिन बि काण्ड लगी गेन. अब दुसर दिन बि मूसी काकी इ रसोई मा छे. घौर की गुस्याण छे त परम्परा से मूसी काकी कु इ हक बणदो छौ बल भगवान जन मेमानु खुणि वा दुफरौ खाणक बणाउ अर सौंरु(परोसना) बि , . भात वै दिन बि गिल्लू रै गे. 'मेरी फूफुक मोछ होंद त वा काका होंदी ' जन मानसिकता की असली बेटी , असली 'मेरी फूफुक मोछ होंद त वा काका होंदी ' मानसिकता की असली सम्वाहक मूसी काकीन आदतन फिर ब्वाल बल , इ राम दां! कन भुलमार ह्व़े धौं ! आज फिर मीन पाणि जादा डाळी त क्या सुन्दर चौंळ ! फिर गिल्लू रै गेन ". बात त नियाय निसाब की इ छे. पण ओड दयाल़ू दादा बि कम नि छौ. अपण अडगै/क्षेत्र को बीरबल च, बड़ो चबोड्या च, वैक छ्वीं सूणीक सांक मा धर्युं मुर्दा बि हंसण बिसे जांद. . दयलु दादा न चखन्यौ मा बोली दे , ' अहा ! ये काकी जु त्यार मोछ होंद त कसम से तीन म्यार काका लगण छौ अर काकी तीन बि हमर दगड ओड ब णण छौ.". जैन जु समजण छौ वैन वी बींग. आज बी बात आई गाई ह्व़े गे.
पण जब जोग इ ग्वरकटा ह्व्वान त भेमाता बी क्या कारली ! जब निहूणी लिखीं ह्वाओ त हुणत्यरी डाळी पर कूरी त लागलि इ. तिसर दिन बी मूसी काकी न खाणक दींद दें पाई बल आज बि भात गिल्लू इ रै गे त झटाक से मूसी काकीन ब्वाल, " ये कनो बिजोग पोड़ीन मेरी यूँ हथकुळयूँ. पर आज बि चौंळऊँ मा पाणी जादा पोड़ी गे. जरा पाणी कम ह्व़े जान्द त भात न फरफरु होण थौ. उंह ! बुरळ पोड़ीन यूँ हथ्युं मा जौन जादा पाणी डाळी दे.". बिचारी मूसी काकी ओडु तैं खुस करणों बान अपण हथुं तै इ गाळी दीण बिसे गे . पण दयलु काका बि कम नि छौ वैन बोली दे, बोली क्या जरा जोर से इ ब्वाल, हे ! काकी! हाँ तौं हथुं पर लुचड़ त पड़यूँ इ च, द्वी मुठी चौंळ हौरी डाळी बि दीन्दी त ऊँ सटयूँ दबलोँ न खाली नि होण छौ." अर ये म्यार भुम्या ! वै दिन त गिल्लो भातौ बात सारा गां मा सौरी (फैली) गे.
अब सरा गां मा ह्व़े 'फूफू क मोछ लगाणे बात अर फूफू तैं काका बणाणे' बात पर . भुन्दरा ज्योरू न ब्वाल, " ए ब्वारी ! तू जरा भात देर तक पकांदी त भात न गिल्लू नि होण छौ."
त भामा ब्यारी न नातो मा सासु लगदी मूसी काकी तैं समजाई, " ए जी! जु तुम आगि झौळ तेज करदा त मी सौं घौटिक बोल्दु बल भातन कबि बि गिल्लू नि होण थौ.".
उमर मा चालीस साल छुटि कमला न बोली, " ए ददि ! जु तू पक्युं भात तैं औंध मा धरदी त कबि बि भातन गिल्लू नि रौ ण छौ. ".
त कमला क बौ बिमला न पैथर किलै रौण छौ अर ब्वाल, " ए जी ! जु तुमर फूलटि क मुंड्याळ चोदु होंद त भातन गिल्लू नि होण छौ."
इनी स्याम दें तक बीसेक जानना 'जु इन होंद त तन ह्व़े जांद', 'जु उन करे जान्द त तने ह्व़े जांद ', जु वा बात वैबरी नि होंद त तन कत्तई नि होण छे ...... याने की सौब 'फूफू क मोछ, ज्वांग, दाड़ी होंद त फूफू काका होंदी 'क सलाह मूसी काकी तैं देकी ऐ गेन.
