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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, May 28, 2017

"त्वी बिंगौ अब"

Garhwali Poems by Dharmendra Negi 

दिन द्वफरि
दिखयाँ
तेरा स्वीणा 
अर
माया मा 
तेरी करीं
सौं - करारौं 
तैं भलि कै 
खरोळि- खराळी 
छीटि-फटकी
अर 
रकरै- बतै की 
देखियाल मिन 
सब उनि
बुसिला छन
जन कोन्ना पेट
मूसा ठुन्ग्याँ सट्टि 
छूड़ु भुखु 
अब 
त्वी बिंगौ मैतैं
यूं 
बुसिला स्वीणों 
अर
सौं- करारौं 
का सारा 
कनक्वे ठ्यलण
मिन अपणी 
या सैरी जिन्दगी

सर्वाधिकार सुरक्षित -:

            धर्मेन्द्र नेगी
       चुराणी, रिखणीखाळ
            पौड़ी गढ़वाळ



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