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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, April 23, 2014

अचाणचक चुनावुं मा बैण्युं गाळि किलै दियाणि छन ?

विमर्श  -भीष्म कुकरेती        

(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
                2014 कु लोकसभाक चुनाव भौत सा अर्थुं मा अभिनव च , बिगऴयुं च , अलग च , भिन्न च। 
            सबसे अलग बात या च कि 2014 कु लोकसभाक चुनावौ कैम्पियन भौत ही लम्बो ह्वे गे।
सितंबर 2013 , भाजपान जैदिन बिटेन  नरेंद्र   मोदी तैं लोकसभा चुनावुं सिरमौर घोषित कार तै दिन बिटेन लोकसभा चुनावुं कैम्पियन शुरू ह्वे गे छौ।  वैदिन ही सौ सेक्युलर पार्टी एक अकेला नरेंद्र मोदी की  आलोचना करण मिसे गेन अर 2013 मा ही 2014 लोकसभा चुनावुं रणभेरी बजण शुरू ह्वे गे।  
           अचाणचक 2013 मा लोगुंन जाण कि भारत मा आर्थिक दृस्टि से गुजरात मॉडल बि च। निथर त आम लोग अमेरिकी कैप्टिलिज्म अर मर्युं साम्यवादी जन द्वी इकोनोमिक मॉडलुं तैं ही जाणदा छा।  नरेंद्र मोदी कु गुजरात मॉडल का समर्थक अर विरोधी आज बि जोर जोर से घ्याळ  लगांदन किन्तु आज तलक भारत की आम जनता समझ नि सौकि कि आखिर यु गुजरात मॉडल क्या च ? ये मॉडल से क्या फायदा छन जां पर भाजपा इथगा हल्ला करणी च अर ये गुजरात मॉडल मा क्या खराबी च कि राहुल गांधी विरोध मा बौंळ बिटाँदु ; मुलयम सिंग आग उगऴदु ; विरोध मा नितेश विहार मा बणाक  लगै   द्यूंद; गुजरात मॉडल कु नाम सुणी ममता  अर जयललिता का मूछ उगी जांदन अर वु काल्पनिक मूछुं पर ताव दींदन कि गुजरात मॉडल मा क्वी दम नी च। 
                  फिर नरेंद्र मोदी का विरोध मा सेक्युलर का ग्वाळा चुलाये गेन जु अब तक बंद नि ह्वेन , इख तक कि सिमी जन संगठन का नेता जु भारतीय जेलुं मा बंद छन वु अपराधी बि जेल से धै लगाणा छन कि नरेंद्र मोदी एक नॉन सेक्युलर नेता च।  जु बि नेता मुजफ्फर नगर हिन्दू -मुस्लिम दंगा , टंटा मा फंस्यां छन वु बि जोर जोर से फड़याणा छन बल नरेंद्र मोदी धर्म निरप्रेक्ष राजनीतिज्ञ नी च।  सेक्युलरिज्म की व्याख्या की इथगा बेज्जती भारत मा कबि नि ह्वे जथगा ऐसी तैसी 2013 अर 2014 मा ह्वे। सेक्युलरिज्म का समर्थक अर विरोध्युंन भारत मा सेक्युलरिज्म की डांडी मड़घट जोग कौर याल। 
     नरेंद्र मोदीन बि गुजरात मॉडल की इन ब्याख्या कार कि आज बि आम जनता की समज मा नि आयि कि यु गुजरात मॉडल क्या च ? पर हरेक भारतीय सुपिन दिखणु च कि भोळ या पर्स्युं भारत मा सुख की नदी बौगलि , आराम की हवा बौगलि , रोजगार का डाळ लगल। 
