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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, April 3, 2014

पर्यटन विपणन में वैशिष्ठ्य हेतु 24 अमर तत्व

 24 Immutable Unique Selling Point Elements for  Tourism Marketing 

                (Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--48)
                                                                               उत्तराखंड में पर्यटन  आतिथ्य विपणनप्रबंधन -भाग 48  
             व्यवसायिक विपणन हो , व्यक्तिगत विपणन हो या अन्य विपणन हो हरेक को एक USP पर टिकना होता है अथवा एक विशिष्ठ वैशिष्ठ्य प्रदान करना पड़ता है। 
भारतीय दर्शन शास्त्रियों याने भारतीय मनोवैज्ञानिकों ने 3000 साल  पहले ही वैशिष्ठ्य के 24 अमर आधारभूत कारक  खोज लिए थे।  6 भारतीय दर्शन शास्त्रों में से एक दर्शन का नाम है वैशेषिक । वैशेषिक  की रचना महर्षि कणाद या आलुक्य ने की थी , इसीलिए वैशेषिक का नाम कणाद या ओलुक्य भी है। 
                    6 भागों में  विभक्त वैशेषिक का एक भाग है गुण।  इस भाग में 24 गुणो का वृतांत है जो आज के USP के भी कारक हैं।  USP का अर्थ है यूनीक सेलिंग प्वाइंट याने बेचने का विशिष्ठ तत्व . 
पर्यटन एवं आथित्य विपणन में भी प्रत्येक संस्थान या व्यक्ति को अपनी विशेषता बतलाने हेतु 24 अमर तत्वों में से एक या एक से अधिक तत्वों को चुनना होता है। 
निम्न 24 विशिष्ठ गुण होते हैं -
रूप - रूप आँखों से दिखता है।  अतः आँखों को जो विशेष लगे उसे रूप कहते हैं।  रंग से रूप की शिनाख्त होती है। भौतिक जगत में रूप दर्शन होते हैं। पर्यटन विपणन में रूप का बहुत प्रयोग होता है।  जैसे मसूरी या नैनीताल की सुंदरता आदि। 
रस -रस मधुर (मीठा ), अम्ल , लवण , कटु (कडुवा ), तिक्त , कसैला आदि रस के अंग हैं।  पर्यटन विपणन में खाद्य पदार्थ  बेचने वाले रसों का बखान करते है।  मीठी लस्सी , श्रीनगर की मिठाई , गुमखाल के मीठे काफळ आदि। 
गंध - गंध दो तरह का होता है -सुगंध व दुर्गन्ध।  पर्यटन विपणन में गंध का औचित्य बहुकोणीय रूप से प्रयोग होता है. निर्गंध होटल आदि। 
स्पर्श - स्पर्श  तरह का होता है -गरम , ठंडा व अनुष्णातीत (न ठंडा ना गरम ). उत्तराखंड का पर्यटन ठंडे स्पर्श पर ही टिका है।  हमारे होटल में 24 घंटे गरम पानी का प्रबंध है जैसे स्लोगन स्पर्श वैशिष्ठ्य का एक उदाहरण है। 
संख्या - संख्या भी वैशिष्ठ्य पैदा करती है। जैसे 1906 से फोरेस्ट रिसर्च इंस्टीच्यूट देहरादून की शान है। 
परिमाण - यह इतना है भी विशेष छवि बनाने हेतु  एक तत्व है। छोटे छोटे मंदिर , बड़े बड़े देवदारु के पेड़, आदि पर्यटन में विशेषता पैदा करते हैं। 
पृथकत्व -यह इससे अलग है कथन भी विशेषता पैदा करता है।  यथा -शाकाहारियों व जैन धर्मावलम्बियों के लिए ठहरने के लिए अलग से प्रबंध है। 
संयोग -मिलन या संयोग अवश्य ही विशिष्ठता प्रदान करता है।  जैसे अलकनंदा नदी में 6 संगम हैं। 
विभाग - संयोग के बिपरीत स्थिति से विशेषता का जन्म होता है। उदाहरण - स्कीइंग यात्रियों के लिए उत्तराखंड पर्यटन में अलग विभाग है। 
परत्व-अपरत्व - यह दूर है या परे है या यह नजदीक है दोनों तत्व विशेषता पैदा करते हैं।  जैसे -शहरी कोलाहल से दूर केदारघाटी में शांत वातवरण का आनद लूटिये।  दिल्ली से निकट हरिद्वार है।
भार या गुरुत्व - गिरने या भार का निमित भी वैशिष्ट्य पैदा करता है।  यथा -हमारे यहाँ केवल पांच किलो बासमती  चावल मिलते हैं। 
द्रवित्व -बहने को द्रवित्व कहते हैं।  यथा - उत्तराखंड में  कई धार्मिक  नदिया बहती हैं। 
स्नेह -स्नेह गुण भी वैशिष्ठ्य पैदा करता है।  यथा - महात्माओं का स्नेहिल आशीर्वाद हेतु नीलकंठ की यात्रा कीजिये !
शब्द - शब्द याने ध्वनि , व्याकरण या अन्य साहित्य।  शब्द ही तो गुणो की व्याख्या करते हैं। 
बुद्धि - तर्क को बुद्धि कहते हैं।  तार्किक ढंग से पर्यटकों को आकर्षित किया जाता है। 
सुख - जैसे -आत्मिक सुख हेतु डांडा नागराजा की यात्रा कीजिये !
दुःख - जैसे दुःख निवारण हेतु चार धाम यात्रा कीजिये। 
इच्छा - यथा -अपनी इच्छा पूर्ति हेतु सीम जात्रा लाभदायक यात्रा है। 
द्वेष या प्रतियोगिता - उदाहरण -जब उत्तराखंड पर्यटन विभाग हिमाचल के साथ प्रतियोगात्मक विज्ञापन रिलीज करे तो इसे द्वेष आधारित विशेषता या यूनिक सेलिंग प्वाइंट का नारा कहा जाएगा . 
प्रयत्न - औली में पर्याप्त बर्फ न गिरने के कारण प्रशाशन कृत्रिम बर्फ बनाकर स्कीइंग टूर्नामेंट करे तो इसे पर्यटन आधारित सेलिंग प्वाइंट कहते हैं। 
धर्म -अधर्म -परम्परा गत नियम या नियमों के हटने को धर्म -अधर्म कहते हैं। 
संस्कार -१- वेग २-भावना ३-स्थिति को संस्कार कहते हैं।






Copyright @ Bhishma Kukreti  2 /4/2014 

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Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series to be continued ...

उत्तराखंड में पर्यटन  आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी 

                                   
 References

1 -
भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना शैलवाणी (150  अंकों मेंकोटद्वार गढ़वाल 



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