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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, January 19, 2012

छि भै ! जनान्युं जंघड़ दिखाण मा क्यांकि सकासौरी


Humour/Satire
चबोड़ इ चबोड़ मा भैरों!
                                        छि भै ! जनान्युं जंघड़ दिखाण मा क्यांकि सकासौरी !
                                                     चबोड्या ; भीष्म कुकरेती
 
                                मेरी   ददि जैञ तैं वींक बूड ददि न बिंगाई/ समझाई छौ, वीन मीं तैं टक्क लगैक बिंगाई/ समझाई छौ बल दीन दुन्या मा बदलौ भौतिक होंद अर मनिखौ मगज /मन त उनि रौंद जन हजार बीसी बरस पैल थौ. अब द्याखो ना गाऊँ मा अब जनान्युं कुणि उन काम-काज नि रै गे जु पैल छया अब गैस ऐ गे , घर बैठ्याँ बैठ्याँ फटक्यूँ-फटक्यूँ , बीं बिंवर्यूं राशन ऐ जांदी, ड्यारम अपण कजै तैं तून दीण मा क्वी कमी बेसी रै गे त जैबरि ज्यू बुल्याओ मोबाईल मा तून दे द्याओ. अब जन की बल गौं मा मवारां/हरेक घरमा ना सै थुकाँ/मुंडीत त कम्पुटर अर इन्टरनेट ऐ इ गे. अबाक जनानी ह्युन्दों मा घाम तपद तपद बिस्कुण/ अनाज नि फटकदन बल्कण मा बड़ो स्क्रीनौ टी.वी मा इन्टरनेट मा ब्लौगी छ्वीं (चैटिंग ) लगांदन. अब द्याखो ना सी वीं बडी मौक ड़्यार जनान्यून भौत देर तलक नेट मा छ्वीं लगैन अर जब नेटौ छ्वीं से बिखल़ाण (उबना ) पोड़ी गे त सबि जनानी औफ़्फ़ लैन मा छ्वीं लगाण बिसे गेन.
वो - हाँ उन त सबी सोसल नेटवर्क एकजसी छन पण भै फेस बुक जरा सौंग/सरल च हाँ !
वा- हाँ ए जी ! तुम ठीकि बुलणा छंवां . मेरी ननी क कणसी द्युराणे जेठी फूफू क बड़ो नौनौ समदी क नाती क साडू भै क छ्वटो नौनु जु यूंक नातो मा भुला लगद अर लन्दन मा रौंद वो बि इनी बुलणो छौ बल फेसबुक को क्या बुलण. हम त वैको दगड रोजी छ्वीं लगौन्दा.
या - हाँ भै अब त ड़्यार-बैठो अकास पताळ वालोँ दगड कथगा बि कैबरी बि चैट कौर ल्याओ अर ना कैक डौर ना कैक भौ .
स्या - हे भूलि ! अच्काल वै कंपौडरौ दगड औफ़लैन छ्वीं कम ह्व़े गेन जु तु अब औन लैन बाटु जोग ह्व़े गे .
या- देख ह्यां ! या ! बिंडी नि बोल हाँ . मी बि अपण बुबा क बेटी नि होलू जु तेरी ब्व़े क्या , तेरी ननी -ददि क सौबुं क बथा नि लगौल हाँ ! फिर नि बोली कि.....
हैंकि - ह्यां ! हे निर्भाग्युं हम छ्वीं लगाणा छंवां नेटौ-चैटौ अर तुम बि कख लग्यां छंवां . फंड फूको औफ़ लैन कि बथौं तैं.
गां तौल़े की- हाँ ये जी ! तुम ठीक बुलणा छंवां . अच्काल ज्वा रौंस/मजा ऑन लैन मा च वा ऑफ़ लैन मा कख रै गे. अब स्या या कम्पोडरो दगड छ्वीं लगाली बि त क्या लगाली वी फाणु अर बाड़ी की अर जादा जादा से जादा रामजवाण चौंळऊं की!
अरे अच्काल त औन लैन मा मोडर्न छ्वीं लगदन जन की चाऊ माऊ ,पिजा कि ''
गौं मथे की- हाँ ये तौळऐ की ! तू सै बुलणि छे. ह्यां ! उन त म्यार अंग्रेजी स्कोल मा पढ़ण वाळ नौनु फाणु- बाड़ी तैं छ्व्ट लोकुं खाणक माणदो छौ पण जब बिटेन वैन फेस बुक मा जाण बल फाणु तैं मिन्सड कोरमा करी अर बाड़ी तै स्वीट्लेस पुडिंग बुले जांद त ए भै म्यार नौनु अच्काल हर दुसर दिन फाणु- बाड़ी क फरमैस करदो.
