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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, May 28, 2017

#बगत.....

Garhwali Poem by Virendra Juyal 

बगत छिरकुणुं च लाटा अर तू देख्दै रैग्ये।
बिंगण नि चाणु छै किलै बोल त्वै क्या ह्वैग्ये।।
बगत एक बाटु चा
जैमा हम हिटदा बि छो अर रिटदा बि छो।
बगत एक चिट्ठी चा
जैथै हम ल्यख्दा बि छो अर पढदा बि छो।।
बगत एक मुसु चा
जो खैंडि बि जांद अर चंग्वोरि बि जांद।
बगत एक बसग्याल चा
जैमा सुख क छोया बि फुटदि
अर दुख क ब्वगण बि आंद।।
बगत एक सूड बथौं च जो कुंगला डालौं थै लटकै जांद।
बगत सब्युंक दगुडु करंद Juyal  पर लौटिक कब्बि नि आंद।।
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दिनांक-22-05-17.