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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, May 28, 2017

चार चकड़ैत (कविता में कहावतों का सुंदर प्रयोग )

Uses of Proverbs, Sayings, Idioms in Garhwali Poems 
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:बालकृष्ण बहुखण्डी 

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पूजिक त्वेथैं भ्यटणू छौं मि ,
     अक्वे  जामाफर आदी !
          कना कना त्यारा दादा प्वड्यां छीं ,
                धार पोर त जादी ।।

अन्धों म तू कांणु बण्यूं छै ,
     हमसबकू सरदार !
         लतु का द्यवता बतु से नि मनदा ,
               त्वे नि सुहांदू प्यार । ।

काम न काजकु दुश्मन नाजकु,
    किलै मि त्वेथै  सुमुरू !
         ना दूधा ना मूता कामा ,
             बखऱा गाल़ा लुमरू ।।

 ऐनसैन तुम लगणा छव जन , 
    पढ्य़ाई लिख़ाई  बल जाट ! 
         काल़ू आखर भैंस जनू अर ,
             सोल़ा दूनी आट  ।।

बालकृष्ण बहुखण्डी