गौं क एक छ्वाड़ करैकि- म्यार इख बि यी हाल छन . पैलि मेरी नौनी कै बि घर्या ब्वालो या गंवड्या गीत (लोक गीत) ब्वालो लगाण मा इन्सलट्यांदी (इन्सल्ट महसूसना ) छे पण जब बिटेन वीन हेम पन्त की इंटरनेटी-छ्वीं बांच बल बेडुपाको डौट कौम को गुसें डा. शैलेश उप्रेती अमेरिका मा रौंद अर बेडुपाको डोट कौम से घर्या गीतुं प्रचार करदो त बेडुपाको डौट कौम की मेर्बानी से मेरी नौनी अब त सिर्फ घर्या गीत गांदी भै!
गौं क हैंकि छ्वाडे कि- अरे याँ छ्वाड़ करैंकी ! जब तलक यू शैलेश उप्रेती मनान , सोमेश्वर मा छौ त तेरी बेटी शैलेश की बात माणणे बात त राई दूर वैकी बात कतै नि सुणदी छे. अब शैलेश उप्रेती अमेरिका क्या गे कि तेरी बेटी घर्या गीतुं मा इंटरेस्ट ल़ीण लगी गे .
गौं क एक छ्वाड़ करैकि- ये ! ज्यूंरौ दगडै ज्योर जी ! मरी बेटी क बात सुणीक तुमर अंदड़ किलै म्वाट (गुस्सा होना ) हूणा छन. हाँ १
गौं क हैंकि छ्वाडे कि; ह्यां ! ये ब्वारी मी बुलणो छौं बल जब तलक क्वी गौं मा रौंद त हम वै तैं फ़िक्वाळ /मंगत्या समजदवां अर जनि वु अमेरिका ग्याई ना वी हमखुण बड़ो जादू वाळ महात्मा ह्व़े जान्दो.
वा - ह्यां मी तैं त 'हमर उत्तराखंड ' ब्लौग भलो लगद .
स्या- मी तैं त भै ,कौथिग ब्लॉग मा रौंस आन्द
वै - भै ! मेरो हिसाबन त कौथिक, कौथिग, म्यार उत्तराखंड या हमर उत्तराखंड, बुरांस, गढ़वाली कुमाउनी , कुमाउनी -गढ़वाली , सबी इकसनी इ ब्लौग छन . सौब वी हिंदी का गजल, हिंदी का कविता , हिंदी का कथा, हिंदी का जोक्स सौब कुछ हिंदी का
गौं क मथ्या की- ना कबि कबि क्वी क्वी कामै या रौन्सदार छ्वीं बि लगै दीन्दन भै !
गौं की बीचे क - अच्काल त भंगुल जम्युं च भै ! इख नेतों ऑफ़ लैन भंभ्याट, प्वींपाट अर उख इंटरनेटो ब्लौगुं मा बि नेतौं चमचौं च्यूंचाट.
गौं मुड्या की - हाँ भै ! हमन जौंक सुपिन मा नाम बि नि सुणी छौ वुंका चमचा ब्लौग मा लिखणा छन बल नेता जीन हमर क्षेत्र मा भारी भारी सामजिक काम कार बल जन बुल्यां यूँ नेतौं न हमर गाँ मा भीम शिला धौरी होलो धौं !
या- इ राम दा! मि त रोज 'खाटळी-विकास' ब्लौग बांचणो रौं की कबि ट ये ब्लौग मा नयार मैत - सिंदूरी, बीरों खाळ, या मुंबई मा बस्यां खाटळी वाळऊँ च्व्वें होली. पण कख लगाण धौं! खाटळी ब्लौग मा क्वी टीरी को केशर सिंग बिस्ट की ही छ्वीं लगदन .
हैंकि - ह्यां ! वै खुसाल सिंग न बि क्या जि करण जर्मनी- गढ़वाली शब्दकोश ल्याखल कि खाटळी ब्लौग तैं खाटळी वालूं मा प्रचार कॉरल धौं !
उखाकी - एक नामौ बान हमर जातिक ब्लॉग बि च . नाम त च ' वी आर कुकरेती' पण सौं घटणो ' वी अर कुकरेती ' ब्लॉग मा कुकरेत्यूं क्वी बि छ्वीं नि लगदन. बस नामौ कुकरेत्यूं ब्लॉग च .
इखाकी - हाँ भै! अच्काल त बिजोग इ पड़ी छन भै ओ क्वी लीड इंडिया च जो हिमालय ब्लौग मा छोर्युं फोटक दीन्दो अर बेशरम तैं द्याख्द त सै ! जनान्युं जंघड़ों फोटक दिखान्दो.
स्या - इनु तैं पुछण छौ बल दूसरों बेटी -ब्वार्युं नंगा जंघड़ दिखण/दिखाण मा यूँ तैं रौंस आन्द अर क्वी युंकी ब्व़े, बेटी अर ब्वार्युं ब्लौगूं मा नंगो फोटो दिखाला त वैबरी यूँ पर क्या बीतली.
ज्युरा दगडै कि - युंकी करतूत से त सरकार तैं इथगा बढिया प्रजातंतरौ मीडिया पर बि सेंसर लगाणो मौक़ा मिल्दो.
सबी - हाँ ज्युंरा दगड्या न ठीक इ ब्वाल
Garhwali Satire, Garhwali Humour, Garhwali Wits to be continued ...
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