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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, May 10, 2017

Garhwali Couplets by Krishan Mamgain

गढ़वाली दोहा  ““पखणौं  का  बुखणां””
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Garhwali Couplets by Krishan Mamgain 

दोहा लम्बर 161 :
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गुरु त गुड़ ही रै ग्यया  
च्याला शक्कर बणिं जांद ।
फिर भी चेला गुरुम ही   
गुर सिखणूं कू आंद ॥ [१६१]
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दोहा लम्बर 162 :
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तू ठगणी कू ठग छई   
मी जाती कू ठग ।
पार नि पै सकदू मेरू 
कोशिस कैर जतग ॥ (१६२)
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दोहा लम्बर 155 :
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नाच नचणु त आंद नी  
करलु बतांदा चौक ।
अपणीं कमी छुपांण कू   
बाना  हुंदन  भौत  ॥ (१५५)
.दोहा लम्बर 143 :
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शक कु इलाज हूंद नी  
हो लुकमान हकीम  ।
शक से पीछु छुड़ाण मां  
फेल सभी स्कीम ॥ [१४३]
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दोहा लम्बर 127:
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हैंककु  लाटु हंसांदु चा   
अपड़ू  लाटु रुलांद ।
दुनियां की या रीत चा  
दुख बस अपड़ु सतांद ॥ (१२७) 
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दोहा लम्बर 105:
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कैकि मरीनी गैबणीं    
लैंदी कैकि खांद ।
ईं शरम कू बाग यू  
दिनम गौंम नी आंद ॥ (१०५)
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दोहा लम्बर 144 :
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अपड़ु हि सूनू खोटु रा
कै पर दींण क्य दोष ।
आस त इन्नी कै नि छै
बैठ्यां छां खामोश ॥ 
[१४४]

दोहा लम्बर 120:
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क्या कन ये नौन्याल कू
अपड़ि मस्ति मां रांद ।
काम काज कुछ करदु नी
हगदिदां गीत लगांद ॥ 
(१२०)

दोहा लम्बर 69:
अन्ध्यरी और बिन्दरि का     
भितरकि जंणद नि छाय ।
अल्ट्रसौंड पर कांडा लग्या  
भ्रूण हत्य पनपाय ॥ (६९)

दोहा लम्बर 60:
कन भग्यानका भाग की  
मिलदि खणीं च खाड ।
निरभगि थैंत दबाणुं कू    
मिलदू नी चा माटु ॥ (६०)

बाकी फिर कभी अगले अंक में ........

Of and By  कृष्ण कुमार ममगांई
ग्राम मोल्ठी, पट्टी पैडुल स्यूं, पौड़ी गढ़वाल
[फिलहाल दिल्लि म]  :: {जै भैरव नाथ जी की }