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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, April 27, 2014

हिंदुस्तान -चीन मध्य पाणी युद्ध पर चर्चा किलै नि हूणि च ?

विमर्श -भीष्म कुकरेती        

(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
                  2014 लोकसभा चुनाव मा  भाजपा या कॉंग्रेसम सही बुल्या त बुलणs कुछ नी च त मा -बेटी -बैणि अदानी -फदानी का तीर चलाणा त हवा मा तैरदु गुजरात मॉडल का सौदागर -गलादार जनता तैं वाड्रा की  फिलम इन दिखाणु च जन बुल्यां यीं फिलम तैं ऑस्कार पुरूस्कार मिलण वाळ हो।  
मुद्दा भटक्यां छन अर नेता बेमुद्दा तैं मुद्दा बणैक वोट लांदेर थाळी मा परोसणा छन।. सभी के सब वौद्धिक  दिवालिया कहींके !
 सरकार कैक बि बौणलि वीं सरकार तैं हिन्द -चीन कु पाणि जुद्ध निपटाण ही पोड़ल अर चुनाव मा इंडो -चाइना वाटर वॉर पर बहस जरुरी छे किन्तु शहजादा -यशोदाबेन की लड़ै मा सीमा युद्ध से बि अहम पाणी -युद्ध की चर्चा ही नी हुणि च। 
 एक सत्य च कि चीन अर भारत दुयुं तै विकास करण तो नदी ही ना हरेक छ्वाया क सही इस्तेमाल पर ध्यान दीण पोड़ल। 
ब्रह्मपुत्र एक इन नदी च ज्वा भविष्य का खातिर ब्रह्मपुत्र भारत का वास्ता एक बरदान साबित ह्वे सकद जैक फायदा बंगलादेश अर बर्मा तैं बि ह्वे सकद।  ब्रह्मपुत्र कु पाणी से भारत मा अन्य भागुं मा सिंचाई ह्वे सकद अर बिजली पैदा ह्वे सकद। 
किन्तु चीन समजद या चीन की नीति च कि जैं नदी को स्रोत्र चीन मा च वीं नदी पर चीन कु हक च। 
चीन ब्रह्मपुत्र ( यरलंग सांगपो जैक अब यालुजंगबु नाम च )   पर भौत सा बाँध  बणानु च। चीन ब्रह्मपुत्र पर केवल बाँध ही नी बांधणु च अपितु ब्रह्मपुत्र तैं पीली नदी मा लिजाणो तयारी करणु च। ब्रह्मपुत्र पर पांच बाँध त बंधी गेन अर चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र तैं भारत -चीन सीमा पर उत्तर दिशा मा मोड़णो तयारी बि ह्वे गे। यदि ब्रह्मपुत्र तै पीली नदी से जुड़े जालु तो भारत कु पाणी पर चीनी अधिकार तो होलु ही बल्कि भारत मा भौत सा पर्यावरणीय समस्या बि पैदा ह्वे जाली। हमर जमीन का बाद हमर पाणी  पर चीन अधिकार करणै तयारी मा च अर भारत सियुं च। 
चीन हमेसा से , हजारो साल से सन तुन जो की छद्म नीतियु पर चलद। ब्रह्मपुत्र अर अन्य संसाधनो का मामला मा चीन भारत तैं बौगाणु च अर संधि हूणों बाद बि भारत तै नदी संबंधी डाटा नि दींदु अर भारत सरकार यां पर क्या करणी च यी त मनमोहन जी ही जाणदा होला अर मनमोहन जी तो मुख खुल्दा ही नि छन तो ये विषय मा भारतीय जनता अनभिज्ञ च। 
आज पानी युद्ध हमर समिण च अर इखमा हमर विदेश नीति मा तेजी लाणै जरूरत च। आज भारत तैं चितळ ह्वेक अपर हक्क की रक्षा करणो जतन करण चयेंद।  निथर इन नि ह्वे जाव कि ब्रह्मपुत्र बि हम से छिन जावु !
भारत का सबि राजनीतिक दलूँ तैं एक ह्वेक चीन की पाणी पर अधिकार करणो आक्रमक मुद्रा तैं रुकणो बान जु बि वाजिब दबाब बणाण सि दबाब बणान चयेंद।
आज पाणी हक्क पर चर्चा जरूरी च। पाणी पर चीनी गिद्ध जन लुटेरी रणनीति कु तोड़ भारतम हूण चयेंद। 


Copyright@  Bhishma Kukreti  28/4/2014