पण कैन इन नि सोची बल जब क्वादु चून बौणी जांद त फिर 'जु इन होंद त तन ह्व़े जांद' , 'जु उन होंद त उन्नी ह्व़े जान्द ' जन बात कौरिक क्या फैदा ! पण हम त 'जु फूफू क जोंग-दाड़ी होंद त फूफू काका ह्व़े जांदी ' सिद्धांत का च्याला/चेली छं वां त हमन इनी बुलण.
इन नी च बल या परबिरती हमारी इ ह्वाऊ. या परबिरती हम तैं राष्ट्रीय अर अंतर्राष्ट्रीय थौळ/स्थान/स्तर पर दिखणो मिल्द .
अच्काल टी. वी चैनलूं क भरमार ह्व़े गे त कामौ क्रिकेट कमेंटेटरूं क अकाळ पड़णो इ छौ. त कत्ति टी.वी चेनलूं मा ओ कमेन्टटेटर बि छन जौन रणजी ट्रोफी मा कबि बि सेंचरी बणे होली धौं पण सचिन की बल्लेबाजी पर कमेन्टरि इन करदन ," जु सचिन अपण बल्ला तैं एक बाई दस इंच तौळ रखदु त शर्तिया सचिन न आउट नि होण छौ.". कति कमेंटेटर इन बि छन जौन बारा टेस्ट खेलीन अर बारों दें शून्य पर अर और ह्वेन , आट दें पाँच रन से जादा नि टपी सकीन वो राहुल द्रबिड , सहवाग, लक्ष्मण आदि की बैटिंग पर इन बुल्दन , " जु राहुल अपण फीट बलेंस पर ध्यान दीन्दा त द्रबिड न पिचासी रन पर आउट नि होण छौ. जु द्रबिड जरा अपण दै खुटक फिफन /एडी तैं आधा मिलीमीटर अळग रखद अर बाएँ खुटक पंजों तैं आधा सूत इ उठान्दो त द्रबिड न कबि बि आउट नि होण छौ. सहवाग जु अपण मुंड तैं बाएँ ना दै घुमांद त सहवाग न आउट नि होण छौ..."
सबी क्रिकेट कमेन्टटेटर मूसी काकी क तरां ' फूफू क जोंग हुँदा त फूफू काका होंदी' मा विश्वास करदन.
उनि चुनाव क विश्लेषण मा हूंद . विश्लेषक बुल्दन , " जु लालू यादव वै दिन टी.वी चनेलूं कैमराक समणि बाजरो रुट्टी नि खांदो अर जुंडल़ो रूटळ खांदो त शर्तिया लालू यादव न चुनौ जीत जाण छौ किलैकि जुंडळ प्रेमी वोटर बाजरो रुट्टी देखिक भड़की गेन.
फिर क्वी विश्लेषक बोल्दु, " जु वै दिन सोनिया गाँधी चुनाव रैली मा नीलो रंग को दुपट्टा नि पैरदी अर हौर रंग को दुपट्टा पैरदी त मुसल्मानु न कोंग्रेस तैं भोट दीण छौ. जु लाल कृष्ण अडवानी राम नामी च्वाल़ा पैरिक अयोध्या मन्दिर नि जांदा अर हनुमान का च्वाल़ा पैरदा त भाजपा तैं इथगा बड़ो नुकसान नि होंण छौ . हनुमान भक्त अडवानी क राम भक्ति से चिरडे गेन अर उन मुलायम सिंग तैं वोट डे द्याई."
मोडर्न कमेन्टटेटर , आधुनिक चुनावी विश्लेषक बि मूसी काकी क तरां 'इफ क्वींस हैड मोस्टेचो सही वुड हैव बीन किंग' या 'फूफुक ज्वांग होंद वा काका होंदी ' जन जुमलों गुलाम छौंवां. इफ अर बट्स, अगर, जु, यदि , ऐसा होता तो तैसा हो जटा जन वाक्यों का हम अभ्यस्त ह्व़े गेवां . अर जु, अगर, यदि, इफ का चक्कर मा मूसी काकिक भात ना त फरफरू पकी सकदो ., ना ही जु, अगर, यदि, इफ का फेर मा लालू यादव चुनाव जीति सकदो अर ना ही जु, इन, इफ, यदि क कारण सौवीं सेंचरी ब णे सकदो . इफ, जु, यदि सौब फोकट की बात छन .
Garhwali Satire, Garhwali Humour, Garhwali Wits to be continued ...
Copyright@ Bhishm Kukreti