             फिर ये दौरान मध्य भारत , दिल्ली अर नेफा का एक राज्य  मा चुनाव ऐन. ये चुनाव मा नरेंद्र मोदी या भाजपा मा जथगा बि चुनावी असला , चुनावी अस्त्र शस्त्र छौ ऊंन कॉंग्रेस पर चलै देन।  कॉंग्रेस अर आम आदमी पार्टी मा जू बि नया नया हथियार अर खुंड से खुंड पुरण लड़ाई का यंत्र छा सब भाजपा अर नरेंद्र मोदी पर चलै देन।  
             अर जब फ़रवरी 2014 मा लोकसभा चुनावुं घोषणा ह्वे तो सबि राजनीतिक दलों का सब अस्त्र शस्त्र , असला , उपकरण , हथियार खतम ह्वे गे छा।  लोक सभा चुनावुं घोषणा से पैल ही मीडिया का कारण नरेंद्र मोदीक हरेक चुनावी हथकंडा की जानकारी ह्वै गे छे अर इनि सब्युं तैं (जु अपण समाज का चौपाल मा चुनावी बहस मा हिस्सा लीन्दन ) पता चल गे कि राहुल गांधी , मुलायम सिंह , नीतीश कुमार , ममता , जयललिता अपण चुनावी भाषणो मा क्या क्या बोली सकदन। मीडिया की सुलभता से कु क्या बुलणु च , कैं स्टाइल मा बुलणु च की जानकारी  लोगुं तैं पता चल गे.  
 असल मा लोकसभा चुनाव आण से पैल ही अधिकतर राजनीतिज्ञ नेता भाषण दीणो मामला मा अर भाषणु विषयुं मामला मा ओवर एक्सपोज ह्वे गे छा। युद्ध की भाषा मा ये तैं बुले जांद सारी  सेना अर  सबि हथियार प्रयोग हूण। 
अब जब राजनीतिज्ञों का सब सेना प्रयोग ह्वे गे हो , विषयुं का सब अस्त्र -शस्त्र चली गेन तो बच्युं क्या च ? इख तलक कि रिजर्व सेना अर आरक्षित अस्त्र -शस्त्र बि चुनावी युद्ध मा युद्ध बिगुल बजण से पैलि खतम ह्वे गे छा।  
 जब चुनावुं मा रिजर्व या आरक्षित हथियार बि खतम ह्वे जावन तो व्यक्तिगत लांछन , व्यक्तिगत भगार , व्यक्तिगत अभियोग जन हथियार बची गेन। 
यही कारण च कि मुलायम सिंह बलात्कार्युं तैं बचाणो बात करदु। 
यही वजह च कि आजमखान जन सपा का नेता सेना मा मुस्लिम सैनिकुं शौर्य गाथा लगांद। अर रिजर्व उपकरण नि हूण से अमित शाह तैं बदला लीणै बाण चलाण पड़ना छन। 
रिजर्व वीपन्स /अस्त्र शस्त्र ख़तम हूणो  कारण से राहुल गांधी गांधी तैं नरेंद्र मोदी पर वूमन स्पाइंग का अभियोग लगाण पड़णु च। 
आरक्षित हथियारूं खर्च हूण से ही राहुल गांधी तैं नरेंद्र मोदी तैं घायल करणो बान केजरीवाल से उधार लियुं हथियार याने 'मोदी -अदानी संबंध' का हथियार प्रयोग करण पड़णु च। 
रिजर्व अस्त्र शस्त्र नि बचण से उमा भारती, अरुण जेटली अर खुद नरेंद्र मोदी तैं वाड्रा जन  तीर राहुल गांधी अर सोनिया गांधी पर चलाण पड़ना छन। 
अधिकतर राजनैतिक पार्टयूं (मायावती , ममता , जयललिता छोड़िक ) मा अब चुनावी असला बच्युं ही नी च तो व्यक्तिगत गाळी गलौज तैं राजनीतिज्ञ अब चुनावी हथियार से काम चलाणा छन। 
अब हम तैं 9 मई 2014 तक रोज राजनीतिज्ञों द्वारा चुनावी सभाओं मा विरोध्युं तैं मा -बैण्युं  गाळी सुणनो  मीलल। अब जन सरोकार , जन समस्या , जन चिंतन, जन हित की छ्वीं चुनावी सभाओं मा नि लगलि अपितु नेता लोग एक दुसर तै गाळी दींद ही दिख्याला।  


Copyright@  Bhishma Kukreti  21/4/2014