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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, January 3, 2012

साइबर जनानी या कम्प्यूटरी कज्याण

मूस ब्वाद म्यार बगैर सब्बी चीज बेकार
साइबर जनानी या कम्प्यूटरी कज्याण
                        भीष्म कुकरेती 
इ राम दा म्यार बुबा जी कु जमानु माँ इथ्गा किस्मू कज्याँn नि होंद था अब ता क्या बोलूं भै. कंप्यूटर को ज़माना माँ ल्या द्याखो हाँ.....
हार्ड डिस्क कज्याण :
कज्याणि ए मेरी ब्वै ! क्या यादास्त च भै इन जनानी की . ईन जनानी की यादास्त कबी बी ख़तम नी होंदी .
इन्टरनेट स्त्री
ईं जनानी तै सबी पाण चांदन, पण सबूं तैं एक्सेस नी होंदी मतलब या जनानी सब्युं तैं उपलब्ध नी ह्व़े सकद
विंडोज जनानी :
सौब जाणदा छन बल या जनानी क्वी बी चीज ठीक से नि कौरी सकदी पण ईं बगैर क्वी रै बी त नि सक्दू .इन चा या जनानी
वाइरस स्त्री :
उफ ! या त बिलकुल घरवाली च . शी इज जस्ट एज वाइफ . जब तुम तैं ईंक आँणो आशा कत्तई नी होऊ या वै इ बगत फार आंदी . तुमारा घर फर
बेधड़क कबजा जमें दीन्दी. तुमारा सबी संशाधंनु (रिसोर्सेस ) फ़र यींको राज ह्वै जान्दो . द्यारम रखील्या त नुक्सान आर
घार से भैर नि निकलिल्या त बहुत ही नुक्सान क्या बिजां नुक्सान हून्दो .
स्क्रीन सेवर :
अहा ! सौब जाणदा छन बल या कज्याण निकज्जी छ , पण दिख्याण दरसन माँ बिग्रैली बांद हुन्दी अर दिखण माँ मजा आनंद/रौंस त औंदी च .
एक्सेल जनानी :
या जननी बुल्दी बल या सब कुछ कौरी सकद च पण इन दिखे ग्याई कि सबी ईं जनानी से दूर ही रौण चांदन .
Copyright @Bhishma kukreti